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Vivek Pandey Dwij
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Vivek Pandey Dwij's Page

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Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"द्वितीय प्रस्तुति (कवित्त छंद) दिल से भला है यहाँ जो भी इंसान आज,नर वो नहीं यह पे देवता के जैसे हैं।दूसरों के सुख में जिसे है सुख मिलता,आदमी जहाँ में बस शेष कुछ ऐसे हैं।चर व अचर यहाँ जो भी हमें दिखता है,रचा है विधाता ने ये स्वर्ग यहाँ कैसे हैं।दिल…"
Nov 10
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"प्रथम प्रस्तुति (दोहा छंद) करता हूँ आराधना, दिल से प्रभु मैं आजज्ञान सिन्धु बस चाहिये, नहीं चाहिये ताज।। देख जगत व्यवहार को, दिल से निकले आहमानव दिल पत्थर हुआ, उपजे दिल में डाह।। हर जीवन है एक सा, इसको समझो यार'वसुधा एव कुटुम्ब' है,…"
Nov 10
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आo सुरेंद्र सिंह कुशक्षत्रप जी इस सुंदर रचना के लिये बधाई स्वीकार करें।"
Nov 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आ. विवेक जी, मज़दूर की समस्याओं पर अच्छे दोहे रचे हैं। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 8
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आदरणीय डॉ.गीता चौधरी जी इस उत्साहवर्धन के लिये आप को साधुवाद।"
Nov 4
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी प्रणाम उत्साहवर्धन लिये धन्यबाद।"
Nov 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आद0 विवेक पांडेय द्विज जी सादर प्रणाम। मजदूर विषय पर आपके दोहे शिल्पगत और भावपूर्ण हैं। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Nov 4
Dr. Geeta Chaudhary commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आदरणीय विवेक पाण्डे जी अच्छे दोहे लिखे आपने, हार्दिक बधाई!"
Nov 4
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"प्रणाम समर कबीर जी, मेरे उत्साह संबर्धन के लिए आप का बहुत बहुत धन्यबाद।"
Nov 4
Samar kabeer commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"जनाब विवेक पाण्डेय जी आदाब,मज़दूर की समस्याओं पर अच्छे दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 4
Vivek Pandey Dwij posted a blog post

मजदूर पर दोहे

कहने को मजदूर पर, नहीं आज मजबूर।अपनी ताकत से सदा, करे दुखों को दूर।।काम करे डटकर सदा, नहीं कभी आराम।इसके श्रम से ही बने, महल अटारी धामजंगल या तालाब हो, रुके न फिर भी पाँव।करता श्रम दिन-रात वो, देखे धूप न छाँव।।कंकड़ पत्थर जोड़कर, देता उसको रूप। निज तन चिंता छोड़कर, खाता दिन भर धूप।।राह बनाता वो यहाँ, दुष्कर गिरि को काट।अपने भुजबल से करे, सुंदर सरल ये बाट।।मन निर्मल है तन कड़ा, लौह बना है हाथ।सबके हित में वो खड़ा, है सबके वो साथ।।करता है दिन रात वो, बिना थके हर काम।लेकिन उसको ना मिले, सही काम का…See More
Nov 3
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"कुण्डलिया यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसानवृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञानकहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगायासूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पायाकह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारोनिशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1 अभिलाषा प्रारम्भ है,…"
Jun 15
Vivek Pandey Dwij posted a blog post

पर्यावरण पर कुंडलिया

यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसानवृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञानकहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगायासूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पायाकह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारोनिशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1 अभिलाषा प्रारम्भ है, मृगतृष्णा का यारअंधी दौड़ विकास की, हुई जगत पे भारहुई जगत पे भार, मस्त फिर भी है मानवहर कोई है त्रस्त, विकास लगे अब दानवकह विवेक कविराय, प्रकृति की समझो भाषापर्वत नदियाँ झील, नष्ट करती अभिलाषा।।2मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
Jun 15
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ० लक्क्षमण धमी 'मुसाफिर' जी मेरे उत्साह वर्धन हेतु कोटिशः धन्यवाद."
Apr 19
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ० समर कबीर जी मेरे उत्साह वर्धन हेतु सहृदय आभार."
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ. विवेक जी, चुनावी माहौल में सुंदर आल्हा छंद हुए है । हार्दिक बधाई।"
Apr 19

Profile Information

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Male
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Varanasi
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Varanasi
Profession
Teacher
About me
Writing is my hobby

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मजदूर पर दोहे

कहने को मजदूर पर, नहीं आज मजबूर।

अपनी ताकत से सदा, करे दुखों को दूर।।

काम करे डटकर सदा, नहीं कभी आराम।

इसके श्रम से ही बने, महल अटारी धाम

जंगल या तालाब हो, रुके न फिर भी पाँव।

करता श्रम दिन-रात वो, देखे धूप न छाँव।।

कंकड़ पत्थर जोड़कर, देता उसको रूप।

निज तन चिंता छोड़कर, खाता दिन भर धूप।।

राह बनाता वो यहाँ, दुष्कर गिरि को काट।

अपने भुजबल से करे, सुंदर सरल ये बाट।।

मन निर्मल है तन कड़ा, लौह बना है…

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Posted on November 3, 2019 at 4:11pm — 7 Comments

पर्यावरण पर कुंडलिया

यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसान

वृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञान

कहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगाया

सूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पाया

कह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारो

निशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1

 अभिलाषा प्रारम्भ है, मृगतृष्णा का यार

अंधी दौड़ विकास की, हुई जगत पे भार

हुई जगत पे भार, मस्त फिर भी है मानव

हर कोई है त्रस्त, विकास लगे अब दानव

कह विवेक कविराय, प्रकृति की समझो भाषा

पर्वत नदियाँ झील, नष्ट करती…

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Posted on June 15, 2019 at 9:46am

'आम चुनाव और नेता'

आल्हा छंद (16, 15 अंत में गुरु लघु)

लोकतंत्र के महापर्व में, हुए सभी नेता तैयार

शब्द बाण से वार करें वे, छोड़ छाड़ के शिष्टाचार।।

युध्द भूमि सा लगता भारत, जहाँ मचा है हाहाकार

येन केन पाने को सत्ता, अपशब्दों की हो बौछार।।

खून करें वे लोकतंत्र का, जुमले हैं इनके हथियार

हित जनता का भूल गए वे, ऐसा इनका है आचार

हे जन मन तुम जाग उठो अब, व्यर्थ न जाये यह त्योहार

ऐसा कुछ इस बार करो तुम, राजनीति बदले आकार ।।

रंग बराबर बदलें ऐसे,…

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Posted on April 13, 2019 at 8:27am — 6 Comments

नवरात्र पर दोहे

घर- घर हो घट स्थापना, लगे नए पंडाल

हर मन उल्लासित दिखे, ले पूजा की थाल।।

चैत्र मास नवरात्र में, हो माँ का गुण गान

दुर्गुण सारा जल उठे, हो इसका भी ध्यान।।

यह सारा संसार ही, माँ का है दरबार

माँ ही बस इक सत्य है, बाकी सब बेकार।।

बालक बृंद अबोध मैं, माँ ममता की खान

जैसा भी हूँ मैं अभी, रखना माँ तू ध्यान।।

माँ के ही सब लाल हम, माँ ही खेवनहार

दया दृष्टि जब माँ करे, हों भवसागर पार।।

(मौलिक व…

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Posted on April 9, 2019 at 7:00pm — 6 Comments

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At 3:15pm on March 6, 2019, Ahmed Maris said…

Good Day,

How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day

Thanks God bless

Stella.

 
 
 

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