For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'
Share on Facebook MySpace

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Friends

  • Aziz
  • Tasdiq Ahmed Khan
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Sushil Sarna
 

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Page

Latest Activity

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-131
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी! बहुत ही उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई.. हरेक शेर जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने में पूरी तरह से कामयाब रहा है..  सादर"
May 29, 2021
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 121 in the group चित्र से काव्य तक
"(चित्राधारित गीतिका) बैठ जाएं आज रिक्सा में चलो दोनों वहाँ। है गया स्वामी कहीं रिक्सा खड़ा ख़ाली यहाँ। लाल प्यारी सीट देखो मोहती मेरा जिया। हाथ थामे जा चढ़े, बैठे, हुआ राजी हिया।। स्वर्ग में भी क्या मिलेगी मौज ऐसी पा रहे। मुस्कुराते चेहरे सन्देश ये…"
May 22, 2021
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय समर कबीर जी! मीर तकी मीर की एक-एक गजल  आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत्त हैं...  कर नाला-कशी कब तईं औक़ात गुज़ारें फ़रियाद करें किस से कहाँ जा के पुकारें हर-दम का बिगड़ना तो कुछ अब छूटा है इन से शायद किसी नाकाम का भी काम…"
Mar 27, 2021
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय समर कबीर जी, नमन! आपके अनमोल सुझावों के लिए अंतर की गहराइयों से बहुत बहुत आभार।  प्रथमतः गिरह के मिसरे के लिए कहा गया शेर जो टाइप होने से छोटी गया था..शहीदों में हुआ शामिल कोई अपना तो ये जाना।। ख़ुशी ऐसी भी होती है अलम ऐसा भी होता…"
Mar 27, 2021
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"ग़ज़ल***** हों मक़तल ओ रिजर्वेशन बहम ऐसा भी होता है।न मानो तुम भले लेकिन सितम ऐसा भी होता है।।.दिया था बाँध शेरों को हुई जब कुश्ती भेड़ों से।विजेता हम हैं भेड़ों को भरम ऐसा भी होता है।।.चुराते हक़ परायों का दिखाते आँख ऊपर से।नहीं उनको कभी आती शरम ऐसा भी…"
Mar 26, 2021
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"अतुकांत कविता हम और हमारेकितना आसान हैमानव का बने रहनामानव।परंतुचाहतकरने कीकुछ बड़ाबना देती है दानव अक्सर ही उसे।या फिरतोड़ देती हैउसे हीकुछ भी न बन पाने की कातिल कसक।देखकरबनता दानव या फिरटूटता मानवसालता हैसवाल?कहाँ जा रहे हैंहमऔर…"
Jun 13, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय दंडपाणि नाहक जी ,आपका हार्दिक धन्यवाद..."
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय अमीरुद्दीन खान "अमीर" साहब, आपका हार्दिक धन्यवाद।"
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, आपका हार्दिक धन्यवाद।"
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , गजल पर आपकी उपस्थिति एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार।"
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"सादर अभिवादन! 'जब' को 'जो' करने से शेर की दूसरी पंक्ति से इसका सामंजस्य उचित प्रतीत न होने की वजह से 'जब' रखने का आग्रह रहा है। क्या 'जो' के साथ शेर की दूसरी पंक्ति में भी बदलाव अपेक्षित नहीं होगा?  "
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"सादर प्रणाम!  इसको सुधार कर "नाकाबिले अदा जब कर्जा चढ़ा लिया" किया जा रहा है। आपके सुधारात्मक सुझाव हित हार्दिक धन्यवाद।"
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"भूखों को लाठियों से डराना बहुत हुआ। शैतानियत की खेल दिखाना बहुत हुआ।। रूहों ने आशिकों की कहा बार बार ये। इस आशिकी में जान से जाना बहुत हुआ।। आरक्षणों का दौर जरा रोक दीजिये। बीते युगों का बैर भुनाना बहुत हुआ।। कर्जा चढ़ा लिया जब नाकाबिले-अदा। देने…"
May 23, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आदरणीय प्रतिभा पांडे जी , अपनी बात कहने में पूरी तरह से सफल , विचार करने को प्रेरित करती लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई... पुनः विशेष बधाई लघुकथा को बहुत ही अप्रत्याशित अंत प्रदान करती "और फिर अपनी अपनी कब्र के अन्दर लौट गये।" इस पंच लाइन…"
Jan 30, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आदरणीय ओमप्रकाश जी, आधुनिकता के मिथ्या अहंकार पर चोट करती अत्यंत ही मार्मिक लघुकथा ...बहुत बहुत बधाई.."
Jan 30, 2020
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"इक ओर है दुपट्टा इक ओर कहकशाँ है. किसकी कशिश बड़ी है  यह प्रश्न ही कहाँ है. हर वक्त हादसों ने जिसको दिया सहारा. उस शख्स को तलासो वह शख्स जाविदाँ है. लब  पर हँसी क़यामत ख़म जुल्फ के हैं तौबा. नज़रें कटार सी हैं मजरूह हुआ  जहां है . अब राज…"
Jan 24, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur
Native Place
...
Profession
Poet
About me
A Poet.

सावण सूखो क्यूँ !

सावण सूखो क्यूँ !

इबकाळ रामजी न जाण के सूझी, क बरसण क दिनां मं च्यारूँ कान्या तावड़ की  बळबळती सिगड़ी सिलागायाँ बठ्यो है | जठे देखो बठे ई लोग-लुगावड़ियां में कि बाट देखता-देखता आकता होगा | खेतां मायलो बीज निपजणों भूलगो | तपत  तावड़ के मायनं टाबरां का पसीन स चिड़पड़ा होयोड़ा मूंडां न देखतां निगावां होठां प आयोड़ी सूखी फेफड़ी पर जाक थम ज्याव | पण कर तो के कर , सारो कुण् लगाव | सगळा एक-दूसर न  देख ले और फेरूँ आसमान कानी देखण लागज्या हैं |
एक कानी जांटी कि छाया म बठ्यो गण्डकङो जीब बारणै काड राखी है | गर्मी क मार ऊंकी  ल्हक-ल्हक डट ई कोन्या | 
रामजी सैँकी पत् राखण हाळो है, बं ई न याद करो., सगळा मिल रामजी न याद करण लागज्या है....
रामजी , गेर दे छाँट र |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र | 

तीतरपंखी बादळ आव |
बिन बरसे  पाछा जाव |
पीण न  पाणी कोनी |
तुरत तरस दिखलाव |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र |

ळियाँ काची कई  तोड़ली |
 मँहगाई है घणी खोड़ली |
पण राम-रुखाळा सबका |
तू निठुराई  कयां ओढ़ली |
ल्हुका-छिपि क्यांले कर्र्यो , क्यांकि आंट र |
रामजी , गेर दे छाँट र |
देखतां -देखतां छांट पड़ण लागज्या है, बो रामजी घणों दयालु है. 
(गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान')
मौलिक व अप्रकाशित

 

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Videos

  • Add Videos
  • View All

Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s Blog

भारत माता करे पुकार...

मुझको भारत माँ कहते थे , करते थे मेरी जयकार।

पुलवामा में बेटे मेरे , षडयंत्रों का हुए शिकार।

विकल ह्रदय जननी हूँ मैं , पुत्रों मेरी सुनो पुकार।

विकल्प एक ही है, प्रतिशोध, सत्य यही है करो स्वीकार।

कायरता के कृत्य घिघौने , छद्मयुद्ध की माया को।

चिथड़े-चिथड़े  उड़ते  देखा, मैंने पुत्रों की काया को।

इस छद्मयुद्ध के जख्मों में , टीस  भयानक उठती है।

फ़फ़क-फ़फ़क  कर रोते-रोते  ही, रीस भयानक उठती है।

समय नहीं है अब केवल वक्तव्यों  और…

Continue

Posted on February 17, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

एक रंग है खून

हिन्दू - मुस्लिम का कहें, एक रंग है खून.

हिन्दू हिन्दू में फरक, क्यों करता कानून.

सबके दो हैं हाथ, पाँव भी सबके दो हैं.

नाक सभी के एक, सूँघते जिससे वो हैं.

नयन जिसे भी मिले,जगत के दर्शन करता.

कान और मुँह से, सुनता - वर्णन करता.

सात दिन मिले सभी को, हफ्ते में एक समान.

विद्यालय में गुरु सभी को, देता ज्ञान समान.

अन्न नहीं करता देने में, ताकत कोई भेद.

मनु के पुत्र सभी मनुष्य हैं, कहते सारे वेद.

सूरज सबके लिए चमकता, सबको राह दिखाता.

श्वांस सभी पवन से…

Continue

Posted on August 26, 2018 at 1:45am — 5 Comments

ग़ज़ल : है अँधेर नगरी चौपट का राज है.

है अँधेर नगरी चौपट का राज है.

हंसों को काला पानी, कौवों को ताज है.

 

आईन का मसौदा ऐसा बुना बुजन नें.

घोड़ों की दुर्गति खच्चर पे नाज है.

 

माज़ी के जो गुलाम हुक्काम हो गए.

शाहाना आज देखो उनके मिज़ाज है.

 

अंगुश्त-कशी का मुजरिम वो बादशाहे इश्क.

मुमताज जिसकी जिन्दा जमुना का ताज है.

 

‘हिन्दुस्तान’ कहता हरदम खरी-खरी.

लफ्जे-दलालती बस ग़ज़ल का रिवाज है.

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 7, 2018 at 3:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल : नौकरी है कहाँ बता भाई. (२१२२ १२१२ २२)

लाज माँ बाप की बचा भाई.
हो सके तो कमा के खा भाई.

सौ में नम्बर मैं सौ भी ले लूँगा.
नौकरी है कहाँ बता भाई.

खून का रंग एक है लेकिन.
राज जातों में बाँटता भाई.

नूर भी आफ़ताब से लेता.
चाँद में रोशनी कहाँ भाई.

आज 'हिन्दोस्तान' को देखो.
दीखता है खफा खफा भाई.
(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on May 18, 2018 at 4:27pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:51pm on March 15, 2017, Sushil Sarna said…

aadrneey Gangadyar jee aapke saath mitarta, mera soubhagya hai.thanks

At 11:25am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

जनाब गंगा धर साहब आदाब, होसला अफज़ाइ का शुक्रिया

At 9:44pm on October 22, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

good night gangadhar bhai .....aap ka bahut bahut shukriya

At 5:58am on November 1, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय गंगा धर भाई जी , मेरी रचनायें आपको अच्छी लगीं जान कर बडी खुशी हुई , हौसला अफज़ाई का दिली शुक्रिया । व्यस्तताओं के कारण देर से जवाब दे पाया , क्षमा चाहता हूँ ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 136

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ छत्तीसवाँ आयोजन है.…See More
8 hours ago
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , रचना सुन्दर लगी , जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
11 hours ago
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक धन्यवाद"
11 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
11 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
11 hours ago
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय दयाराम मेथानी जी , सृजन सुन्दर लगा ,जानकर  खुशी हुई।  हार्दिक आभार आपका"
11 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"हार्दिक आभार आदरणीय दयाराम मेठानी जी "
12 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आ. भाई दयारामजी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आ. रचना बहन सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आ. ऊषा जी, प्रदत्त विषय पर सुन्दर रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
14 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service