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Mohammed Arif
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4 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता-- लाजमी है अब मरना
"बेहद सटीक और सारगर्भित , उत्सासजनक टिप्पणी के लिए दिल की अथाह गहराइयों से आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी । लेखन सार्थक हो गया ।                  इस पर एक अच्छी लघुकथा भी लिखी जा सकती है , आपके इस अमूल्य…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohammed Arif's blog post कविता-- लाजमी है अब मरना
"बेहद कटाक्षपूर्ण तीखी और यथार्थपूर्ण विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब। कमाल कर दिया है। इसे आप बेहतरीन लघुकथा का रूप भी दे सकते हैं प्रतीकात्मक/ विवरणात्मक शैली में!"
7 hours ago
Mohammed Arif commented on somesh kumar's blog post पर मोहब्बत
"आदरणीय सोमेश कुमार जी आदाब,                    पर मोहब्बत की अनिच्छा को प्रकट करती बेहतरीन कविता के लिए हार्दिक बधाई ।"
11 hours ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post देवियां (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी आदाब,                              शादी शुदा मर्द जब लिव-इन-रिलेशन में रहे तो पत्नी का घुटघुटकर मरना वाजिब है । ऐसे ज़रूरी हो जाता है कि  पत्नी…"
11 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब,                    बहुत उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय मुनीश जी आदाब,                     ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । आयोजन में सहभागिता लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय बलराम धाकड़ जी आदाब,                  अच्छी ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय हर्ष महाजन जी आदाब,                       आयोजन में सहभागिता के लिए बधाई । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का तत्काल प्रभाव से संज्ञान लें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"किस मुँह से आयें सामने ये दाग़दार लोग चेहरा अगर न अपना छुपायें तो क्या करें वाह! वाह!! बहुत ही लाजवाब शे'र ।                  शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय अजीत…"
yesterday
Mohammed Arif commented on TEJ VEER SINGH's blog post अंधा कानून – लघुकथा  –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी आदाब,                             दुष्कर्म की पृष्ठभूमि पर लिखी गई सशक्त लघुकथा । देश के रसूखदार लोग.जब दुष्कर्म का खेल खेलते हैं तो उनके ऊपर कोई कार्रवाई…"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय अरविंद कुमार जी आदाब,                   अच्छा प्रयास । आयोजन में सहभागिता के लिए बधाई । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"नादानियाँ थी अपनी जो पत्थर को दिल दिया अब मुस्कुरा के भूल न जाएँ तो क्या करें। वाह! वाह ! बहुत ही बढ़िया शे'र ।         शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद कुबूल करें आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
" अद्भुत ! लाजवाब ! बेमिसाल ! दिलकश ! ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय गजेंद्र जी । पढ़कर मज़ा आ गया ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"ऐसे भी चन्द लोग हैं शुहरत के वास्ते अपना मज़ाक़ ख़ुद ही उड़ाएँ तो क्या करें वाह! वाह!! बहुत ही लाजवाब और सच्चा शे'र है ।  इस मुफ़लिसी के दौर में रोटी के वास्ते बच्चों को काम पर न लगाएँ तो क्या करें सच है, सच है । आजकल बच्चों को अपना बचपन छोड़कर…"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब,                बहुत उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Friday

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कविता-- लाजमी है अब मरना

हमें अब मरना होगा

अपने आदर्शों के साथ

गला घोंटना होगा

अपने ही सिद्धांतों का

सूली पर चढ़ाना होगा मान्यताओं को

इन सबका औचित्य समाप्त - सा हो गया है

सच की अँतड़ियाँ निकल आई है

काल के दर्पण पर कुछ भद्दे चेहरें

मुँह चिढ़ा रहे है खोखले मानव को

दिन सारे दहशत में झुलसते रहते हैं

दोपहर को लू लग गई है

कँपकँपी-सी लगी रहती है शाम को

रातें आतंकी के विस्फोट -सी लगती है

हमें अब मरना होगा अपने आंदोलनों के साथ

भूख हड़ताल और आमरण अनशन…

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Posted on February 25, 2018 at 8:00am — 2 Comments

कविता--फागुन

फागुन
अलसाई हुई भोर को
फागुनी दस्तक की
गंध ने महका दिया
मेरे अंदर भी
बीज अंकुरित होने लगे
तुम्हारे अहसासों के
शायद तुम भी
गुनगुना रही होगी
होली का गीत
प्रेम की मादल पर
कुछ पुरानी यादें भी
थाप दे रही होंगी
हृदय के आँगन में
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on February 20, 2018 at 12:30am — 10 Comments

कविता --पारदर्शिता



कितनी पारदर्शिता है

इस सदी में

किसानों की बर्बाद फसल का

तगड़ा मुआवज़ा देने की

सरकार खुलेआम घोषणा कर रही है

मगर मुआवज़ा

आत्महत्या में बदल रहा है

मीडिया सुबह की पहली किरण के साथ

दिखला रहा है

भूख-ग़रीबी , बेरोज़गारी , आँसू , सिसकी

मगर सरकार कहती है

हमने करोड़ों का बजट में

प्रावधान बढ़ा दिया है

आँकड़ों में

मृत्यु दर लगातार घट रही है

सरकारी अस्पतालों में

मौत सस्ती बिक रही है

हीरा और हवाला कारोबारी

करोड़ों की चपत लगा रहे…

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Posted on February 18, 2018 at 7:56am — 4 Comments

कविता--नए संस्करण

अब पैमाने

तय किए जा रहे हैं

राष्ट्रीयता के

ब्रेन मेपिंग और नार्को टेस्ट के ज़रिए

उगलवाया जाएगा राष्ट्रीयता का अमृत्व

भूल से स्वप्न में भी

गांधी का चश्मा मत देख लेना

चश्में सारे सरकार बाँटेगी

भूख बाँटने के काम में भी वह दक्ष हो गई है

जंतर-मंतर पर अनशन

भूख हड़ताल की पसलियाँ बाहर निकल आई है

संसद में भेड़िये घूस आए हैं

नोच डालना चाहते हैं संविधान की प्रतियों को

बहुत भूखे हैं

खाना चाहते हैं सारी संसदीय मर्यादा को

" रघुपति राघव राजा राम "…

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Posted on February 12, 2018 at 1:11am — 14 Comments

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At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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