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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"सुंदर कुण्डलिया लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई भाई सुरेन्द्र जी"
Thursday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"आद0 समर कबीर साहब बहुत बहुत आभार आपका,, आपके कथनानुसार परिवर्तन कर दिया है,, पुनश्च आभार"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"आद0 आली जनाब समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया का हमें रचना पोस्ट करने के तुरन्त बाद से बाट जोहता हूँ।  पढ़के खबरें रोज ही-- इसमें भूल वस त्रुटि हो गयी है। अभी दुरुस्त करता हूँ।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted blog posts
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। कुण्डलिया की प्रशंसा से अभिभूत हूँ। हार्दिक आभार आपका।"
Monday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अख़बार पर व्यंग करते अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ' पढ़के खबरें पढ़कर रोज ही'--? ' खबर सब हमें रुलाती'--इस पंक्ति में 'सब' शब्द लिया तो…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"बेहतरीन यथार्थपूर्ण, कटाक्षपूर्ण उम्दा कुण्डलिया छंदों के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने,,बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन,, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल, वाह वाह, बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)
"आद0 तस्दीक अहमद खान साहब,, सादर अभिवादन।। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरी धरोहर - लघुकथा -
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया सन्देश देती हुई लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Nov 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें(ग़ज़ल)
"आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। बहुत बहुत बधाई स्वीकार कीजिये।"
Nov 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post फिर भी - लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा लिखी आपने। इस प्रस्तुति पर कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये"
Oct 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : बात करते हैं मगर मर के दिखाते भी नहीं
"आद0 महेंद्र कुमार जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही आने। शैर दर शैर दाद के साथ बधाई कुबुल कीजिये"
Oct 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताड़ना के कारी-अधिकारी' (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने। बधाई संप्रेषित है।"
Oct 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 सत्यनारायण सिंह जी सादर अभिवादन। जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित है"
Oct 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

"अखबार" पर तीन कुण्डलिया

कल घटना जो भी घटी, नभ थल जल में यार

उसे शब्द में बाँधकर, लाता है अखबार

लाता है अखबार, बहुत कुछ नया पुराना

अर्थ धर्म साहित्य, ज्ञान का बड़ा खजाना

पढ़के जिसे समाज, सजग रहता है हरपल

सबका है विश्वास, आज भी जैसे था कल।1।

जैसा कल था देश यह, वैसा ही कुछ आज

बदल रही तारीख पर, बदला नहीं समाज

बदला नहीं समाज, सुता को कहे अभागिन

लूटा गया हिज़ाब, कहीं जल गई सुहागिन

कचरे में नवजात, आह! जग निष्ठुर कैसा

समाचार सब आज, दिखे है कल ही…

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Posted on November 11, 2018 at 5:00pm — 6 Comments

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यार

सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

झेल रहा है बचपन देखो,

बस्तों का अभिशाप

सदा प्रथम की हसरत पाले,

दिखते हैं माँ बाप।।

पढ़ो रात दिन नम्बर पाओ, कहना छोड़ो यार

सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

गुंडे और मवाली के सिर,

सजे आजकल ताज

पढ़े लिखे हैं झोला ढोते,

पर है मौन समाज।।

सबको चिंता एक यहाँ बस, हो स्वजाति सरकार

सही गलत क्या आप परखना, विनती…

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Posted on September 25, 2018 at 7:30pm — 13 Comments

राखी पर कुछ कुण्डलिया

कच्चे धागों से जुड़ा, रक्षाबंधन पर्व

बहना बाँधे डोर जब, भैया करता गर्व

भैया करता गर्व, नेग बहना को देकर

प्रण जीवन रक्षार्थ, वचन खुश बहना लेकर

रेशम बाँधे प्रीत, सनातन रिश्ते सच्चे

बाँटे खुशी अपार, भले हैं धागे कच्चे।1।

सावन में बदरा घिरे, बहने लगी बयार

प्यार बाँटने आ गया, राखी का त्योहार

राखी का त्योहार, सजीं चहुओर दुकानें

ट्रांजिस्टर पर खूब, बजें राखी के गाने

जात धर्म से दूर, भाव है कितना पावन

बँधे स्नेह की डोर, मास आये…

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Posted on August 26, 2018 at 1:00pm — 19 Comments

श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे

कहीं बनाते हैं सड़क, कहीं तोड़ते शैल

करते श्रम वे रात दिन, बन कोल्हू के बैल।1।

नाले देते गन्ध हैं, उसमें इनकी पैठ

हवा प्रवेश न कर सके, पर ये जाएँ बैठ।2।

काम असम्भव बोलना, सम्भव नहीं जनाब

पलक झपकते शैल को, दें मुट्ठी में दाब।3।

चना चबेना साथ ले, थोड़ा और पिसान

निकलें वे परदेश को, पाले कुछ अरमान।4।

सुबह निकलते काम पर, घर से कोसों दूर

भूमि शयन हो शाम को, होकर श्रम से चूर।5।

ईंट जोड़…

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Posted on May 7, 2018 at 5:30pm — 25 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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