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Nilansh
  • Male
  • Patna,Bihar
  • India
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Gender
Male
City State
delhi
Native Place
patna
Profession
engineer
About me
writing ,imagining ,reading and learning

Nilansh's Blog

काश की इस दश्त में ऐसा रिवाज़ हो !

ग़ालिब-ओ- मीर हो या फैज़-ओ-फ़राज़ हो 

हर जगह शायरी का तख़्त-ओ-ताज हो 



जब दवा हो जाए नाकाम दोस्तों 

तब ग़ज़ल से ही गम का इलाज़ हो 



हो कलम हाथों में और मिटे खंजर 

काश की इस दश्त में ऐसा रिवाज़ हो !



आज लम्हों को जियो दिलनवाज़ी से 

क्या पता कल वक़्त का कैसा मिज़ाज हो 



अब कोई तर्क-ए-वफ़ा, न करें साहब 

न कोई भी पर्दा हो ,न कोई राज़ हो 



ये आरज़ू थी कि जो कब से नहीं…
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Posted on November 23, 2012 at 12:31pm — 10 Comments

न जाने किस सागर में कश्ती का ठिकाना हो जाये

 

न जाने किस सागर में कश्ती का ठिकाना हो जाये

किस बात पे चर्चे हों जाएँ ,फिर कैसा फ़साना हो जाये  

कागज़ पे लिख लिख कर तुम  कोई सन्देशा न भेजो 
कहीं नेकी के फितरत में नहीं दुश्मन ज़माना  हो…
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Posted on June 10, 2012 at 10:55am — 8 Comments

क्यूँ तेरा अब ,तुझी पे इख्तियार नहीं

क्यूँ तेरा अब, तुझी पे इख्तियार नहीं?
कठपुतली बना, पर सोगवार नहीं ?

मेहनत पसीने की रोटियाँ तो तोड़
कि साथ देता ज़माना, हर बार नहीं

ज़मीर तो होगा ही दामन में तेरे
शोहरत न रहे, तू खतावार नही

वो छीन लेंगे तेरी आँखों का पानी
टिकती है खुदाई, कोई किरदार नहीं

खबरों में है पर दिलों में कहाँ
तू अपने ही खातिर, वफादार नहीं

Posted on May 19, 2012 at 11:00am — 13 Comments

उदास नहीं देख सकता

स्याह रातों में चाँद का गिलास नहीं देख सकता

उखड़ी उखड़ी आवाज़ तेरी, बोझल सांस नहीं देख सकता

.

तेरे माथे पर कोई दोष न होगा कभी ,

तुझे मजबूर, बद -हवास नहीं देख सकता

.

हाँ , तेरी रुसवाई तो फिर भी सह लूँगा ,

तुझे खुद से नाराज़, उदास नहीं देख सकता

.

मेरी रूह में घुल गयी है मधु तेरी रहमत की

क्या हुआ कि रहूँ तनहा, तुझे आस पास नहीं देख सकता

.

हैं अजीब हालात, मगर तेरे कदम न रुकें

तुझे बिखरा हुआ सा, उजास…

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Posted on May 12, 2012 at 3:30pm — 13 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 12:38pm on August 26, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:56am on September 10, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

ग़ज़ल को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सहित सादर आभार

At 12:31pm on August 26, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

janmdiwas ki hardik shubhkaamnaayein...

At 5:42pm on June 19, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

नीलांश भाई बहुत बहुत धन्यवाद।

At 10:42pm on May 29, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

नीलांश जी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी दाद के लिए। आपको ग़ज़ल पसंद आई । मेरी मेहनत सार्थक हुई !

 
 
 

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