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Neeraj Mishra "प्रेम"
  • 28, Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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Neeraj Mishra "प्रेम"'s Discussions

कविता के भाव पर व्याकरण की तलवार क्यों
79 Replies

कविता हमारे ह्रदय से सहज ही फूटती है, ये तो आवाज़ है दिल की ये तो गीत है धडकनों का एक बार जो लिख गया सो लिख गया ह्रदय के सहज भाव से ह्रदय क्या जाने व्याकरण दिल नही देखता वज्न ...वज्न तो दिमाग देखता है…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr Ashutosh Mishra Sep 4, 2013.

 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post अंजामे दिल/ग़ज़ल
"आ. भाई नीरज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ः"
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Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
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"बड़े अच्छे भाव हुए आदरणीय..बाकी आदरणीय तस्दीक जी बता ही चुके हैं..."
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"आदर्णीय नीरज मिश्रा जी खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई"
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Rakshita Singh commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post अंजामे दिल/ग़ज़ल
"आदरणीय नीरज जी बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ...  मैं भला हूँ किस तरह तुझसे अलग, मुझमें जो कुछ भी है सब तेरा ही है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 18, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" posted a blog post

अंजामे दिल/ग़ज़ल

महफिलों से एक दिन जाना ही है । आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत, मुद्दतों से दिल  मेरा तड़पा ही है ।मै तुम्हे अपनी हकीकत क्या कहूँ, तुमने जो सोचा तुम्हे करना ही है ।प्यार के सपने बिखर कर चूर हैं, प्यार भी शायद कोई सपना ही है ।प्यार में दिल टूटना क्यों आम है, सब ये कहते हैं कि ये होता ही है ।अब किसी भी रास्ते को चुन ले दिल, रास्ता तेरा तो तू भूला ही है ।किसको चाहूँ किसको अब रुसवा करूँ, प्यार अपना दर्द भी अपना ही है ।मै भला हूँ किस तरह तुझसे अलग,मुझमे जो कुछ भी है सब तेरा…See More
Feb 18, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"आदरणीय राम अवध जी बहुमूल्य जानकारी देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।"
Feb 18, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब"
Feb 18, 2018
Ram Awadh VIshwakarma commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"आदरणीय नीरज मिश्रा जी खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई। मतला में कफिया तबाह और निबाह बाँधने पर आगे काफिया पनाह आह नहीं आयेगा। आगे भी ऐसे काफिये आयेंगे जिसमे अन्त में बाह आये। यहाँ   कैदेहर्फी का दोष है। ग़ज़ल शब्द भी मिसरे को बह्र से खा़रिज़ कर…"
Feb 15, 2018
Mohammed Arif commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"आदरणीय नीरज जी आदाब,                             बहुत उम्दा ग़ज़ल । आपने ग़ज़ल के अर्कान नहीं लिखें । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Feb 15, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" posted a blog post

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो । तुम मुझे और भी तबाह करो ।तोड़ दो दिल तो कोई बात नहीं, टूटे दिल मे मगर पनाह करो ।मै अगर कुछ नहीं तुम्हारा हूँ, दर्द पर मेरे तुम न आह करो ।चाहना तुमको मेरी फितरत है, तुम भले ही न मेरी चाह करो ।तुम सजा पर सजा सुना दो पर, मत कहो मुझसे मत गुनाह करो ।आज कुछ यूँ मुझे सताओ तुम, ग़ज़ल पर मेरी वाह वाह करो ।नीरज मिश्रा मौलिक व अप्रकाशितSee More
Feb 15, 2018
Tasdiq Ahmed Khan commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post दिल/ग़ज़ल
"जनाब नीरज साहिब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है , कोशिश करते रहिए ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ |शेर 2 के मिसरों में लय बाधित हो रही है | यूँ कर सकते हैं " बे क़रारी बढ़े याद से -याद से ही बहलता है दिल "शेर 3 उला यूँ करसकते हैं |"दर बदर खा रहा…"
Feb 14, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post दिल/ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी"
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Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post दिल/ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहजाद जी"
Feb 14, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post मजबूर/ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी"
Feb 14, 2018
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post मजबूर/ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी"
Feb 14, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow U.P.
Native Place
Lucknow
Profession
Auther
About me
तुम्हारी बन्दगी में मै नयी हर बात करता हूँ , तो दुनिया के पुराने लोग मुझसे रूठ जाते हैं । मै तेरी थामकर बाहें जो तेरे साथ चलता हूँ , मेरे हाथों से उनके हाथ अक्सर छूट जाते हैं । मोहब्बत हद से आगे जब गुज़र जाती है ऐ दिलबर । हमारे सामने हमको ही ले आती है ऐ दिलबर । के खुद से रूबरू होकर करें औरों का ही सिजदा , किनारे पर भी आकर वो मुसाफिर डूब जाते हैं । ना तारीफों के पुल बाँधू न तेरे हक़ में ताली दूँ । मेरा दिल आज कहता है तुझे जी भर के गाली दूँ । तोड़ दूंगा मै सारे भाव जो दिल में हैं तेरी खातिर , तोड़ना ही इन्हें वाजिब अगर ये टूट जाते हैं । मिटाकर आज रख दूंगा मै हम दोनों की ये हस्ती । या तू रह जाएगा बाकी , या मै रह जाऊंगा बाकी । एक ही शै जुदा होकर नही रह सकते हम दोनों , के मिलकर बूँद सागर भी हो एक ही रूप जाते हैं |

कभी बैठे बैठे आँखों में भर आये आंसू जाने क्यूँ | 

कभी महकी हवा से घुलने लगी साँसों में खुशबू जाने क्यूँ | 

कुछ बात अकेले पन में है , कोई गीत छिड़ा जीवन में है |

अस्तित्व के मौन तरानों का संगीत मेरी धड़कन में है | 

एहसास ये कुछ अनजाना सा, अब हर लम्हा दीवाना सा | 

पल पल में बहारें ले आये ये मौसम कुछ मस्ताना सा | 

ऐसे में फिर हो जाता है ये दिल बेकाबू जाने क्यूँ | 

 कभी बैठे बैठे आँखों में भर आये आंसू जाने क्यूँ |

 दिल कहता है पागल हो जाऊं, इस बहती हवा में उड़ जाऊं |

ज्यूँ नदियाँ मिलती सागर से ऐसी ही तुझ से मिल जाऊं | 

अब हर दीवार गिरा दूँ मै,सब एक में आज मिला लूँ मै | 

यूँ फैलाऊं बाहें अपनी सारा अस्तित्व समा लूँ मै | 

इन बहती हवा के झोकों में कोई जाता है छू जाने क्यूँ |

नीरज......

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Neeraj Mishra "प्रेम"'s Blog

अंजामे दिल/ग़ज़ल

महफिलों से एक दिन जाना ही है ।

आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।

क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत,

मुद्दतों से दिल  मेरा तड़पा ही है ।

मै तुम्हे अपनी हकीकत क्या कहूँ,

तुमने जो सोचा तुम्हे करना ही है ।

प्यार के सपने बिखर कर चूर हैं,

प्यार भी शायद कोई सपना ही है ।

प्यार में दिल टूटना क्यों आम है,

सब ये कहते हैं कि ये…

Continue

Posted on February 18, 2018 at 1:56am — 3 Comments

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल

इश्क कुछ इस तरह निबाह करो ।
तुम मुझे और भी तबाह करो ।

तोड़ दो दिल तो कोई बात नहीं,
टूटे दिल मे मगर पनाह करो ।

मै अगर कुछ नहीं तुम्हारा हूँ,
दर्द पर मेरे तुम न आह करो ।

चाहना तुमको मेरी फितरत है,
तुम भले ही न मेरी चाह करो ।

तुम सजा पर सजा सुना दो पर,
मत कहो मुझसे मत गुनाह करो ।

आज कुछ यूँ मुझे सताओ तुम,
ग़ज़ल पर मेरी वाह वाह करो ।

नीरज मिश्रा
मौलिक व अप्रकाशित

Posted on February 15, 2018 at 5:26am — 4 Comments

दिल/ग़ज़ल

दर्द में ऐसे जलता है दिल ।
मोम जैसे पिघलता है दिल ।

यादों में ही रहे बेकरार,
यादों में ही बहलता है दिल ।

दर बदर ठोकरें मिल रहीं,
पर भला कब सँभलता है दिल ।

कुछ कभी तो कभी है ये कुछ ,
लमहा लमहा बदलता है दिल ।

तनहा तनहा किसी शाम सा,
होके वीरान ढलता है दिल ।

प्यार का कोई दरिया सा है,
जिसमें हर वक्त घुलता है दिल ।

नीरज मिश्रा 

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on February 14, 2018 at 12:18am — 6 Comments

मजबूर/ग़ज़ल

होके मजबूर तेरी गलियों से जाना होगा ।

अब खुदा जाने कहाँ अपना ठिकाना होगा ।

मै मना पाया न रब को न तेरे दिल को,

अब तो तनहाई में खुद को ही मनाना होगा ।

जान मेरी मै बिना तेरे जियूँगा लेकिन,

मेरे जीने में न जीने का बहाना होगा ।

तनहा होकर भी रहूँगा न कभी तनहा,

तेरी यादों का मेरे साथ ज़माना होगा ।

हर रजा अपनी मै हारूँगा रजा पर तेरी,

प्यार जब कर ही लिया है तो निभाना होगा ।

प्यार का नाम फकत प्यार को…

Continue

Posted on February 13, 2018 at 9:37am — 10 Comments

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At 2:23pm on December 15, 2014, Usha Pandey said…
नीरज जी ये , तो मेरा सौभाग्य है की आप लोगों के बीच स्थान मिला,
इसके लिए आभारी हूँ आपकी
At 12:15pm on August 19, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

प्रभावित होना एक बात है, लेकिन प्रोफ़ाइल फोटो किसी व्यक्ति की परिचयात्मकता की पहली कड़ी होती है. विश्वास है, तदनुरूप शीघ्र प्रयास करेंगे.

सादर

At 10:04pm on August 16, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

वाह नीरज भाई , क्या बात है

भले ही दुनियादारी के बड़े नादान पंछी हम ,

मगर दिल के हिसाबों में समझ अपनी सयानी है ।

At 1:45pm on August 11, 2013, neeraj sanadhya said…

आभार नीरज की ओर से नीरज को 

At 1:02am on July 2, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…
"तहे दिल से शुक्रिया...."
 
 
 

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