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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"आद0 नादिर खान जी सादर अभिवादन। गीत का अच्छा प्रयास हुआ है। कहीं-कहीं लय भंग है, गुनगुनाते रहें तो वह भी दूर हो जाएगी। गुणीजनों की बातों को संज्ञान में लीजिये। मेरी बधाई स्वीकार कीजिये"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"आ. भाई नादिर जी, सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
नादिर ख़ान commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बड़ी उम्मीद थी उनसे वतन को शाद रक्खेंगे ।खबर क्या थी चमन में वो सितम आबाद रक्खेंगे ।। है पापी पेट से रिश्ता पकौड़े बेच लेंगे हम।मगर गद्दारियाँ तेरी हमेशा याद रक्खेंगे ।।..... उम्दा अशआर आदरणीय नवीन मणि जी .... सम्वाद  को संवाद  कर…"
Wednesday
नादिर ख़ान commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गीत- प्यार के आगे
"अमन की क्यारियाँ सींचो, मुहब्बत को महकने दो. हृदय में आज अपने तुम, हमारा दिल धड़कने दो....खूबसूरत भाव लिए उत्तम रचना के लिए बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी ..."
Wednesday
नादिर ख़ान commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"आदरणीया बबीता जी हौसला अफजाई का शुक्रिया ...."
Wednesday
नादिर ख़ान commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"आदरणीय समर साहब बेशकीमती सुझाओं के लिए बहुत शुक्रिया आपका .... पहली बार गीत लिखने की कोशिश की है ।"
Wednesday
babitagupta commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"उम्दा पंक्तियाँ वरखा रानी की बहार पर,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।"
Wednesday
Samar kabeer commented on नादिर ख़ान's blog post झूम के देखो सावन आया ....
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,सावन के मौसम पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'चंचल सोख़ हवा इतराई' इस पंक्ति में 'सोख़' को "शौख़" कर लें । ' भीनी भीनी सी खुशबू छाई' ये पंक्ति…"
Wednesday
नादिर ख़ान posted a blog post

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लायाझूम के देखो सावन आया चंचल सोख़ हवा इतराईबारिश की बौछारें लाईमहक उठा अब मन का आँगनभीनी भीनी सी खुशबू छाई देख छटा हर मन हर्षायाझूम के देखो सावन आया ...  मन की बगिया महक रही हैपंछी बन के चहक रही हैइच्छाओं को पंख मिल गएदिल की धड़कन बहक रही है मौसम में है खुमार छायाझूम के देखो सावन आया ... धरती बाहों को फैलायेअपना आँचल भी लहरायेउमड़ पड़े हैं नदियाँ नालेआसमान अमृत बरसाये सबको ऐसा उत्सव भायाझूम के देखो सावन आया....  धीरे धीरे गरजो मेघाखेतों में ही बरसो मेघाछत टूटी कच्ची दीवारेंउलझन…See More
Wednesday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जंग ए आज़ादी में कुर्बां होने वालों को 'शकूर' क्या पता था कैसे-कैसे हुक्मराँ हो जाएँगे जनाब शिज्जु साहब पूरी गज़ल बाकमाल है गिरह भी आपने लाजवाब कही है....... "
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जबाब अफ़रोज साहब इस मंच की यही खुशूसियत है के यहाँ खुद को तराशने का मौका मिलता है चूंकि स्वम में सुधार की गुंजाईस सदैव रहती है इसलिए बड़ा दिल करके त्रुटियों को सहर्ष स्वीकारें    आपमें बहुत पोटेन्सियल है गुणीजनों की सलाह का इस्तकबाल…"
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जबाब अफ़रोज साहब इस मंच की यही खुशूसियत है के यहाँ खुद को तराशने का मौका मिलता है चूंकि स्वम में सुधार की गुंजाईस सदैव रहती है इसलिए बड़ा दिल करके त्रुटियों को सहर्ष स्वीकारें    आपमें बहुत पोटेन्सियल है गुणीजनों की सलाह का इस्तकबाल…"
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"हाथों में गुब्बारे थामे शादमां हो जाएँगे खिलखिलाएँगे ये बच्चे तितलियाँ हो जाएँगे जब तलक जिन्दा जड़ें हैं फुनगियाँ आबाद हैं वरना रिश्ते रफ्ता-रफ्ता नातवां हो जाएँगे रंग सतरंगी समेटे बस जरा सी देर को हम भी ऐसे बुलबुलों की दास्तां हो जाएँगे आदरणीया…"
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"वो ज़मीं मेरी वो मेरा आसमां हो जाएंगेयूँ समा जाएंगे दिल में एक जाँ हो जाएँगे आदरणीया आंजली जी अच्छी गज़ल हुयी मुबारकबाद स्वीकारें ... जो बसे थे दिल में मेरे .......को दिल में जो मेरे बसे थे .... किया जा सकता है । सादर ....."
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आदरणीय गुरप्रीत जी अच्छी गज़ल हुयी है ढेरों मुबारकबाद आपको ...."
Jul 28
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब तसदीक़ साहब बहुत ही उम्दा गज़ल कही आपने मुबारकबाद कूबूल करें .. एक संशय सा दिल मे है हुस्ने मतला में आपने गुमाँ और शादमाँ लिया है । जबकि काफिया आँ है ......"
Jul 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

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Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

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Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

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Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 12:55pm on February 3, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

सालगिरह मुबारक हो, अपका और हमारा स्नेह और सहयोग बना रहे, यही दुआ करते है 

At 3:08pm on December 9, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

बे ज़ार= अप्रसन्न, क्रोधी 

 
 
 

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