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ग़ज़ल - मेरी तक़दीर लिख रहा है वो

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जबसे मुझसे बिछड़ गया है वो

सबमें मुझको ही ढूढ़ता है वो

मैंने मांगा था उससे हक़ अपना

बस इसी बात पर खफ़ा है वो

मेरी  तदवीर को किनारे रख

मेरी तक़दीर लिख रहा है वो

पत्थरों के शहर में जिंदा है

लोग कहते हैं आइना है वो

उसकी वो ख़ामोशी बताती है

मेरे दुश्मन से जा मिला है वो

 

संजू शब्दिता

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by sanju shabdita on September 30, 2014 at 9:31am

हार्दिक आभार महिमा जी ।

Comment by sanju shabdita on September 30, 2014 at 9:31am

बेहद शुक्रिया गीतिका जी । आपने जो शेर कोट किया है, मेरा भी पसंदीदा है ।

Comment by sanju shabdita on September 30, 2014 at 9:28am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गुमनाम जी

Comment by MAHIMA SHREE on September 30, 2014 at 8:02am

जबसे मुझसे बिछड़ गया है वो

सबमें मुझको ही ढूढ़ता है वो

मैंने मांगा था उससे हक़ अपना

बस इसी बात पर खफ़ा है वो....waah हार्दिक बधाई संजू जी 

Comment by वेदिका on September 29, 2014 at 8:55pm
मैंने मांगा था उससे हक़ अपना
बस इसी बात पर खफ़ा है वो/// आयहाय .. बहुत खूब शेर और सादा भी
Comment by gumnaam pithoragarhi on September 27, 2014 at 7:28pm

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है...................................बधाई।.

Comment by sanju shabdita on September 27, 2014 at 5:21pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी

Comment by vijay nikore on September 27, 2014 at 1:29pm

अति सुन्दर। बधाई।

Comment by sanju shabdita on September 26, 2014 at 11:26pm

हार्दिक आभार आदरणीय भुवन निस्तेज जी

Comment by भुवन निस्तेज on September 26, 2014 at 10:48pm
पत्थरों के शहर में जिंदा है

लोग कहते हैं आइना है वो

क्या बात है आदरणीया बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल काहीही, दाद कबूल फरमाएं...

कृपया ध्यान दे...

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