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Mohammed Arif
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Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब, हर शे'र उम्दा , बेजोड़ । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
15 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब, बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल हुई है । ग़ज़ल मतला बहुत ही उम्दा है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
3 hours ago
Mohammed Arif posted a blog post

ग़ज़ल (बह्र--22/22/22/2)

सौदें होते हैं तन केरिश्ते-नाते हैं धन के ।याद बहुत आते हैं अबमुझको दिन वो बचपन के ।मीठी-मीठी यादें सबताने-बाने हैं मन के ।कितने ही होते हैं दुखमाँ को लालन-पालन के ।ग़ुर्बत के शिकवें हैं,येख़ाली सारे बरतन के ।मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
6 hours ago
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब,लघुकथा क्षण में घटित होने वाली घटना होती है । आपकी यह लघुकथा दो काल खंड को प्रदरर्शित कर रही है--(1)दफ्तर के लिए जाते हुए पत्नी अनुराग को चैक थमा रही है । यह सुबह का समय है । (2)जब रात में अनुराग कमरे में प्रवेश करता हैऔर…"
7 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"तबाह करने चला था बस्तियाँ जो तूफान वो इंक़लाब की सूरत नगर से निकला था । वाह!वाह!!वाह!! हर शे'र लाजवाब । मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय अशफाक़ अली साहब ।"
9 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मोहतरम मोहम्मद नायाब जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । ग़ज़ल के शैल्पिक विधान के बारे में गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
18 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
19 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय गजेंद्र श्रोत्रिय जी आदाब, बहुत अच्छे अशआर । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
19 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"कोई इधर से तो कोई उधर से निकला था हर एक शख़्स परेशान घर से निकला था । वल्लाह कमाल है ।कितनी सच्चाई है इस शे'र में । नहीं था कुछ भी मेरे पास इक ख़ुदा के सिवा जब अपना लेके परिवार घर से निकला था । कितनी बेबाकी है इस शे'र में हर शे'र…"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"दुआ सलाम लिए जब उधर से निकला था, बड़े इताब से नश्तर नज़र से निकला था । कमाल है!कमाल है!! बहुत हु बेहतरीन मतला । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय रवि शुक्ला जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन अशआर हुए हैं । हर शे'र बेहतरीन । मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बना रहा है वो अख़बार शहर की अक्सर, ख़बर नहीं है सूरज किधर से निकला था । बहुत बेहतरीन मक़्ता हुआ है । बहुत ख़ूब!! शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय मोहन बेगोवाल जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"हुआ हबाब सा जीवन कि हफ्तदोजख जन्नत बहा जो ख़ून का दरिया उमर से निकला । वल्लाह कमाल है!! बहुत हु उम्दा शे'र आदरणीय लक्ष्मण धामी जी शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय साजिद हाशमी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । कुछ शे'र वाकई सामयिक बन पड़े हैं । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"तलाश जिसकी थी रावण को अपनी लंका में वो भेदिया उसी रावण के घर से निकला था । बहुत ख़ूब!बहुत ख़ूब!! शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"क़दम बढ़ाते ही रस्ते से हो गई अनबन, अगरचे ठान के मंज़िल मैं घर से निकला था । कमाल है!कमाल है!! जो शख़्स ग़ैर के साये में ढूँढता है पनाह, हमारे साये के गहरे असर से निकला । बहुत मारक क्षमता वाला शे'र शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल…"
yesterday

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Ujjain M.P.
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ग़ज़ल (बह्र--22/22/22/2)

सौदें होते हैं तन के
रिश्ते-नाते हैं धन के ।
याद बहुत आते हैं अब
मुझको दिन वो बचपन के ।
मीठी-मीठी यादें सब
ताने-बाने हैं मन के ।
कितने ही होते हैं दुख
माँ को लालन-पालन के ।
ग़ुर्बत के शिकवें हैं,ये
ख़ाली सारे बरतन के ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 27, 2017 at 10:40am

ग़ज़ल बह्र-22/22/22/2

उसने बस धन देखा है,
कब ये जीवन देखा है ।
टेसू छाया बाग़ों में,
उसका यौवन देखा है ।
देखी उसकी सूरत तो,
फिर से दरपन देखा है ।
जब-जब बरसे बादल तो,
भीगा तन-मन देखा है ।
उसकी बजती पायल पर,
खिल उठता मन देखा है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 21, 2017 at 7:54am — 16 Comments

ग्रीष्म के दोहे

सूरज शोले छोड़ता ,पशु भी ढूँढे छाँव ।
दर खिड़की सब बंद है ,सन्नाटे में गाँव ।।

भीषण गरमी पड़ रही,पशु -मानव हैरान ।
भू जल भी घटने लगा, साँसत में है जान ।।

पारा बढ़ता जा रहा, सूख रहे तालाब ।
देखो गाँव महानगर , हालत हुई खराब ।।

पत्ते झुलसे पेड़ पर ,नीम बबूल उदास ।
पशु किसान सबको लगी, पानी की अब आस ।।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 11, 2017 at 8:30am — 15 Comments

ग़ज़ल: सूखे-सूखे जंगल अब

बह्र-22/22/22
सूखे-सूखे जंगल अब,
रूठे-रूठे बादल अब ।

.
वादे, नारे सब झूठे,
बदले-बदले हैं दल अब ।

.

देखो किसकी साज़िश है,
रिश्ते-नाते घायल अब ।

.

बोतल में ऊँचे दामों,
बिकता है गंगा जल अब ।

.

ग़रीब के घर भी यारों,
ख़ुशियों वाला हो पल अब ।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 7, 2017 at 9:00pm — 14 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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"अच्छी ग़ज़ल से मुशायरे का आग़ाज़ किया है आपने आदरणीय रिज़वान जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
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"सादर धन्यवाद आदरणीय।"
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" आदरणीय अशफाक अली जी.उम्दा शायरी के लिए मुबारकबाद "
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Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब, हर शे'र उम्दा , बेजोड़ । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद…"
15 minutes ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरनीय नयाब साहिब, सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें "
16 minutes ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरनीय अजय जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल , बधाई कुबूल करें "
19 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"ग़मे हयात के शामो सहर से निकला थाजो एक अश्क मेरी चश्मे तर से निकला था ...शानदार मतला है…"
50 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"फ़कीर तू था सियासत में फिर बता कैसे,निशातो ऐश का सामान घर से निकला था।मक़ाम जिसने किया है समाअतों में…"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"aapki nawazish hai janaab"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"Shukriya Dhami ji"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"Shukriya ji"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"Abhar Hashmi Sahab"
1 hour ago

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