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Rakshita Singh
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Rakshita Singh commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"आदरणीय अमोद जी... " मिले बहुत से मगर और बात है तुझ में। तुम्हारे जैसा कोई खुशनुमा नहीं मिलता।।"  बहुत बढ़िया शैर.... हार्दिक बधाई।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी, बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ.... बहुत बहुत बधाई।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on विनय कुमार's blog post जरुरत- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, बहुत बढ़िया लघुकथा। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"आदरणीय सोमेश जी, सुन्दर रचना । बहुत बहुत बधाई।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते)
"आदरणीय सुरेन्द्र जी,  बहुत ही खूबसूरत गजल । हार्दिक बधाई स्वीकार करे।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post एक गीत पिता के नाम
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, दिल को छू लेने बाली बहुत  ही बेहतरीन रचना। पिता के व्यक्तित्व को बारीकियों से दर्शाती ये रचना बहुत ही सराहनीय है..... हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"आद0 रक्षिता सिंह जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन। भाव सम्प्रेषण उत्तम। बधाई आपको इस सृजन पर"
Feb 7
Rakshita Singh commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आदरणीय नमन जी नमस्कार, बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ.... "मुहब्बत की शमअ पर मर मिटे जल जल पतंगे जो, खबर किसको कि उन नाकाम परवानों पे क्या गुजरी" हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 6
Rakshita Singh commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त
"आदरणीय मोहित जी, आत्मविश्वाश से परिपूर्ण बहुत ही प्रेरणादायक  पंक्तियाँ....सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 6
Sushil Sarna commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"इस भावपूर्ण सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया।"
Feb 5
SALIM RAZA REWA commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"आ. Rakshita जी. बहुत खूबसूरत रचना हुई है मुबारक़बाद कुबूल फरमाएं."
Feb 5
narendrasinh chauhan commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"खुब सुन्दर रचना"
Feb 5
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"आदाब आदरणीय आरिफ जी  एवं तस्दीक जी, सराहना के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। श्रीमान समर कबीर जी  के इस्लाह  को मद्दे नजर रखते हुए मैंने अपनी त्रुटियाँ सुधारली हैं।"
Feb 5
Rakshita Singh posted blog posts
Feb 5
Mohammed Arif commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब,                     छू लेने वाली रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह पर गौर करें ।"
Feb 5
Tasdiq Ahmed Khan commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"मुहतर्मा रक्षिता साहिबा , दिल की गहराइयों को छूती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
Feb 5

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Ujhani
Profession
Fashion desinger
About me
NA

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Rakshita Singh's Blog

हाल-ए- दिल

डर लगता है दुनिया से

और घर वालों के तानों से,

और कभी डर जाती हूँ मैं

प्यार के इन अफसानों से।।

कितनी मुश्किल आती है

और कितने ही गम सहते हैं,

लाखों कोशिश कर लें-

फिर भी तन्हा ही हम रहते हैं।।

रहता कुछ भी याद नहीं 

जब याद किसी की आती है,

प्रेस से कपड़े जलते हैं-

काॅफी फीकी रह जाती है।।

माँ भी गुस्सा करती है

और बापू भी चिल्लाते हैं,

मगर किसी को इस दिल के

हालात समझ ना…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 5:00pm — 11 Comments

व्यथा

हर वक्त ,

दिल -ओ- दिमाग में,

एक बहस सी छिड़ी रहती है-

कितना लड़ते हैं, दोनों आपस में-

कुछ पल के लिए, एक हो भी जाते हैं

मगर फिर अगले ही पल 

" मैदान -ए- जंग" ।

और मैं !

एक निहत्थे प्यादे (सैनिक) की तरह , 

जो जीता -

उसी की तरफ।।

( मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on January 29, 2018 at 10:38am — 4 Comments

इसके आगे बस खुदा का नाम है।

 

सर पे मेरे इश्क का इल्जाम है,

और दिल का टूट जाना आम है।



हुस्न दौलत इश्क सब बेदाम है,

इसके आगे बस खुदा का नाम है।



दफ़्अतन यूँ जा रहे हो छोड़कर,

क्या तुम्हें कोई जरूरी काम है ?



ठहरो भी बैठे रहो आगोश में,

पीने दो आँखों से, ये जो जाम है।



यूँ ना देखो बेरुखी से अब हमें,

दिल ये तेरे इश्क में बदनाम है।



चल दिए यूँ छोड़ कर दामन मेरा,

क्या यही मेरी वफ़ा का दाम है।



हम तो समझे थे जिसे सबसे जुदा…

Continue

Posted on December 23, 2017 at 9:21pm — 4 Comments

अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये।

रोते रहे खुद, मुझको हँसा कर चले गये-

काफ़िर से अपना दिल वो लगाकर चले गये।



पूँछा जो उनसे घर का पता मैंने दोस्तों-

हौश अपना कू-ए-यार बता कर चले गये।



तारीक में वो शम्मा जला कर चले गये-

मैं रूठी और वो मुझको मना कर चले गये।



ग़ाफ़िल थी जिनके इश्क को लेकर मैं आज तक-

तालिब वो मुझको अपना, बना कर चले गये।



मदहोश सी रहती हूँ, न कुछ होश है मुझको-

जब से वो बादः-ए-इश्क पिला कर चले गये।



ताबीर क्या दूँ वस्ल की, ज़ाइद मैं… Continue

Posted on November 24, 2017 at 5:34am — 8 Comments

 
 
 

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