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Sheikh Shahzad Usmani
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"'अग्निपथ पर' (लघुकथा) : वह हांफती हुई अपने चुने हुए रास्ते पर दौड़ती जा रही थी। लेकिन यह रास्ता भी उसे दुविधायुक्त लगने लगा था। अचानक ही उसे अहसास होने लगा कि कोई उसका पीछा कर रहा है। लेकिन उसने पीछे मुड़कर देखना उचित नहीं समझा। तभी उसने…"
3 minutes ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post प्रासंगिक अस्तित्व (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, कथानक में कसावट,सटीक संवाद से भरपूर मानवीकरण की श्रेणी की लघुकथा का प्रतिनिधित्व करती संदेशपरक लघुकथा के हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"रचनाकारों के अनुभवों व दर्द को उभारती एक और बढ़िया रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय राहिला जी। जनाब मोहम्मद आरिफ साहब के सुझाव पर ग़ौर फ़रमाइयेगा।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani posted blog posts
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

टूटा पहिया (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"ये मैं नहीं, तुम हो जो झुकते, डगमगाते टूट चुकी हो!""नहीं, यह सच नहीं! मीडिया और जनता तो यह कहती है कि तुम ही तो हो जिसकी यह हालत हुई है, समझीं!"काठगाड़ी के आगे का पहिया ग़ायब था और उसी पर वे तीनों स्वयं को पहिया मानकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहीं थीं।दरअसल ग़रीबी और पर्यावरण-प्रदूषण लटकाये लोकतंत्र की यह काठगाड़ी खींचती भारत-माता बुढ़िया के वेष में सच्चाई जानने के लिए निकल पड़ीं थीं। उनके कानों में मीडिया और जनता के आरोप-प्रत्यारोप भी सुनाई देने लगे।"इस देश में क़ानून नाम की चीज़ नहीं…See More
May 21
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफजाई के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय महेन्द्र कुमार जी । बढ़िया सुझाव। शीर्षक चयन में इतना विवेक काम नहीं कर पा रहा है।"
May 20
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"वाह! क्या ज़बरदस्त लघुकथा हुई है आदरणीय शेख़ शहजाद उस्मानी जी. आपके इस कथानक से मैं भी पूरी तरह इत्तेफ़ाक रखता हूँ. इस शानदार लघुकथा के लिए दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए. शीर्षक को ले कर एक सुझाव है कि इसे "चार महारथी" की जगह केवल…"
May 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohit mukt's blog post पिघलता मुखौटा - मोहित मुक्त
"बेहतरीन चित्रण, बेहतरीन सृजन के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय मोहित मुक्त जी।"
May 14
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rahila's blog post भगौड़ों की कतार में(लघुकथा) राहिला
""भगोड़े"-क्रम में आपकी एक और बेहतरीन रचना। छात्रों, प्रतियोगियों, निराशावादियों, पालकों, शिक्षकों सभी को सबक़ व प्रेरणा देती बढ़िया रचना। तहे दिल से बहुत-बहुत बधाई आपको आदरणीय राहिला जी। क्या इस पर भी मैं 'सीक्वल-लघुकथा' लिखने की…"
May 14
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरे इस रचना पटल पर समय देकर अपनी राय से अवगत करा कर मेरे इस नवीन प्रयास की प्रशंसा कर मुझे प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी साहब, जनाब बसंत कुमार शर्मा जी व जनाब सतविंदर कुमार राणा साहब।"
May 7
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरे इस रचना पटल पर समय देकर अपनी राय से अवगत करा कर मेरे इस नवीन प्रयास की प्रशंसा कर मुझे प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी साहब, जनाब बसंत कुमार शर्मा जी व जनाब सतविंदर कुमार राणा साहब।"
May 7
सतविन्द्र कुमार commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"उत्तम अभिव्यक्ति हुई है आदरणीय शेखशाहज़ाद जी।हार्दिक बधाई"
May 7
बसंत कुमार शर्मा commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"गज़ब की अभिव्यक्ति , वाह आदरणीय  Sheikh Shahzad Usmani जी "
May 7
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत ही बढ़िया रचना कही है आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब, अपराध कर के जो पकड़ा जाये वो अपराधी और जो बच जाये वो महारथी| सादर बधाई स्वीकार करें इस रचना के सृजन हेतु| "
May 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"त्वरित प्रतिक्रिया व राय दे कर प्रोत्साहित करने के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ साहब व जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा साहब। जी, बिल्कुल मंच के नियमानुसार कोई भी रचना साझा कर (रचनाकार के नाम सहित) उसे प्रोत्साहित किया जा सकता है। ."
May 6
Dr Ashutosh Mishra commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख जी लघु कथा के बिषय में तो मुझे बहुत जानकारी नहीं हैं आपकी रचनाओं को पढ़ कर इस विधा से जुडाव हुआ है आपकी बेहतरीन रचनाएँ पढी हैं लेकिन यह रचना मुझे सर्वाधिक पसंद आयी ..क्या ही शानदार तरीके से आपने इतनी बड़ी बात को इस माध्यम से कहा है आपकी…"
May 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

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प्रासंगिक अस्तित्व (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

वह एक गाड़ी में सवार थी, जो अब तेज़ गति पकड़ रही थी। गाड़ी किसी और दिशा में जा रही थी और खिड़की से वह विपरीत दिशा में देख रही थी, जहां से वह चली थी। खिड़की से नज़ारे देखते हुए अचानक लगने वाले ब्रेक के झटकों से वह कभी सहम जाती, तो कभी उसे संभलने का सुखद अहसास सा होता। लेकिन तेज़ हवाएं उसे कभी सुखद लग रहीं थीं, तो कभी उसे झकझोर कर परेशान कर रही थीं। तेज़ हवाएं उससे बातें कर रहीं थीं या वह ख़ुद उनसे मोहित होकर उनसे बातें करना चाह रही थी, किसी को भी समझ नहीं आ रहा था। वह खिड़की बंद नहीं कर पा रही… Continue

Posted on May 27, 2017 at 2:00am — 1 Comment

टूटा पहिया (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"ये मैं नहीं, तुम हो जो झुकते, डगमगाते टूट चुकी हो!"

"नहीं, यह सच नहीं! मीडिया और जनता तो यह कहती है कि तुम ही तो हो जिसकी यह हालत हुई है, समझीं!"



काठगाड़ी के आगे का पहिया ग़ायब था और उसी पर वे तीनों स्वयं को पहिया मानकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहीं थीं।

दरअसल ग़रीबी और पर्यावरण-प्रदूषण लटकाये लोकतंत्र की यह काठगाड़ी खींचती भारत-माता बुढ़िया के वेष में सच्चाई जानने के लिए निकल पड़ीं थीं। उनके कानों में मीडिया और जनता के आरोप-प्रत्यारोप भी सुनाई देने लगे।

"इस… Continue

Posted on May 20, 2017 at 8:17pm

चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

मोमबत्ती जलाते हुए एक व्यक्ति ने कहा-"लो हम भी निर्भया के नाम आज एक मोमबत्ती जला देते हैं उसकी मम्मी की तरह!"

"तो निर्भया और उसकी मम्मी के नाम हो जाये एक और जाम!" दूसरे व्यक्ति ने अगला पैग बनाते हुए कहा।"

"सालों को रेप और वो सब करना ही था, तो ऐसे करते कि फांसी की सज़ा न हो पाती! गये साल्ले काम से, फांसी की सज़ा कन्फर्म!" अख़बार का मुख्य पृष्ठ लहराते हुए तीसरे व्यक्ति ने नशे में कहा।

पांच साल पहले निर्भया नाम की युवती पर कुछ युवकों ने एक निजी बस में हमला कर निर्ममता से बलात्कार…

Continue

Posted on May 6, 2017 at 10:00am — 10 Comments

शराफ़त (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"तुम्हारे अब्बू तो बस क़िताबी बातें करते रहेंगे! तू तो छोड़-छाड़ अपने शौहर को!" मायके में आई अपनी लाड़ली बिटिया सलमा को समझाते हुए उसकी अम्मी ने कहा- "तुझे इतना पढ़ा-लिखा कर नौकरी इसलिए नहीं करवाई है कि तू शौहर से यूं दब कर रहे। आख़िर उसकी औक़ात क्या है, तू उससे तिगुना कमाती है!"



"तुम सही कहती हो अम्मी! ऐसे आदमी के साथ ज़िंदगी जीना तो मेरे लिए बहुत मुश्किल है, यहां अब्बू से परेशान रही और वहां शौहर और ससुर के उसूलों से!"



"अपनी सहेली नग़मा को देखो, शौहर को छोड़ अपने बेटे के… Continue

Posted on April 30, 2017 at 8:39am — 12 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
At 11:17pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मुखाग्नि" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:22pm on August 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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