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babitagupta commented on Admin's page FAQ
"सर जी ,एक बात जाननी थी की ३०-३१ मई को होने वाले लाइव लघुकथा में कैसे शामिल हो सकते हैं.तथा विषय पर लिखी गई रचना को किस तरह इस संगोष्ठी में शामिल किया जाया.कृपया करके बताने का कष्ट कीजिएगा तो अति मेहरवानी होगी. बबीता गुप्ता "
23 hours ago
babitagupta replied to योगराज प्रभाकर's discussion लघुकथा विधा : तेवर और कलेवर
"सादर नमस्ते सर जी ,बहुत ही विस्तृत जानकारी से अवगत करवाने के लिए आभार ."
yesterday
babitagupta commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चाय पर चर्चा (लघुकथा)
"वर्तमान राजनेताओ की छवि और कार्यशैली का  प्रतीकात्मक शैली में वयां करना.बहुत ही सुंदर लगा ,प्रस्तुत रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए आ.सर जी."
yesterday
babitagupta commented on Mohan Begowal's blog post किराये के रिशते (लघुकथा)
"बुजुर्गों की बेटों के घर बेमन से रहने की मनोस्थिति बयाँ की हैं,आधे अधूरे वाक्यों में सब कुछ वयां कर देती हैं,बहुत ही ह्रदय स्पर्शीय लघुकथा.प्रस्तुत रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए आ.सर जी."
yesterday
babitagupta commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"आदरणीया दी,संकेतात्मक शैली में लडकी के बचाव में आई सभी निर्जीव वस्तुओं का दर्शाना ,यह संदेश प्रेषित करता हैं की सहयोग और समुकिकता से बढ़ते अपराधों को रोका जा सकता हैं,प्रस्तुत रचना के लिए ढेर सारी बधाइयां स्वीकार करे."
yesterday
babitagupta commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"विचारोत्तेजक पंक्तियाँ सत्यता को उजागर करती,बधाई व्विकार कीजिये आदरणीय सर जी."
yesterday
babitagupta commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बोलती निगाहें (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी. आज के बच्चों और माता पिता के आपसी सोच मे सामंजस्य दर्शाती बहुत ही अच्छी लघु कथा है । प्रकाशित रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा ।"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on babitagupta's blog post हमारा परिवार [ कविता ] परिवार दिवस पर
"परिवार पर सब कुछ समेटने की कोशिश करती बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता गुप्ता जी। किसी छंद में ढालने पर आपका परिश्रम निखर कर सामने आ सकता है। आज अंतिम दिन चल रहे ओबीओ काव्य छंदोत्सव में उपस्थित हो कर बहुत कुछ सीखने की कोशिश की जा सकती है।"
May 19
babitagupta is attending sharadindu mukerji's event

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की मासिक गोष्ठी at 37, रोहतास एन्क्लेव, रवींद्र पल्ली

May 20, 2018 from 3:30pm to 6pm
यह हर्ष का विषय है कि ओबीओ लखनऊ चैप्टर अपने छठे वर्ष में पदार्पण कर रहा है. मई 2013 में स्थापित होने के बाद से पिछले पाँच वर्षों में वह निरंतर सक्रिय रहा है. नए वर्ष की पहली साहित्यिक गोष्ठी रविवार दिनांक 20 मई 2018 को आयोजित की जा रही है जिसमें हमेशा की तरह काव्यपाठ तो होना ही है, उससे इतर कुछ विचार-विमर्श करने की परिकल्पना है. सभी सुधी-जन सादर आमंत्रित हैं.  - संयोजकSee More
May 18
babitagupta posted blog posts
May 17
babitagupta commented on Kumar Gourav's blog post सफेदपोश (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी, वर्तमान व्यवस्था पर शब्दों से अच्छा कटाक्ष किया है, बधाई स्वीकार कीजिए प्रस्तुत रचना के लिए ।"
May 16
babitagupta commented on Sushil Sarna's blog post निष्कलंक कृति ...
"आदरणीय सर जी, बहुत ही सटीक शब्दों में भावों को पिरोया है, बधाई स्वीकार कीजिए प्रस्तुत रचना के लिए ।"
May 16
Mohammed Arif commented on babitagupta's blog post 'एक फरियाद - माँ की'
"आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,                               लाजवाब और विचारोत्तेजक रचना । मैं आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी की बातों से सहमत हूँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 15
babitagupta commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कड़वे जलवे (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी, नमस्कार, बहुत ही सरल ,सुन्दर शब्दों में प्रस्तुतीकरण, प्रकाशित रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
May 14
babitagupta commented on babitagupta's blog post सामाजिक सरोकार
"आदरणीय सर जी, त्रुटि की ओर धयानाकर्षित ककरने के लिए सधन्यवाद।"
May 14
babitagupta commented on मोहन बेगोवाल's blog post अधूरा रिश्ता (लघुकथा)
"अच्छी रचना प्रस्तुति के लिए आदरणीय सर जी बधाई स्वीकार कीजिए"
May 14

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Gender
Female
City State
chhattisgarh
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Bilaspur
Profession
Retired teacher
About me
Simplicity

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टेली फोन के कारनामें [कविता] [विश्व संचार दिवस पर ]

मुंह अँधेरे ही भजन की जगह,फोन की घंटी घनघना उठी,

घंटी सुन फुर्ती आ गई,नही तो,उठाने वाले की शामत आ गई,

ड्राईंग रूम की शोभा बढाने वाला,कचड़े का सामान बन गया,

जरूरत अगर हैं इसकी,तो बदले में  कार्डलेस रख गया,

उठते ही चार्जिंग पर लगाते,तत्पश्चात मात-पिता को पानी पिलाते,…

Continue

Posted on May 17, 2018 at 12:00pm

हमारा परिवार [ कविता ] परिवार दिवस पर

छोटा-सा,साधारण-सा,प्यारा मध्यमवर्गीय हमारा परिवार,

अपने पन की मिठास घोलता,खुशहाल परिवार का आधार,

परिवार के वो दो,मजबूत स्तम्भ बावा-दादी,

आदर्श गृहणी माँ,पिता कुशल व्यवसायी,

बुआ-चाचा साथ रहते,एक अनमोल रिश्ते में बंधते,

बुजुर्गों की नसीहत…

Continue

Posted on May 16, 2018 at 6:48pm — 1 Comment

व्यथित मन की औषधि हैं-संगीत [सामाजिक सरोकार ]

वर्तमान में भागमभाग की जिन्दगी में मनुष्य एक ऐसी मायवी दुनिया में जी रहा हैं जहां ऊपर से अपने आप को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इन्सान जताता हैं,जबकि वास्तव में वो एक मशीनी जिन्दगी जी रहा हैं,तनावग्रस्त,सम्वेदनहीन,एकाकी हो गया हैं जहाँ सम्वेदनशीलता और सह्रदयता अकेली हो जाती हैं और एक उठला जीवन जीने लगता हैं .ऐसे में उसेइस कोलाहल भरी दुनिया से छुटकारा मिलने का एक मात्र साधन -सात सुरों से सजा संगीत होता हैं.संगीत ही ऐसी औषधि होती हैं जिसमें ह्रदय से बिखरे आदमी को…

Continue

Posted on May 16, 2018 at 6:02pm

'एक फरियाद - माँ की'

ममता का सागर,प्यार का वरदान हैं माँ,

जिसका सब्र और समर्पण होता हैं अनन्त,

सौभाग्य उसका,बेटा-बेटी की जन्मदात्री कहलाना,

माँ बनते ही,सुखद भविष्य का बुनती वो सपना,

इसी 'उधेड़बुन'में,कब बाल पक गये,

लरजते हाथ,झुकी कमर.सहारा तलाशती बूढ़ी…

Continue

Posted on May 13, 2018 at 1:00pm — 5 Comments

 
 
 

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"मोहतरमा अंजली गुप्ता 'सिफ़र' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
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"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ अशआर और वक़्त चाहते हैं,जैसे ,छटे शैर…"
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"मुबारकबाद कबूल करें आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी। बेहद उम्दा पेशकश"
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"ठोकरों में जो हर इक शख़्स की आया देखोकितने टुकड़ों में है वो आइना बिखरा देखो मेरी तन्हाई में डूबी…"
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