For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रोहिताश्व मिश्रा
  • Male
  • फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • India
Share

रोहिताश्व मिश्रा's Friends

  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Samar kabeer
  • मिथिलेश वामनकर
  • Tilak Raj Kapoor
  • वीनस केसरी

रोहिताश्व मिश्रा's Groups

 

रोहिताश्व मिश्रा's Page

Latest Activity

रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"थैंक्यू भाई"
Jun 27
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"शुक्रियः विजय जी"
Jun 27
सतविन्द्र कुमार राणा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"वाह गजब मुबारकां आ रोहितभाई"
Jun 10
vijay nikore commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"गज़ल अच्छी लगी। बधाई।"
Jun 10
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"बहुत बहुत शुक्रियः मुसाफ़िर सर गुमनाम सर ब्रजेश सर"
Jun 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"भई वाह मिश्रा जी क्या शानदार ग़ज़ल कही है...हर एक शेर बेहतरीन.."
Jun 9
gumnaam pithoragarhi commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"वाह बेहद खूबसूरत ग़ज़ल ....वाह"
Jun 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"आ. भाई रोहित जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 8
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"बहुत बहुत शुक्रियः सर"
Jun 7
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर
"मेरी शिकस्त की ख़बर नफ़स नफ़स में रच गई,था जिसमें ज़िक्र फ़तह का वो इश्तेहार जल गया।...............वाह.....आदरणीय भाई मिश्रा जी ....बहुत ही कामयाब ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई..........."
Jun 7
रोहिताश्व मिश्रा shared their blog post on Facebook
Jun 6
रोहिताश्व मिश्रा shared their blog post on Facebook
Jun 6
रोहिताश्व मिश्रा shared a profile on Facebook
Jun 6
रोहिताश्व मिश्रा posted blog posts
Jun 6
रोहिताश्व मिश्रा updated their profile
Jun 5
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post एक कोशिश
"बहुत बहुत शुक्रियः सर Thanku"
Nov 26, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Farrukhabad
Profession
Student
About me
Students. Studying

रोहिताश्व मिश्रा's Photos

  • Add Photos
  • View All

रोहिताश्व मिश्रा's Blog

ग़ज़ल : बहुत दिनों था मुन्तज़िर

मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन

बहुत दिनों था मुन्तज़िर फिर इन्तिज़ार जल गया।

मेरे तवील हिज्र में विसाल-ए-यार जल गया।

मेरी शिकस्त की ख़बर नफ़स नफ़स में रच गई,

था जिसमें ज़िक्र फ़तह का वो इश्तेहार जल गया।

मैं इंतिख़ाब-ए-शमअ में ज़रा सा मुख़्तलिफ़ सा हूँ,

मेरे ज़रा से नुक़्स से मेरा दयार जल गया।

मुझे ये पैकर-ए-शरर दिया था कैसे चाक ने,

मुझे तो सोज़ ही मिला मेरा कुम्हार जल गया।

पनाह दी थी जिसने कितने रहरवों को…

Continue

Posted on June 5, 2018 at 1:00pm — 10 Comments

एक कोशिश

फ़इलातु फ़ाइलातुन फ़इलातु फ़ाइलातुन

ये जो राबिता है अपना फ़क़त एक शे'र का है।

कोई इक रदीफ़ है तो कोई उसका क़फ़िया है।

है अजीब ख़ाहिश-ए-दिल कि रहूँ गा साथ ही में,

मैं हबीब हूँ हवा का मेरा आश्ना दिया है।

कभी मुझ से आके पूछो सर-ए-शाम बुझ गया क्यों,

कभी उस तलक भी जाओ कि जो दिन में भी जला है।

कभी कश्तियों को छोड़ो दिले आबजू में उतरो,

मेरे पास आके देखो मेरे दिल में क्या छिपा है।

मेरा क्या है मेरी मंज़िल मुझे ढूँढ…

Continue

Posted on November 22, 2017 at 11:30am — 4 Comments

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
करीब मुझ को' बुला रहा था।

वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स,
मगर दिये भी जला रहा था।

वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में,
न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।

सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर,
हमें मुहब्बत सिखा रहा था।

बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"।
नहीं तो' ये आईना रहा था।

रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबाद

मौलिक एवम अप्रकाशित

Posted on April 18, 2017 at 1:30pm — 15 Comments

कब ख़ुद को मुख्तार करोगे

22/22/22/22



तूफाँ से गर प्यार करोगे,

बाहों को पतवार करोगे।



अब कर दो इज्हार-ए-मुहब्बत,

कब तक छुप छुप प्यार करोगे।



छोड़ोगे कब हुक़्म बजाना,

कब ख़ुद को मुख्तार करोगे।



पेश आएंगे सभी अदब में,

जब खुद शिष्ट आचार करोगे।



दरिया पार तभी होगा जब,

ज़र्फ़ अपना पतवार करोगे।



इश्क़ में' हद से' गुज़रने वालों,

तुम ख़ुद को बीमार करोगे।



शाम हुई फैला अँधियारा,

जाने कब इज़्हार* करोगे।

*चराग़ रौशन करना…

Continue

Posted on February 15, 2017 at 4:30pm — 11 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:24pm on December 20, 2016, रोहिताश्व मिश्रा said…
शुक्रियः सर
At 1:56pm on May 21, 2016, रोहिताश्व मिश्रा said…
तुम इस को बन्द कर लो लाख़ पहरों मे भले रोहित ।
मगस को लौट कर जलाने शमा के पास जाना है।।
At 1:24am on November 22, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,                    …"
4 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय क़मर जौनपुरी आदाब,                    …"
15 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब,जी, परिवार अब कुशलपूर्वक है । शक्तिछन्द पर मेरा प्रथम प्रयास आपको पसंद…"
15 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब क़मर जौनपुरी साहिब ।"
20 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर जी शक्ति छंद पर शानदार प्रस्तुति हार्दिक बधाई आपको"
21 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब,रचना आपको पसंद आई,मेरा लिखना सार्थक हुआ, अस्ल में शक्तिछन्द पर…"
21 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब,आपकी प्रशंसा में आपका असीम प्यार छुपा है,इसके लिए आभारी हूँ ।"
33 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया जनाब ।"
36 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"जी, आपका कहना दुरुस्त है,मैंने इसे एक सबक़ के तौर पर लिया उसकी वजह ये भी है कि दूसरे भी इसे इतनी ही…"
38 minutes ago
Meena Pathak replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ सर | सादर "
48 minutes ago
क़मर जौनपुरी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, बहुत बहुत आभार हौसला आफ़ज़ाई के लिए। विद्वतमण्डली में नौसिखिया हूँ। धीरे…"
55 minutes ago
mirza javed baig commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,  हौसला अफजा़ई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service