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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ कुशक्षत्रप जी , आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Feb 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"आद0डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। प्रश्न छोड़ती इस सूक्ष्म कविता पर आपको बधाई देता हूँ। सादर"
Jan 30
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपका बहुत बहुत आभार , बात कितनी भी छोटी हो आपकी नज़र में आ ही जाती है।आभार। न जाने क्यों कभी कभी मुझे लगता है कि क्या हमारी समस्याएं सच में इतनी बड़ी हैं या बस बात इतनी सी है कि सही छोर हाथ नहीं लग रहा है वरना उलझाव…"
Jan 30
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी जी , आभार ! आपकी नज़र का जो पद ही गई वरना मुझे तो लगा था कि शायद ही किसी की नज़र में आये यह सूक्ष्म कविता। कोशिश तो हाईकू की भी कर लेते हैं पर यह तो मात्र एक सूक्ष्म प्रश्न है , अक्सर हम अपने सामने की सर्वोच्च प्राथमिकताओं…"
Jan 30
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब,क्या बात है,वाह, दो पंक्तियों में आपने पूरी किताब लिख दी,इसे कहते हैं हुस्न-दस्तकारी, बहुत ख़ूब इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 28
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर
"वाह। बेहतरीन सारगर्भित कटाक्ष, विचारोत्तेजक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. विजय शंकर साहिब। हाइकु काव्य-विधा में भी 17 वर्ण व्यवस्था 5-7-5 परिपालन करते हुए बीच की पंक्ति में 'या' के स्थान पर 7 वर्णों की लघु पंक्ति जोड़ कर बेहतरीन संदेश वाहक…"
Jan 28
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर

सूक्ष्म कविता - गणतंत्र - डॉo विजय शंकरगण का तंत्र या तंत्र का गण ?मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jan 26
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी , स्वयं से साक्षात्कार बहुत ही कठिन होता है , आपने तो बहुत से प्रश्नों पर साक्षात्कार की मांग उठा दी वह भी एक ऐसे परिवेश में जहां अधिकाँश लोग जनतंत्र अर्थ से अभी तक अपरिचित हैं और अधिकाँश नेताओं की जनतंत्र की अपनी अपनी…"
Dec 30, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आदरणीय अजय गुप्ता जी , बहुत ही सशक्त लघु-कथा , बधाई , सादर।"
Dec 30, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय डॉo टी आर शुकुल जी , अच्छी प्रस्तुति, अच्छा व्यवसाय। बधाई ,सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी , अरे वाह। बधाई , सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय विनय कुमार जी , एक गंभीर प्रस्तुति। हार्दिक बधाई , सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय जी , ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय विनय कुमार जी , आपकी पकड़ को नमन। मैं यही सदेश देना चाहता था कि वास्तव में यह वरदान ही है , विशेषतः नौकरी पेशा दम्पतियों के लिए। हार्दिक आभार एवं धन्यवाद। सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय सुश्री बबीता गुप्ता जी , बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Oct 31, 2018
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी , आजकल के जीवन का एक ( आकस्मिक ) पहलु , बहुत ही सुन्दर प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त। बधाई , इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए , सादर।"
Oct 31, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment Wall (18 comments)

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

जिंदगी के लिए — डॉo विजय शंकर

कभी लगता है ,

वक़्त हमारे साथ नहीं है ,

फिर भी हम वक़्त का साथ नहीं छोड़ते।

कभी लगता है ,

हवा हमारे खिलाफ है ,

फिर भी हम हवा का साथ नहीं छोड़ते l

कभी लगता है ,

जिंदगी बोझ बन गयी है ,

फिर भी हम जिंदगी को नहीं छोड़ते l

कभी लगता है

सांस सांस भारी हो रही है ,

फिर भी हम सांस लेना नहीं छोड़ते l

ये सब जान हैं

और जान के दुश्मन भी l

जिंदगी की लड़ाई हम

जिंदगी में रह कर लड़ते हैं ,

जिंदगी के बाहर जाकर कौन…

Continue

Posted on June 16, 2019 at 10:04pm

गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर

सूक्ष्म कविता - गणतंत्र - डॉo विजय शंकर

गण का तंत्र
या
तंत्र का गण ?

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 26, 2019 at 10:47am — 6 Comments

टुकड़ों में बटा आदमी - डॉo विजय शंकर

टुकड़ों में बटा आदमी 

टुकड़ों की बात करता है , 

टुकड़ों को छोटे , और छोटे 

टुकड़ों…

Continue

Posted on October 8, 2018 at 10:05pm — 18 Comments

टकराव — डॉo विजय शंकर

फिर एक बार 

स्वाधीनता का 

जश्न मनाया हमने। 

पर अभी भी स्वाधीनता 

का…

Continue

Posted on August 15, 2018 at 9:59am — 8 Comments

 
 
 

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