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नादिर ख़ान
  • Male
  • Bilaspur,chhattisgarh
  • India
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dandpani nahak left a comment for नादिर ख़ान
"आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का"
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"नाम पर यूँ मज़हब के बाँटते हो बच्चों कोज़्ह्र बो रहे हो क्यों अपने नोनिहालों में उम्दा बात कही आदरणीय दंडपाणि साहब बधाई स्वीकारेंं "
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"बेरहम हवाओं ने उसके पर कतर डाले जो फ़लक पे उड़ता था रात दिन ख़यालों में  आदरणीया राजेश कुमारी जी   उम्दा प्रस्तुति  के लिए बधाई स्वीकारें "
yesterday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब अनीस साहब उम्दा गजल के लिये मुबारकबाद "
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"रोटी के निवालों में के जगह खाने के निवालों में     "
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय गुरप्रीत जी अच्छी गजल काही आपने   एक कोशिश कि है गौर कीजिएगा शायद पीज़ा को पीजों करना उचित नहीं है हमारी नज़र में बाकी गुणीजन बताएँगे  उसी तरह "रोटियों निवालों में"  भी "के" शब्द छूट सा रहा है  पीज़ा…"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया अंजली बहन बहुत ही खूबसूरत, भावपूर्ण  गज़ल हुयी है सभी शेर लाजवाब हैं पढ़ कर अच्छा लगा |"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"अच्छी कोशिश हुयी है आदरणीय वसुदेव नमन जी बधाई स्वीकारें |"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"देवता है खुद अपने, आदमी ख़यालों में।तरबियत नहीं पाते,मस्जिदों शिवालों में।। क्या लिहाज़ की बातें,क्या अदब का पैमाना।हम जवाब क्या देते , खो गए सवालों में।। बहुत खूबसूरत मतला हुआ है जनाब आसिफ साहब | गिरह भी बकमाल है | मेरे देश आँगन के , फूलों में…"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"दूर तक निदा अपनी गूँजे है सवालों में हम न बंध सकेंगे अब मख़मली ख़यालों में   फँस के रह गई उम्मत दुश्मनों की चालों में ढूँढे है वजूद अपना माज़ी के हवालों में   हर तरफ अँधेरा है, झूठ की नुमाइश का सच नज़र नहीं आता दिन के भी उजालों में   खोल…"
Friday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"जी ज़रूर...... मै खुद शर्मिंदा हूँ हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गई जल्द ही सुधार कर लेंगे "
Jul 27
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"वो दौर अलग था कि सभी लोग थे काबिल अब  कौन  चलाता  है  यहाँ  देश  हुनर  से।२। इस वक्त की गर्दिश को मिटायेगी मुहब्बत क्यों लोग  परेशाँ  हैं  यहाँ  भीड़  के डर से।3। सार्थक गज़ल के…"
Jul 27
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"हम अपनी तरफ से तो बिछा बैठे हैं आँखें,अब नज़रे इनायत भी हो थोड़ी सी उधर से।.... अच्छी गज़ल के लिए मुबारकबाद आदरणीय वासुदेव नमन जी ।"
Jul 27
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"मान रखने का धन्यवादआदरणीय अमित जी , हम सब विद्यार्थी है एक दूसरे से सीखते है |"
Jul 26
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"जनाब आसिफ़ साहब उम्दा भावों से लबरेज़ खूबसूरत गजल के लिए मुबारकबाद स्वीकारें |"
Jul 26
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"अंजाम के शर से  हालात चलो पूछ .......  "
Jul 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Bilaspur,chhattisgarh
Native Place
Bhilai Nager,Chhattisgarh
Profession
govt. employee
About me
simplicity

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नादिर ख़ान's Blog

झूम के देखो सावन आया ....

खुशियों की सौगातें लाया

झूम के देखो सावन आया

 

चंचल सोख़ हवा इतराई

बारिश की बौछारें लाई

महक उठा अब मन का आँगन

भीनी भीनी सी खुशबू छाई

 

देख छटा हर मन हर्षाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

 

मन की बगिया महक रही है

पंछी बन के चहक रही है

इच्छाओं को पंख मिल गए

दिल की धड़कन बहक रही है

 

मौसम में है खुमार छाया

झूम के देखो सावन आया ...

 

धरती बाहों को…

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Posted on August 14, 2018 at 11:21pm — 6 Comments

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

      (122  122  122  122)

कोई बात दिल में छुपाते नहीं हैं

मगर आँसुओं को दिखाते नहीं हैं

 

सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते

मिले ज़ख्म कितने गिनाते नहीं हैं

 

ये बातें हैं दिल की सुनो तुम भी…

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Posted on February 18, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 6:31pm — 10 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

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Posted on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 11:00pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नादिर खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफजाई का
At 11:34pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय नादिर ख़ान साहब
At 10:50pm on April 20, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय नादिर जी आपका दोस्त बनना मेरे लिए सुखद अहसास वाला है सादर
At 9:34pm on February 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीय नादिर खान सर, ओबीओ परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 5:50pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

 आपका हार्दिक आभार आदरणीय  

At 10:05pm on April 3, 2014, Mukesh Verma "Chiragh" said…

नादिर जी
आपको मित्र रूप मे पाकर मुझे बहुत खुशी हुई.
खुश रहिए.. धन्यवाद

At 1:08pm on January 4, 2014, Razia mirza said…

बहोत बहोत शुक्रिया ओ बी ओ परिवार में मुझे शामिल करने के लिये।

At 7:58pm on November 20, 2013, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार एवं मेरी मित्र मंडली मे आपका हार्दिक स्वागत है । 

At 7:07pm on April 23, 2013, Usha Taneja said…

मित्रता स्वीकार के लिए हार्दिक धन्यवाद! 

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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