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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"आदरणीय सुरेंद्र कुमार शुक्ल जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन और सामयिक रचनाएँ हैं । हर बुराई का अंत होना मानव के हित में है भाई मगर जो आतंक की आड़ में राजनेता रात-दिन ऊल-जलूल ब्यानबाज़ी करके एक वर्ग विशेष को राष्ट्रीय धारा से वंचित करने का काम कर रहे हैं उन…"
14 minutes ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"दाद-ओ-तहसीन का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय विजय निकोर जी ।"
23 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी अमूल्य राय देंगे ।"
27 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजय तिवारी जी आदाब, हर शे'र माक़ूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।ः"
31 minutes ago
vijay nikore commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"//वक़्त बदलते देर नहीं लगती भाईअपना होकर बेगाना सा लगता है ।// वाह ! बेहतरीन गज़ल के लिए दिल से बधाई, आरिफ़ भाई।"
6 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, प्रीत में , रंग में , श्रृंगार में , बेचैनी में डूबे बेहतरीन दोहों की प्यारी सौग़ात । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
7 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र मारक क्षमता वाला । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
7 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी ।"
7 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"दाद-ओ-तहसीन का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया रक्षिता जी ।"
7 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई । बधाई ।"
14 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय गोपाल नारायण जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास बेहतरीन । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ने इस ग़ज़ल के साथ नीर-क्षीर न्याय कर दिया है । इस समीक्षा से मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिला । आशा है आप उनके…"
15 hours ago
Rakshita Singh commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ,आदरणीय आरिफ जी! "वक्त बदलते देर नहीं लगती भाई अपना होकर बेगाना सा लगता है।""
17 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय दिलबाग जी आदाब, आयोजन में सहभागिता हेतु बधाई । प्रयास जारी रखे और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
18 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"सैय्याद से कहे सुनो मासूम इक चमन आबाद बुलबुलों से मेरी सरजमीं रहे । सच है! सच है मोहतरमा । आजकल ज़मीं ही तो सुरक्षित नहीं है । बहुत ही उम्दा अशआर । हर शे'र बढ़िया । दिली मुबारकबाद आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
18 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"दीदार ग़ैर का मैं करूँ किस तरह कहो जबकि मिरी निगाह में बैठे तुम्हीं रहे।। वाह! वाह!! बहुत बढ़िया शे'र । हर शे'र माक़ूल है । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।"
18 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"tanha 6 hours ago हंसते रहो सदा ही चमकती जबीं रहे गर साथ है खुदा तो समझ दिल हसीं रहे । वाह! वाह!! बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल का मतला । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय मुनीश तन्हा जी ।"
18 hours ago

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Male
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Ujjain M.P.
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Ujjain
Profession
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ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा

कुछ भूला कुछ पहचाना सा लगता है
कोई मुझको दीवाना सा लगता है ।

थोड़ी उलझन थोड़े आँसू जैसा वो
जीवन का ताना बाना सा लगता है ।

ग़ुरबत में देखा जो मुझको यारों ने
बोले कोई अंजाना सा लगता है ।

वक़्त बदलते देर नहीं लगती भाई
अपना होकर बेगाना सा लगता है ।

शाइर बनकर घूम रहा है देखो तो
'आरिफ़'कोई दीवाना सा लगता है ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on November 23, 2017 at 12:02am — 18 Comments

हाइकु

(1) बचे न जीव
ख़त्म होते जंगल
है अमंगल ।
(2) सूखी धरती
बरसे न बादल
गायब जल ।
(3) भारतवर्ष
संस्कृतियों की गंगा
मन है चंगा ।
(4) आओ बनाएँ
खुशहाल भारत
है ज़रूरत ।
(5) रक्षा नायक
राष्ट्र का रखवाला
सेना नायक ।
(6) जातीय भेद
देश का नुकसान
घटाए शान ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on November 15, 2017 at 6:26pm — 14 Comments

लघुकथा--एटीकेट्स

" विजेश ! विजेश ! हू इज़ विजेश ।"

" आई एम विजेश सर ।" डरता-डरता विजेश सिर झुकाकर खड़ा हो गया ।

" व्हेरी गुड ! यू आर विजेश । तुम्हारी कई दिनों से शिकायतें आ रही है कि तुम क्लास और स्कूल परिसर में गुटखा-पाऊच खाते हो । क्या यह सच है ? जवाब दो ।"

थोड़ी चुप्पी के बाद वह साहस जुटाकर बोला-" सॉरी सर , बट आज के बाद कभी नहीं खाऊँगा । प्रॉमिस सर !"

" ओके ! सीट डाउन एण्ड मैण्टेन यूअर एटीकेट्स । अब सभी बुक निकालकर रीडिंग शुरू करें ।" पूरी क्लास लेसन रीडिंग में तल्लीन हो गई । थोड़ी ही देर में… Continue

Posted on November 11, 2017 at 11:17pm — 12 Comments

लघुकथा-- परिचय

" जी , आपका परिचय ?"
" मुझे 'धर्मनिरपेक्षता' कहते हैं ।"
" बहुत ख़ूब ! आपके साथ ये कौन है ?"
" ये मेरी बड़ी बहन ' राष्ट्रीयता ' है ।"
" लेकिन आपने अपना परिचय नहीं दिया , आप कौन ?"
" मेरा कोई एक परिचय हो तो दूँ । फिर भी कुछ लोग मुझे वादे , नारे , भाषण-राशन , बयानबाज़ी , आशीर्वाद की भूखी 'राजनीति' कहते हैं ।"
राष्ट्रीयता तिलमिलाकर बोली-" सीधे-सीधे क्यों नहीं कहती कि मुझे 'चरित्रहीन' कहते हैं ।"
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on November 3, 2017 at 10:10pm — 16 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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