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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीया ग़ज़ल के लिए बहुत बधाई उम्दा कोशिश .."
14 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"जनाब तसदीक़ साहब उम्दा गज़ल के लिए मुबारकबाद 4 थे शेर के संदर्भ में नीलेश जी से सहमत हूँ ।"
14 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय अनिल सिंह जी उम्दा गज़ल हुयी बधाई स्वीकारें ।"
14 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"पास सबके टालने के सौ बहाने हो गए आजकल के लोग भी बेहद सयाने हो गए ...1   वो शिफ़त अल्लाह ने बख़्शी मेरे महबूब को देखकर उसको सभी उसके दिवाने हो गए ...2   फ़ायदे पर ही टिकी थी रिश्तों की बुनियाद तो धीरे धीरे फ़िर अलग सबके ठिकाने हो गए…"
14 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"उम्दा गज़ल हुयी बधाई आदरणीय "
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"मतले में पुनः कोशिश कि है सबकी अलग हैं बोलियाँ पर इक ज़बाँ से हम हमको है फ़ख्र ये कि हैं हिन्दोस्ताँ से हम"
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय दिनेश जी सही कहा आपने जल्दबाज़ी में देख नहीं पाये आज ही लिखी है गज़ल टाइम ख़त्म हो रहा था ध्यानाकर्षण का शुक्रिया बाद में मतला बादल लेंगे .."
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जनाब समर साहब उम्दा इस्लाह ...बहुत ख़ूब"
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय सालिक जी अच्छी गज़ल हुयी बधाई स्वीकारें "
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय मुनीश जी गज़ल का उम्दा प्रयास हुआ बधाई स्वीकारें ..."
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरनीय विश्वकर्मा जी गज़ल  की बधाई गुणिजनों से सहमत ...प्रयासरत रहें "
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय दिनेश जी उम्दा गज़ल हुयी बधाई स्वीकारें "
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"हमको है फ़ख्र ये कि हैं हिन्दोस्ताँ से हम हैं रंग सैकड़ों प हैं इक गुल्सिताँ से हम ...1   जब आह भी हमारी न महसूस कर सके "अब तुम से दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम "...2   बदनाम हो न जायें वो बस इस ख़याल से लेते नहीं हैं नाम भी उनका…"
Sep 25, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"क्या खूब इस्लाह की जनाब... उपयोगी जानकारी मिली l"
Aug 28, 2021
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"उम्दा इस्लाह की जनाब"
Aug 28, 2021
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"दर असल शेर यूँ था "सो उनका आ गया हूँ ताब देखने के लिए" बिलासपुर से बाहर हूँ पहली दफ़आ मोबाइल se type करने की कोशिश की है l"
Aug 28, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

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Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

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Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

Continue

Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 11:00pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का
At 11:34pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय नादिर ख़ान साहब
At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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"बेहतरीन गजल पर मुबारकबाद कुबूल कीजिए।"
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"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,मैंने अपना स्टैंड नहीं बदला है .. मैं अब भी मानता हूँ कि बिगाने सहीह नहीं…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
""जब से आए हैं सियासत में सियाने हो गए    साँप में और नेवले में दोस्ताने हो…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .राजनीति
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर दोहावली हुई है । हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आ. भाई संजय जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
2 hours ago

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