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Rakshita Singh
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Rakshita Singh commented on Mohammed Arif's blog post कविता- वो आँखें
"आदरणीय आरिफ जी, नमस्कार उन दिनों आँखेंबड़ी व्यस्त रहती थीकिसी के दिल को लुभाती थीकिसी के मन को भाती थी।बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ......मुबारकबाद कुबूल करें।"
Mar 3
Rakshita Singh commented on Harash Mahajan's blog post तरही ग़ज़ल : ये दिया जैसे जलता हुआ रह गया
"आदरणीय हर्ष जी, नमस्कार। बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ..... उठ चुका तू मुहब्बत में इतना मगर मैं गिरा इक दफ़ा तो गिरा रह गया ।  हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Mar 3
Rakshita Singh commented on somesh kumar's blog post दो जिस्मों के मिलने भर से
"आदरणीय  सोमेश जी, आपने  प्रेम की वास्तविकता को बहुत ही खूबसूरत अल्फाजों में पेश किया। दिली मुबारकबाद कुबूल करें।"
Feb 27
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय अफरोज़ जी। बहुत ही बेहतरीन गजल, हर शेर मुकम्बल। दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदर्णीया अंजली जी, सुन्दर रचना, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय नीलेश जी। बढ़िया गजल।।हार्दिक बधाई।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय बासुदेव जी, नमस्कार। बहुत ही बढ़िया गजल...बहुत बहुत बधाई।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय तस्दीक़ जी नमस्कार। बेहतरीन शेरों के साथ बहुत ही उम्दा गजल,हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय आशीश जी नमस्कार। बहुत ही खूबसूरत गजल, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय सुरेन्द्ररनाथ जी नमस्कार। बहुत ही बेहतरीन गजल, हर शेर मुकम्बल..काबिले तारीफ।। दिली मुबारकबाद कुबूल करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय सार्थक जी बहुत ही उम्दा शैर- "सोचा किया यही की दरिया में डूब लूँ, आँखे मगर दे तेरी सदाये तो क्या करें। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय रामअवध जी, नमस्कार। बहुत ही उम्दा गजल, दिली मुबारकबाद कुबूल करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार। "जर्जर है कश्ती और  ये पतवार बेवफादेती तनिक न साथ हवाएँ तो क्या करें।" बहुत ही खूबसूरत ...गजल। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय नादिर जी। बहुत ही खूबसूरत गजल, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 23
Rakshita Singh commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post इसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता हूँ
"आदरणीय शकूर जी, बहुत बेहतरीन गजल। बहुत बहुत मुबारकबाद।"
Feb 23
Rakshita Singh shared शिज्जु "शकूर"'s blog post on Facebook
Feb 23

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Ujhani
Profession
Fashion desinger
About me
NA

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Rakshita Singh's Blog

तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...

तुम्हारे इश्क ने मुझको,

क्या क्या बना दिया...

कभी आशिक,कभी पागल-

कभी शायर बना दिया।।

अब इतने नाम हैं मेरे,

कि मैं खुद भूल जाता हूँ...

कोई कुछ भी पुकारे मुझको-

मैं बस मुस्कुराता हूँ।।

मेरी माँ कहती है मुझसे,

दिवाना हो गया है तू....

मगर इक तू ही न समझे-

कि मैं तेरा दिवाना हूँ।।

अगर तुझको भी है चाहत,

तो क्यों इनकार करती है?

तेरी आँखों से लगता है-

कि तू भी प्यार करती है।।

खुदा…

Continue

Posted on February 18, 2018 at 12:00pm — 8 Comments

हाल-ए- दिल

डर लगता है दुनिया से

और घर वालों के तानों से,

और कभी डर जाती हूँ मैं

प्यार के इन अफसानों से।।

कितनी मुश्किल आती है

और कितने ही गम सहते हैं,

लाखों कोशिश कर लें-

फिर भी तन्हा ही हम रहते हैं।।

रहता कुछ भी याद नहीं 

जब याद किसी की आती है,

प्रेस से कपड़े जलते हैं-

काॅफी फीकी रह जाती है।।

माँ भी गुस्सा करती है

और बापू भी चिल्लाते हैं,

मगर किसी को इस दिल के

हालात समझ ना…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 5:00pm — 11 Comments

व्यथा

हर वक्त ,

दिल -ओ- दिमाग में,

एक बहस सी छिड़ी रहती है-

कितना लड़ते हैं, दोनों आपस में-

कुछ पल के लिए, एक हो भी जाते हैं

मगर फिर अगले ही पल 

" मैदान -ए- जंग" ।

और मैं !

एक निहत्थे प्यादे (सैनिक) की तरह , 

जो जीता -

उसी की तरफ।।

( मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on January 29, 2018 at 10:38am — 4 Comments

इसके आगे बस खुदा का नाम है।

 

सर पे मेरे इश्क का इल्जाम है,

और दिल का टूट जाना आम है।



हुस्न दौलत इश्क सब बेदाम है,

इसके आगे बस खुदा का नाम है।



दफ़्अतन यूँ जा रहे हो छोड़कर,

क्या तुम्हें कोई जरूरी काम है ?



ठहरो भी बैठे रहो आगोश में,

पीने दो आँखों से, ये जो जाम है।



यूँ ना देखो बेरुखी से अब हमें,

दिल ये तेरे इश्क में बदनाम है।



चल दिए यूँ छोड़ कर दामन मेरा,

क्या यही मेरी वफ़ा का दाम है।



हम तो समझे थे जिसे सबसे जुदा…

Continue

Posted on December 23, 2017 at 9:21pm — 4 Comments

 
 
 

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Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -कब है फ़ुर्सत कि तेरी राहनुमाई देखूँ?
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