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सुचिसंदीप अग्रवालl
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सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"वाह बहुत खूब। बधाई स्वीकार करें भाई आशिफ जी"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय भाई समर कबीर जी आपका प्रोत्साहन पाकर लेखन सार्थक हुआ। दिल से आभार भाई आपका।"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"हार्दिक आभार भाई सत्यनारायण जी। प्रतिक्रया पाकर आह्लादित हुई।"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आपकी टिप्पणी से लेखन सार्थक हुआ भाई सुरेंद्र जी। दिल से आभार"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"बहन नीलम जी दिल से आभार आपका"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"उत्साहवर्धल टिप्पणी हेतु दिल से आभारी हूँ भाई योगराज जी"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आपका आशीर्वाद है भैया।"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"भाई छोटेलाल जी अतिशय आभार आपका"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"दिल से आभार भाई"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"प्रोत्साहन हेतु दिल से आभार आदरणीय प्रतिभा बहन।"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आदरणीय भाई समर कबीर जी आपके दिल से निकले भावों से बनी गजल के लिए दिल से बधाई।"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
""ये बेटियाँ"विधा-लावणी छन्द घर की रौनक होती बेटी, है उमंग अनुराग यही।बेटी होती जान पिता की, है माँ का अभिमान यही।। जब हँसती खुश होकर बेटी, आँगन महक उठे सारा।मन मृदङ्ग सा बज उठता है, रस की बहती है धारा।। त्योंहारों की चमक बेटियाँ, जीवन का…"
Feb 11
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"उम्दा, बेहतरीन गजल हेतु दिल से बधाई आ राजेश कुमारी जी"
Jan 26
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ बासुदेव भैया, काबिले तारीफ गजल हुई है। बहुत बहुत बधाई"
Jan 26
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ भाई समर कबीर जी बहुत ही उम्दा गजल हेतु बहुत बधाई"
Jan 26
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ महेंद्र कुमार जी बेहतरीन गजल हेतु बधाई"
Jan 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Tinsukia (Assam)
Native Place
Tinsukia
Profession
House wife
About me
नाम - सुचिता अग्रवाल, "सुचिसंदीप" जन्म स्थान - 26.11.1969 सुजानगढ़,राजस्थान सम्प्रति- 'अनुराग हाउस', चालिहा नगर, सेक्टर 3, बाई लेन 3, अथवा 'अनुराग' जी एन बी रोड पो.ओ. तिनसुकिया (असम) 786125 लेखन विधा- कविता, गीत प्रकाशित कृति- "दर्पण"(काव्य संग्रह) सदस्य- नारायणी साहित्य अकादमी तिनसुकिया के सचिव पद पर कार्यरत। email: suchisandeep2010@gmail.com

सुचिसंदीप अग्रवालl's Blog

हास्य कुंडलिया

(1)

सारे घर के लोग हम, निकले घर से आज

टाटा गाड़ी साथ ले, निपटा कर सब काज।

निपटा कर सब काज, मौज मस्ती थी छाई

तभी हुआ व्यवधान, एक ट्रक थी टकराई।

ट्रक पे लिखा पढ़ हाय, दिखे दिन में ही तारे

'मिलेंगे कल फिर बाय', हो गए घायल सारे।।

(2)

खोया खोया चाँद था, सुखद मिलन की रात

शीतल मन्द बयार थी, रिमझिम सी बरसात।

रिमझिम सी बरसात, प्रेम की अगन लगाये

जोड़ा बैठा साथ, बात की आस लगाये।

गूंगा वर सकुचाय, गोद में उसकी सोया

बहरी दुल्हन पाय, चैन जीवन का…

Continue

Posted on January 17, 2019 at 4:23pm — 9 Comments

इज्जत

*इज्जत*

(ताटंक छन्द)

इज्जत देना जब सीखोगे, इज्जत खुद भी पाओगे,

नेक राह पर चलकर देखो, कितना सबको भाओगे।

शब्द बाँधते हर रिश्ते को, शब्द तोड़ते नातों को।

मधुर भाव जो मन में पनपे, बहरा समझे बातों को।

तनय सुता वनिता माता सब,भूखे प्रेम के होते हैं,

कड़वाहट से व्यथित होय ये, आँसू पीकर सोते हैं।

इज्जत की रोटी जो खाते, सीना ताने जीते हैं,

नींद चैन की उनको आती, अमृत सम जल पीते हैं।

नारी का गहना है इज्जत, भावों…

Continue

Posted on January 10, 2019 at 4:48pm — 3 Comments

गजल

2122 2122 2122 212

प्यार का तुमने दिया मुझको सिला कुछ भी नहीं,

मिट गये हम तुझको लेकिन इत्तिला कुछ भी नहीं।

कोख में ही मारकर मासूम को बेफ़िक्र हैं,

फिर भी अपने ज़ुर्म का जिनको गिला कुछ भी नहीं।



राह जो खुद हैं बनाते मंजिलों की चाह में ,

मायने उनके लिए फिर काफिला कुछ भी नहीं।

हौंसले रख जो जिये पाये सभी कुछ वे यहाँ,

बुज़दिलों को मात से ज्यादा मिला कुछ भी नहीं।

ज़िंदगी चाहें तो बेहतर हम बना सकते यहाँ,

ज़ीस्त में…

Continue

Posted on January 7, 2019 at 8:02pm — 13 Comments

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At 5:34pm on November 22, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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