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babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"जी। बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सरजी ।"
Dec 30, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"जी सुझाव देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, आदरणीय सरजी। "
Dec 30, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"जी,कोशिश करती हूँ।  बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सरजी। "
Dec 30, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"जी।बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सरजी। "
Dec 30, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"मेरे हिस्से की जमीन........‘हमारे किसान भाइयों,सब की लहलहाती फसलों में आपकी मेहनत दिखती हैं। ऊपर वाले के सहयोग के साथ ही सरकार के सहयोग व खुद की मेहनत आपके लहलहाते खेत बयां करते हैं। देश के अन्नदाताओं को दिये जा रहे सम्मान में इस बार सोमदास…"
Dec 30, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-122
"हाइकु खून पसीनाबहाता किसानअन्न उगाता रात को जागेरखवाली करताठंड सहता भूखा रहतादो वक्त का भोजनउगाने वाला रीढ़ की हड्डी हमारे समाज कीवो अन्नदाता हैं कहलाताकृषिप्रधान भारतदेश हमारा | स्वरचित व अप्रकाशित हैं। बबीता गुप्ता  "
Dec 13, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-121
"अतुकांत कविता  बदलाव की दरकार..... कठिन समय संत्रास-त्रासदी भरा घिर आई दुःख की कारी बदरिया उमंगों,उत्साह,प्रेम से रीता जीवन भावहीन होकर मौन हो गया हताशाभरी राहें,दहशत ने डेरा डाला चपेटता मन को आशंकाओं भरा तूफान समय मांगता,नव शैली सृजन कर कोरे…"
Nov 14, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"बहुत-बहुत धन्यवाद, कनक जी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"कोरोना काल की पेचीदी जिन्दगी को दर्शाती रचना।बहुत-बहुत बधाई, आदरणीय शेख सरजी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"बहुत सुन्दर रचना।बहुत-बहुत बधाई आदरणीय अनिल सरजी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"सीख देती रचना।बहुत-बहुत बधाई आदरणीय तेजवीर सरजी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"बहुत सुन्दर रचना।अंतर बताती।बहुत-बहुत बधाई, मनन जी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"बहुत कटु सत्य।बहुत-बहुत बधाई, कनक जी।"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-67 (विषय: तलाश)
"सुकून 'क्या तुम भी किस सोच में खोई-खोई सी रहती हो?किस बात की चिन्ता तुम्हें घुन की तरह खाए जा रही हैं? 'किसी बात की नहीं, बस अपने आपकी सोच परेशान किए रहती हैं,'सोफे पर फैलते हुये दृष्टि ने अपने में खोई पूर्वी से पूछा।अप्रत्याशित…"
Oct 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"कड़वा सच पुरूष वर्चस्व समाज का।बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीया दी।"
Aug 31, 2020
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"जीने की उम्मीद भरी दिलासा आखिर अपना रंग दिखाती हैं। बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीया दी।"
Aug 31, 2020

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Profession
Retired teacher
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Simplicity

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At 11:36pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीया बबिता गुप्ता जी बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का

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मेरे पिता (लेख)

मेरे पिता

पिता शब्द स्वयं अपने आप में बजनदार होता हैं। हाथ की दसों उंगलियों की तरह हर पिता का व्यक्तित्व अलग होता हैं। पिता को परिभाषित किया जा सकता हैं, उपमानों से अलंकारित किया जा सकता हैं पर रेखांकित नही किया जा सकता।बस,उम्मीद की जा सकती हैं कि हमारे पिता बहुत अच्छे हैं, बस थोड़े-से ऐसे और होते। सभी बच्चों के पिता उनके हीरो होते हैं। ऐसे ही मेरे पिता मेरे किसी सुपरमेन से कम नहीं हैं, हरफनमौला हैं। बचपन से मैंने उनका सख्त चेहरा,कठोर अनुशासनबद्ध,जुझारूपन देखा हैं। मितभाषी हम सब के…

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Posted on June 21, 2020 at 3:03pm — 1 Comment

फूल

फूल-सी सुकोमल,सुकुमारी

कौन-सा फूल तेरी बगिया की

न्यारी-प्यारी माँ-बाबा की दुलारी

मुस्कराती ,बाबा फूले ना समाते

फूल-से झङते माँ होले-से कहती

पर दादी झिङकती-फूल कोई-सा होवे

पर सिर पर ना ,चरणों में चढाये जावे

उस समय कोमल मन को समझ ना आई

जब किसी के घर गुलदान की शोभा बनी

तब बात समझ आई

नकारा,छटपटाई,महकना चाहती थी

टूटकर अस्तित्वहीन नहीं होना था

पर असफल रही,दल-दल छितर-बितर गया

सोचती,मैं फूल तो हूँ

चंपा,चमेली,चांदनी,पारिजात नहीं

गुलाब…

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Posted on April 21, 2020 at 4:32pm

जीवन का कर्फ्यू

जीवन का कर्फ्यू

रोजमर्रा की तरह टहलते हुये रामलाल उद्यान में गोपाल से मिला तो उसके चेहरे की झाईयां से झलकती खुशी कुछ और ही बयां कर रही थी।इससे पहले मैं कुछ पूछता कि उसने कहा, 'यार,कल जैसा दिन गुजारे जमाना हो गया।'

'पर यार कल तो कर्फ्यू लगा था।न किसी से मिलना-जुलना हुआ।कितना बोरियत भरा दिन था?'

'तेरे लिए था।पर इसने मेरी जिन्दगी के कर्फ्यू को हटा दिया।'

'कुछ समझा नही?'प्रश्न भरी निगाह से रामलाल ने गोपाल की तरफ देखकर कहा।

गोपाल ने पास पङी बेंच पर उससे बैठने का इशारा…

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Posted on March 22, 2020 at 11:33pm — 2 Comments

परिचय [लघु कथा ]

परिचय

मेला प्रांगण में आयोजित बारहवाँ साहित्य सम्मेलन में देशभर के साहित्यकारों का जमावड़ा लगा हुआ था,जिसमें माननीय राज्यपाल के करकमलों से पुस्तक का विमोचन किया जाना था.

आगंतुकों में शहर के प्रतिष्ठित,मनोहर बाबू भी विशिष्ठजन की पंक्ति मंं विराजमान थे.शीघ्र ही मंच पर राज्यपाल की उपस्थित से सन्नाटा खिंच गया.औपचारिकताओं के पश्चात,जिस लेखक की किताब ‘मेरा परिचय’का अनुमोदन किया जाना था,उसे संबोधित कर मंच पर आने का आग्रह किया गया.तो सभी की उत्सुकता में एकटक निगाहें मंचासीन होने वाले के…

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Posted on March 4, 2019 at 10:45pm — 7 Comments

 
 
 

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