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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"अली जनाब तस्दीक साहब, आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया, मशविरे के लिए शुक्रिया, सिर्फ टाइपिंग की गलती है..और कुछ नहीं, उमीद लिखा ही गया था आटो करेक्शन की वज़ह से..उम्मीद ले लिया,(तवक़्क़ो भी ) अच्छा लफ्ज़ है,"
8 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"शुक्रिया जनाब आरिफ साहब."
9 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब, ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त और मशविरे के लिए शुक्रिया, जनाब 'में' टाइप नहीं हुआ है, उम्मीद को उमीद ही पढ़ें ,"
9 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर 5और6 का सानी मिसरा बह्र में नहीं आ रहा है ,मुनासिब समझें तो यूँ कर सकते हैं । (हम इसी तवक़्क़ो पर इनतजार करते हैं ),(आशिक़ों में वो हमको कब शुमार करते हैं )"
13 hours ago
Mohammed Arif commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों का संज्ञान लें ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार करते हैं' इस मिसरे में लय बाधित हो रही है,'उम्मीद' को "उमीद"कर लें । 'दोस्तों वो हमको कब शुमार करते हैं' ये मिसरा…"
18 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212  1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैंतुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं   जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं ख़ुश रहे  हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो  ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैंउँगलियाँ  उठाते हैं लोग दोस्तों पर भीहम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैंवादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगाइस उम्मीद पर अब भी इंतज़ार करते हैंहम तो जान दे देते उनके इक इशारे परदोस्तों वो हमको कब शुमार  करते हैंफूल सा खिला चेहरा आँख वो गज़ालों सीआके ख़्वाब…See More
21 hours ago
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत सुंदर  ग़ज़ल भ्रमर ५"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब आरिफ साहब, ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया महब्बत सलामत रहे."
yesterday
Mohammed Arif commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र लाजवाब । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब आरिफ साहब, ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया महब्बत सलामत रहे."
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- अभी तक शख्स वो जिन्दा है साहब
"वाह वाह.. हर शेर ख़ूबसूरत.. जनाब राम अवध साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"आ. काली प्रसाद जी, बहुत ही ख़ूबसूरत हिंदी उर्दू की मेल से बनी इस ग़ज़ल के लिए बधाई, कुछ मिसरे बहर में नहीं है पर कुछ लफ़्ज़ों को इधर उधर करने से हो जाएगा.. देखिएगा"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"वाह... जनाब सुशील सरना साहिब ,बहुत ही आकर्षक और सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"आ. सुरेंद्र नाथ जी, ग़ज़ल पसंद करने के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ."
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"जनाबे मुहतरम समर साहिब, ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया, आपकी महब्बत के बिना ग़ज़ल अधूरी होती.. अपना प्यार नाचीज़ पर बनाए रखें..."
yesterday

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तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212  1222

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं

रात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं



तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं   

जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं 



ख़ुश रहे  हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो  

ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं



उँगलियाँ  उठाते हैं लोग दोस्तों पर भी

हम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं



वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगा

इस उम्मीद पर अब भी इंतज़ार करते हैं



हम तो जान दे देते… Continue

Posted on November 22, 2017 at 8:30am — 6 Comments

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा

212 212 212 212

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे

बिन तेरे आह भर-भर के मर जाएँगे

 -

चाँद भी देख कर उनको शरमाएगा 

मेरे महबूब जिस दम संवर…

Continue

Posted on November 20, 2017 at 10:00am — 13 Comments

चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा

2122 2122 2122 212

चांद  का टुकड़ा है या कोई  परी या हूर है 

उसके चहरे पे चमकता हर घड़ी इक नूर है

-

हुस्न पर तो नाज़ उसको ख़ूब था पहले से ही …

Continue

Posted on November 17, 2017 at 10:30am — 13 Comments

सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा



212 212 212 212, 212 212 212 212

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जब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी /

लब तुम्हारी महब्बत में खो…

Continue

Posted on November 15, 2017 at 9:00am — 21 Comments

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"आद0 पंकजोम " प्रेम "जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रशंसा बहुत बहुत आभार।"
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"बहुत बहुत आभार सर"
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Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
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Mohammed Arif commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
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