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SALIM RAZA REWA
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Kalipad Prasad Mandal commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ सलिन रज़ा जी  | ग़ज़ल बहुत उम्दा बनी  है , मुबारक बाद कुबूल करें |"
6 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"भाई नीलेश जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
yesterday
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, आपकी बात ठीक है लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए की मिस्ररा भी ठीक हो और शेरियत भी बनी रहे. सादर   "
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ. तिवारी जी, आपकी मशविरे के लिए शुक्रिया लेकिन, मिसरा सीधा करने के चक्कर में शेरियत, मर जाए तो शेर कहने का फायदा क्या.. बहरहाल कुछ और सोचेंगे.."
yesterday
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, तीसरे शेर को निकाल देने से ग़ज़ल बेहतर हो गयी है. दूसरे शेर में 'तो' कम होने से मेरी मुराद ये थी कि दोनों मिसरों को जोड़ने वाला संयोजक इनमे नहीं है. दोनों मिसरों को अगर सरल वाक्य के रूप में लिखें तो यह बात स्पष्ट हो जायेगी…"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Mohammed Arif's blog post कटाक्षिकाएँ
"अति सुंदर मुबारक़बाद क़ुबूल करें."
Monday
SALIM RAZA REWA commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)
"भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई."
Monday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत बहुत शुक्रिया"
Monday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"अच्छा है ।"
Monday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब आपकी शुक्रिया नवाज़िश करम.. एक अभी शेर हुआ है अगर किसी लायक़ हो... मेरे घर में ख़ुशी नहीं आती तू अगर हम-नवा नहीं होता"
Monday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,'मोमिन' की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।कि"
Monday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा

 2122 1212 22 तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता दिल ये तुझपे फ़िदा नहीं होता    - इश्क़ तुमसे किया नहीं होता  ज़िन्दगी में मज़ा नहीं होता - ज़िन्दगी तो  संवर गयी  होती  ग़र वो मुझसे जुदा नहीं होता - उसकी चाहत ने कर दिया पागल  प्यार  इतना  किया  नहीं  होता  - सबको दुनिया बुरा बनाती है कोई इंसाँ बुरा नही होता - चोट खाएँ भी मुस्कुराएँ भी अब रज़ा हौसला नहीं होता. _____________________ मौलिक व अप्रकाशितSee More
Monday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है -SALIM RAZA REWA
"भाई बृजेश जी बहुत बहुत शुक्रिया,"
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SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है -SALIM RAZA REWA
"धन्यवाद सुरेंद्र सिंह जी"
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SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी, आपकी की बधाई के लिए शुक्रिया"
Monday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"भाई नीलेश जी आपकी मुहब्बत और टंकण गलती अवगत कराने के लिए बहुत शुक्रिया,"
Monday

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तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा

 2122 1212 22 

तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता

दिल ये तुझपे फ़िदा नहीं होता   

-

इश्क़ तुमसे किया नहीं होता 

ज़िन्दगी में मज़ा नहीं होता

-

ज़िन्दगी तो  संवर गयी  होती 

ग़र वो मुझसे जुदा नहीं होता

-

उसकी चाहत ने कर दिया पागल 

प्यार  इतना  किया  नहीं  होता 

-

सबको दुनिया बुरा बनाती है

कोई इंसाँ बुरा नही होता

-

चोट खाएँ भी मुस्कुराएँ भी

अब रज़ा हौसला नहीं होता. …

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Posted on January 13, 2018 at 10:30pm — 16 Comments

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है -SALIM RAZA REWA

 221 2122 221 2122

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है

जो यक-ब-यक ही मुझसे तू हो गया ख़फ़ा है

-

कुछ भी नहीं है शिकवा कुछ भी नहीं शिकायत

क़िस्मत में जो है मेरे  वो मुझको मिल रहा है

-

आंखों में नींद रुख़ पर गेसू बिखर रहे हैं

हिज्र-ए-सनम में शायद वो जागता रहा है

-

शाख़-ए-शजर हैं सूखी मुरझा गई हैं कलियाँ

गुलशन हुआ है वीरां कैसा ग़ज़ब हुआ है

-

इक पल में रूठ जाना इक पल में मान जाना 

उसकी इसी अदा ने दीवाना कर दिया है…

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Posted on January 10, 2018 at 11:30pm — 11 Comments

जो अपने माँ-बाप के - सलीम रज़ा

22 22 22 22 22 2

जो अपने माँ-बाप के दिल को दुखाएगा

चैन-ओ- सुकूँ वो जीवन भर ना पाएगा

-

हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगा

अहसानों के तले  अगर दब जाएगा

-

उस दिन दुनिया ख़ुशिओं से भर जाएगी

जिस दिन प्रीतम लौट के घर को आएगा

-

भूँखा -प्यासा जब देखेगी बेटों को

माँ का दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा

-

उसकी मुरादें सब पूरी हो जाएंगी

दर पे उसके जो दामन फैलाएगा

-

मेरी…

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Posted on January 7, 2018 at 6:00pm — 12 Comments

वज़्म ये सजी कैसी कैसा ये उजाला है - सलीम रज़ा

212 1222 212 1222

बज़्म ये सजी कैसी कैसा ये उजाला है

महकी सी फ़ज़ाएँ हैं कौन आने वाला है

-

चाँद जैसे चेहरे पे तिल जो काला काला है

मेरे घर के आँगन में सुरमई उजाला है

-

इतनी सी गुज़ारिश है नींद अब तू जल्दी आ 

आज मेरे सपने में यार आने वाला है

-

जागना वो रातों को भूक प्यास दुख सहना

माँ ने अपने बच्चों को मुश्किलों से पाला है

-

उसके दस्त-ए-क़ुदरत में ही निज़ाम-ए-दुनिया है

इस जहान-ए-फ़ानी को जो बनाने वाला है

-…

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Posted on January 4, 2018 at 5:30pm — 29 Comments

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