For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Alok Rawat
  • Male
  • Lucknow, Uttar Pradesh
  • India
Share

Alok Rawat's Groups

 

Alok Rawat's Page

Latest Activity

Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"भाई ब्रज जी , धामी जी , श्यामजी , आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया।"
Jul 25
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"जनाब कबीर साहब , आदाब। मेरी तबियत ख़राब होने के कारण जवाब देने में देरी हुई। आपके सुझावों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।"
Jul 25

सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"प्रिय आलोक जी, आपको इस मंच पर देखकर बेहद अच्छा लग रहा है. आपकी रचना के बारे में कुछ भी कहने में मैं असमर्थ हूँ......विद्वानों की प्रतिक्रिया आपको और ऊँचाईयों तक ले जाएगी क्योंकि व्यक्तिगत रूप से आपको जानता हूँ....आप सलाह को हमेशा सकारात्मक ढंग से…"
Jul 15
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत और सरस  ग़ज़ल कही है आदरणीय..सादर"
Jul 13
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आ. आलोक जी, अच्छी गजल हुयी है हार्दिक बधाई ।"
Jul 11
Shyam Narain Verma commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
""क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को " ..सादर "
Jul 11
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"कभी गुस्सा कभी आँसू कभी फिर रूठना उनका इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है,'फिर रूठना',गुरप्रीत जी का सुझाया मिसरा उचित है,देखियेगा ।"
Jul 11
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आख़री शैर इस तरह और बहतर हो सकता है:- 'बस इक पल के लिये ही उनकी आँखों से लड़ीं आँखें और इतनी सी ख़ता पर वो मेरा ईमान लेते हैं'"
Jul 11
Samar kabeer commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"जनाब आलोक रावत जी आदाब, 'फ़िराक़' की ज़मीन में अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,ग़ौर कीजियेगा । 'ज़रा हम भी तो देखें धार उन क़ातिल निगाहों…"
Jul 11
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , पहली बार इस मंच पर आपकी ये ग़ज़ल पढ़ी , और निश्चित ही बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। और हाँ  इस्लाह तो उस्ताद ही करेंगे , मैं तो खुद एक अदना सा विद्यार्थी हूँ ग़ज़ल का। जो प्रश्न मन उठते है उन पर आपस में बातचीत से सीखने की कोशिश रहती है।…"
Jul 11
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , आपकी इस मंच पर शायद ये पहली ग़ज़ल है और निश्चित ही बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। और हाँ मैंने कोई इस्लाह नहीं की इस पर , इस्लाह तो उस्ताद ही करेंगे , मैं तो खुद एक अदना सा विद्यार्थी हूँ ग़ज़ल का। जो प्रश्न मन उठते है उन पर आपस में बातचीत…"
Jul 11
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय दादा गोपालजी, सादर प्रणाम , आप ठीक कहते हैं | आप सदैव मेरे शुभचिंतक रहे हैं | ओ बी ओ में ये मेरी दूसरी ग़ज़ल है | पहली ग़ज़ल में मुझे आदरणीय समर कबीर साहब का और अन्य लोगों का उचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था | मेरी दृष्टि में सीखने के लिए इस मंच से…"
Jul 11
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीया नीलम जी आपका बहुत बहुत आभार"
Jul 11
Alok Rawat commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया, इस्लाह के लिए | आप जैसे गुणीजनों के सान्निध्य में निश्चय ही कुछ सीख सकूंगा | मतले में सिर्फ मुहब्बत में ईमानदारी की बात की है कि मैं अपनी ग़लती स्वीकार करता हूँ लेकिन तुम्हारा अपने बारे में क्या ख्याल…"
Jul 11
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"प्रिय अलोक  मंच पर आपकी गजल देखकर बड़ा सुकून हुआ . यहाँ  बहुत  कुछ सीखने को मिलता है . अपनी कमियां  खुद को अक्सर नजर नही आती पर यह मंच आपको अवश्य टोकेगा  जैसे मतले के बारे में कहा  गया कि शायद दोनों पंक्तियों में राब्ते…"
Jul 10
Neelam Upadhyaya commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अलोक रावत जी, नमस्कार । बहुत बढ़िया ग़ज़ल की पेशकश।  दिल से मुबारकबाद।"
Jul 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow Uttar Pradesh
Native Place
Lucknow
Profession
Bank Employee
About me
Aahat Lucknowi

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है
ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके
अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है
क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं
ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना
खुद ही खुश रहने की तरकीब निकाली जाए

जब किसी को भी गुनाहों की सज़ा देनी हो
इक नज़र अपने गुनाहों पे भी डाली जाए

मौलिक एवं अप्रकाशित

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:03pm on June 3, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सुखद आश्चर्य . ओ बी ओ में आपका स्वागत है . अब आप ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर के सम्मानित सदस्य है . दादा शरदिंदु जी को इस रत्न की प्राप्ति पर बधाई . मेरी  रचना के पाठको में एक वृद्धि और हुयी . वाह , अति सुन्दर .

 

At 11:58am on June 2, 2017, Alok Rawat said…

कभी डोली सजाते हैं कभी अर्थी उठाते हैं
हम इक दूजे के सुख दुख मे हमेशा काम आते हैं
मैं जिस बस्ती मे रहता हूँ वो हिन्दुस्तान है मेरा
मुसलमान दोस्त हैं बच्चे मुझे चाचा बुलाते हैं

Alok Rawat's Blog

ग़ज़ल

मुहब्बत में हमीं मुजरिम हैं हम ये मान लेते हैं

चलो अब तुम कहो तुमसे तुम्हारी जान लेते हैं



ज़रा हम भी तो देखें धार उन क़ातिल निगाहों की

सुना है वो इसी ख़ंजर से सबकी जान लेते हैं



जो फिर देखो उन्हें तो वो जुदा लगते हैं पहले से

कहें कैसे कि हम उनको सही पहचान लेते हैं



कभी गुस्सा कभी आँसू कभी फिर रूठना उनका

वो कितने इम्तिहाँ मुझसे मेरे भगवान लेते हैं



तो फिर दुनिया क्या इस दुनिया का रखवाला भी झुकता है

मुहब्बत करने वाले भी अगर ज़िद ठान… Continue

Posted on July 9, 2018 at 6:54pm — 20 Comments

ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए

दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए 

आरजू ऐसी कोई दिल में न पाली जाए

जान मांगी है तो अपनी भी यही कोशिश है 

ऐ मेरे दोस्त तेरी बात न खाली जाए

अपने हाथों के करिश्मे पे भरोसा करके 

अपनी सोई हुई तक़दीर जगा ली जाए

आज फिर छत पे मेरा चाँद नज़र आया है 

क्यूँ न फिर आज चलो ईद मना ली जाए

घर में दीवार उठी है तो कोई बात नहीं 

ऐसा करते हैं कि छत अपनी मिला ली जाए

जब किसी और के बस में नहीं है खुश रखना 

खुद ही…

Continue

Posted on November 13, 2017 at 2:30pm — 17 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

santosh khirwadkar posted a blog post

बीते लम्हों को चलो .....संतोष

अरकान:-फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुनबीते लम्हों को चलो फिर से पुकारा जाएवक़्त इक साथ सनम मिलके…See More
38 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यारसही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।झेल रहा है बचपन देखो,…See More
48 minutes ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post फिर ज़ख़्मों को ...संतोष
"बहुत धन्यवाद आ लक्ष्मण धामी साहब!!!"
53 minutes ago
Sudha mishra is now a member of Open Books Online
12 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आशंका के गहरे-गहरे तल में
"सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आद0हरिहर झा जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना है पर यह दुबारा पोस्ट हुई है। एक बात और आपने "आदरणीय…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post वापसी.... लघुकथा
"आद0 वीरेंदर वीर मेहता जी सादर अभिवादन। बढ़िया मार्मिक लघुकथा हुई है। बहुत बहुत बधाई इस सृजन पर।"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"नरेंद्र सिंह चौहान जी क्या आप प्रतिक्रिया के बाद फिर पलट कर कभी नहीं देखते क्या,, क्योकि अगर देखते…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on vijay nikore's blog post सो न सका मैं कल सारी रात
"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन, वाह वाह, मजा आ गया पढ़के। बधाई देता हूँ आपको।…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)
"आद0 शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन।एक बेहतरीन लघुकथा आपके हवाले से पढ़ने को मिली।  बात भी…"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढिया समकालीन परिस्थितियों में उत्तम लघुकथा। बधाई निवेदित है इस…"
13 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service