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Sheikh Shahzad Usmani
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  • SHIVPURI M.P.
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। मेरी रचना पर भी समय देकर मुझे यूं प्रोत्साहित करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब सतविंदर कुमार राणा साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"आदाब। ग़ज़ब की प्रतीकात्मक लघुकथा। कच्चा चिट्ठा। हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। पते की बात। सार्थक संदेश और आह्वान। ई़देमीलादुन्नबी के अवसर पर  इस बेहतरीन रचना से महाउत्सव का आग़ाज़ करने के लिए और ई़देमीलादुन्नबी की हार्दिक बधाई। हार्दिक शुभकामनाएं जनाब  लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। सुंदर अतीत सा सुंदर वर्तमान और भविष्य हो।.यही शुभकामनाएं और आह्वान करती रचना के लिए हार्दिक बधाई जनाब सुरेंद्र सिंह कुशक्षत्रप जी ।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। यथार्थ और सत्य सम्प्रेषित करती बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। प्रेम से ही दिल के तार जुड़ते हैं। हार्दिक बधाई इस गागर में सागर रचना के लिए आदरणीया नमिता सुंदर साहिबा।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"बहुत से सबक़ और संदेश देते छंदों के लिए हार्दिक बधाई जनाब  Vivek Pandey Dwij जी।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। बढ़िया अपेक्षाएं और आह्वान करती रचना। हार्दिक बधाई जनाब  Vivek Pandey Dwij जी।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। दिल से दिल के भाव सम्प्रेषित करते.दोहे। हार्दिक बधाई जनाब सतविंदर कुमार राणा जी।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। आप सभी को ई़देमीलादुन्नबी की मुबारकबाद। रचना पर समय देकर मेरी हौसला अफ़ज़ाई हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहिब। "
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आदाब। रचना पर समय देकर आत्मीय टिप्पणी व राय साझा करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"कौन अपना? (छंदमुक्त) : कह दो कि तुम अब भी मेरे हो वरनागंगा-जमुनी मुल्क में ही हमें डरना!दिल में अपने यूं जगह दीजिएअपनी भी इबादतगाह हो तेरे नज़दीक़, है सपना!चंद ग़ज़ या एकड़ ज़मीं की पकड़ नहीं मज़बूतभव्य भवन एकता के नहीं सबूतकह दो कि तुम अब भी मेरे हो…"
Sunday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post फ़िर वही राग (क्षणिकायें)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया रचना दिए को आधार बना कर। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।"
Nov 1
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दीये पलते हैं...! (लघुकथा)
"आद0 शेख सहजाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 1
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आदाब। रचना पर समय देकर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए और मुझे प्रोत्साहित करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब योगराज प्रभाकर साहिब।"
Nov 1
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sushil Sarna's blog post प्यार पर चंद क्षणिकाएँ : .......(. 500 वीं प्रस्तुति )
"अर्धसहस्त्रीय-रचना पोस्ट/भावपूर्ण सटीक, सार्थक व सारगर्भित क्षणिकाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई आदरणीय सुशील सरना साहिब।"
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

फ़िर वही राग (क्षणिकायें)

दीये बनते, बिकते, जलते हैं

पेट पालते हैं

दीपक तले अंधेरा

फ़िर वही रात, वही सबेरा!

दीये पालते हैं, दीये पलते हैं

विरासत पलती है

दीपक तले अंधेरा

फ़िर वही बात, वही बखेड़ा!

विरासत पालती है, विरासत पलती है

उद्योग पलते हैं; राजनीति पलती है

लोकतंत्र पलता है

दीपक तले अंधेरा

फ़िर वही धपली, वही राग!

स्वच्छता पालती है, स्वच्छता पलती है

नारे-पोस्टर पलते हैं, भाषण पलते हैं

दीपक तले अंधेरा

फ़िर वही चाल, वही…

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Posted on October 25, 2019 at 6:46am — 5 Comments

दीये पलते हैं...! (लघुकथा)

दीपावली के चंद रोज़ पहले से ही त्योहार सा माहौल था उस कच्चे से घर में। सब अपने पालनहार बनाने में जुटे हुए थे; कोई मिट्टी रौंद रहा था, कोई पहिया चला-चला कर उसके केंद्र पर मिट्टी के लौंदों को त्योहार मुताबिक़ सुंदर आकार दे रहा था। वह उन्हें धूप में कतारबद्ध जमाती जा रही थी। लेकिन अपने-अपने काम में तल्लीन और सपनों में खोये अपनों को देख कर उसे अजीब सा सुकून मिल रहा था हर मर्तबा माफ़िक़। एक तरफ़ उसकी सास; दूसरी तरफ़ समय के पहिये संग कुम्हार का पैतृक पहिया चलाता उसका पति दीपक और उसके कंधों पर झूलता…

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Posted on October 22, 2019 at 10:40pm — 3 Comments

विकासोन्मुखी (लघुकथा)

"ख़ामोश!" एक बलात्कार पीड़िता और सरेआम उसकी हत्या करने वाले युवकों के बाद बारी-बारी से माइक पर उसने मशहूर नेताओं-अभिनेताओं और पुलिसकर्मियों की मिमिक्री करते हुए कहा, "कितने आदमी थे!"



"साहब, ती..ई...तीन थे!"



"वे तीन थे ... और ये सब तीस-चालीस...ऐं! लानत है... तुम लोगों की ख़ामोशी पर!"

"साला... एक मच्छर इस देश के आदमी को हिजड़ा बना देता है!"



"साहब... मच्छर! .. मच्छर बोले तो... पैसा, डर, पुलिस, नेता, क़ानून या स्वार्थ!..है न!"



"कोई…

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Posted on October 8, 2019 at 8:30am — 4 Comments

चक्र पर चल (छंदमुक्त काव्य)

विकसित से

हर पल जल

विकासशील

बेबस बेकल

होड़ प्रतिपल

छलके छल

भ्रष्टाचार-बल!

धरती घायल

सूखते स्रोत

उद्योग-दलदल!

उथल-पुथल

बिकता जल

दर-दर सबल

थकता निर्बल

धन से दंगल

नारे प्रबल

हर घर जल

सुनकर ढल

नेत्र सजल!

बड़ी मुश्किल

आग प्रबल

दूर दमकल

सीढ़ी दुर्बल

ज़िंदा ही जल!

जल में ही बल

जल है, तो कल

कर किलकिल

या फ़िर सँभल!

धाराओं का जल

बिन कलकल

नदियाँ बेकल

प्रदूषण-प्रतिफल!

प्रकृति ही…

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Posted on July 7, 2019 at 11:54am — 2 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर जी,नमन।"
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"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्द: कविता लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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