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रामबली गुप्ता
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rajesh kumari commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"बहुत बढ़िया(आधार छंद ) छंद गीतिका लिखी है आद० रामबली जी बहुत बहुत बधाई लीजिये  अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख उज्ज्वल सम चंद्रदृग-मद सर मृदु बोल ज्यों, रति ने गाया गीत----वाह्ह्हह्ह लजवाब "
Nov 21, 2018
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीतछूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत बहुत सुंदर आदरणीय रामबली गुप्ता जी ... इस भावपूर्ण गीतिका के लिए हार्दिक बधाई।"
Nov 19, 2018
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 19, 2018
रामबली गुप्ता posted a blog post

गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीतछूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीततीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेमइन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौनबिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीतसतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहारपर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीतअधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख उज्ज्वल सम चंद्रदृग-मद सर मृदु बोल ज्यों, रति ने गाया गीतउसके आने से सदा, हो चेतन तन प्राणमन के सूने साज तब, छेड़ें मृदु संगीतश्री के सम्मुख शारदे! घटा तुम्हारा मानहाय! भरत की भूमि…See More
Nov 19, 2018
रामबली गुप्ता commented on Arpana Sharma's blog post *शरद-पूर्णिमा*- कविता/ अर्पणा शर्मा, भोपाल
"आदरणीया अर्पणा जी सुंदर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें। किन्तु आपके इस प्रयास पर मात्र बधाई देकर चले जाना मुझे उचित नहीं लगता। यह आवश्यक और ओ बी ओ की परंपरा है कि गुणीजन रचना की कमी बेसी से रचनाकार को अवगत करायें। आपकी रचना में सुंदर भावों का…"
Oct 26, 2018
रामबली गुप्ता commented on rajesh kumari's blog post 'रूह का पाखी' (नवगीत राज )
"सुंदर नवगीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय बहना राजेश कुमारी जी। मुखड़े के द्वितीय पड़ में 'रूह का पाखी' में लय बनाने के लिए मात्रापतन लिया गया है। शायद नवगीत में मात्रापतन की छूट होती है। मकड़िया और दुकड़िया में तुकांतता ठीक तो है न?"
Oct 26, 2018
रामबली गुप्ता commented on Sushil Sarna's blog post मानव छंद में प्रयास :
"आदरणीय सुशील भाई जी। सुंदर छंद हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकारें। तृतीय छंद में कुछ गुंजाईश है। प्रवाह बाधित हो रहा है। रैन को रैना और संग को सँग कर लीजिए। इसी प्रकार 'तृषा से तृप्ति हारी है' के स्थान पर 'तृप्ति तृषा से हारी है' कर…"
Oct 26, 2018
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। बढ़िया भक्ति भाव से भरी छंद रचना की आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Oct 16, 2018
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी आप तो इस विधा के माहिर हैं आपकी काबिलियत को नमन"
Oct 16, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सुंदर छंद हुये हैं । हार्दिक बधाई ।"
Oct 16, 2018
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अच्छी छन्द रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 15, 2018
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब बृजेश जी,इतनी छोटी टिप्पणी देना ओबीओ की परिपाटी नहीं है,कृपया इस ओर ध्यान दें ।"
Oct 15, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत ही उत्तम रचना आदरणीय..."
Oct 14, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 14, 2018
रामबली गुप्ता posted a blog post

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।रचनाकार-रामबली गुप्तामौलिक एवं अप्रकाशितसूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22See More
Oct 14, 2018
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"हृदय से धन्यवाद भाई सुरेन्द्रनाथ जी"
Oct 13, 2018

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गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीत

छूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत



तीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेम

इन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।



द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौन

बिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीत



सतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहार

पर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीत



अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख…

Continue

Posted on November 19, 2018 at 1:21pm — 3 Comments

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।
व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।
कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।
आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

सूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22

Posted on October 13, 2018 at 9:48pm — 6 Comments

छप्पय छंद-रामबली गुप्ता

ज्योतिपुंज जगदीश! रहो नित ध्यान हमारे।
कलुष-द्वेष-दुर्भाव, हृदय-तम हर लो सारे।।
सत्य-स्नेह-सद्भाव, समर्पण का प्रभु! वर दो।
जला ज्ञान का दीप, प्रभा-शुचि हिय में भर दो।
दो बल-पौरुष-सद्बुद्धि हरि! मार्ग चुनेें सद्कर्म का।
हर जनजीवन के त्रास हम, फहरायें ध्वज धर्म का।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

रचनाकार-रामबली गुप्ता

शिल्प-प्रथम चार पद रोला छंद और अंतिम दो पद उल्लाला छंद के संयोग से छप्पय छंद की निष्पत्ति होती है।

Posted on October 9, 2018 at 11:30pm — 11 Comments

पिया का पत्र-रामबली गुप्ता

आज खुशी से झूमूँ सखि री पत्र पिया का आया है

भाव भरे अक्षर-अक्षर ने तन-मन को हर्षाया है



लिखते, प्रिये! तुम्हीं से सब कुछ, सुख-दुख की सहभागी तुम

सतरंगी स्वप्नों सा सुंदर जीवन तुमसे पाया है



रहता था निर्वासित सा मन जीवन के निर्जन वन में

पावन प्यार भरा गृह इसको तुमने ही लौटाया है



कहते- पीर भरा यह जीवन जो तपते मरुथल सा था

होकर सिंचित स्नेह से' तेरे हरा भरा हो…

Continue

Posted on October 1, 2018 at 9:21am — 10 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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