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babitagupta commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post रक्तसिक्त हाथ (लघुकथा)
"प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती बेहतरीन रचना ।बधाई, आदरणीय सतविन्दर सरजी।"
Jan 3
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"बेहतरीन रचना द्वारा नेताओं के  वादों  पर तंज कसती। बधाई,आदरणीय तेजवीर सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आभार ,विनय सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आभार महेंद्र सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आभार,आदरणीय शहजाद सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"गुस्सा शायद ,बच्चा अगर मर जाता तो वो सब भुगतना पड़ता,जो उसके मुंह से निकला,क्योकि आज के वातावरण में यह लहर बह हैं,कर भला,हो बुरा ,और अगर पिल्ला मर जाता,तो कौन जबाव-तलब करने आ रहा. फिर भी जान किसी की भी जाये,मानवीयता तो होनी ही चाहिए।बेहतरीन…"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"पड़ोसियों का जीवन में महत्वता क्या हैं,दर्शाती  बेहतरीन रचना। बधाई,आदरणीया अनीता दी."
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"जीवन के गणित में उलझे सवाल काअनंत चिह्न में विलीन होता।बेहतरीन रचना,बधाई,आदरणीय महेंद्र सरजी। "
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"भ्र्ष्टाचार से त्रस्त व्यथित व्यक्ति की अंतर्चेतना को जगाती बेहतरीन रचना।बधाई,आदरणीय शहजाद सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"सही रास्ते चलकर जिंदगी जीने का सकारात्मक संदेश देती बेहतरीन रचना।बधाई,आदरणीय विनय सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"बड़े ही हास्यस्पद तरिके से मरीज की अंतर्मन की व्याधियों का कारगर इलाज।बेहतरीन रचना,बधाई,आदरणीय मनन सरजी."
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"स्वनिर्णय लेने का हक ,नारी की अंतर्चेतना को जाग्रत करती बेहतरीन रचना।बधाई,आदरणीय मोहन सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"कभी-कभी बड़ों के  बाहरी अनुशासन के कारण उनके नजरिये के प्रति बच्चे भर्मित हो जाते हैं,इसी को दर्शाती बेहतरीन रचना।बधाई ,आदरणीय गिरधारी सरजी।"
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"सैद्धांतिक और व्यवहारिक ज्ञान पर कटाक्ष करती बेहतरीन रचना।बधाई,आदरणीय शुकुल सरजी."
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"बेहतरीन रचना,जहां एक ओर रूढ़िवादी सोच से बाह्रर निकाल समय साथ चलना  सिखाती हैं,तो वही दूसरो ओर लक्ष्यहीन दिशा में चलने लगता हैं,मन के भटकाव को दर्शाती रचना।बधाई आदरणीय इकवाल सरजी."
Dec 31, 2018
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"सोई हुई चेतना.....   रामदीन काका का पटा हैं,सो उनके बेटा-दामाद ,नाते रिश्तेदार सभी उपस्थित होकर,कृतज्ञ हो रहे थे.पूजा की पूरी तैयारी होने पर पंडितजी ने काका का फोटो पूजा स्थल पर रखने के लिए कहा.तभी काका की बड़ी बहू की आवाज ने सभी का…"
Dec 31, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
chhattisgarh
Native Place
Bilaspur
Profession
Retired teacher
About me
Simplicity

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At 7:30am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

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उम्मीद की रोशनी (अतुकांत कविता)

चुनावी महाकुंभ के नगाडे की टंकार में

चौतरफा राजनीति का हुआ महौल गरमागरम

ईद के चांद हुए नेता जो ,

चिराग लेकर ढूंढने पर थे नदारद

योजनाओं की बरसात होने लगी

धूल उडती गड्ढे वाली सडकों पर

चुनावी सीमेंट चढ गया

उजाड बंजर खेती पर

हरियाल करने का मरहम लगाते

कंबल, साडी, दारू, मुर्गा का

बंदरबांट का फार्मूला चलाते

नित नए तरीकों से वोटरों को रिझाते

चरणवंदन कर, घडियाली ऑंसू बहाते

खोखले वायदों की दहाड,

ना खायेंगे, ना खाने देगे

दिए प्रलोभन, दिखाई…

Continue

Posted on November 22, 2018 at 3:19pm — 5 Comments

बदहाल जनता (तुकांत अतुकांत कविता)

प्रजातांत्रिक देश स्वतंत्र व्यक्ति

अभिव्यक्ति की आजादी

विकास यात्रा सत्तर साल की

सरकारी नक्शे पर दर्ज इलाका

हालात जस के तस

टूटे घने जंगलों में बसा वीराना सा गांव

टूटी फूटी नदी, दम तोडती पुलिया

जर्जर धूल उडाती सडकें

विकराल संकटों से जूझ रहा

जीवन से लडता

रोजीरोटी की जद्दोजहद

मैले कुचैले अर्धवदन ढके

बदहाली मे आपस में दुख बांटते

अपने गांव की पीडा समझाते

चेहरे पर पीडा झलक आती

नेताओं के झूठे वादे घडियाली ऑसू

बिना लहर के हिलोरें…

Continue

Posted on November 19, 2018 at 7:52pm — 7 Comments

दोस्ती [तुकांत - अतुकांत कविता]

बचपन की यादों का अटूट बंधन 

बिना लेनदेन के चलने वाला 

खूबसूरत रिश्तों का अद्वितीय बंधन 

एक ढर्रे पर चलने वाली जिंदगी में 

नई-नई सोच से रूबरू करवाया 

अर्थहीन जीवन को अर्थ पूर्ण बनाया 

जीने का एक…

Continue

Posted on August 27, 2018 at 8:00pm — 4 Comments

रिश्तों की डोर [लघुकथा]

दरवाजे की घंटी सुन,  दरवाजा मेड शीला ने  खोला तो अपरिचित समझ मुझे आवाज लगाने पर मैं देखने गई तो सामने सलिल भैया और शालिनी भाभी को  देख हतप्रद रह गई.मुझे इस तरह देख,भैया कहने लगे- 'भूल गई क्या ?मैं तुम्हारा भाई .......

मैं अपने को संभालते हुए ,उन्हें  इशारे से अंदर आने को कह,कहने लगी- 'अरे नहीं भैया,आपको अचानक इतने सालो बाद देखा ....बस और कुछ नहीं।'

भाभी मेरी मनोस्थिति  समझ भैया को डाटने वाले लहजे में कहा - 'अब ,उसे झिलाना छोडो'।और मुझे रसोई में ले जाकर खाना बनाने में हाथ बटाँने…

Continue

Posted on August 26, 2018 at 9:42pm — 8 Comments

 
 
 

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