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राज़ नवादवी
  • Male
  • Bhopal, Madhya Pradesh
  • India
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राज़ नवादवी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"अनुभूतियाँ उक्केरती हैं जो आपकी क्षणिकाएँ, खुले नभ में जैसे चमकें हैं रात को मणिकाएं ! बहुत सुन्दर आदरणीय सुनील सरना जी. हार्दिक बधाई. सादर "
3 hours ago
राज़ नवादवी posted blog posts
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राज़ नवादवी commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,सुन्दर ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सादर "
yesterday
राज़ नवादवी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"जनाब क़मर जौनपुरी साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर "
yesterday
राज़ नवादवी commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
"आदरणीय तेजवीर सिंह साहब, नमस्ते. सुन्दर लघुकथा लिखी आपने, हार्दिक बधाई स्वीकार करें. सच है, अच्छाई को परिभाषित करने का सही तरीका स्वयं अच्छा बन जाना है, आपकी कहानी से ये बात बड़े सुन्दर ढंग से व्यक्त होती है. सादर. "
yesterday
राज़ नवादवी commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
"आदरणीय तेजवीर सिंह साहब, नमस्ते. सुन्दर लघुकथा लिखी आपने, हार्दिक बधाई स्वीकार करें. सच है, अच्छाई को परिभाषित करने का सही तरीका स्वयं अच्छा बन जाना है, आपकी कहानी से ये बात बड़े सुन्दर ढंग से व्यक्त होती है. सादर. "
yesterday
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"जनाब क़मर जौनपुरी साहब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है. सादर "
yesterday
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब। आपकी इस्लाह और ग़ज़ल को अपना बेशक़ीमती वक़्त देने का तहे दिल से शुक्रिया। मैंने तो ग़ज़ल लिखी थी, आपने उसे ग़ज़ल बनाया। आपकी प्रेरणा और सुझावों का ह्रदय से आभार। आवश्यक बदलाव करके रिपोस्ट करता हूँ। सादर। "
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"'   चंद लम्हों में उसके हाल बदल जाते थे मेरी नज़दीक जो आता था अदू दीवाना' इस शेर का ऊला मिसरा लय में नहीं,और सानी में 'मेरी' को "मेरे" करना उचित होगा,शैर यूँ कर सकते हैं:- 'चन्द लम्हों में ही हालात बदल जाते…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६७
"आ. भाई राज नवादवी जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
क़मर जौनपुरी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहब।"
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
""  जब भी होता है मेरे क़ुर्ब में तू दीवाना मेरी नस नस में भी दौड़े है लहू दीवाना" सानी मिसरा यूँ कर लें तो गेयता बढ़ जाएगी:- "दौड़ता है मेरी नस नस में लहू दीवाना" '  एक हम ही नहीं बस्ती में परस्तार हुए' इस…"
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Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । "बू" शब्द हिन्दी और उर्दू में स्त्रीलिंग है ।"
yesterday
क़मर जौनपुरी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"मोहतरम हिंदी के हिसाब से बू दीवानी होगी दीवाना नहीं। उर्दू का गहन अध्ययन नहीं है, वहाँ यह प्रयोग सही या नहीं कृपया वज़ाहत करें।"
yesterday
राज़ नवादवी commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक(गजल)
"आदरणीय राणा जी, हार्दिक बधाई. सुन्दर गज़ल की प्रस्तुति. मुबारकबाद. सादर "
Tuesday
राज़ नवादवी commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जु शकूर साहब आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर. "
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Nawada, Bihar
Profession
Education, Training, and Community Development. Hybrid Value Chain Entrepreneur (HVCE) at Ashoka Innovators for the Public
About me
Main shayar to nahin, magar ai zindgee, jab se tum ko samjha, shayari aa gai.

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राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६९

2212 1212 2212 1212

ख़ुश्बू सी यूँ हवा में है, लगता वो आने वाला है

आबोहवा का हाल भी पिछले ज़माने वाला है //१

 

बाहों का तुम सफ़ीना दो, तूफ़ान आने वाला है

दरिया तुम्हारे प्यार का सबको डुबाने वाला है //२ 

 

बनते हो तीसमार खाँ, मेरी भी पर ज़रा सुनो

इक दिन ये वक़्त आईना तुमको दिखाने वाला है //३ 

 

मैं तो बड़े सुकून से सोया था तन्हा अपने घर

मुझको वफ़ा के खेल में तू ही डुबाने वाला है //४ 

 

मैं भी ज़रा तो देख…

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Posted on November 15, 2018 at 10:05am

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८

2122 1122 1122 22

 

जब भी होता है मेरे क़ुर्ब में तू दीवाना

दौड़ता है मेरी नस नस में लहू दीवाना //१

 

एक हम ही नहीं बस्ती में परस्तार तेरे 

जाने किस किस को बनाए तेरी खू दीवाना //२

 

इश्क़ में हारके वो सारा जहाँ आया है

इसलिए अश्कों से करता है वजू दीवाना //३

 

लोग आते हैं चले जाते हैं सायों की तरह

क्या करे बस्ती का भी होके ये कू दीवाना //४

चन्द लम्हों में ही हालात बदल जाते थे

मेरे नज़दीक जो…

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Posted on November 11, 2018 at 6:00pm — 12 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६७

1212 1122 1212 22

.

हमारी रात उजालों से ख़ाली आई है

बड़ी उदास ये अबके दिवाली आई है //१



चमन उदास है कुछ यूँ ग़ुबारे हिज्राँ में

कली भी शाख़ पे ख़ुशबू से ख़ाली आई है //२ 




फ़ज़ा ख़मोश है घर की, अमा है सीने में

हमारा सोग मनाने रुदाली आई है //३ 



मवेशी खा गए या फिर है मारा पालों ने

कभी कभार ही फ़सलों पे बाली आई है…

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Posted on November 7, 2018 at 12:00pm — 16 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६६

२१२२ २१२२ २१२२



है वो मेरा दोस्त, मेरा नुकताचीं भी

शर्म खाए उससे कोई ख़ुर्दबीं भी //१



काविशे सुहबत में आके मैंने जाना

हाँ में उसकी तो छुपा था इक नहीं भी //२



जब उफ़ुक़ पे सुब्ह लाली खिल रही थी

थी हया से सुर्ख थोड़ी ये ज़मीं भी //३



दूर क्यों जाना है ज़्यादा जुस्तजू में

पालती है जबकि दुश्मन आस्तीं भी //४…



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Posted on November 4, 2018 at 7:30am — 10 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 9:54pm on August 28, 2017, Samar kabeer said…
जनाब राज़ साहिब,कृपया फोन कर लें,मुझे ओबीओ पर चेट करना नहीं आता ।
At 2:14am on July 31, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 3:21pm on July 18, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

जी आप कुछ कुछ ठीक कह रहे हैं त्रुटी वश ये न की जगह ना लिखा गया 'केवल दो किलोमीटर पीछे हुए एक्सीडेंट का वो बेचारा पेशेंट साइकिल वाला था न  और ये कार वाला, क्या ये  अंतर मैं नहीं समझती'----ये इस तरह लिखा था मेरी मूल लघु कथा में ----हम दैनिक बोलचाल में न शब्द का इस्तेमाल ? के साथ करते हैं  इसमें न के बाद ? मार्क लगाना भूल गई बहुत बहुत आभार इस और ध्यान दिलाने के लिए 

At 12:30pm on July 18, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

सादर आभार तहे दिल से शुक्रिया ग़ज़ल आपको पसंद आई राज़ जी 

At 5:36pm on October 11, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

welcome sir

At 2:36pm on October 11, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

aapki rachnaen behatreen hain

At 4:38pm on October 8, 2012, नादिर ख़ान said…

मुझको तिरी बेजारियों का कुछ गिला नहीं

मेरी भी ज़िंदगी अना दिखला के रह गई  

मैं भी न मिल सका उसे पिछले बरसके बाद

तनहा कली कहीं कोई मुरझा के रह गई

बहुत ही उम्दा गज़ल है राज़ भाई  बहुत ख़ूब

At 11:45am on September 21, 2012, प्रमेन्द्र डाबरे said…

राज़ साहब आपने मुझ नाचीज़ की भी रचना पढ़ी मैं धन्य हो गया, आपकी दाद मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है और कुछ और अच्छा लिखने की प्रेरणा अब मुझे मिलती रहेगी.... आपका तलबगार  प्रमेन्द्र डाबरे

At 10:24am on September 21, 2012, लोकेश सिंह said…

राज भाई तहे दिल से मेरा शुकराना स्वीकार करे ,आपके स्नेहिल वचन मुझे और अच्छे काव्य की रचना की प्रेरणा देंगे ,सराहना के लिए बहुत -बहुत साधुवाद ......लोकेश सिंह

At 12:37am on June 27, 2012, Albela Khatri said…

राज़ साहेब, आप नये हैं ये मुझे मालूम नहीं था क्योंकि मैं ख़ुद यहाँ नया हूँ......हा हा हा हा ....लेकिन आपसे पहली मुलाक़ात  अच्छी रही........मुझे  इस महफ़िल में बहुत प्यार और  मुहब्बत से नवाज़ा गया है और आप भी  यहाँ के दोस्ताना माहौल  में रस से सराबोर हो जायेंगे . ऐसा मेरा यक़ीन है

___ओ बी ओ  है ही ऐसी जगह.................आपका  तहेदिल से इस्तेकबाल है भाई साहेब !

 
 
 

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