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होके मजबूर तेरी गलियों से जाना होगा ।
अब खुदा जाने कहाँ अपना ठिकाना होगा ।

मै मना पाया न रब को न तेरे दिल को,
अब तो तनहाई में खुद को ही मनाना होगा ।

जान मेरी मै बिना तेरे जियूँगा लेकिन,
मेरे जीने में न जीने का बहाना होगा ।

तनहा होकर भी रहूँगा न कभी तनहा,
तेरी यादों का मेरे साथ ज़माना होगा ।

हर रजा अपनी मै हारूँगा रजा पर तेरी,
प्यार जब कर ही लिया है तो निभाना होगा ।

प्यार का नाम फकत प्यार को पाना तो नहीं,
ये कोई कर्ज़ है जो मुझको चुकाना होगा ।

नीरज मिश्रा
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 668

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Comment by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 6:26pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी

Comment by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 6:25pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 14, 2018 at 5:41pm

आदर्णीय नीरज जी खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई

Comment by vijay nikore on February 14, 2018 at 9:58am

 आ० नीरज जी, हार्दिक बधाई इस अच्छी गज़ल के लिए।

Comment by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 12:40am

बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी

Comment by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 12:39am

बहुत बहुत हार्दिक शुक्रिया आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब

Comment by Neeraj Nishchal on February 14, 2018 at 12:39am

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 13, 2018 at 6:36pm

बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय नीरज जी | हार्दिक बधाई

Comment by Mohammed Arif on February 13, 2018 at 2:30pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी आदाब,

                              बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।कुछ वर्तनीगत अशुद्धियों को देखिएगा ।

Comment by नाथ सोनांचली on February 13, 2018 at 10:51am

आद0 नीरज जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। शेर दर शैर बधाई देता हूँ।

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