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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम तस्दीक़ एहमद साहब  ।"
11 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आ दाब, असरदार और प्रभावशाली रचना हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
14 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी ।"
15 hours ago
vijay nikore commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"बहुत ही प्रभावशाली रचना प्रस्तुत की है आपने, भाई मोहम्मद आरिफ़ ज॥ हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post बेबसी...
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी आदाब,                             बहुत ही मार्मिक कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
20 hours ago
Mohammed Arif commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(212)
"राम शिरोमणि जी आदाब,                        बहुत बेहतरीन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
20 hours ago
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हो गई उनकी महरबानी है)
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,                     शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
20 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"आपका हुक़्म सर आँखों पर । बहुत-बहुत आभार आदरणीय आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"हार्दिक आभार आदरणीया रक्षिता सिंह जी ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"हार्दिक आभार आदरणीय गुमनाम जी ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"हार्दिक आभार आदरणीया कल्पना भट्ट जी ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"हार्दिक आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी ।"
yesterday
Rakshita Singh commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"आदरणीय आरिफ जी नमस्कार, बाकई बहुत ही गम्भीर और प्रभावशाली रचना, जैसा कि सभी गुणीजनों ने कहा...हार्दिक बधाई स्वीकार करें।।"
yesterday
gumnaam pithoragarhi commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"वर्तमान की एकदम सही तस्वीर.....बधाई"
yesterday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"नमस्ते आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब, बहुत प्रभावशाली कविता लिखी है आपने, हार्दिक बधाई आपको|"
yesterday
Mohammed Arif posted a blog post

कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1

कश्मीर अभी ज़िंदा है झेलम के ख़ून में केसर के रक्त में नहाया बेवाओं की चीख पुकार मेंदहााड़ेंं मारती माँओं में पत्थरबाज़ी में कश्मीर अभी ज़िंदा है भटके नौजवानों में कश्मीर अभी ज़िंदा है शहीदों के जनाज़ोंं में डरे सहमे शिकारों मेंख़ूूून से सनी पतवारों में दया के लिए भीख माँगते हाथों में धमकी भरे पत्रों में हैण्ड ग्रेनेड में मोर्टार और एके फोर्टी सेवन में असंख्य हथियारों के ज़खीरों में बरामद पाकिस्तानी हथियारों में कश्मीर अभी ज़िंदा है शहीदों के ताबूतोंं में ।मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
yesterday

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कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1



कश्मीर अभी ज़िंदा है

झेलम के ख़ून में

केसर के रक्त में नहाया

बेवाओं की चीख पुकार में

दहााड़ेंं मारती माँओं में

पत्थरबाज़ी में

कश्मीर अभी ज़िंदा है भटके नौजवानों में

कश्मीर अभी ज़िंदा है शहीदों के जनाज़ोंं में 

डरे सहमे शिकारों में

ख़ूूून से सनी पतवारों में

दया के लिए भीख माँगते हाथों में

धमकी भरे पत्रों में

हैण्ड ग्रेनेड में

मोर्टार और एके फोर्टी सेवन में

असंख्य हथियारों के ज़खीरों में

बरामद पाकिस्तानी हथियारों में…

Continue

Posted on June 17, 2018 at 8:30am — 16 Comments

कविता --हाँ, हमें अभी और देखना है

हाँ , हमें अभी और देखना है

टूटते शहर का मंज़र

रिश्तों में उलझी संवेदनहीनता का दंश

अपनों के बीच परायेपन का अहसास

घुट घुटकर रोज़ मरना

पीढ़ियों के अंतर की गहरी खाई में गिरना

निर्मम व्यवस्था का शिकार होना

हाँ, हमें अभी और देखना है

लालच का उफनता समुद्र

अकेलेपन के चुभते काँटें

बीमार बाप के लरजते हाथ

झुर्रियों की ख़ामोशियाँ

बेचैन माँ की प्रतीक्षा

कर्कश तरंगों का शोर

विघटन की शैतानी लकीरें

भरोसे में लालच के दैत्य

ठहरा…

Continue

Posted on June 8, 2018 at 10:00am — 15 Comments

लघुकथा--शगुन

विवाह में शामिल होने आए दोस्त , रिश्तेदार क़रीबी और परिवार के सदस्य सभी यह जानने के बड़े उत्सुक थे कि आख़िर राहुल मंच से ऐसी क्या घोषणा करेगा जिससे उसकी शादी हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन जाएगी । प्रीतिभोज से निवृत्त होकर सभी मेहमान मंच के सामने एकत्रित हो गए । राहुल अपनी जीवन संगिनी वर्षा का हाथ थामे मंच पर उपस्थित हुआ । हाथ जोड़कर दोनों ने सबका अभिवादन किया और कहा-" साथियों , आप सभी का आभारी हूँ कि आपने अपनी गरिमामयी उपस्थित देकर मेरा मान बढ़ाया । ज़्यादा कुछ नहीं कहूँगा । आज के इस विवाह आयोजन को…

Continue

Posted on May 1, 2018 at 10:30am — 10 Comments

लघुकथा--बोध

प्रसंग था 'दशा और 'बोध ' किसे कहते हैं ? जिज्ञासु और दार्शनिक के बीच इस विषय को लेकर काफी वाद-विवाद चला । जिज्ञासु दार्शनिक के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रहा था । अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर जिज्ञासु अभिभूत हो गया । दार्शनिक ने उंगली से चींटियों के जाते हुए झुण्ड की ओर इशारा कर दिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 23, 2018 at 9:00am — 16 Comments

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At 8:39pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ मोहम्मद साहब प्रणाम
बहुत शुक्रिया
आपकी सलाह पर तुरंत अमल होगा
At 8:57am on March 6, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ सर
आपको कविता अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया
At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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