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DR ARUN KUMAR SHASTRI
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  • योगराज प्रभाकर
 

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DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है // दीद का अचरज उफनता इसके पहले //  शिष्टता ने रोक मुझको लिया है  // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त "
13 hours ago
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted blog posts
Thursday
Chetan Prakash and DR ARUN KUMAR SHASTRI are now friends
Dec 10, 2020
Samar kabeer commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post सिकुडते हुये सद्भाव
"जनाब डॉ. अरुण कुमार शास्त्री जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 24, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Chetan Prakash
"भाई चेतन जी नमन - इस्लाह का सलीका आ जायेगा मैंने आज तलक मुकम्मल तो कोई देखा नहीं गलतियां निकालोगे- तो सीखूंगा ही ।। मैं तो अधूरा था अधूरा रहा और हूँ अब तलकआज आया हूँ आपकी बज्म में कुछ सिखा दोगे - तो सीखूंगा भी ।।"
Nov 22, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं"
Nov 22, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post मौसम त्योहार का ओर तुम
"आदरणीय चेतन जी ने बिलकुल सही सलाह दी है...अच्छा पढ़ेंगे सुधार अपने आप आ जायेगा।"
Nov 22, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

सिकुडते हुये सद्भाव

छंदमुक्त काव्य  जिंदगी से जिंदगी लड़ने लगी है आदमी को आदमी की शक्ल अब क्यूँ इस तरह अखरने लगी है //आँख में आँख का तिनका चुभेगा बात ये जिसने कही सही ही कही है //आँख में अब तरक्कीयां चुभेंगीं तुम्हारी ये बात अब मुझको बेजा लगने  लगी है //तेरी मेरी इस जात में फ़र्क़ क्या है इंसानियत इंसानियत से ये कहने लगी है // तू है गोरा मैं क्यूँ काला मैं हुँ सूंदर तू है भद्दा क़ाबलियत का पुलंन्दा या नाकारा //छोटी छोटी बात पर आज तलवार क्यूँ अब हर जगह हर किसी में  तनने लगी है //जिसको देखो आजकल  है वही डूबा हुआ नफरत…See More
Nov 20, 2020
Chetan Prakash commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post मौसम त्योहार का ओर तुम
"   भाई, डाॅ अरण कुमार शास्त्री, आपकी कविता अथवा काव्य- लेखन इस्लाह से नही, मुक्त छंद अथवा अतुकांत कविता के अच्छे काव्य के अध्ययन से सुधर सकता है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी मे टी. एस एलिएट, हिन्दवी ( हिन्दुस्तानी, उर्दू ) में कैफी आज़मी, साहिर…"
Nov 20, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for JOSE J VETTIYIL
"happy birthday dear jose !  may god keep u healthy and happy thru life pls accept my friendship thanks "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Dr chetan
"happy birthday dear dr chetan may god keep u healthy and happy thru life "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Deepa singh
"mujhe abhi ptaa chalaa aaj aapka happy birthday hai / all the very best and god bless pls enjoy full celebrations as per opportunity for the day permits pls take good care and accept my obo member frend req if possible "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Atul Chandra Awsathi *अतुल*
"dear atul seen and learnt that its your birth day today , pls accept my best of best happy birthday wish on this very important day god bless u with best happiness for life "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Arun kumar Sharma
"dear co earth habitant , seen and learnt that its ur birthday today // i wish to convey my best regards and choicest blessings of the god all the best "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post मौसम त्योहार का ओर तुम
"परम आदरणीय समर साहेब आभार , आ . चेतन जी की प्रतिक्रिया को आपने सहमती  दी , धन्यवाद , लेकिन संशोधन व सुधार करने का रास्ता तो आपसे ही सीख सकूंगा न // हे अग्रज ! आशा है तत्सम - असीस मिलेगा ! ओइम ओइम !!   "
Nov 19, 2020
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post मौसम त्योहार का ओर तुम
"आ ० चेतन जी सादर प्रणाम , आपकी प्रतिक्रिया हेतू आभार - कृपया इसमें सुधार व संशोधन का उपाय भी देते तो ? मै तो एक अपरिपक्क्व लेखक हूँ , आपके वचनो से राहत मिली //  "
Nov 19, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI NCR
Native Place
DELHI
Profession
EMINENT CONSULTANT
About me
LOVE THY GOD AND HUMANITY VASUDHAIV KUTUMBKAM

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आणविक अनुप्रस्थान

आणविक अनुप्रस्थान लघु कथा



वेदना से संवेदना हो तो मानवीय प्रकल्प उपजता है ऐसा मेरा सोचना था , तुम क्या सोचती हो इसी विषय में मैं अनभिज्ञ था , फिर एक दिन तुम बिना बताये कहीं चली गई। आभास था जाओगी और वो आभास प्रकटतः घटित भी हुआ। मुझे लेकिन इस अजन्मे विरह का अभ्यास किंचित न था सो मैं खिन्नता से खिसियानी बिल्ली अर्थात बिल्ले सा भ्रमित मन से एकांत में उतर गया। अब तक अपने…

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Posted on January 12, 2021 at 3:29am

अबोधिता

छंद मुक्त रचना  

तिथि १२ जनवरी 21 समय 2.3 6 सुबह 

डॉ अरुण कुमार शास्त्री / एक अबोध बालक //  अरुण अतृप्त

 

मिला है वक्त जो भी इस ज़हान में …

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Posted on January 12, 2021 at 2:41am

सिकुडते हुये सद्भाव

छंदमुक्त काव्य 

 

जिंदगी से जिंदगी लड़ने लगी है

आदमी को आदमी की शक्ल

अब क्यूँ इस तरह अखरने लगी है //

आँख में आँख का तिनका…

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Posted on November 19, 2020 at 1:00pm — 1 Comment

मौसम त्योहार का ओर तुम

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मुझ से तो तुम बस सहयोग ही करो 

मानव जनम मिला है तत्सम आचरण करो  

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

प्रेरणा न बन सको तो कोई फरक नही

लेकिन किसी सन्मार्ग में कंटक तो न बनो

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मै आज हूँ बस आज और अभी

गुजरे हुये पलो  से मेरी तुलना तो न करो 

भविष्य से मेरा कोई सम्बन्ध है कहा 

वर्तमान को ही मैंने जीवन कहा 

हठ धर्मिता तुम्हारी तुम ही धरो 

मुझ से तो तुम बस सहयोग…

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Posted on November 14, 2020 at 6:00pm — 6 Comments

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At 12:39pm on September 12, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

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http://www.openbooksonline.com/forum/topics/119-1?xg_source=activity&xg_raw_resources=1

 
 
 

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"आ. रचना बहन सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। मेरे हिसाब से मिसरा यह करें तो अधिक…"
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् सुधारने की कोशिश की है। देखें क्या सहीह है ? एक आवाज़ कानों…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
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21 hours ago

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