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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"बहुत -बहुत हार्दिक आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी ।"
9 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"आदरणीय आरिफ मुहम्मद जी, नमस्कार । बहुत ही बढ़िया लघुकथा की प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"दिली शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब । लेखन सार्थक हो गया ।"
19 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"आ.जनाब आरिफ़ साहिब आदाब, गागर में सागर यानी कम लफ़्ज़ों में ज़बरदस्त लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से लघुकथा पर सफलता की मोहर लगाने का बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"आदरणीय आशुतोष जी आदाब,                           लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से अवगत करवाने का बहुत-बहुत आभार ।                  …"
yesterday
Dr Ashutosh Mishra commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"आदरणीय आरिफ जी येतो लघु लघु कथा हो गयी प्रतीक का बढ़िया प्रयोग हुआ है अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर................संकेत को सुनना थोडा असमंजस में हूँ रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करी सादर "
yesterday
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,वाह बहुत खूब,शानदार लघुकथा,इस् प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post वार हर बार (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                   ईमानदारी और बेईमानी को आधार बना बहुत ही कटाक्षपूर्ण प्रतीकात्मक लघुकथा । आजकल बेईमानी का ही। तो…"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"आपकी प्रतिक्रिया ने सफल लघुकथा होने की मोहर लगा दी । दिली आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
" वाह। आदाब। बेहतरीन प्रतीकात्मक बोधात्मक सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब। मुझे ऐसा भी लगा कि अंतिम दोनों वाक्यों को मिला कर एक वाक्य कहा जा सकता है! सादर"
yesterday
Mohammed Arif commented on babitagupta's blog post टेसू की टीस या पलाश की पीर
"आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,                                 सबसे पहले तो ओबीओ मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है ।                                                   आपकी यह रचना किस विधा में आती है मुझे समझ में नहीं आ रहा है ।मंच का नियम है कि जो भी…"
Monday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post विचार-मंथन के सागर में (अतुकान्त कविता)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                               लोकतंत्र की दशा और दिशा को लेकर , देश के हालातों को…"
Monday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से लघुकथा को सफल बनाने का हार्दिक आभार आदरणीय श्याम नारायण जी ।"
Monday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से लघुकथा को सफल बनाने का हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी ।"
Monday
TEJ VEER SINGH commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--बोध
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।बेहतरीन प्रस्तुति।"
Monday

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Male
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Ujjain M.P.
Native Place
Ujjain
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लघुकथा--बोध

प्रसंग था 'दशा और 'बोध ' किसे कहते हैं ? जिज्ञासु और दार्शनिक के बीच इस विषय को लेकर काफी वाद-विवाद चला । जिज्ञासु दार्शनिक के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रहा था । अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर जिज्ञासु अभिभूत हो गया । दार्शनिक ने उंगली से चींटियों के जाते हुए झुण्ड की ओर इशारा कर दिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 23, 2018 at 9:00am — 14 Comments

कविता -- अनकही ख़ामोशियाँ



अनकही ख़ामोशियाँ

बहुत कुछ कहती है

उनका शोर बहुत दूर तक सुनाई देता है

उन ख़ामोशियों की ज़मीन पे

बीज अंकुरित होते हैं

बहुत कुछ कहने के

मगर अनकही ख़ामोशियाँ

ख़ामोश बनकर रह जाती है

जैसे हड़ताल की अधूरी रह जाती है माँगें

जो कभी पूरी नहीं होती है

और माँगें हड़ताल को चलाती है

अतीत की स्मृतियों को भी

दबाती है अनकही ख़ामोशियाँ

धीरे-धीरे अनकही ख़ामोशियाँ

कब भीतर की तपिश बन जाती है

पता ही नहीं चलता है

यह तपिश

लावा बनकर फूट पड़ती है…

Continue

Posted on April 8, 2018 at 9:06am — 12 Comments

लघुकथा--हठ


एक दिन तंग आकर ज़िंदगी मौत से बोली-" आख़िर तू मुझे कब तक डसती रहेगी ?"
मौत खिलखिलाकर बोली-" जब तक तू जीने की हठ करती रहेगी ।"

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 1, 2018 at 9:00am — 8 Comments

लघुकथा--अपील



" आप समस्त शहरवासियों से हाथ जोड़कर विनम्र अपील करता हूँ कि इस बार होने जा रहे 'स्वच्छता सर्वेक्षण ' में बढ़ चढ़कर भाग लें , अपना सकारात्मक फीडबेक देकर शहर को स्वच्छता की सूची में नंबर-वन बनाएँ ।यह शहर आपका है , इसे अपने घर की भाँति साफ-सुथरा और सुंदर बनाएँ। यह सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है । शहर का नाम पूरे देश में रोशन करें । अपने आसपास गंदगी को फटकने न दें , घरों से निकलने वाला गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डस्टबिन में डालें । मुझे उम्मीद है इस बार हमारा शहर स्वच्छता में पूरे देश में नंबर-वन…

Continue

Posted on March 25, 2018 at 9:13am — 10 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 8:39pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ मोहम्मद साहब प्रणाम
बहुत शुक्रिया
आपकी सलाह पर तुरंत अमल होगा
At 8:57am on March 6, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ सर
आपको कविता अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया
At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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