For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Usha Pandey
Share
 

Usha Pandey's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
Gorakhpur U.P.
Native Place
Ramgarh Tank
Profession
Writer

Usha Pandey's Blog

मेरे जीवन में वो मौसम, वो दिन और रात कहाँ..

मेरे जीवन में वो मौसम, वो दिन और रात कहाँ,

जो भिगो दे मुझे वो प्यार की बरसात कहाँ।

तेरी बातों में हर इक बात भूल जाते थे,

भला अब तुझमे वो पहली सी हंसीं बात कहाँ।

यूँ तो अब भी तू वही है, ये शब-ओ-रोज़ वही,

दरमियाँ अपने मगर पहले से हालत कहाँ।

देखके तुझको बस तुझमे ही सिमट जाते थे,

अब सिमटने के लिए दिल में वो जज़बात कहाँ।

प्यार के नाम पे चुनते रहे कांटे हरदम,

मेरे दामन में कोई फूलों की सौगात…

Continue

Posted on December 29, 2014 at 3:21pm — 7 Comments

इश्क की हद से, गुज़र कर देखा...

इश्क की हद से गुज़र कर देखा,

जीते जी हमने तो मर कर देखा।

राह में तेरा वो बिछड़ जाना,

कितना तनहा सा वो सफ़र देखा।

छोड़कर तुझको जब हुए रुखसत,

हमने कई बार पलटकर देखा।

काश तू फिर कहीं पे मिल जाए,

हर गली हमने ढूँढकर देखा।

ख्वाब में भी कभी तो तू आये,

हमने नींदों में जागकर देखा।

होके तनहा सदा न देता हो,

आहटों पे भी गौर कर देखा।

ऊषा पाण्डेय.

अप्रकाशित व…

Continue

Posted on December 21, 2014 at 8:00pm — 9 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:08pm on December 15, 2014, Neeraj Mishra "प्रेम" said…
आदरणीय ऊषा जी आपका बहुत बहुत स्वागत है हम सबके बीच ।
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"मुहतरम समर कबीर साहब जी, अगर "तू पहले से ज़्यादा सिगरेट पीता है" यह कर दिया जाए तो क्या…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"अमीरुद्दीन खान साहब आपने जो इस्लाह की उससे सहमत हूँ, मैंने सही कर लिया है। आपका स्नेह मिलता रहे,…"
1 hour ago
Dimple Sharma joined Admin's group
Thumbnail

ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के…See More
2 hours ago
Dimple Sharma updated their profile
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

पूर्वराग के रंग कच्चे भी और पक्के भी: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

मानव के रूप में हम सभी ने अपने अंतस में शृंगार रस के संयोग और वियोग दोनों स्वरूपों का अनुभव अवश्य…See More
3 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको

१२२२/१२२२/१२२ ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको वफ़ा का नाम अब डसता है मुझको[१] मुझे वो बा-वफ़ा लगता…See More
3 hours ago
Dimple Sharma is now a member of Open Books Online
3 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"मोहतरम समर कबीर साहब आदाब जनाब, मैं समझता हूँ एक शब्द के लिए इतनी बहस उचित नहीं है. इसे क्या मैं इस…"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन के भावों पर आपकी स्नेह बरखा का दिल से आभार। आपके सुझाव का दिल से…"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय  अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " जी भावों पर आपकी मनोहारी प्रशंसा से सृजन सार्थक…"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी भावों पर आपकी मनोहारी प्रशंसा से सृजन सार्थक हुआ,…"
21 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service