For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pradeep Devisharan Bhatt
  • मुंबई
  • India
Share

Pradeep Devisharan Bhatt's Friends

  • Sheikh Shahzad Usmani
 

Pradeep Devisharan Bhatt's Page

Latest Activity

Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post मैं एक स्त्री भी हूँ
"शुक्रिया समर जी एवम अन्य सुधीजनो का "
Mar 14
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post मैं एक स्त्री भी हूँ
"जनाब प्रदीप भट्ट जी आदाब,महिला दिवस पर अच्छी रचना पेश की आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 12
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

मैं एक स्त्री भी हूँ

"अंतर्रष्ट्रिय  महिला दिवस पर विशेष"सिर्फ माँ बहन पत्नी बेटी की,परिभषा में मत उल्झओ ।सबसे पहले मैं एक स्त्री हूँ,मुझे मेरा सम्मन दिलवाओ।। सिर्फ वंश बढाने के लिए ही,मेरा जन्म हुआ है क्या बतलाओ ।दो दायित्व हैं मेरे कांधौ पर,मैं  डिगूँ तो हौसला बढाओ।। सिर्फ दो वक्त की रोटी ही नही,कुछ और भी चाहिए परिवार से ।घडी दो घडी पास आकर बैठो,और थोडा ढाँढ्स भी बढाओ।। सिर्फ बातोँ से मत बहलाओ,  कुछ अलहदा करके दिखलाओ ।रोक टोक सिर्फ बेटियोँ पे नहीं,कभी बेटोँ को भी धमकाओ।। सिर्फ महिला दिवस पर पुष्प गुच्छ,और दिन भी…See More
Mar 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post अपबे वतन में बेघर
"आ. प्रदीप जी, अच्छी रचना हुयी है ।हार्दिक बधाई ।"
Feb 21
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post अपबे वतन में बेघर
"जनाब प्रदीप भट्ट जी आदाब,अच्छे भाव के लिए बधाई ।"
Feb 20
Pradeep Devisharan Bhatt shared Tasdiq Ahmed Khan's blog post on Facebook
Feb 20
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

अपबे वतन में बेघर

अपने वतन में बेघर का दर्द क्या जानो जिन्होने लूटा है खसूटा उनको पहचानो मेहनत मज़दूरी की तो जी गये बच्चे संस्कार मिले थे बुजुर्गो से हमें भी अच्छे लुट गये लेकिन हथियार उठाया ना कभी वतन पे जान देने का है इरादा अब भी सिर्फ अफसोस जताने से कुछ नहीं होगा कश्मीर में फिर से बसा दो तो अच्छा होगामौलिक एव्म अप्रकशित- प्रदीप भट्ट-See More
Feb 19
JAWAHAR LAL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"श्मशान ऐसी जगह है जहाँ जाकर वैराग्य उत्पन्न हो जाता है ....फिर भी आपकी भावना का शब्दों में निरूपण बेहतरीन ढंग से किया है, आदरणीय प्रदीप भट्ट जी."
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"आद0 Pradeep Devisharan Bhatt जी सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये। कुछ जगहों पर टंकण त्रुटि है। जैसे जीवित शुद्ध है"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"सुरेंद्र जी धन्यवाद"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"शुक्रिया महेंद्र जी"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"आपका बहुत बहुत आभार"
Feb 5
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"मरघट के कपोत"

मनुज पशु पक्षी और जंतु,एक ही सबका जीवन दाता,धनी हो या फिर निर्धन कोई,मरघट अंतिम ही सुख् दाता ।भोर से लेकर सांझ तलक शव,मरघट में आते रह्ते हैं,चंद्न लकडी घी पावक मिल,भस्म उसे करते रहते हैं ।मूषक पिपिलिका कपोत उपाकर,व्रीही खाकर जीवीत रहते हैं,दूषित समझ मनुज जो छोडे,वो जल पी जीवीत रहते हैं ।उचित अनुचित तो ये भी जाने,मनुज के मन को भी पहचाने,पाप पुण्य का ज्ञान इन्हे भी,पर भूखा पेट तो कुछ ना जाने ।अगर नहीं हो पुण्य लालसा,मनुज नहीं कुछ करने वाला,पाप के भय से भयातुर मन को,स्वय मनुज है छ्लने…See More
Feb 4
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है रोक पाता नहीं उसे कोई , उसके आगे ना रंक, राजा है , कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ जब भी कहता है सच ही कहता है जैसे बच्चा हृदय में रहता है , उसके जैसा नहीं कोई सानी , वो भी लिखता है पानी पे पानी ॥ धार शब्दोँ की उसकी तीखी है , जानता है वो जिसपे बीती है कह के उसको क्या तुम बुलाओगे , तुम ना समझे हो ना समझ पाओगे ॥ उसपे मर्ज़ी चलाना मुश्क़िल है, झूठ के पांव पाना मुश्क़िल है , कोशिशें सब नाकारा कर देगा , तुमको इंसानियत से भर देगा ॥ बरसों में शख़्स ऐसा होता है,  बीज उल्फ़त…See More
Jan 16
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"महब्बत है आपकी,सलामत रहो ।"
Jan 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Roorkie
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, Mumbai

Pradeep Devisharan Bhatt's Blog

मैं एक स्त्री भी हूँ

"अंतर्रष्ट्रिय  महिला दिवस पर विशेष"

सिर्फ माँ बहन पत्नी बेटी की,

परिभषा में मत उल्झओ

सबसे पहले मैं एक स्त्री हूँ,

मुझे मेरा सम्मन दिलवाओ।।

 

सिर्फ वंश…

Continue

Posted on March 8, 2019 at 11:30am — 2 Comments

अपबे वतन में बेघर

अपने वतन में बेघर का दर्द क्या जानो

जिन्होने लूटा है खसूटा उनको पहचानो

मेहनत मज़दूरी की तो जी गये बच्चे

संस्कार मिले थे बुजुर्गो से हमें भी अच्छे

लुट गये लेकिन हथियार उठाया ना कभी

वतन पे जान देने का है इरादा अब भी…

Continue

Posted on February 18, 2019 at 6:00pm — 2 Comments

"मरघट के कपोत"

मनुज पशु पक्षी और जंतु,

एक ही सबका जीवन दाता,

धनी हो या फिर निर्धन कोई,

मरघट अंतिम ही सुख् दाता ।

भोर से लेकर सांझ तलक शव,

मरघट में आते रह्ते हैं,

चंद्न लकडी घी पावक मिल,

भस्म उसे करते रहते हैं ।

मूषक पिपिलिका कपोत उपाकर,

व्रीही खाकर जीवीत रहते हैं,

दूषित समझ मनुज जो छोडे,

वो जल पी जीवीत रहते हैं ।

उचित अनुचित तो ये भी जाने,

मनुज के मन को भी पहचाने,

पाप पुण्य का ज्ञान…

Continue

Posted on February 4, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है 

रोक पाता नहीं उसे कोई , 

उसके आगे ना रंक, राजा है , 

कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ 

जब भी कहता है सच ही कहता है 

जैसे बच्चा हृदय में रहता है , 

उसके…

Continue

Posted on January 4, 2019 at 1:00pm — 8 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल अपनी ज़ुलफें वो अगर रुख पे परेशां कर दें l अहले महफ़िल के लिए मौत का सामाँ कर दें l कम से कम…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आज के मुशायरे का आगाज़ बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल के साथ करने पर आपको बहुत…"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"इल्म से अपने दिमाग़ों में चराग़ाँ कर देंमेरे उस्ताद जिसे चाहें ग़ज़ल ख़्वाँ कर दें डूब कर रंग में…"
6 hours ago
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब  आदब  बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल…"
7 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"वाह !"
8 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"इससे पहले कि ये सब चाक गरेबाँ कर दें वोट जो पास है अपने उसे क़ुरबां कर दें बच गया जो हो ज़रा आँख में…"
8 hours ago
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल आओ इस देश को मिलजुल के गुलिस्ताँ कर दें इसके उजड़े हुए शहरों में चराग़ाँ कर दें हम वतन के…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"राह दुश्वार बहुत है इसे आसां कर दें ख़ून से अपने बयाबां को गुलिस्ताँ कर दें आज़माने के लिए अज़्म को…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'मुझे भी!' (लघुकथा) :
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहिब।"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"समस्त परिवारजन को रंगोत्सव पर हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं।"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब गणेश जी "बाग़ी" साहिब आदाब, बहुत-बहुत  मुबारकबाद ।"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी..आपको भी होली की शुभकामनाएं.."
14 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service