For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : आशिक़ों का भला करे कोई

अरकान : 2122 1212 22/112

आशिक़ों का भला करे कोई

मौत आए, दुआ करे कोई

पाँव में फूल चुभ गया उनके

जाए जाए दवा करे कोई

हाल पे मेरे रोता है शब भर

सुब्ह मुझ पर हँसा करे कोई

फ़र्क़ ज़ालिम पे कुछ नहीं पड़ता

चाहे कुछ भी कहा करे कोई

ये नहीं होता, ये नहीं होगा

हम कहें और सुना करे कोई

इन रईसों के शौक़ की ख़ातिर

मरता हो तो मरा करे कोई

बेवफ़ा मुझको कह रहा है वो

सामने आइना करे कोई

अपने अन्दर मैं क़ैद हूँ कबसे

पास आए, रिहा करे कोई

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 790

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 4:32pm

जी सर, सही कह रहे हैं। यह तीसरी ग़ज़ल है जिसमें ऐसा हुआ है। एक ग़ज़ल बहुत पहले की है और दो अभी की। पहले वाली ग़ज़ल में चूँकि मफ़हूम टकरा रहा था तो उस शेर को ग़ज़ल से हटा दिया। अभी की दो ग़ज़लों में से एक का मिसरा जो मेरे ख़याल में आया था उसे एक दूसरे शाइर ने पहले प्रयोग किया था। इसलिए उसे इनवर्टेड कॉमा में रख कर प्रयोग किया था। इस वाली ग़ज़ल में मुझे लगा कि शायद इसे प्रयोग किया जा सकता है, मफ़हूम अलग होने के कारण और मिसरा भी एक शब्द अलग होने के कारण। यह स्थिति भले ही अनजाने में हुई हो पर किसी भी लेखक के लिए सम्माननीय नहीं है। यदि आपको लगता है कि मुझे पहले वाली ग़ज़ल की तरह हाल की इन दोनों ग़ज़लों से भी ऐसे शेर हटा देना चाहिए तो मैं तुरन्त हटा देता हूँ। सादर।

Comment by Samar kabeer on November 10, 2022 at 3:40pm

//एक जिज्ञासा है कि अगर ऐसे मिसरे के ऊला (या सानी) से मूल से अलग एक दूसरे तरह का शेर उभर कर आ रहा हो तो उसे रखना चाहिए या नहीं जैसा कि इस शेर के ऊला में है//

ये तो ज़ाहिर है कि पूरा का पूरा मफ़हूम शे'र मेंनहीं है, सिर्फ़ एक ही मिसरा किसी दूसरे से मिल रहा है, अगर ऐसा अनजाने में हो तो दूसरी बात है,लेकिन अगर ये मालूम हो जाए कि मिसरा टकरा रहा है तो उसे नहीं रखना चाहिए,या उसे रखना ही है तो इन्वर्टेड में लिखें, ये आपकी तीसरी ग़ज़ल है शायद जिसमें ऐसा हुआ है ।

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 6:55am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी। आभारी हूँ।

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 6:54am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय ज़ैफ़ जी। हार्दिक आभार।

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 6:54am

आभारी हूँ आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। बहुत शुक्रिया।

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 6:53am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर। आप सही कह रहे हैं। एक जिज्ञासा है कि अगर ऐसे मिसरे के ऊला (या सानी) से मूल से अलग एक दूसरे तरह का शेर उभर कर आ रहा हो तो उसे रखना चाहिए या नहीं जैसा कि इस शेर के ऊला में है। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on November 10, 2022 at 6:49am

दिल से आभारी हूँ आदरणीय अमीरुद्दीन जी। बहुत-बहुत शुक्रिया।

Comment by Ashok Kumar Raktale on November 8, 2022 at 8:14am

आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. सभी अशआर उम्दा हैं. बहुत बधाई स्वीकारें. सादर

Comment by Zaif on November 8, 2022 at 4:51am

इन रईसों के शौक़ की ख़ातिर

मरता हो तो मरा करे कोई

बेवफ़ा मुझको कह रहा है वो

सामने आइना करे कोई

..

वाह। आदरणीय महेंद्र जी, क्या ही कहने। लाजवाब ग़ज़ल।।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 6, 2022 at 10:54am

आ. भाई महेंद्र जी, सादर अभिवादन। उत्तम गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
5 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
17 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Tuesday
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service