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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                           लोगों की दृष्टि ख़राब होती है तो फिर वे बेबसी या लाचारी से सिकुड़े बदन को नहीं देखते । वासना के भेड़िये किसी की मज़दूर की ग़ुर्बत…"
33 minutes ago
Mohammed Arif commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये   वाह! वाह!! बहुत ही सच्चा शे'र कहा ।औरों पर या मज़बूर हँसने वाले एक दिन ख़ुद ग़म के शिकार हो सकते हैं  शे'र दर शे'र दिद के साथ मुबारकबाद आली जनाब मोहतरम…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Kumar Gourav's blog post कुलीन(लघुकथा)
"वाह! वाह!! बहुत ही बेहतरीन और कटाक्षपूर्ण लघुकथा । मज़ा आ गया इस लघुकथा को पढ़कर । सच है, जिस नाक को लेकर चला जाता है या जिन आदर्शों को लेकर हम जीवन यापन करने की कोशिश करते हैं वो आदर्श परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं । सारे आदर्श धराशायी हो…"
13 hours ago
Mohammed Arif posted blog posts
14 hours ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,फागुन का स्वागत करती बहतरीन कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अंतिम से ऊपर वाली पंक्ति में 'होगी' को "होंगीं" कर लें।"
16 hours ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एक और रत्नाकर(लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                              पौराणिक पात्रों को आधार बनाकर आधुनिक समाज में  चोर-उचक्के और बेईमान रत्नाकर पर अच्छा कटाक्ष किया आपने । आज सारे…"
19 hours ago
Mohammed Arif is now friends with Ramavtar Yadav, Sahar Nasirabadi, vijay nikore, Sushil Sarna and 5 more
22 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"बहुत -बहुत आभार आदरणीय विजय निकोर जी ।"
Monday
vijay nikore commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"//मगर ग़रीब के पास आधार कार्ड न होने सेराशन से वंचित किया जा रहा हैक्या इतनी पारदर्शिता काफी नहीं है ।// बहुत ही प्रभावशाली रचना लिखी है। आपको हार्दिक बधाई।"
Monday
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी आदाब,                              इश्क़ के रंग में शिद्दत से डूबी बहुत ही प्यारी रचना । सच है इश्क़ ही इस संसार में शाश्वत है वह चाहे जो करवा सकता ।…"
Sunday
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब,                       आदरणीय सुशील सरना जी की रचना पर मेरी प्रतिक्रिया पर अपनी उत्साहवर्धक टिप्पणी देने का बहुत-बहुत शुक्रिया । यह मेरा सबसे बड़ा सौभाग्य है ।"
Sunday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"बहुत-बहुत आभार आदरणीया रक्षिता सिंह जी । लेखन सफल हो गया ।"
Sunday
Rakshita Singh commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"आदरणीय आरिफ जी, नमस्कार बहुत ही बढ़िया कविता... हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Sunday
Mohammed Arif posted a blog post

कविता --पारदर्शिता

कितनी पारदर्शिता हैइस सदी मेंकिसानों की बर्बाद फसल कातगड़ा मुआवज़ा देने कीसरकार खुलेआम घोषणा कर रही हैमगर मुआवज़ा आत्महत्या में बदल रहा हैमीडिया सुबह की पहली किरण के साथदिखला रहा हैभूख-ग़रीबी , बेरोज़गारी , आँसू , सिसकीमगर सरकार कहती हैहमने करोड़ों का बजट मेंप्रावधान बढ़ा दिया हैआँकड़ों मेंमृत्यु दर लगातार घट रही हैसरकारी अस्पतालों मेंमौत सस्ती बिक रही हैहीरा और हवाला कारोबारीकरोड़ों की चपत लगा रहे हैंमगर ग़रीब के पास आधार कार्ड न होने सेराशन से वंचित किया जा रहा हैक्या इतनी पारदर्शिता काफी नहीं है…See More
Sunday
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"आदरणीय नंदकीशोर दुबे जी आदाब,                            बहुत ही सुंदर भावोंं की वाटिका । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,                                 सुंदर प्रेम की भावना से ओतप्रोत गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

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कविता--फागुन

फागुन
अलसाई हुई भोर को
फागुनी दस्तक की
गंध ने महका दिया
मेरे अंदर भी
बीज अंकुरित होने लगे
तुम्हारे अहसासों के
शायद तुम भी
गुनगुना रही होगी
होली का गीत
प्रेम की मादल पर
कुछ पुरानी यादें भी
थाप दे रही होंगी
हृदय के आँगन में
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on February 20, 2018 at 12:30am — 1 Comment

कविता --पारदर्शिता



कितनी पारदर्शिता है

इस सदी में

किसानों की बर्बाद फसल का

तगड़ा मुआवज़ा देने की

सरकार खुलेआम घोषणा कर रही है

मगर मुआवज़ा

आत्महत्या में बदल रहा है

मीडिया सुबह की पहली किरण के साथ

दिखला रहा है

भूख-ग़रीबी , बेरोज़गारी , आँसू , सिसकी

मगर सरकार कहती है

हमने करोड़ों का बजट में

प्रावधान बढ़ा दिया है

आँकड़ों में

मृत्यु दर लगातार घट रही है

सरकारी अस्पतालों में

मौत सस्ती बिक रही है

हीरा और हवाला कारोबारी

करोड़ों की चपत लगा रहे…

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Posted on February 18, 2018 at 7:56am — 4 Comments

कविता--नए संस्करण

अब पैमाने

तय किए जा रहे हैं

राष्ट्रीयता के

ब्रेन मेपिंग और नार्को टेस्ट के ज़रिए

उगलवाया जाएगा राष्ट्रीयता का अमृत्व

भूल से स्वप्न में भी

गांधी का चश्मा मत देख लेना

चश्में सारे सरकार बाँटेगी

भूख बाँटने के काम में भी वह दक्ष हो गई है

जंतर-मंतर पर अनशन

भूख हड़ताल की पसलियाँ बाहर निकल आई है

संसद में भेड़िये घूस आए हैं

नोच डालना चाहते हैं संविधान की प्रतियों को

बहुत भूखे हैं

खाना चाहते हैं सारी संसदीय मर्यादा को

" रघुपति राघव राजा राम "…

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Posted on February 12, 2018 at 1:11am — 14 Comments

कविता--बहुत बेईमानी लगता है

आत्मा के

कल-कल छल-छल जल में

शब्दों की ध्वनियाँ तैरती है

देर तक गूँजती रहती है

तब बहुत बेईमानी लगता है

इस युग के मुहाने की छाती पर

नंगे पैर खड़े होकर चलना

समझौतों के ताबीज पहनना

मक्कारी का मंत्र जाप करना

रोज़ आत्मा का गला घोटना

खंडित-खंडित होकर

अखंडित समाधि बनना

बहुत बेईमानी लगता है

इस युग के रिश्तों में जीना

जहाँ रिश्तों में डाका पड़ा है

ख़ूनी हाथ अट्टहास करते हैं

अकेलेपन की साँसें थम गई है

रातरानी को लकवा हो गया है

गुलाब…

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Posted on February 6, 2018 at 9:08pm — 16 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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