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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 में स्वीकृत सभी लघुकथाएँ
"समयाभाव के कारण इस बार न तो मैं साथी रचनाकारों की लघुकथाओं पर टिप्पणी कर पाया और न ही अपनी लघुकथा पर आयी टिप्पणियों का प्रत्युत्तर. इस हेतु मैं सभी से क्षमाप्रार्थी हूँ. मेरी लघुकथा को लेकर एक आम राय यह रही कि यह अस्पष्ट है. इसलिए इसे मैंने संशोधित…"
May 14
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"अधूरे ख़्वाब अंग्रेज़ सैनिकों की टुकड़ी इमारत में प्रवेश कर चुकी थी। “न्याय की देवी वो द्रौपदी है जिसकी अस्मत कृष्ण ने ही लूट ली।’’ बूढ़े चित्रकार ने उस न्यायाधीश पर कूची फेरते हुए कहा जो एक औरत की साड़ी उतार रहा था। औरत की हालत…"
Apr 29
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तज़ुर्बे (लघुकथा)
"कम शब्दों में शानदार लघुकथा कही है आपने आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी। प्रतीकों का उम्दा प्रयोग करते हुए बढ़िया व्यंग्य किया है आपने। ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Apr 9
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 में स्वीकृत लघुकथाएं
"हार्दिक आभार आदरणीय वीर मेहता जी. वैसे इस सूची में आप अपनी लघुकथा का नाम लेना भूल गए. सादर."
Apr 6
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 में स्वीकृत लघुकथाएं
"आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, लघुकथा गोष्ठी अंक 36 के सफल आयोजन, कुशल संचालन और त्वरित संकलन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आपसे निवेदन है कि क्रमांक 14 पर अंकित लघुकथा "विष बेल" को निम्न लघुकथा से प्रतिस्थापित कर दें. सादर धन्यवाद. विष…"
Apr 6
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ की आठवी वर्षगाँठ की ओबीओ परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ. "
Apr 1
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया बरखा जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया प्रतिभा मैम. हार्दिक आभार. सादर."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"हार्दिक आभार आदरणीय सत्यनारायण जी. सादर धन्यवाद."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"आपके इन शब्दों ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है आदरणीय कल्पना मैम. हौसला अफज़ाई के लिए हृदय से आभारी हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय राजेश मैम. सादर आभार."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी. सादर धन्यवाद."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"हार्दिक आभार आदरणीय मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीक़ी जी. सादर धन्यवाद."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर. लघुकथा को पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. हार्दिक आभार. सादर."
Mar 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"सादर आदाब आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी. इस प्रयास की सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ. धन्यवाद. सादर."
Mar 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

विद्वता के पैमाने /लघुकथा

एथेन्स के प्रसिद्ध चैराहे पर सुकरात जोकर बन कर खड़ा था। जो भी आता उसके ठिगने कद, चपटी नाक, मैले-कुचैले पुराने कपड़े, निकली हुई तोंद और नंगे पैर को देख कर हँसे बिना न रह पाता। ‘‘कौन हो तुम?’’ भीड़ में से किसी ने पूछा।



‘‘एक दार्शनिक।’’ उसे लगा कि नाम बताने की अपेक्षा यदि वह दार्शनिक कहेगा तो लोग उसे कुछ गंभीरता से लेंगे मगर वह गलत था। चैराहा एक बार पुनः ठहाकों से गूँज उठा।

‘‘वो देखो, दार्शनिक उन्हें कहते हैं।’’ विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर्स को बाहर आते देख…

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Posted on January 16, 2018 at 5:22pm — 10 Comments

बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा

‘अगर मैंने पाँच का यह सिक्का पाखाने में ख़र्च कर दिया और मुझे आज भी काम नहीं मिला तो फिर मैं क्या करूँगा?’ सार्वजनिक शौचालय के बाहर खड़ा जमाल अपनी हथेली पर रखे उस पाँच के सिक्के को देखकर सोच रहा था। तभी उसके पेट में फिर से दर्द उभरा। वह चीख उठा, ‘‘उफ! अल्लाह ने पाखाने और भूख का सिस्टम बनाया ही क्यों?’’



जिस उम्र में जवानी शुरु होती है उस उम्र में उसके चेहरे पर बुढ़ापा था। लेबर चैराहे के कुछ अन्य मजदूरों की तरह पिछले कई दिनों से जमाल को भी कोई काम नहीं मिला था। घर भेजने के बाद जो…

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Posted on January 14, 2018 at 1:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल : अब दवाओं का नहीं मुझ पे असर होने को है

अरकान : 2122 2122 2122 212

एक तरफ़ा इश्क़ मेरा बेअसर होने को है

ख़त्म यानी ज़िन्दगी का ये सफ़र होने को है

कहने को तो सर पे सूरज आ गया है दोस्तो

ज़िन्दगी में पर हमारी कब सहर होने को है

हर किसी ने हाथ में पत्थर उठाये देखिये

और फिर उनका निशाना मेरा सर होने को है

आपको चाहा था मैंने बेतहाशा टूट कर

अब यही तकलीफ़ मुझको उम्र भर होने को है

करना है कुछ आपको तो बस दुआएँ कीजिए

अब दवाओं का कहाँ मुझ पे असर होने को…

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Posted on December 26, 2017 at 10:00pm — 18 Comments

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

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Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 18 Comments

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