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Sheikh Shahzad Usmani
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Latest Activity

Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, अच्छा कथानक, बेहतरीन कथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
KALPANA BHATT ('रोनक') commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आ सुरेन्द्र नाथ जी से सहमत हूँ आदरणीय शहजाद जी | सादर |"
Sunday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत खूब उस्मानी साहब,आपने एकदम झकझोर दिया रचना के माध्यम से। क्या पुरूष प्रधान समाज है। शिक्षित समाज भी आज भी उसी तरह है, बहुत प्रश्न छोड़ती है यह लघुकथा। बहुत बहुत बधाई इस लघुकथा पर।"
Sep 17
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। चुकि लगभग हर लघुकथा आपकी पड़ता हूँ, और आप बेहद उम्दा लिखते बी हैं, इसलिए आपका प्रशंशक भी हूँ, पर इस लघुकथा में मुझे उस कसावट की कमी लगी, जो दूसरी में होती है। आपके कथानक और एक प्रश्न छोड़ती लघुकथा के लिए कोटिस…"
Sep 17
SALIM RAZA REWA commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब उस्मानी साहब, ख़ूबसूरत कहानी के लिए मुबारक़बाद,"
Sep 16

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"हृदयस्पर्शी रचना हुई है मोहतरम जनाब उस्मानी साहब"
Sep 16
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"नारी आखिर निरीह,बेचारी ही रह गई।।एेसा समाज हो जिसमें महिला सम्मानित,गर्व से भरपूर जीवन जी सके।महिला सशक्तिकरण से जुड़ी कथा मुझे हमेशा प्रभावित करती है ।अंतिम पंक्ति को कुछ एेसा भी कर सकते है देश के अहम ओहदे तक महिला पहुँच रही है ।समय ही नही समाज और…"
Sep 16

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"लघुकथा के शिल्प पर तो गुणीजन प्रकाश ़डालेंगे मेरी तरफ से इस प्रस्तुति के लिए बधाई"
Sep 16
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"मैंने यह तो कहा नहीं कि शादी के बाद हम यह देश ही छोड़ देंगे! मैं तो यह कह रहा हूं कि अधिक से अधिक डॉलर जुटाने के लिए अभी से नोटों की जुगाड़ करनी चाहिए हम दोनों को!""सही कहा तुमने। आदर्शवादी बनने और सबका सोचने के चक्कर में न देश में मज़े कर पाये और न ही विदेश में! तुम अपने पिता से अपना हक़ मांगों और मैं दहेज़ के बजाय नक़द पैसों की बात कर लूंगी पापा से!"अरुण के विचारों का समर्थन करते हुए मंजू ने एक बार फिर से अनुरोध करते हुए उस से कहा- "अब हमें अपनी शादी और नहीं टालनी चाहिए। इतनी क्वालिफिकेशन और…See More
Sep 16
पंकजोम " प्रेम " commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"ह्र्दयस्पर्शी रचना आदरणीय दिली मुबारकबाद आपको"
Sep 15
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, बेहतरीन प्रतीकात्मक लघुकथा का प्रयास । आपने इससे पहले भी प्रजातंत्र के स्तंभों को आधार बनाते लघुकथाएँ लिखीं है । विषय और बेहतर हो सकता था । बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 12
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब अफ़रोज़'सहर'साहिब आदाब,आपका ओबीओ मंच पर स्वागत है ।"
Sep 12
Afroz 'sahr' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत ही सुंदर लघु कथा है! आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहब बधाई स्वीकार करें!"
Sep 12
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, इस बढ़िया लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. एक सुझाव है, शायद आपको पसन्द आये. मुझे लगता है कि अन्त में यह कहने के बजाय कि //(वह) अपने अब तक के बुरे तज़ुर्बों के संसार में खो गई कुछ सिसकियों के साथ।// यदि हम उसकी…"
Sep 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"मैंने यह तो कहा नहीं कि शादी के बाद हम यह देश ही छोड़ देंगे! मैं तो यह कह रहा हूं कि अधिक से अधिक डॉलर जुटाने के लिए अभी से नोटों की जुगाड़ करनी चाहिए हम दोनों को!"

"सही कहा तुमने। आदर्शवादी बनने और सबका सोचने के चक्कर में न देश में मज़े कर पाये और न ही विदेश में! तुम अपने पिता से अपना हक़ मांगों और मैं दहेज़ के बजाय नक़द पैसों की बात कर लूंगी पापा से!"

अरुण के विचारों का समर्थन करते हुए मंजू ने एक बार फिर से अनुरोध करते हुए उस से कहा- "अब हमें अपनी शादी और नहीं टालनी चाहिए। इतनी… Continue

Posted on September 16, 2017 at 2:19am — 5 Comments

अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"लगता है कि रास्ता भूल गई है।"



"काफ़ी देर से बैठी है, कोई मानसिक रोगी है या पागल है!"



"नहीं भाई, कपड़े तो साफ़ सुथरे हैं, शायद किसी से बिछड़ गई है!"



एक पेड़ के नीचे बैठी वह औरत लोगों की टिप्पणियां सुन तो रही थी लेकिन कहीं खोई हुई थी। उसके कानों में अभी भी बैंड-बाज़ों की आवाज़ें सुनाई दे रहीं थीं। फूल-मालाओं से लदे जीप में बैठे अपने पति के अपने प्रति रवैए से वह बहुत आहत थी। अत्यल्प-शिक्षित थी। बरसों से अपने बेटे-बहू के साथ ही 'किसी तरह' रह रही थी। पति द्वारा लाख… Continue

Posted on September 14, 2017 at 7:54pm — 6 Comments

रोशनी में सिसकियां (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

रोशनी की किरण के रास्ते को जब उस युवती ने अपनी हथेली से बाधित किया तो उसकी चारों उंगलियां लालिमा पाकर उसे भाव संसार में ले गईं।

"लोकतंत्र के चारों स्तंभों में नारी भी सक्रिय है, नारी का महान योगदान है!" यही तो उसकी मां ने उसे बताया, समझाया और फिर इस लायक बनाया कि वह आज इन सभी के संपर्क में है बतौर मीडियाकर्मी। मां की मधुर स्मृतियां उसे भाव संसार में ले गईं। कुछ पल ही गुज़रे कि उसकी आंखों से आंसू लाल गालों को गर्माहट सी देने लगे।

"परिपक्व कहलाने वाले हमारे इस लोकतंत्र के चारों स्तंभ आज… Continue

Posted on September 9, 2017 at 11:23pm — 9 Comments

आज की बेटी (क्षणिकाएं या अतुकान्त) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

पापा की बेटी

या

बाबा की बेटी।



देश की बेटी

या

वेश में बेटी।



स्वतंत्र बेटी

या

क़ैद में बेटी।



हेर-फेर में बेटी

या

डेरे-फेरे में बेटी।



हाथ बंटाती बेटी

या

'हाथ की सफाई' में बेटी।



गौरवशाली बेटी

या

कलंककारी बेटी।



उठती, उड़ती बेटी

या

उठाती, उड़ाती बेटी।



चौंकती बेटी

या

चौंकाती बेटी।



जीतती, जीती बेटी

या

हारती, मरती… Continue

Posted on September 6, 2017 at 9:09pm — 3 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
At 11:17pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मुखाग्नि" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:22pm on August 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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