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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"(1 ) कुंडली छन्द    ----------------- (१ ) दाना लाने के लिए ,चिड़ी गई है दूर      बच्चा ऊपर मुँह किए ,बैठा है मजबूर      बैठा है मजबूर ,भूख से मुँह को खोले      सुनो लगा कर कान…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"मुहतरम जनाब गिरिराज साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
12 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"आदरणीय तस्दीक भाई , बेहतरीन गज़ल कही है , दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल करें ।"
20 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Samar kabeer's blog post 'ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत'
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है ,शेर दर शेर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Tuesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"मुहतरम जनाब रवि साहिब,बहुत ही उम्दा गज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Tuesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT's blog post लो आ गया सावन ( कविता)
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा ,सावन के रंगों को आपने अच्छा उकेरा है कविता में ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post सावन की ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/22)
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब ,सावन के कई रंग दिखाती सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"मुहतरम जनाब रवि साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी"
Monday
Ravi Shukla commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"आदरणीय तस्दीक साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल आपने कही है इसके लिए शेर दर्शन दिली मुबारकबाद पेश करते हैं आखरी शेर खास तौर से पसंद आया उसके लिए अलग से मुबारकबाद सादर"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"जनाब मोहित साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"जनाब गुरप्रीत साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Monday
Mohit mishra (mukt) commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan जी सुन्दर ग़ज़ल | बधाई कुबूल करें "
Monday
Gurpreet Singh commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने...सभी अशआर उम्दा हुए हैं"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan's blog post was featured

ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फऊलन)मेरे प्यार का शम्स ढलने से पहले | कोई आ गया दम निकलने से पहले |बहुत होगी रुसवाई यह सोच लेना रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले |तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|कहे सच हर इक आइना सोच लेना बुढ़ापे में इसको बदलने से पहले |ख़यालों में आ जाओ कटती नहीं शब मिले चैन दिल को मचलने से पहले |अज़ल से है उल्फ़त का दुश्मन ज़माना लगाए यह ठोकर संभलने से पहले |है शतरंज का खेल तस्दीक़ उल्फ़त न दिल की तू सुन चाल चलने से पहले |(मौलिक व अप्रकाशित )See More
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले ) --------------------------------------------------------
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले ) --------------------------------------------------------
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय ...सादर"
Sunday

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Male
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Ajmer
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qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

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ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फऊलन)

मेरे प्यार का शम्स ढलने से पहले |

कोई आ गया दम निकलने से पहले |

बहुत होगी रुसवाई यह सोच लेना

रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले |

तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली

कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|

कहे सच हर इक आइना सोच लेना

बुढ़ापे में इसको बदलने से पहले |

ख़यालों में आ जाओ कटती नहीं शब

मिले चैन दिल को मचलने से पहले |

अज़ल से है उल्फ़त का दुश्मन ज़माना …

Continue

Posted on July 16, 2017 at 12:30pm — 20 Comments

ग़ज़ल --ईद (ईद मुबारक बोल के फिर हम ईद मनाएंगे यारो )

ग़ज़ल --ईद (ईद मुबारक बोल के फिर हम ईद मनाएंगे यारो )

------------------------------------------------------------------------------

(बह्र हिन्दी --मुत्क़ारिब ,मुसम्मन ,मुज़ायफ )

रस्म गले मिलने की निभा कर हाथ मिलाएंगे यारो |

ईद मुबारक बोल के फिर हम ईद मनाएंगे यारो |

ख़ुद ही निकल जाएगी पुरानी सारी कड़वाहट दिल की

आज सिवैयाँ घर पे तुम्हें हम इतनी खिलाएंगे यारो |

सदक़ा और फितरे से ही यह अपनी ईद मनाते हैं

ईद के इस अहसान को मुफ़लिस कैसेभुलाएंगे यारो…

Continue

Posted on June 27, 2017 at 3:58pm — 14 Comments

ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की

ग़ज़ल

-----

(फ़ाइलातुन -मफ़ाइलुंन -फेलुंन)



आँधियाँ चल रही हैं नफ़रत की।

शमअ रोशन करो मुहब्बत की।



जिसको तदबीर पर यक़ीन नहीं

बात करता है वह ही किस्मत की।



दुश्मने जान हो गए उमरा

में ने मुफ़लिस की जब हिमायत की।



रहबरी के लिए चुना जिसको

साथ उसने मेरे सियासत की।



होश में आ जा बागबाने चमन

हो गई इब्तदा बग़ावत की।



उनके जलवों से वह नहीं वाकिफ़

बात करते हैं जो कियामत की।



वक़्त तस्दीक़ इम्तहान का… Continue

Posted on May 19, 2017 at 9:18pm — 17 Comments

ग़ज़ल----(कब वो मेरे दिल से निकला था)

ग़ज़ल

---------

(फअल-फऊलन-फेलुन-फेलुन )

सिर्फ़ वो महफ़िल से निकला था |

कब वो मेरे दिल से निकला था |

दिलबर के दीदार का मंज़र

चश्म से मुश्किल से निकला था |

रास्ता मेरी मंज़िल का भी

उनकी ही मंज़िल से निकला था |

जिसने बचाया बद नज़रों से

वो जादू तिल से निकला था |

हरफे निदा जो बना अदावत

ज़ह्ने मुक़ाबिल से निकला था |

आ ही गया वो फिर मक़्तल में

बच के जो क़ातिल से निकला था…

Continue

Posted on May 13, 2017 at 12:44pm — 16 Comments

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At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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