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Ranveer Pratap Singh
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Latest Activity

laxman dhami commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"आ० भाई रणवीर जी , इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ."
Jan 27, 2015
Ranveer Pratap Singh commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"@मिथिलेश वामनकर @जितेन्द्र पस्टारिया @ Hari Prakash Dubey @ शिज्जु "शकूर" आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने मेरी इस कविता को सराहा... "
Jan 27, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"आदरणीय रणवीर प्रताप सिंह जी सुन्दर प्रस्तुति हेतु  हार्दिक बधाई !"
Jan 26, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"सुंदर प्रस्तुति, आदरणीय रणवीर जी. बधाई , गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये"
Jan 26, 2015
Hari Prakash Dubey commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"आदरणीय रणवीर प्रताप सिंह जी सुन्दर रचना हार्दिक बधाई !"
Jan 26, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Ranveer Pratap Singh's blog post मैं बदल गया हूँ!
"आदरणीय रणवीर जी अच्छी भावाभिव्यक्ति है बहुत बहुत बधाई आपको"
Jan 26, 2015
Ranveer Pratap Singh shared their blog post on Twitter
Jan 25, 2015
Ranveer Pratap Singh shared their blog post on Facebook
Jan 25, 2015
Ranveer Pratap Singh posted a blog post

मैं बदल गया हूँ!

आसमान में उगता सूरज, जलता सूरज तपता सूरजबदरियों की बगियाँ में, लुका-छिपी करता सूरजसांझ सकारे किसी किनारे, धीरे धीरे ढलता सूरजमैं भी तो इस सूरज सा, चढ़ा कभी कभी ढ़ल गया हूँजाने क्यों कहते हैं लोग, की मैं बदल गया हूँ!हर रंग ढंग में रहता पानी, थमता पानी बहता पानीआसमान से झर झर बरसे, गागर में फिर भरता पानीबर्फ सा बनकर जमा धरा पर, आसमान में भी उड़ता पानीमैं भी तो इस पानी सा, प्यास बुझा के भी जल गया हूँजाने क्यों कहते हैं लोग, की मैं बदल गया हूँ!सनन सनन सर्र बहे हवा, चुप है फिर भी कहे हवाजहां देखो वहाँ…See More
Jan 25, 2015
Ranveer Pratap Singh updated their profile
Jan 25, 2015
AVINASH S BAGDE and Ranveer Pratap Singh are now friends
Jan 26, 2014
Ranveer Pratap Singh and Tushar Raj Rastogi are now friends
Mar 10, 2013

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ranveer Pratap Singh's blog post ककहरा
"//हाँ मैंने आज कल की पुस्तकों में श्र देखा है। //मैं आपकी प्रस्तुति पर अनावश्यक बहस चला कर इस थ्रेड को भटकाना नहीं चाहता, किन्तु, जिन पुस्तक(ओं) में आपने इस वर्ण श्र को वर्णमाला के रूपमें देखा है क्या वे पुस्तकें मान्य व भाषायी तौर पर स्तरीय हैं ?…"
Jan 14, 2013
Ranveer Pratap Singh commented on Ranveer Pratap Singh's blog post ककहरा
"@PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA, @ SANDEEP KUMAR PATEL, @ Er. Ganesh Jee "Bagi", @ Laxman Prasad Ladiwala, @ Dr.Prachi Singh, @ अरुन शर्मा "अनन्त", @ सूबे सिंह सुजान  आप सभी ने मेरी कविता सराही…"
Jan 14, 2013
Ranveer Pratap Singh commented on Ranveer Pratap Singh's blog post ककहरा
"@Saurabh Pandey क्ष- क्षत्रिय की तरह तलवार उठाओ या  त्र - त्रिशूल लेकर शिव बन जाओ या  ज्ञ - ज्ञानी की की तरह कलम उठाओ पर  श्र - श्रृंगारित सम्मानित देश बनाओ  क्षमा कीजिये महोदय ठीक से छप नहीं पाया और हाँ मैंने आज कल की…"
Jan 14, 2013
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on Ranveer Pratap Singh's blog post ककहरा
"वाह रणवीर जी  सादर  नवीनता लिए हुए बधाई "
Jan 13, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Bhopal
Profession
Film maker
About me
a common man with big dreams...

Ranveer Pratap Singh's Blog

मैं बदल गया हूँ!

आसमान में उगता सूरज, जलता सूरज तपता सूरज

बदरियों की बगियाँ में, लुका-छिपी करता सूरज

सांझ सकारे किसी किनारे, धीरे धीरे ढलता सूरज

मैं भी तो इस सूरज सा, चढ़ा कभी कभी ढ़ल गया हूँ

जाने क्यों कहते हैं लोग, की मैं बदल गया हूँ!…

Continue

Posted on January 25, 2015 at 10:00pm — 6 Comments

ककहरा

ककहरा



क- काले दिल कपड़े सफ़ेद

ख- खादी की नियत में छेद

ग- गद्दार देश को बेच रहे

घ- घर को रहे भालो से भेद

इसके बाद कुछ नहीं

मानो हुआ कुछ नहीं…



च- चिड़िया थी जो सोने की

छ- छलनी है आतंक की गोली से

ज- जहां तहां है ख़ून खराबा

झ- झगड़े, जात-धर्म की बोली से

इसके बाद कुछ नहीं

मानो हुआ कुछ नहीं…



ट - टंगी है आबरू चौराहे पे माँ की

ठ - ठगी सी आंसू बहाती है

ड - डरी हुयी है बलात्कारियों से

ढ - ढंग से जी नहीं…

Continue

Posted on January 11, 2013 at 11:30pm — 11 Comments

चन्द्रबदन!

चन्द्रबदन!

तेरे कपोल पे तेरे नैनों का नीर

लागे जैसे सीप में मोती

शशी से भी तू सुन्दर लागे

जब ओढ़ चुनर तू है सोती

झरने सी तू चंचल है

सुन्दरता से भी सुन्दर है

सुगंध तेरी  जैसे कोई संदल

चन्द्रबदन, चन्द्रबदन, हय तेरा चन्द्रबदन…

 

तेरे केशों में…

Continue

Posted on November 16, 2012 at 10:30pm — 8 Comments

ईश्वरल्लाह...

अजब सा शोर है…

मंदिर की घंटियों में भी

मस्ज़िद की अजानों में

मुझको रब नहीं दीखता

धर्म के इन दुकानों में



दिल में बचैनीं हैं...

क्या ख़ाक मिले सुकूं

गीता में कुरानों में

आब हूँ हवा में मिल जाऊँगा

मुझे ना दफनाना तुम

ना जलाना शमशानों में



नहीं जाता किसी दर पर...

खुदा जो है तो मुझसे मिले

कभी मेरे मकानों में

मैं मंदिर में बैठ के पियूँगा

वो तो हर जगह है

पैमानों में मयखानों में



उसे क्या ढूंढते हो तुम…

ज़िन्दगी…

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Posted on November 5, 2012 at 11:30pm — 8 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 9:05am on September 16, 2012, Nilansh said…

janmdin ki subhkaamnaaon ke liye bahut aabhaar aapka

At 5:14pm on August 31, 2012, Lata R.Ojha said…

Dhanyavaad :)

At 7:56pm on August 20, 2012, Khushbu Singh said…
thanx
At 9:36am on August 14, 2012, AjAy Kumar Bohat said…

janamdin ki  shubhkaamnao ke liye bahut bahut dhanyavaad Ranveer ji..

 
 
 

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rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post हैं वफ़ा के निशान समझो ना (प्रेम को समर्पित एक ग़ज़ल "राज')
"आद० मोहम्मद आरिफ जी, आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post हैं वफ़ा के निशान समझो ना (प्रेम को समर्पित एक ग़ज़ल "राज')
"आद० समर भाई जी ,आपने इतने विस्तृत रूप से आस्तां शब्द की व्याख्या की है मेरे भी सब भ्रम दूर हो गए…"
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