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प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Male
  • हैदराबाद (तेलांगाना)
  • India
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प्रदीप देवीशरण भट्ट's Friends

  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Samar kabeer
 

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vijay nikore commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -गुरु दिवस
"सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीय प्रदीप जी"
Thursday
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post ज़िंदगी तू क्यूँ उदास है-
"जनाब प्रदीप जी,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post रोटियाँ
"जनाब प्रदीप जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बह्र भी गड़बड़ है,और क़वाफ़ी भी दुरुस्त नहीं हैं,देखियेगा ।"
Sep 9
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

ज़िंदगी तू क्यूँ उदास है-

जिंदगी ये तो बता, तू इतनी क्यूँ उदास हैमुझसे है नाराज़ या फिर,औऱ  कोई बात हैमैंने तो तुझसे कभी कुछ खास मांगा भी नहींले रही फिर बारहा तू लंबी क्यूं उच्छवास हैजो तेरी ख़्वाहिश थी शायद वो मिला तुझको नहींफ़िक्र ना कर तेरे हिस्से में यक़ीनन ख़ास हैजो मिला संतोष रख विचलित नहीं होना कभीहास भी मिलता कभी होता कभी परिहास हैसुख के बादल भी बरसते और दुख के भी कभीतू बता इससे अलग कया तेरा कुछ कयास हैसांस चलना ही निशानी जिंदगी की है तो फिरनींद भी तो 'दीप' प्रतिदिन मौत क़ा अभ्यास है-प्रदीप देवीशरण भट्ट- मौलिक व…See More
Sep 9
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

रोटियाँ

पेट हो खाली तो फिर कैसे खेले गोटियांअब मयस्सर हैं बस ख्व़ाब में ही रोटियाँ.तुम्हें मुबारक हो शाहों की दावतें हमकोमिल जाएँ खाने को दो चार सूखी रोटियाँ.माल असबाब की तो तुमको ज़रूरत होगीअपनी पूँजी सुबह औ शाम की हैं रोटियाँ.अपने कांधों पर लिए बोझ गरिबी हर दिनचढ़ाती रहती है अमीरों को ऊँची चोटियाँ.अब ये दस्तूर ही बना लिया है मुंसिफ नेमाँगो इनसाफ़ तो देता है सबको सोटियाँ.कम-से-कम इतना करम तो रब्बा कर देहमें मिले ना मिले पर मेहमां को मिले रोटियाँ.मुफलिसी जो ना करा दे ‘प्रदीप’ वो कम हैछीन लेता है इंसाँ…See More
Sep 7
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -गुरु दिवस
"जनब प्रदीप जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -गुरु दिवस
"शुक्रिया तेजवीर सिंह् जी"
Sep 6
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on rajesh kumari's blog post तू शिक्षक है़ या रक्षक है़
"बेहतरीन प्रस्तुति पर बधाई राज जी"
Sep 6
TEJ VEER SINGH commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -गुरु दिवस
"हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवी शरण भट्ट जी।बहुत सुंदर प्रस्तुति।"
Sep 5
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मुफ़लिसी
"कृपया व्हाट्सऐप की बजाए फ़ोन पर सम्पर्क किया करें ।"
Sep 5
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

-गुरु दिवस

झिझको नहीं ठिठको नहीं लो पकड़ लो मेरा हाथ मैं तुम्हे ले चलता हूँ तम से प्रकाश की ओरप्रकाश तुम्हें दिखाएगा जीवन के अनंत आयाम तुम कसौटी पर परखना औऱ चुन लेना कोई एकवो एक ही पर्याप्त है जीवन को दिशा देने के लिए अन्य के जीवन में प्रकाश फ़ैलाने के लिए॥- प्रदीप देवीशरण भट्ट - मौलिक व अप्रकाशितSee More
Sep 5
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मुफ़लिसी
"अच्छा सुझाव  देने के लिए शुक्रिया समर जी,  मैंने आपके व्हट्सप पर इस्लाह के लिए एक रचना भेजी थी। अभी भी प्रतिक्षारत्त हूँ"
Sep 5
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"गिरधारी जी शानदार गज़ल्म बधाई"
Sep 5
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post on Facebook
Sep 5
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मुफ़लिसी
"जनाब प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आदाब,एक बात ये कि रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'भूख से हूँ बेहाल इतना के चला जाता नहीं जाना चाह्ता हूँ उधर जाने किधर जाता हूँ मैं' ये शैर बह्र में नहीं…"
Sep 1
TEJ VEER SINGH commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मुफ़लिसी
"हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट जी। बेहतरीन गज़ल। जो मेरी है वो ही अब हालत शहर की हो रही आइने में ख़ुद की सूरत देख डर जाता हूँ मैं"
Aug 30

Profile Information

Gender
Male
City State
हैदराबाद
Native Place
रुडकी (उत्तराखंड)
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, हैदराबाद

प्रदीप देवीशरण भट्ट's Blog

ज़िंदगी तू क्यूँ उदास है-

जिंदगी ये तो बता, तू इतनी क्यूँ उदास है

मुझसे है नाराज़ या फिर,औऱ  कोई बात है

मैंने तो तुझसे कभी कुछ खास मांगा भी नहीं

ले रही फिर बारहा तू लंबी क्यूं उच्छवास है

जो तेरी ख़्वाहिश थी शायद वो मिला तुझको नहीं

फ़िक्र ना कर तेरे…

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Posted on September 9, 2019 at 11:00am — 1 Comment

रोटियाँ

पेट हो खाली तो फिर कैसे खेले गोटियां
अब मयस्सर हैं बस ख्व़ाब में ही रोटियाँ
.
तुम्हें मुबारक हो शाहों की दावतें हमको
मिल जाएँ खाने को दो चार सूखी रोटियाँ
.
माल…
Continue

Posted on September 6, 2019 at 12:30pm — 1 Comment

-गुरु दिवस

झिझको नहीं ठिठको नहीं
लो पकड़ लो मेरा हाथ
मैं तुम्हे ले चलता हूँ
तम से प्रकाश की ओर

प्रकाश तुम्हें दिखाएगा
जीवन के अनंत आयाम
तुम कसौटी पर परखना
औऱ चुन लेना कोई एक

वो एक ही पर्याप्त है
जीवन को दिशा देने के लिए
अन्य के जीवन में
प्रकाश फ़ैलाने के लिए॥

- प्रदीप देवीशरण भट्ट - मौलिक व अप्रकाशित

Posted on September 5, 2019 at 3:50pm — 4 Comments

मुफ़लिसी

शाम को जिस वक़्त खाली हाथ घर जाता हूँ मैं

अपने बच्चों की निगाहों से उतर जाता हूँ मैं
भूख से हूँ बेहाल इतना के चला जाता नहीं
जाना चाह्ता हूँ उधर जाने किधर जाता हूँ मैं
एक ठीया है शहर में हम सब जहाँ होते जमा
ख़ुद को लेकिन रोज़ तन्हा उस डगर पाता हूँ मैं
जो मेरी है वो ही अब हालत शहर की हो रही
आइने में ख़ुद की…
Continue

Posted on August 26, 2019 at 3:30pm — 4 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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"आभार आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, सराहना से रचना सार्थक हुई."
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"बेहतरीन पंक्तियाँ, आदरणीय गणेश सरज बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
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