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"हार्दिक आभार आदरणीया मंजीत कौर जी"
yesterday
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"छंदमय टिप्पणी के लिये हार्दिक आभार आदरणीय सतविन्दर भाई"
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"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी"
yesterday
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", रचना की सराहना व उत्साहवर्धन के लिये हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ जी//आजके आम दादाओं को वाकई सुनने वाला कौन है ? कितने हैं ? // जी सही कहा आपने। वैसे सुना दादियों को भी कम ही जाता है पर महिलायें किसी भी तरह से अपने मन की बाहर उँडेल ही देती हैं जो…"
yesterday
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"वाह छन्नपकैया सार छंद में आपने चित्र की आत्मा को उकेर दिया है आदरणीया मंजीत कौर जी  हार्दिक बधाई। बचपन लगे प्यारा// इसमे 11 मात्राएँ हो रही हैं। "
yesterday
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"कुण्डलिया छंद बिट्टू  मेरे ध्यान से,  सुन ले मेरी बात।  दी है मेरे लट्ठ ने, बड़े बड़ों को मात।। . बड़े बड़ों को मात.  समझ मत बुड्ढा मुझको।  अपने सारे दाँव ,  सिखाऊँगा  मैं  तुझको।। बिछड़े सारे यार ,आज दादू के…"
Saturday
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"नमस्कार आदरणीय सौरभ पांडेय जी "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"संभल जाओ यारों ये वक्त नहीं फिर आयेगा जख्मी पर्यावरण पर अब तो मरहम लगाईये//  बहुत खूब   प्रदत्त विषय पर शानदार रचना  हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम मथानी जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"मेरी छाया तले गुड्डे-गुड़ियों के खेल कथा-कहानियाँ, पींग भरते झूले// बहुत सुन्दर शब्दों के चयन के साथ  अच्छी रचना  हार्दिक बधाई आदरणीया  नीलम उपाध्याय जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"पर्यावरण के साथ होती खिलवाड़ पर चिंता दिखाती  शानदार छंद रचना। हार्दिक बधाई आपको आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"पेड़ हूँ, मैं आज भी बादल बुलाता हूँप्यास की मारी धरा को मैं हँसाता हूँ।1//  बहुत खूब। . मानव जीवन में पेड़ का महत्त्व और उपयोगिता की याद दिलाती शानदार प्रस्तुति हार्दिक बधाई आदरणीय मनन जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"बहुत सुन्दर छंद रचना प्रदत्त विषय पर  हार्दिक बधाई आपको आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हरसाल पर्यावरण दिवस मनाकर,ना करे खानापूर्तिहरदिन प्रकृति से खिलवाड़ ना करे,यह दृढसंकल्प जरूरी// जी बिलकुल सही कहा आपने।  प्रदत्त विषय पर एक अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीया बबीता  गुप्ता जी "
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"संवाद( गीत) बरगद से पूछा मैने तू देता क्यों सबको छाया खुद तपकर औरों को शीतल ,रखकर तूने क्या पाया बरगद मुस्काता बोला तब बुद्धि हीन मैं हूँ भाई संगत में तेरी रहकर भी सीख न पाया चतुराई थका पथिक मेरी छाया में रुक कर  जब  है सुस्ताता बता नहीं…"
Jun 14
pratibha pande replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दिवंगत आत्मा के प्रति विनम्र श्रद्धाँजली।परिवार को ईश्वर इस दुःख को वहन करने की शक्ती दे।"
Jun 11
pratibha pande commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"कुछ तत्व अपने स्वार्थ के लिये मुद्दे गर्माये रखना चाहते हैं।  सामयिक विषय लिये प्रभावशाली रचना। हार्दिक बधाई आपको"
Jun 10

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]

“ कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा I एक राज़ की बात बतानी है I’’ राधा के बाहर आते ही अब्दुल ड्राईवर झट उसके पास आ गया I

“जल्दी बता, बहुत काम पड़ा है I” झटके का कपड़ा कमर में खोंसती राधा बोली I

“ कल तू बता रही थी ना कि मेमसाब आजकल बदली बदली हैं, बहुत मीठा बोलती हैं , टूट फूट में चिल्लाती  भी नहीं हैं I’’

“ हाँ तो ?’’

“दोनों कड़वे करेलों की दरियादिली का राज़ आज खुल गया है I’’ अब्दुल का अंदाज़ भेद भरा था  I

“दोनों मतलब ?’’

“ साहब भी आजकल मीठे हो रहे हैं I…

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Posted on July 6, 2017 at 6:00pm — 9 Comments

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

ऊन सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते तक

गर्माहट का आना…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

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At 3:07pm on November 18, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

 

आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक बधाई और  शुभकामनाएँ।

At 1:39pm on November 18, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीया प्रतिभा पांडे साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ. ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखे. सादर 

At 12:19pm on November 18, 2018, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।प्रभु आपकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण करें।माता रानी का सदैव आशीर्वाद मिले। जीवन में सुख, शाँति,समृद्धि और सेहत से मालामाल रहें।सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
 
 
 

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