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Rakshita Singh
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शिज्जु "शकूर" commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"अच्छी भावाभिव्यक्ति है, सादर बधाई आपको"
Tuesday
Rafique Nagori commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"WAA"
Feb 10
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
" आदरणीय मनोज जी नमस्कार  बहुत सुंदर पंक्तियाँ, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 8
Rakshita Singh posted a blog post

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -छोटे बच्चों की तरह,  मेरी शायरी पर -अपने पैर पटक रहे हैं,बहुत अरसे के बाद -आया हूँ मिलने इनसे,यकीनन इसलिए-रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Feb 8
Rakshita Singh commented on Maheshwari Kaneri's blog post कुछ अनमोल रिश्ते   ( कहानी )
" आदरणीया कनेरी जी, नमस्कार  भावविभोर कर देने वाली सुंदर लघुकथा। "
Feb 8
Rakshita Singh commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुन! जो उनसे हो मुलाकात जाये तो क्या होगा
"आदरणीय अमोद जी ,नमस्कार ! बहुत सुंदर भाव, बधाई हो। "जाये तो क्या होगा"  के स्थान पर यदि रदीफ़  "हो जाये तो क्या होगाा"  ज्यादा उचित रहेेेेगा । कुछ अन्य बदलाव भी जो मुझे आवश्यक लगे, कृपया गौर फरमाइये ।    …"
Feb 8
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।।"
Jan 14
Mahendra Kumar commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"अच्छी रचना है आदरणीया रक्षिता सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 7
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Rakshita Singh posted a blog post

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही भरता मेरा पेट प्रिय,जिस दिन तू गुमसुम रहती है-भूखा मैं सो जाता हूँ !!मैखाना, ये आँखें तेरीपीने दे मत रोक प्रिय,जब जब ये छलका करती हैं-और बहक मैं जाता हूँ !!रहता हूँ तेरे दिल में मैं बनकर तेरा दास प्रिय,जब भी टूटा है दिल तेरा-तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ जब होती हो तुम साथ प्रिय,छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ !!तू ही कह दे अब कहाँ गुजारूँतुझ बिन अपनी रात प्रिय,तेरी ही बाहों में अक्सर-थककर के मैं सो जाता हूँ !!तुम बिन मेरा जीवित…See More
Jan 4
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- नहीं आती
"आदरणीय बसंत जी  नमस्कार  बहुत ही सुंदर  प्रस्तुति, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Nov 1, 2018
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"आदरणीय बसंत जी बहुत ही खूबसूरत गज़ल। बहुत बहुत बधाई"
Sep 15, 2018
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"गीत सुंदर बन पड़ा है। शुभकामनाएँ"
Aug 24, 2018
santosh khirwadkar commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"वाह्ह्ह क्या बात है ...बहुत सुंदर गीत!! बधाई!"
Aug 22, 2018
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आदरणीया रक्षिता जी विरह गीत पढ़कर बहुत आनन्द आया बहुत बहुत बधाई"
Aug 22, 2018

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Gender
Female
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Noida
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Ujhani
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Fashion desinger
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NA

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At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -
छोटे बच्चों की तरह,  

मेरी शायरी पर -
अपने पैर पटक रहे हैं,

बहुत अरसे के बाद -
आया हूँ मिलने इनसे,

यकीनन इसलिए-
रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on February 8, 2019 at 10:25am — 4 Comments

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Posted on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

विरह गीत

अश्रु भरे नैन,
नाहीं आवे मोहे चैन
कैसे कटें दिन रैन,
इस विरहा की मारी के...

मन में समायो है,
ये जसुदा को जायो
कोई ले चलो री गाम मोहे,
कृष्ण मुरारी के...

कर गयो टोना,
नंनबाबा को ये छोना
देख सांवरो सलौना,
गाऊँ गीत मल्हारी के...

व्याकुल सो मन
अकुलाये से नयन
बिन धीरज धरें ना
चितवन को निहारि के...

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 19, 2018 at 8:58pm — 11 Comments

जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)

जरा ज़ुल्फें हटाओ चाँद का दीदार मैं कर लूँ !

बस्ल की रात है तुमसे जरा सा प्यार मैं कर लूँ !!



बड़ी शोखी लिए बैठा हूँ यूँ तो अपने दामन में !

इजाजत हो अगरतो इनको हदके पार मैंकरलूँ!!



मुआलिज है तू दर्दे दिल का ये अग़यार कहते हैं!

हरीमे यार में खुद को जरा बीमार मैं कर लूँ !!



यूँ ही बैठे रहें इकदूजे के आगोश में शबभर !

जमाना देख ना पाये कोई दीवार मैं कर लूँ !!



तुझे लेकर के बाहों में लब-ए-शीरीं को मैं चूमूँ !

कि होके बेगरज़ अब इकनहीं…

Continue

Posted on June 28, 2018 at 3:16pm — 11 Comments

 
 
 

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