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Usha
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Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"Pratibha ma'am .. apka bahut bahut dhanyawad."
Wednesday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"aadarniya sushri Rajesh Kumari ma'am.. dhanyawaad. aapki nazma ka T-series mei launch hona ek badi uplabdhi hai. apko bahut bahut badhi."
Wednesday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"Aadarniya Sushil Ji.. aapki shubhkaamnayo ke liye v apka maa sharde ki mujh pr kripa bnaye rakhne ke liye sadar dhanyawaad. "
Wednesday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"Aadarniya Vijai Shanker Sir... aapka ek bar punah dil se dhanyawad sath hi ashwasan deti hu ki agli pustak pr jaldi hi kaam shuru kr dungi. Aaapka bahut bahut aabhar.  "
Wednesday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"Pratibha ma'am .. apka bahut bahut dhanyawad."
Wednesday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय ओबीओ साथियो, मेरे लिए यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि मैं आप सभी आदरणीयों के साथ अपनी इस ख़ुशी को साझा कर पा रही हूँ कि मेरी तीसरी पुस्तक जो कि मेरी पहली कथा साहित्य है प्रकाशित होकर पुस्तक भण्डार व ऐमज़ॉन लिंक…"
Monday
Usha replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय ओबीओ साथियो, मेरे लिए यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि मैं आप सभी आदरणीयों के साथ अपनी इस ख़ुशी को साझा कर पा रही हूँ कि मेरी तीसरी पुस्तक जो कि मेरी पहली कथा साहित्य है प्रकाशित होकर पुस्तक भण्डार व ऐमज़ॉन लिंक…"
Monday
Usha commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर सर। आज संवेदनाओं का एहसास मात्र स्वयं के लिए सिमट कर रह गया है । इंसानियत शुष्क होते जा रही है। वर्तमान स्तिथि का सजीव चित्रण प्रस्तुत करने के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Jun 25, 2018
Usha commented on babitagupta's blog post भविष्य के जनक [कविता]
"आदरणीय सुश्री बबीता जी,भविष्य के जनक, कविता में आज के पढ़े-लिखे वर्ग की संकीर्ण व् स्वार्थ से परिपूर्ण मानसिकता का सुन्दर चित्रण देखने को मिलता है। इस वर्ग का दायित्वहै स्वयं व् अन्य सभी का उत्थान करना परन्तु यह अत्यधिक दुखद है कि ऐसी सकारात्मक सोच…"
Jun 4, 2018
Usha commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"आदरणीय सुश्री नीलम जी ,मेरे इस छोटे से लेख पर प्रोत्साहन भरी टिप्पणी के लिये आपका बहुत आभार। बेशक़ हैरान होती हूँ कि आज भी इस तरह की प्रताड़नायें समाज में कम होने का नाम ही नहीं ले रही। आपने मेरे इस भाव को सराहा, उसके लिए आपको हृदय से धन्यवाद ज्ञापित…"
Jun 4, 2018
Neelam Upadhyaya commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"महिलाओं के साथ अक्सर ससुराल में दुर्व्यवहार होता है और उनके साथ ही दुर्घटनाएँ घटती हैं । कभी ससुराल की महिलाओं के साथ इस तरह दुर्घटना नहीं होती । सामाजिक कुरीतियों पर बहुत ही करारा व्यंग्य है लघु कथा में । आदरणीया उषा जी, बेहतर रचना के लिए हार्दिक…"
Jun 4, 2018
Usha commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आपके सुझाव मेरे लेखन को और सुदृण करने के लिए अति महत्वपूर्ण हैं। जी बिल्कुल, आय सी यू की बात की पुनरावृत्ति हो गयी है। तथा क्या हुआ उस भाव को और सशक्त किया जा सकता था। आप सभी के सुझावों व् अनुभवों से आशान्वित हूँ की भविष्य…"
Jun 2, 2018
Mahendra Kumar commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"आपकी लघुकथा पर आदरणीय विजय शंकर जी की समीक्षात्मक टिप्पणी के बाद बहुत कुछ कहना शेष नहीं रह जाता. आपकी लघुकथा अच्छी है और पाठक को अन्त तक बांधे रखती है. आपने ससुराल में महिलाओं के साथ होने वाली दुर्घटनाओं को उठाकर आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पर अच्छा…"
Jun 2, 2018
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"अचानक गंभीर बीमारी , अस्पताल और अस्पतालों में आवश्यक गम्भीरताओं के प्रति अभाव पूर्ण व्यवहार कुछ सामान्य से होते जा रहे हैं। आदमी चिकित्सालयों से उलझे या अपने ही परिवार और रिश्तेदारों से ? सबकुछ असंतुलित सा होता जा रहा है। बात आई सी यू की हो या ओ पी…"
Jun 2, 2018
Usha commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"आदरणीय विजय शंकर सर,मेरी कहानी में जो दूसरा पहलू था वह भी ज़ाहिर हो पाया और आपने सराहा, उसके लिए में आपका सादर धन्यवाद करती हूँ। आपकी बधाई भविष्य में और अच्छी प्रस्तुति देने के लिए प्रेरणास्पद है। सादर।"
Jun 2, 2018
babitagupta commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"मानसिक प्रताड़ना की शिकार श्रीलता की सहनशीलता का परिणाम मौत ही निकला.भावपूर्ण,सम्वेदनात्मक रचना ,प्रस्तुत रचना पर बधाई स्वीकार कीजिएगा.आदरणीया ऊशादी."
Jun 2, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
Meerut
Native Place
Firozabad
Profession
Assistant Professor -English

Usha's Blog

आख़िर कब तक?

श्री लता को अचानक ऑय सी यू में भर्ती कराने की ख़बर सुन रानी अपने दफ़्तर से निकल, आनन् फ़ानन में कुछ इस तरह गाड़ी चलाते हुए अस्पताल की तरफ लपकी, जैसे वो अपनी बहन को आखिरी बार देखने जा रही हो। श्री लता कमरा नंबर १० जो की ऑय सी यू वार्ड था में भर्ती थी। दर और घबराहट के साथ रीना रिसेप्शन पर पहुंची और पहुँचते ही उसने डॉक्टर की सुध ली।

मैडम, डॉक्टर साहेब तो जा चुके हैं, आप कल आइएगा। 

ये सुनना था कि रानी का कलेजा मुँह को आ गया। मेरी बहन अभी कुछ समय पहले ही ऑय सी यू में भर्ती हुई है, श्री…

Continue

Posted on June 1, 2018 at 9:34am — 8 Comments

शिकवा - डॉ उषा साहनी

कितनी बंदिशें ज़िन्दगी में,
कितनी रुकावटें,
दिल नाशाद
दिमाग में रंजिशें।
बेपरवाह होके जीना,
इक गुनाह
घुट घुट के जीना,
इक सज़ा
न यह सही है न यह ग़लत
तिसपर भी ज़िन्दगी के हैं उसूल
औ नियम ,...... अनगिनत।
चाहा तो बहुत था
सब रहे सलामत
पर कब, कैसे बिगड़ गया,
याद भी नहीं रह गया
अब ये आलम है कि..... क्या है ,
क्या नहीं ,
पड़ता कहीं कोई फ़र्क़ नहीं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 25, 2016 at 5:01pm — 10 Comments

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