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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"  जब शीत हो तो गर्म कपडे, दे सदा संतान को | खुद ठण्ड सह ले उफ़ न बोले, माँ कहें उस मान को || बारिश रहे या बाढ़ ही हो, माँ नहीं यह हारती | हर हाल में संतान पर माँ, जान अपनी वारती ||// बहुत सुन्दर भाव और शिल्प में प्रदत्त चित्र को सार्थक करती…"
Sunday
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"हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी "
Sunday
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"आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक  आदरणीया राजेश  कुमारी जी  "
Sunday
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"  हार्दिक आभार आदरणीय अशोक जी  "
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"हार्दिक आभार आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी "
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"हार्दिक आभार आदरणीय समर   कबीर जी।  आपका कहना सही है कि  रचना   छोटी है कुछ पारिवारिक व्यस्तताओं के चलते रचना  पर अधिक समय नहीं दे पायी "
Sunday
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"रचना पर आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी  से लेखन कर्म सफल हुआ   हार्दिक  आभार  आदरणीय सौरभ पांडेय जी "
Sunday
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"हार्दिक आभार आदरणीया बबीता  जी "
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"उत्साहवर्धन के लिए   हार्दिक आभार  आदरणीय उस्मानी  जी "
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"प्रदत्त चित्र पर सुन्दर शक्ति छंद रचना हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश जी "
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"सन्तान से बढ़कर नहीं कुछ भी धरोहर मात की;निज पुत्र के सुख के लिए चिंता करे हर बात की।माँ जूझती संकट अकेली लाख भी आये सहे;   मर मर जीये हँस के सदा पर लाल उसका खुश रहे।।//    वाह  प्रदत्त चित्र  पर शानदार छंद रचना …"
Sunday
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"प्रदत्त चित्र पर शानदार शक्ति छंद  रचना   हार्दिक बधाई आदरणीया मंजीत कौर जी "
Sunday
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"सब बह गया है बाढ़ में ये कह रही तस्वीर है माँ के  लिए सन्तान पर सबसे बड़ी जागीर है  //  मातृत्व को गरिमा देती  प्रदत्त चित्र पर भावपूर्ण  छंद रचना  है आपकी   हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी "
Sunday
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"नहीं साथ कोई सहारा मिले दुआ से किसी के किनारा मिले बढ़ी बेबसी नार हैरान है बचे जान कैसे परेशान है ll//  प्रदत्त चित्र को सार्थक करती  शानदार छंद  रचना   हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ  छोटेलाल जी "
Sunday
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"प्रदत्त चित्र पर   भावपूर्ण रचना   हार्दिक बधाई आदरणीया  अनीता शर्मा जी   "
Sunday
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"दो रोज तो शासन दिखाता और करता है रहम.फिर कौन है किस हाल में किसको पता रहते सहम./वाह  प्रदत्त चित्र को परिभाषित करती शानदार छंद रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय गंगाधर जी"
Sunday

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]

“ कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा I एक राज़ की बात बतानी है I’’ राधा के बाहर आते ही अब्दुल ड्राईवर झट उसके पास आ गया I

“जल्दी बता, बहुत काम पड़ा है I” झटके का कपड़ा कमर में खोंसती राधा बोली I

“ कल तू बता रही थी ना कि मेमसाब आजकल बदली बदली हैं, बहुत मीठा बोलती हैं , टूट फूट में चिल्लाती  भी नहीं हैं I’’

“ हाँ तो ?’’

“दोनों कड़वे करेलों की दरियादिली का राज़ आज खुल गया है I’’ अब्दुल का अंदाज़ भेद भरा था  I

“दोनों मतलब ?’’

“ साहब भी आजकल मीठे हो रहे हैं I…

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Posted on July 6, 2017 at 6:00pm — 9 Comments

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

ऊन सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते तक

गर्माहट का आना…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
At 12:41am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:40am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया प्रतिभा जी , आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 4:03pm on November 7, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया प्रतिभा जी हार्दिक आभार आपका!

 
 
 

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Sudha mishra is now a member of Open Books Online
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vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आशंका के गहरे-गहरे तल में
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"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
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"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन, वाह वाह, मजा आ गया पढ़के। बधाई देता हूँ आपको।…"
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
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