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सालिक गणवीर
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Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'मार ही दें न फिर ये लोग मुझेजाँ से प्यारे हैं सारे लोग मुझे' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है, इस मतले को यूँ कहें:- 'जाँ से प्यारे हैं सारे लोग मुझे मार…"
yesterday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"भाई दिनेश कुमार जीसादर अभिवादनअच्छी तरही ग़ज़ल कही है आपने. बधाइयाँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय अमीर साहब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद से मश्कूर हूँ. शुक्रिय: मुहतरम."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया रचना भाटिया जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिये हृदय से आभार."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"भाई दंडपाणि नाहक जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए हृदय से आभार."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"भाई सुरेंद्र नाथ सिंह जी सादय अभिवादन. ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिये ह्रदय से आभार. "
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'सादर नमस्कार बहुत उम्दा तरही ग़ज़ल कहने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, आयोजन में सहभागिता के लिये आपका धन्यवाद ।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"मुहतरमा Dimple Sharma साहिबा सादर नमस्कार अच्छी तरही ग़ज़ल कहने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"जनाब Tasdiq Ahmed Khan साहिब सादर नमस्कार अच्छी तरही ग़ज़ल कहने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"जनाब Anil Kumar Singh साहिब सादर नमस्कार उम्दा तरही ग़ज़ल कहने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"जनाब Tasdiq Ahmed Khan साहिब सादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़जाई के लिए आपका आभारी हूँ।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"प्रिय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' सादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़जाई के लिए आपका आभारी हूँ।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"प्रिय Rupam kumar 'मीत सादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़जाई के लिए आपका आभारी हूँ।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"मुहतरमा ऋचा यादव साहिबा सादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़जाई के लिए आपका आभारी हूँ।"
Friday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"उस्ताद-ए -मुहतरम समर कबीर साहिब सादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़जाई के लिए आपका आभारी हूँ।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

मार ही दें न फिर ये लोग मुझे

जाँ से प्यारे हैं सारे लोग मुझे (1)

मुझको पानी से प्यार है लेकिन

एक दिन फूँक देंगे लोग मुझे (2)

मैं उन्हें मान लूँ अगर अपना

ग़ैर समझेंगे मेरे लोग मुझे (3)

उम्र भर शह्र में रहा फिर भी

जानते ही नहीं ये लोग मुझे (4)

बाद अरसे के अपने गाँव गया

फिर भी पहचानते थे लोग मुझे (5)

उनकी बातों का क्यों बुरा मानूँ

लग रहे हैं भले से लोग मुझे…

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Posted on November 26, 2020 at 4:14pm — 1 Comment

फिर से मुझको न वो हरा जाए....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

फिर से मुझको न वो हरा जाए

इससे पहले ही कुछ किया जाए (1)

जब वो आँखों से कुछ नहीं कहता

कान में कुछ तो बुदबुदा जाए (2)

बन गया है वो मील का पत्थर

अब उसे ठीक से पढ़ा जाए (3)

यार अब बन गया अदू मेरा

अब भले को बुरा कहा जाए (4)

सीधे रस्ते पे क्या चलेगा वो

जिसका ईमान डगमगा जाए (5)

है जबाँ यार ये महब्बत की

उससे उर्दू में कुछ कहा जाए…

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Posted on November 13, 2020 at 9:30am — 7 Comments

जो किसी का नहीं अब वही है मेरा ....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212 212 212 212

आज दिल उसके दुख से दुखी है मेरा

जो किसी का नहीं अब वही है मेरा (1)

मौत मुझको बुलाती है हर पल मगर

ज़िंदगी रास्ता रोकती है मेरा  (2)

लिख न पाऊँगा मैं आज क्या हो गया

मौत से सामना आज भी है मेरा  (3)

डगमगाते हैं जब भी क़दम ये मिरे

यार मंज़िल पता पूछती है मेरा   (4)

रख दिया है मुझे आग के सामने

जानता है बदन काग़ज़ी है मेरा  (5)

रोक सकता नहीं रथ के पहिए कोई

अब…

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Posted on November 2, 2020 at 5:00pm — 9 Comments

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212  212  212  212

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा

सामना मौत से भी तभी हो मेरा  (1)

मैं चलूँ अपने बच्चों की उंँगली पकड़

फिर भले ये सफ़र आख़िरी हो मेरा  (2)

वाक़िआ होगा पहला यक़ीं मानिए

सामना मौत से जब कभी हो मेरा  (3)

अब ये मुमकिन नहीं आज के दौर में

शह्र में भी रहूँ गांँव भी हो मेरा  (4)

ख़ाक ऐसे करें नफ़रतों का जहाँ

आग तेरी रहे और घी हो मेरा  (5)

ज़िंदगी को भी आना पड़े सामने…

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Posted on October 26, 2020 at 4:00pm — 8 Comments

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