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Alok Rawat
  • Male
  • Lucknow, Uttar Pradesh
  • India
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Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मामूर हुयी उमर खैय्याम के प्रभाव से हिन्दी काव्यानुवाद की परंपरा     ////  डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"बहुत ही सारगर्भित जानकारी उमर खय्याम और उनकी रचना के विषय में। विभिन्न साहित्य कारों द्वारा और विभिन्न भाषाओँ में किये गए अनुवादों की वृहत्तर जानकारी आदरणीय डॉक्टर गोपाल नारायण जी द्वारा प्रस्तुत की गयी है। निस्संदेह हम सभी को उमर ख़य्याम की रचना को…"
Feb 2
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव
"मेरी चाचीजी का निधन हो जाने के कारण मैं इस बार गोष्ठी में भाग नहीं ले सका और इतनी अहम् चर्चा में भाग लेने से वंचित रह गया। ये एक बहुत अच्छी परिपाटी शुरू हुई है कि इस प्रकार के विषयों पर चर्चा की जाए। किन्तु मेरा मानना है कि इस तरह की चर्चाओं को बहुत…"
Feb 2
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तवजी, आपका "चंदायन" और "पद्मावत" से सम्बंधित तुलनात्मक आलेख पढ़ा। ये बात बिलकुल सत्य है कि फिल्म पद्मावत के बाद बहुत से लोगों को पद्मावत और मालिक मुहम्मद जायसी के विषय में ज्ञात हुआ होगा। अन्यथा…"
Jan 7
Alok Rawat commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सारे जहाँ से अच्छा (कहानी )
"बहुत ज़बरदस्त लघुकथा लिखी है आदरणीय डॉक्टर श्रीवास्तव जी। बहुत करारा व्यंग्य है।"
Dec 13, 2018
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पुस्तक समीक्षा

इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |
Nov 30, 2018
Alok Rawat commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"आदरणीय समर कबीर साहब, जनाब शादाब लाहौरी की ज़मीन में बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है तेरे ख़याल से कैसे कलाम करता चलूँ बहुत ही बेहतरीन है। आपको बहुत बहुत मुबारक़बाद"
Sep 27, 2018
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"भाई ब्रज जी , धामी जी , श्यामजी , आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया।"
Jul 25, 2018
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"जनाब कबीर साहब , आदाब। मेरी तबियत ख़राब होने के कारण जवाब देने में देरी हुई। आपके सुझावों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।"
Jul 25, 2018

सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"प्रिय आलोक जी, आपको इस मंच पर देखकर बेहद अच्छा लग रहा है. आपकी रचना के बारे में कुछ भी कहने में मैं असमर्थ हूँ......विद्वानों की प्रतिक्रिया आपको और ऊँचाईयों तक ले जाएगी क्योंकि व्यक्तिगत रूप से आपको जानता हूँ....आप सलाह को हमेशा सकारात्मक ढंग से…"
Jul 15, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत और सरस  ग़ज़ल कही है आदरणीय..सादर"
Jul 13, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आ. आलोक जी, अच्छी गजल हुयी है हार्दिक बधाई ।"
Jul 11, 2018
Shyam Narain Verma commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
""क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को " ..सादर "
Jul 11, 2018
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"कभी गुस्सा कभी आँसू कभी फिर रूठना उनका इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है,'फिर रूठना',गुरप्रीत जी का सुझाया मिसरा उचित है,देखियेगा ।"
Jul 11, 2018
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आख़री शैर इस तरह और बहतर हो सकता है:- 'बस इक पल के लिये ही उनकी आँखों से लड़ीं आँखें और इतनी सी ख़ता पर वो मेरा ईमान लेते हैं'"
Jul 11, 2018
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"जनाब आलोक रावत जी आदाब, 'फ़िराक़' की ज़मीन में अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,ग़ौर कीजियेगा । 'ज़रा हम भी तो देखें धार उन क़ातिल निगाहों…"
Jul 11, 2018
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , पहली बार इस मंच पर आपकी ये ग़ज़ल पढ़ी , और निश्चित ही बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। और हाँ  इस्लाह तो उस्ताद ही करेंगे , मैं तो खुद एक अदना सा विद्यार्थी हूँ ग़ज़ल का। जो प्रश्न मन उठते है उन पर आपस में बातचीत से सीखने की कोशिश रहती है।…"
Jul 11, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow Uttar Pradesh
Native Place
Lucknow
Profession
Bank Employee
About me
Aahat Lucknowi

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है
ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके
अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है
क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं
ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना
खुद ही खुश रहने की तरकीब निकाली जाए

जब किसी को भी गुनाहों की सज़ा देनी हो
इक नज़र अपने गुनाहों पे भी डाली जाए

मौलिक एवं अप्रकाशित

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At 7:03pm on June 3, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सुखद आश्चर्य . ओ बी ओ में आपका स्वागत है . अब आप ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर के सम्मानित सदस्य है . दादा शरदिंदु जी को इस रत्न की प्राप्ति पर बधाई . मेरी  रचना के पाठको में एक वृद्धि और हुयी . वाह , अति सुन्दर .

 

At 11:58am on June 2, 2017, Alok Rawat said…

कभी डोली सजाते हैं कभी अर्थी उठाते हैं
हम इक दूजे के सुख दुख मे हमेशा काम आते हैं
मैं जिस बस्ती मे रहता हूँ वो हिन्दुस्तान है मेरा
मुसलमान दोस्त हैं बच्चे मुझे चाचा बुलाते हैं

Alok Rawat's Blog

ग़ज़ल

मुहब्बत में हमीं मुजरिम हैं हम ये मान लेते हैं

चलो अब तुम कहो तुमसे तुम्हारी जान लेते हैं



ज़रा हम भी तो देखें धार उन क़ातिल निगाहों की

सुना है वो इसी ख़ंजर से सबकी जान लेते हैं



जो फिर देखो उन्हें तो वो जुदा लगते हैं पहले से

कहें कैसे कि हम उनको सही पहचान लेते हैं



कभी गुस्सा कभी आँसू कभी फिर रूठना उनका

वो कितने इम्तिहाँ मुझसे मेरे भगवान लेते हैं



तो फिर दुनिया क्या इस दुनिया का रखवाला भी झुकता है

मुहब्बत करने वाले भी अगर ज़िद ठान… Continue

Posted on July 9, 2018 at 6:54pm — 20 Comments

ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए 

आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है 

ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके 

अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है 

क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं 

ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना 

खुद ही…

Continue

Posted on November 13, 2017 at 2:30pm — 17 Comments

 
 
 

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