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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब अफ़रोज़ साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। मुहतरम समर साहिब के मश्वरे पर ध्यान जरूर दीजियेगा"
19 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। आखरी शेर में महब्बत को मुहब्बत कर लें"
20 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
20 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"आदरणीय तस्दीक़ जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दाद पेश करता हूँ ! कुबूल करें !"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब  समर कबीर  साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
" जनाब  ब्रजेश कुमार  साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब  गिरिराज साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      "
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post जिसे ख़यालों में रखता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम साहिब , उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ     "
yesterday
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..हर एक शेर लाजबाब"
Saturday
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अरुण साहिब ,छन्द पसन्द करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। उस मिसरे को यूं कर लिया है -जो प्रतियोगी उड़े हवा में ,लगते हैं वह दोनों वीर ।"
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"बहुत खूब , आदरणीय तस्दीक भाई , ग़ज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।"
Saturday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"जनाब नीलेश नूर साहिब ,उम्दा गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Saturday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"मुहतरम जनाब शकूर साहिब ,आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
Saturday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"जनाब नीलेश नूर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। ध्यान दिलाने का शुक्रिया।"
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मोहतरम तस्दीक अहमद खान साहब, बहुत बहुत बधाई आपको"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

-----------------------------------------------------

(फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन)

 

अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम |

उनके कुचे से वापस न जाएँगे हम |

 

ज़ुल्म कितने भी ढा ले सितमगार तू

ग़म के हर दौर में मुस्कराएँगे हम |

 

आपको तो अज़ीज़ों से फ़ुर्सत नहीं

किस तरह हाल दिल का सुनाएँगे हम |

 

जब भी मिलता है देता है वो ज़ख़्मे नौ

दस्त उलफत का कब तक मिलाएँगे…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 10:23pm — 14 Comments

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

-------------------------------------------------------------------



(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन )



मुन्तखिब करता है दिल जिसको भी दिलबर यारो |

हाए वो शख़्स निकलता है सितम गर यारो |

उनके चहरे से नज़र हटती नहीं है मेरी

किस तरह देखूं ज़माने के मैं मंज़र यारो |

कूचए यार से जाएँ तो भला जाएँ कहाँ

राहे उलफत में लुटा बैठे हैं हम घर यारो |

आस्तीनों में जो रखते हैं…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 6:14pm — 17 Comments

ग़ज़ल (दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल )

(फाइलातुन -फाइलातुन -फाइलातुन - फाइलुन /फाइलात )

शाम होते ही सितम ढाए सदा तेरा ख़याल |

दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल |

देखता हूँ जब भी मैं नाकाम दीवाना कोई

यक बयक आता है मुझको बे वफ़ा तेरा ख़याल |

उम्र भर कैसे निभेगा साथ मुश्किल है यही

है अलग मेरा तसव्वुर और जुदा तेरा ख़याल |

हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही

किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल |

ढोंग तू फिरक़ा परस्ती को…

Continue

Posted on August 17, 2017 at 8:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल (दिल सितमगर के नाम कर बैठे )

ग़ज़ल

(फ़ाइलातुन-मफ़ाइलुंन-फेलुंन)

ज़िन्दगी हम तमाम कर बैठे।

दिल सितमगर के नाम कर बैठे।



हो गई सिर्फ हम से यह गलती

राजे उल्फत को आम कर बैठे।



यक बयक क्या निगाह उनसे लड़ी

नींद अपनी हराम कर बैठे।



जो सियासत को लाया मज़हब में

उसका हम एहतराम कर बैठे।



जो न अब तक ज़बान कर पाई

वह निगाहों से काम कर बैठे।



वह किसी संग दिल का है कूचा

तुम जहां पर क़याम कर बैठे।



वह न तस्दीक़ आये फिर भी हम

बज़्म का इहतिमाम कर… Continue

Posted on August 4, 2017 at 8:13am — 12 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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