For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रोहिताश्व मिश्रा
  • Male
  • फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • India
Share

रोहिताश्व मिश्रा's Friends

  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Samar kabeer
  • मिथिलेश वामनकर
  • Tilak Raj Kapoor
  • वीनस केसरी

रोहिताश्व मिश्रा's Groups

 

रोहिताश्व मिश्रा's Page

Latest Activity

vijay nikore commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"अच्छी गज़ल के लिर बधाई।"
Jun 24
वीनस केसरी and रोहिताश्व मिश्रा are now friends
May 31
रोहिताश्व मिश्रा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-79
"दोहे जैसा जब से आए शहर में ,छूटा प्यारा गाँव ।तबसे पाई ही नहीं,ममता वाली छाँव ।बतरस वो चौपाल की, सीधे सच्चे लोग ।माँ की रोटी दाल थी,जैसे छप्पन भोग । रोहिताश्व मिश्रा मौलिक एवम अप्रकाशित"
May 13
रोहिताश्व मिश्रा's blog post was featured

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122इक अजनबी दिल चुरा रहा था। करीब मुझ को' बुला रहा था।वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स, मगर दिये भी जला रहा था।वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में, न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर, हमें मुहब्बत सिखा रहा था।बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"। नहीं तो' ये आईना रहा था।रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबादमौलिक एवम अप्रकाशितSee More
Apr 26
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"बहुत बहुत शुक्रियः सर"
Apr 23

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"आदरणीय रोहिताश्व भाई , खूब सूरत गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।"
Apr 23
रोहिताश्व मिश्रा commented on Samar kabeer's blog post क़दम उठाने से पहले विचार करना था
"वाह सर बहुत प्यारी ग़ज़ल वाआआह"
Apr 20
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"बहुत बहुत शुक्रियः रवि भाई जी"
Apr 20
Ravi Shukla commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"आदरणीय रोहिताश्‍व जी अच्छी ग़ज़ल पेश की है आपने ..बधाई"
Apr 20
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"थैंक्यू ब्रजेश भाई जी बहुत बहुत थैंक्यू"
Apr 20
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"थैंक्यू ब्रजेश भाई जी बहुत बहुत थैंक्यू"
Apr 20
रोहिताश्व मिश्रा posted a blog post

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122इक अजनबी दिल चुरा रहा था। करीब मुझ को' बुला रहा था।वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स, मगर दिये भी जला रहा था।वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में, न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर, हमें मुहब्बत सिखा रहा था।बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"। नहीं तो' ये आईना रहा था।रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबादमौलिक एवम अप्रकाशितSee More
Apr 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"भाई रोहिताश्व जी बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल कही है..बधाई"
Apr 19
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"जी सर बहुत बहुत शुक्रियः हम वो मिस्रा सही करते हैं"
Apr 19
Samar kabeer commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"जनाब रोहिताश्व मिश्रा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'वो सबक़-ए-उल्फ़त हमीं से पढ़ कर' "सबक़"शब्द अरबी भाषा का है, इसलिये इसमें इज़ाफ़त नहीं लगेगी,ये मिसरा यूँ कर सकते हैं :- 'सबक़ मुहब्बत का…"
Apr 19
Nilesh Shevgaonkar commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"अच्छी ग़ज़ल पेश की है आपने ..बधाई "
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Farrukhabad
Profession
Student
About me
Students. Studying

रोहिताश्व मिश्रा's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

रोहिताश्व मिश्रा's Blog

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
करीब मुझ को' बुला रहा था।

वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स,
मगर दिये भी जला रहा था।

वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में,
न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।

सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर,
हमें मुहब्बत सिखा रहा था।

बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"।
नहीं तो' ये आईना रहा था।

रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबाद

मौलिक एवम अप्रकाशित

Posted on April 18, 2017 at 1:30pm — 13 Comments

कब ख़ुद को मुख्तार करोगे

22/22/22/22



तूफाँ से गर प्यार करोगे,

बाहों को पतवार करोगे।



अब कर दो इज्हार-ए-मुहब्बत,

कब तक छुप छुप प्यार करोगे।



छोड़ोगे कब हुक़्म बजाना,

कब ख़ुद को मुख्तार करोगे।



पेश आएंगे सभी अदब में,

जब खुद शिष्ट आचार करोगे।



दरिया पार तभी होगा जब,

ज़र्फ़ अपना पतवार करोगे।



इश्क़ में' हद से' गुज़रने वालों,

तुम ख़ुद को बीमार करोगे।



शाम हुई फैला अँधियारा,

जाने कब इज़्हार* करोगे।

*चराग़ रौशन करना…

Continue

Posted on February 15, 2017 at 4:30pm — 11 Comments

तू दूर हो तो मौत से कोई गिला नहीं।

२२१/२१२१/१२२१/२१२

तू दूर हो तो मौत से कोई गिला नहीं।

हो पास गर तो कुछ भी यहाँ ज़ीस्त सा नहीं।



आएगी रौशनी यहाँ छोटी दरारों से,

है झौपड़ी में कोई दरीचा बड़ा नहीं।



आएगा कैसे घर पे कहो कोई नामाबर,

उनके किसी भी ख़त पे जब अपना पता नहीं।



मैं सोचता हूँ कह लूँ मुकम्मल ग़ज़ल मगर,

मेरे मिज़ाज का कोई भी क़ाफ़िया नहीं।



ढूँढोगे तुम तो चाँद से मिल जायेंगे, मगर,

"रोहित" सा इस जहाँ में कोई दूसरा नहीं।







रोहिताश्व…

Continue

Posted on January 14, 2017 at 5:00pm — 9 Comments

कोई सूरज भी ढल रहा होगा।

2122/1212/22

चाँद जब भी निकल रहा होगा।
कोई सूरज भी ढल रहा होगा।

ज़िन्दगी भर न वो रहेगा यूँ,
उस का दिल भी पिघल रहा होगा।

मर्ज़-ए-दिल हम को ही नहीं केवल,
उसका भी दम निकल रहा होगा।

चोट खाने के बाद हम सा ही,
आज वो भी सँभल रहा होगा।

हम को इतना यक़ीं तो है 'रोहित',
हिज़्र में वो भी जल रहा होगा।

रोहिताश्व मिश्रा
फ़र्रुखाबाद
(मौलिक एवम् अप्रकाशित)

Posted on December 21, 2016 at 11:21am — 14 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:24pm on December 20, 2016, रोहिताश्व मिश्रा said…
शुक्रियः सर
At 1:56pm on May 21, 2016, रोहिताश्व मिश्रा said…
तुम इस को बन्द कर लो लाख़ पहरों मे भले रोहित ।
मगस को लौट कर जलाने शमा के पास जाना है।।
At 1:24am on November 22, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

SudhenduOjha posted blog posts
30 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास - निलेश नूर
" धन्यवाद आ. सौरभ सर,विधान की कमियाँ इंगित करेंगे तो जल्दी सीख पाउँगा सादर "
46 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"भाई खुर्शीद जी मुग्ध कर दिया आपकी इस शानदार ग़ज़ल ने। मतले से लेकर मक्ते तक हर शैर दमदार है। दिल से…"
49 minutes ago
satish mapatpuri replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"रूपमाला या मदन छंद 24 मात्रायें … 14 / 10 पर यति …. पदान्त गुरु लघु से डाल पर छोटा…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"(1 ) कुंडली छन्द    ----------------- (१ ) दाना लाने के लिए ,चिड़ी गई है…"
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"इन्द्रवज्रा ऽऽ।    ऽऽ।   ।ऽ।   ऽऽ   रोके हुए दो कड़ियाँ…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका सान्निध्य हमसभी का संबल है. आयोजन के हीरक जयंती अंक की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएँ, आदरणीय…"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी छंदोत्सव - 31 [22/10/13] से मेरी भी यात्रा प्रारम्भ हुई थी और आपके साथ यह सफर अब…"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"कुकुभ छंद [मात्रा 16 - 14  पदांत दो गुरुओं…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"बहुत खूब, आदरणीय खुर्शीद भाई. अव्वल तो मंच पर आपका पुनः स्वागत है. फिर इस गहरी ग़ज़लग़ोई के लिए…"
8 hours ago
Manisha Saxena replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक 27 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"भंवर   चलचित्र की भांति शांति की बातें रह रह कर दिमाग में घूम रहीं थीं इतनी सुन्दर व भोली लड़की…"
8 hours ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post लो आ गया सावन ( कविता)
"Ji Adarniya Giriraj ji prayas karungi is rachna ko sudhar sakun . Sadar"
8 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service