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मैं भारत का मुसलमान हूँ

है मज़हब भले अलग मेरा, पर मैं भी तो इंसान हूँ
खान पान पहनावा अलग, पर बिलकुल तेरे सामान हूँ
ऊपर से चाहे जैसा भी, अन्दर से हिंदुस्तान हूँ
अपने न समझे अपना मुझे, इस बात मैं परेशान हूँ
अपने ही मुल्क में ढूंढ रहा, मैं अपनी पहचान हूँ
मैं भारत का मुसलमान हूँ-२

जब कोई धमाका होता है, लोग मुझ पर उंगली उठाते हैं
आतंक सिखाता है मज़हब मेरा, ये तोहमत हम पर लगाते हैं
दंगों में मरते हैं जबकि, मेरे अम्मी अब्बा भाई भी
कुछ मेरे नबी भी मरते हैं, और कुछ मरते तेरे साईं भी
इन हमलों से नहीं, मै तेरे इल्जामों से परेशान हूँ
मैं भारत का मुसलान हूँ-२.

कोहली जब बैटिंग करता है, तब मैं भी तो चिल्लाता हूं
और दिल टूटता है जब मेरा, अरिजीत के गीत ही गाता हूं
जब करना हो इज़हार प्यार का, शाहरुख सी बाहें फैलाता हूं
और सुनील-कपिल के देख विडियो, हंसता हूं हंसाता हूं
फिर कैसे अलग हुआ मैं तुझसे, क्यों मैं सवालिया निशान हूं
मैं भारत का मुसलमान-२

आजाद की तरह अशफाक भी तो, फांसी के फंदे पर झूल गए
इकबाल ने लिखा जो देश गीत, वो सारे जहां से अच्छा भूल गए
कलम तलवार या बंदूक, देश हित में सब हमने उठाया है
लेकिन मेरे सम्मान के हिस्से में, बस आतंकवाद ही आया है
देश के लिए कोई कलंक नहीं, मैं भारत का सम्मान हूँ
मैं भारत का मुसलमान हूँ-२

बाइक के पीछे नंबर प्लेट पर, मैने भी तिरंगा लगाया है
जन गन मन हो या वन्दे मातरम, स्कूल में सब मैने गया है
जॉब वाली रिज्यूमे में, Nationality “Indian” लिखता हूँ
फिर ना जाने क्यों मैं तुमको गैर मुल्क का दीखता हूँ
यह मुल्क मेरा भी है जनाब, मैं नहीं कोई कोई मेहमान हूँ
मैं भारत का मुसलमान हूँ-२

"मौलिक व् अप्रकाशित"
रणवीर प्रताप सिंह

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Comment by babitagupta on May 4, 2018 at 1:23pm

आदरणीय सर जी ,सच्चे देश भक्त की अंतर्व्यथा की प्रस्तुती सराहनीय,प्रस्तुत रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा.

Comment by Samar kabeer on May 2, 2018 at 2:18pm

ये जज़्बात में बहकर लिखी गई कविता है, कुछ लोग बाइक की नम्बर प्लेट पर तिरंगे का चित्र बनवाते हैं,शायद उसी तरफ़ इशारा है ।

'नबी भी मरते हैं' इस पंक्ति को बदलना चाहिए ।

Comment by Ranveer Pratap Singh on May 2, 2018 at 2:18pm

@SheikhShahzadUsmani
Sir aajkal bike ki number plate par RTO key niyam key hisaab sey flag symbol key roop mein lagta hai, Nabi wali baat par gour karunga aur aapttijanak shabdon ko hatah dunga... main kisi ko thes nahin pahuchana chahta.

@Samar Kabeer 

Sir mera sahtiya aur vyakaran kamzor hai, sirf apni bhavna likhta hoon, aap badon ka aashirwad milega to dhirey dhirey vyakaran, Sahitya aur shabdawali bhi sudhar jayegi.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 2, 2018 at 1:58pm

क्या यह आपत्तिजनक नहीं है?//बाइक के पीछे नंबर प्लेट पर, मैने भी तिरंगा लगाया है//?

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 2, 2018 at 1:56pm

बहुत-बहुत शुक्रिया देश के बहुत से परेशान देशभक्तों के मन की बात शाब्दिक करने के लिए। तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया और मुबारकबाद मुहतरम जनाब रणदीप प्रताप सिंह साहिब। मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब की टिप्पणी पर शीघ्र ही अवश्य ग़ौर फ़रमाइयेगा। ***// कुछ मेरे नबी भी मरते हैं,// ... इस पर ध्यान दीजियेगा। यह आपत्तिजनक हो सकता है। 

Comment by Samar kabeer on May 2, 2018 at 11:04am

जनाब रणवीर प्रताप सिंह जी आदाब,रचना ख़यालात के हिसाब से ठीक है,लेकिन इसकी विधा समझ नहीं आती,अगर इसे गीत या नज़्म कहें तो भी इसमें कई तकनीकी कमज़ोरियाँ हैं,कविता कहें तो भी शिल्प और व्याकरण कमज़ोर है, बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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