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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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SudhenduOjha posted a blog post

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

यूँ ही.......... चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी। तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।। **************************************चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी। तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।।मैं मुदित था पक्षियों को नभ में विचरता देख कर। तुमने आकर आंख में क्यूँ नीड़ उनके रख दिये।।चंद्रमा हो साथ मेरे यह कभी सोचा नहीं था। सूर्य पथ में साथ होगा यह कभी सोचा नहीं था।।साथ मेरे द्वंद्व के संघर्ष के ही बस मीत थे। गीत अधरों पर बसेगा, यह कभी सोचा नहीं था।।हर अमावस ठोकरों की…See More
Sep 2

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on SudhenduOjha's blog post सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है
"आदरणीय सुधेन्दु ओझा जी, आपकी प्रस्तुत कविता की संवेदनशीलता बिन्दुवत एवंं प्रहारक है। इसके लिए आप अवश्य ही बधाई के पात्र हैं। आपकी रचना का कथ्य आवृतिजन्य होने से उक्ति विशिष्टता का प्रभाव समीचीन बन पड़ा है। हार्दिक शुभकामनाएँ..  शुभातिशुभ"
Aug 28
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब,अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 27
SudhenduOjha posted blog posts
Aug 25
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब, अच्छी कविता हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 13
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post तुम जो होते तो हम भी संभल गए होते। ये हालात हैं, कुछ तो बदल गए होते॥
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,बह्र,शिल्प,व्याकरण की दृष्टि से ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,इस प्रयास पर बधाई आपको ।"
Jul 22
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 11
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,बहुत अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 8
SudhenduOjha posted a blog post

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई देह हर आहट के धोखे नेमुझको तहस-नहस कर डालासूनी वेदी पर खड़ी रही मैंलिए हाथ में वर की मालाआएगा कि नहीं? हृदय मेंउठते सौ संदेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई देह प्यास प्रेम की वो पहचानेजो रोम-रोम से प्यासा होनट-नागर से कहीं अधिकजो, राधा सा दीवाना होरक्त-शिरा में जिसकेबहता निर्मल स्नेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई…See More
Jul 7
SudhenduOjha posted a blog post

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।कदम-कदम पे सलीबों की प्यास है प्यारे॥ख़यालो-ख्वाब, तसव्वुर भी जुर्म होते हैं।चले भी आओ हर नज़ारा उदास है प्यारे॥मुझे भी पढ़ के किताबों में दफ्न कर देना।वाकिफ हैं तुम्हारी आदत खास है प्यारे॥ये तेरा ही नाम लिक्खा है हर इशारों पर।तेरी नज़र के करम की तलाश है प्यारे॥मेरे कत्ल की साजिश न कर सका पूरी।के मुझे फिर वही दिखा पास है प्यारे॥मौलिक एवं अप्रकाशित........See More
Jul 2
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Jun 25
SudhenduOjha posted a blog post

कर नेकी दरिया में डाल

है धुआँ-धक्कड़ और बवालचेहरे-चेहरे लिक्खे सवालकर नेकी दरिया में डाल बाबा खेल-खिलांवे भइय्यानाचे भक्तिन ताल-तलईय्याचोर सियार सब होशियारमूड़ी काटे भए चमारये सूअर हैं, हरामखोर हैंइनकी लें हम उतार खाल(उपरोक्त पंक्तियाँ ढोंगी बाबाओं के संदर्भ में हैं) है धुआँ-धक्कड़ और बवालचेहरे-चेहरे लिक्खे सवालकर नेकी दरिया में डाल जात अहीर, अहीरन के साथेदेश-मुल्क अब किसके माथे?बहुजन सब्बइ मुसुरमान होततुर्की, अब हिंदुस्तान होतबाभन-ठाकुर लतख़ोर-हुआ है बनिया भी बे-हाल है धुआँ-धक्कड़ और बवालचेहरे-चेहरे लिक्खे सवालकर नेकी…See More
Jun 23
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।
"कृपा कर इस ग़ज़ल के अरकान लिखने का कष्ट करें ।"
Jun 20
SudhenduOjha posted blog posts
Jun 19

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

SudhenduOjha's Blog

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

तुम न कोलाहल सुनो,

ना ही करतल ध्वनि बिको।

सत्य के आधार पर

सुंदरम बन कर टिको।।

दृष्टिहीनों के समक्ष, अति नर्तना ही व्यर्थ है।

पुष्प श्रद्धा के ना चढ़ें तो अर्चना ही व्यर्थ है।।

भाव जिसमें शुचित ना हो, सर्जना ही व्यर्थ है।।

मेनका की कामना

और उसीकी उपासना।

व्यर्थ शालिग्रामों में है

फिर सत्य को…

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Posted on September 10, 2018 at 11:00am

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।

रात का सुन-सान पल मैं, निर्वसन हूँ प्यार कर।
सिंधु तट की रेत मैं, प्रिय है मेरा उच्छृंखल लहर।।
यामिनी कह चंद्रिका से, 
मधु पात्र को वो ढाल दे।
आज श्लथ भू पर गिरूं, 
कुछ इस तरह का गात्र दे।।
चांदनी की शीतल छुवन
हो प्रेम पगता वक्ष पर
रात का सुन-सान पल मैं,…
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Posted on September 4, 2018 at 5:00pm — 1 Comment

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

यूँ ही..........

चाहता मैं नहीं था गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों शब्द लाकर रख दिये।।

**************************************

चाहता मैं नहीं था

गीत गाना कोई भी।

तुमने मेरे अधर पर क्यों

शब्द लाकर रख दिये।।

मैं मुदित था पक्षियों को

नभ में विचरता देख कर।

तुमने आकर आंख में क्यूँ

नीड़ उनके रख दिये।।

चंद्रमा हो साथ मेरे

यह कभी सोचा नहीं था।

सूर्य पथ में साथ होगा…

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Posted on September 2, 2018 at 7:30am

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

सुनो, नारी कभी नग्न नहीं होती है

और सुनो, नारी कभी नहीं रोती है

नारी कभी नग्न नहीं होती

नग्न होती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

नारी कभी नहीं रोती है-

रोती हैं ;

हमारी मातायें,

हमारी बहनें,

हमारी पत्नी,

हमारी बेटियां,

हमारी पुत्र-वधुयें,

हमारी विवशताएं

फिर…

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Posted on August 24, 2018 at 6:30pm — 9 Comments

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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