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Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'
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Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Page

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Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी दीपावली पर केंद्रित विधाता छंद में निबद्ध बहुत ही भावपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई...."
Friday
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"मुक्त छंद : दीपावली दीवाली के दीप ह्रदय में, चमकें बनकर शुम्बल। भस्म करे दुर्भाव, शत्रुता, मन को कर दे निर्मल। देख दीवाली मेरी जिसको भूखों की फिक्र सताए।पर काज-हित वह पहले, अपना अवदान बताए। परपीड़ा पर वो हो रखता,  मरहम नामुमकिन है। पर खुशियों से…"
Friday
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
""दुनिया ने किसको बख़्शा ये बतलाओ तो ज़रा" ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे" ।"......वाह.... आदरणीया मंजीत कौर जी , बहुत ही भाव भरी अभ्व्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय आपका विश्वास बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हूँ...."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"जनाब अफरोज सहर साहब , मशविरे के लिए बहुत बहुत शुक्रिया..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय रवि शुक्ला जी , प्रणाम!  भाव एवं शिल्प पर समय देने की जरूरत मुझे भी महसूस हो रही है...रचना के सम्बन्ध में आपकी बेबाक राय के लिए आपका ह्रदय कि गहराइयों से बहुत बहुत आभार..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय मिर्जा जावेद बैग आपका हार्दिक आभार..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय समर कबीर जी , आप गज़ल तक आकर एक पंक्ति लिख देते हैं तो गज़ल धन्य हो जाती है...उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीया राजेश कुमारी जी , प्रणाम... मुबारकबाद देने के लिए आपका हार्दिक आभार.."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
""कुछ तो बदल हो हिज्र की इन सख़्तियों का अब ।एसा हो वस्ल हिज्र का बदला कहें जिसे ।।"..............वाह....वाह.... जनाब मिर्जा जावेद बेग साहब..एक से एक बेहतरीन शेर...बहुत बहुत मुबारकबाद..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय अजय गुप्ता जी ...बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई..."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीया राजेश कुमारी जी , बहुत ही खूबसूरत मतले के साथ शुरू की गई इस बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद ...."
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय समर कबीर साहब..हमेशा की तरह आपकी इस गजल को  भी वाह...वाह..वाह... वाकई बहुत ही उम्दा .....बहुत बहुत मुबारकबाद..  "
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"हुश्नो-अदा लबालब छलका कहें जिसे. उसपे ये बेरुखी सब तौबा कहें जिसे.   आओ करें वो काम कि सेवा कहें जिसे। मिलजुल निखार दें  अब  गंगा कहें जिसे। लेके   प्रसाद का फुल डिब्बा कहें जिसे. तक्सीम को बढ़ा  सब  अन्धा कहें…"
Sep 28
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी! बहुत ही सीमित शब्दों में चित्र को अभिव्यक्ति प्रदान करते छंदबद्ध गीत के लिए हार्दिक बधाई...."
Sep 23
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी! आपकी छंद के प्रति सजगता एवं चिंता सचमुच ही स्तुत्य है अतः आपका परामर्श  स्वतः ही वरेण्य हो जाता है.... सादर..."
Sep 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur
Native Place
...
Profession
Poet
About me
A Poet.

सावण सूखो क्यूँ !

सावण सूखो क्यूँ !

इबकाळ रामजी न जाण के सूझी, क बरसण क दिनां मं च्यारूँ कान्या तावड़ की  बळबळती सिगड़ी सिलागायाँ बठ्यो है | जठे देखो बठे ई लोग-लुगावड़ियां में कि बाट देखता-देखता आकता होगा | खेतां मायलो बीज निपजणों भूलगो | तपत  तावड़ के मायनं टाबरां का पसीन स चिड़पड़ा होयोड़ा मूंडां न देखतां निगावां होठां प आयोड़ी सूखी फेफड़ी पर जाक थम ज्याव | पण कर तो के कर , सारो कुण् लगाव | सगळा एक-दूसर न  देख ले और फेरूँ आसमान कानी देखण लागज्या हैं |
एक कानी जांटी कि छाया म बठ्यो गण्डकङो जीब बारणै काड राखी है | गर्मी क मार ऊंकी  ल्हक-ल्हक डट ई कोन्या | 
रामजी सैँकी पत् राखण हाळो है, बं ई न याद करो., सगळा मिल रामजी न याद करण लागज्या है....
रामजी , गेर दे छाँट र |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र | 

तीतरपंखी बादळ आव |
बिन बरसे  पाछा जाव |
पीण न  पाणी कोनी |
तुरत तरस दिखलाव |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र |

ळियाँ काची कई  तोड़ली |
 मँहगाई है घणी खोड़ली |
पण राम-रुखाळा सबका |
तू निठुराई  कयां ओढ़ली |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र |
देखतां -देखतां छांट पड़ण लागज्या है, बो रामजी घणों दयालु है. 
(गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान')
मौलिक व अप्रकाशित

 

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Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Blog

एक रंग है खून

हिन्दू - मुस्लिम का कहें, एक रंग है खून.

हिन्दू हिन्दू में फरक, क्यों करता कानून.

सबके दो हैं हाथ, पाँव भी सबके दो हैं.

नाक सभी के एक, सूँघते जिससे वो हैं.

नयन जिसे भी मिले,जगत के दर्शन करता.

कान और मुँह से, सुनता - वर्णन करता.

सात दिन मिले सभी को, हफ्ते में एक समान.

विद्यालय में गुरु सभी को, देता ज्ञान समान.

अन्न नहीं करता देने में, ताकत कोई भेद.

मनु के पुत्र सभी मनुष्य हैं, कहते सारे वेद.

सूरज सबके लिए चमकता, सबको राह दिखाता.

श्वांस सभी पवन से…

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Posted on August 26, 2018 at 1:45am — 5 Comments

ग़ज़ल : है अँधेर नगरी चौपट का राज है.

है अँधेर नगरी चौपट का राज है.

हंसों को काला पानी, कौवों को ताज है.

 

आईन का मसौदा ऐसा बुना बुजन नें.

घोड़ों की दुर्गति खच्चर पे नाज है.

 

माज़ी के जो गुलाम हुक्काम हो गए.

शाहाना आज देखो उनके मिज़ाज है.

 

अंगुश्त-कशी का मुजरिम वो बादशाहे इश्क.

मुमताज जिसकी जिन्दा जमुना का ताज है.

 

‘हिन्दुस्तान’ कहता हरदम खरी-खरी.

लफ्जे-दलालती बस ग़ज़ल का रिवाज है.

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 7, 2018 at 3:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल : नौकरी है कहाँ बता भाई. (२१२२ १२१२ २२)

लाज माँ बाप की बचा भाई.
हो सके तो कमा के खा भाई.

सौ में नम्बर मैं सौ भी ले लूँगा.
नौकरी है कहाँ बता भाई.

खून का रंग एक है लेकिन.
राज जातों में बाँटता भाई.

नूर भी आफ़ताब से लेता.
चाँद में रोशनी कहाँ भाई.

आज 'हिन्दोस्तान' को देखो.
दीखता है खफा खफा भाई.
(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on May 18, 2018 at 4:27pm — 4 Comments

ग़ज़ल : लेके गुलाल हाथ में इक बार देखिये.

लेके गुलाल हाथ में इक बार देखिये.

मुठ्ठी में होगी आपके बहार देखिये.

 

चम्मचों से मात वो चक्की भी खा गई.

आटा भी पाता  रहा संसार देखिये.

 

अच्छे को अच्छा दिखता, दिखता बुरा बुरे को.

आईने सा है मेरा किरदार देखिये.

 

आज़ादी की कीमत आज़ाद ने चुकाई.

लाखों हैं आज इसके हक़दार देखिये.

 

पीतल भी आज देखो स्वर्ण हो गया.

खोटा-खरा बताती झनकार देखिये.

 

आसूदगी को मेरी कुछ और न समझ.

गर्के-उल्फत है…

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Posted on March 5, 2018 at 5:35pm — 3 Comments

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At 7:51pm on March 15, 2017, Sushil Sarna said…

aadrneey Gangadyar jee aapke saath mitarta, mera soubhagya hai.thanks

At 11:25am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

जनाब गंगा धर साहब आदाब, होसला अफज़ाइ का शुक्रिया

At 9:44pm on October 22, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

good night gangadhar bhai .....aap ka bahut bahut shukriya

At 5:58am on November 1, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय गंगा धर भाई जी , मेरी रचनायें आपको अच्छी लगीं जान कर बडी खुशी हुई , हौसला अफज़ाई का दिली शुक्रिया । व्यस्तताओं के कारण देर से जवाब दे पाया , क्षमा चाहता हूँ ।

 
 
 

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