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sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"हार्दिक आभार महिमा जी ।"
Sep 30, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"बेहद शुक्रिया गीतिका जी । आपने जो शेर कोट किया है, मेरा भी पसंदीदा है ।"
Sep 30, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गुमनाम जी"
Sep 30, 2014
MAHIMA SHREE commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"जबसे मुझसे बिछड़ गया है वो सबमें मुझको ही ढूढ़ता है वो मैंने मांगा था उससे हक़ अपना बस इसी बात पर खफ़ा है वो....waah हार्दिक बधाई संजू जी "
Sep 30, 2014
वेदिका commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"मैंने मांगा था उससे हक़ अपना बस इसी बात पर खफ़ा है वो/// आयहाय .. बहुत खूब शेर और सादा भी"
Sep 29, 2014
gumnaam pithoragarhi commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है...................................बधाई।."
Sep 27, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी"
Sep 27, 2014
vijay nikore commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"अति सुन्दर। बधाई।"
Sep 27, 2014
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"हार्दिक आभार आदरणीय भुवन निस्तेज जी"
Sep 26, 2014
भुवन निस्तेज commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"पत्थरों के शहर में जिंदा है लोग कहते हैं आइना है वो क्या बात है आदरणीया बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल काहीही, दाद कबूल फरमाएं..."
Sep 26, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"आदरणीय आशुतोष जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका"
Sep 26, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"आदरणीय श्याम नारायण जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका"
Sep 26, 2014
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"आदरनिया राजेश दी बेहद शुक्रिया आपका"
Sep 26, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"आदरणीय जितेंद्र जी बेहद शुक्रिया आपका"
Sep 26, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"आ0 सविता जी बेहद शुक्रिया आपका"
Sep 26, 2014
sanju shabdita commented on sanju shabdita's blog post ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो
"आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आपका बेहद शुक्रिया"
Sep 26, 2014

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ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो

2122       1212       22

जबसे मुझसे बिछड़ गया है वो

सबमें मुझको ही ढूढ़ता है वो

मैंने मांगा था उससे हक़ अपना

बस इसी बात पर खफ़ा है वो

मेरी  तदवीर को किनारे रख

मेरी तक़दीर लिख रहा है वो

पत्थरों के शहर में जिंदा है

लोग कहते हैं आइना है वो

उसकी वो ख़ामोशी बताती है

मेरे दुश्मन से जा मिला है वो

 

संजू शब्दिता

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on September 25, 2014 at 5:00pm — 26 Comments

ग़ज़ल- कि दरिया पार होकर भी किनारे छूट जाते हैं

१२२२       १२२२          १२२२         १२२२

ज़रा सी बात पर अनबन, भरोसे टूट जाते हैं

कि साथी सात जन्मों के पलों में छूट जाते हैं

ये दिल का मामला प्यारे नहीं दरकार पत्थर की

ज़रा सी बेरुखी से ही ये शीशे फूट जाते हैं

ये ऐसा दौर है साहिब कि आँखें खोल हम सोये

मगर हद है लुटेरे सामने ही लूट जाते हैं

ये माना बेखुदी में हो मगर कुछ होश भी रखना

बहुत जल्दी ही  ख्वाबों के घरौंदे टूट जाते हैं

खुदी में दम…

Continue

Posted on July 6, 2014 at 9:26pm — 30 Comments

ग़ज़ल -कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं

 १२२२      १२२२     १२२२       १२२२

हमें माझी की आदत है उसी के ही सहारे हैं

डुबो दे बीच में चाहे, वो चाहे तो किनारे हैं

मिटाने को हमें अब जा मिला घड़ियाल से माझी

कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं

चमकती चीज ही मिलती रही सौगात में हमको

समझ बैठे ये धोखे से कि किस्मत में सितारे हैं

सियासत जो हमारे घर में ही होने लगी है अब

तभी हर बात में कहने लगे वो  हम तुम्हारे हैं

अदावत घर में ही…

Continue

Posted on June 18, 2014 at 11:30pm — 34 Comments

ग़ज़ल - हमारी बात उन्हें इतनी नागवार लगी

१२१२      ११२२      १२१२     ११२  

हमारी बात उन्हें इतनी नागवार लगी

गुलों की बात छिड़ी और उनको खार लगी

बहुत संभाल के हमने रखे थे पाँव मगर

जहां थे जख्म वहीं चोट बार-बार लगी

कदम कदम पे हिदायत मिली सफर में हमें

कदम कदम पे हमें ज़िंदगी उधार लगी

नहीं थी कद्र कभी मेरी हसरतों की उसे

ये और बात कि अब वो भी बेकरार लगी

मदद का हाथ नहीं एक भी उठा था मगर

अजीब दौर कि बस भीड़ बेशुमार…

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Posted on May 28, 2014 at 7:14pm — 58 Comments

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At 10:41am on August 29, 2013, Albela Khatri said…

swagat hai aapka  Sanju ji...........

At 8:52pm on May 26, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आदरणीया, आप तरही मुशायरे की प्रतिक्रियाओं का ज़वाब उसी मुशायरे में दिया करें.. यह उचित होगा.

सादर

At 9:13am on May 23, 2013, बृजेश नीरज said…

आदरणीया आपका आभार कि आपने मुझे मित्रता योग्य समझा।

 
 
 

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