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केवल प्रसाद 'सत्यम'
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केवल प्रसाद 'सत्यम''s Discussions

यादों का सफर.....हिंदी साहित्य का रणबांकुरा....रवींद्र कालिया

एक दिवसीय स्मरण  कार्यक्रम(सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार व सफलतम सम्पादक रवींद्र कालिया के व्यक्तित्व, कृतित्व)जनवादी  लेखक संघ और साहित्यिक पत्रिका ‘तद्भव’ लखनऊ के संयुक्त तत्वाधान में आज दिनांक…Continue

Started Mar 22, 2016

लोकार्पण कार्यक्रम समाचार पत्रों के आधार पर एक प्रतिवेदन
17 Replies

कवि केवल प्रसाद ‘सत्यम’ का प्रथम काव्य-संग्रह...’छंद माला के काव्य-सौष्ठ्व’ का दिनांक ०७.०२.२०१६ को यू० पी० प्रेस क्लब, लखनऊ में लोकार्पण कार्यक्रम समाचार पत्रों के आधार पर एक प्रतिवेदन . लखनऊ शहर…Continue

Started this discussion. Last reply by केवल प्रसाद 'सत्यम' Mar 25, 2016.

 

केवल प्रसाद सत्यम. yadaa yadaa hi dharmasya glaanirbhavati bhaarata. Abhyutthaanam.h adharmasya tadaatmaanM sRRijaamyaham.h..ds*ih*lR;e@ekSfyd ,oa vizdkf”kr jpuk

केवल प्रसाद 'सत्यम''s Blog

शारदे समग्र काव्य. . .

कलाधर छन्द

शारदे समग्र काव्य में विचार भव्यता कि

सत्यता  उघार के  कुलीन भाव  मन्त्र दें।

शब्द शब्द  सावधान  अर्थ की  विवेचना

करें  विशुद्ध भाव से सुताल छन्द तंत्र दें।।

व्यग्रता  सुधार के विनम्रता  सुबुद्धि ज्ञान

मान के  समस्त  मानदण्ड  के  सुयंत्र  दें।

आप ही कमाल  वाह वाह की  विधायिनी

सुभाषिनी प्रवाह  गद्य पद्य में  स्वतन्त्र दें।।

मौलिक व अप्रकाशित

रचनाकार  . .केवल प्रसाद सत्यम

Posted on August 28, 2016 at 10:37am — 6 Comments

मानव नही लगता. .

मुक्तक

जिसेे भी देखिये नख शिख तलक मानव नही लगता।
लिए बम वासना शमसीर हक मानव नही लगता।।
मुसीबत ने यहाँ मुफ़लिस किसानो को रुलाया है. .
बड़ी ताकत कहूं जो यार तक मानव नही लगता।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on August 11, 2016 at 5:06pm — 3 Comments

दोहा छ्न्द......प्रतिपल अच्छा देखिए

प्रतिपल अच्छा देखिए

आंंख चुरा कर घूमते, मिला न पाए आंख.

आखों के तारे मगर, बिखरे जैसे पांख.1

आसमान से बात कर, मत अम्बर पर थूंक.

कण्ठ-हार बन कर चमक, अवसर पर मत चूक.2

प्रतिपल अच्छा देखिए, अच्छे में उत्साह.

बालमीकि - रैदास भी, हुए ब्रह्म के शाह.3

अच्छे दिन की सोच में, बुरी नहीं यदि सोच.

दीन-हीन के दु:ख भी दूर करें  बिन खोंच.4

संसारिक उद्देश्य ने, रिश्ते गढ़े…

Continue

Posted on July 13, 2016 at 8:30am — 8 Comments

दोहा.... मुहावरों की सार्थकता

मुहावरों में दोहा छंद की छटा...

गाल बजा कर दल गये, जो छाती पर मूंग.

वही अक्ल के अरि यहां, बने खड़े हैं गूंग. १

शीष ओखली में दिया, जब-जब निकले पंख.

उंगली पर न नचा सके, रहे फूंकते शंख. २

डाल आग में घी करे, हवन दमन की चाह. 

अंत घड़ों पानी पियें, खुलती कलई आह. ३

फूंक-फूंक कर रख कदम, कांटों की यह राह.

खेल जान पर तोड़ना, चांद-सितारे- वाह. ४

अपने पैरों पर करें, लिये कुल्हाड़ी वार.

दोष…

Continue

Posted on July 11, 2016 at 9:30am — 10 Comments

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LUCKNOW, UTTAR PRADESH
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Profession
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At 12:31pm on April 14, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय केवल प्रसाद जी ये तो हमारा सौभाग्य है कि हमें आप जैसे महानुभावों के विचार पढने का मौका मिल रहा है
आभार
At 12:23pm on April 8, 2016, Sushil Sarna said…

It is great honor to me sir for accepting my friendship request.thanks sir 

At 5:29pm on April 1, 2016, Sushil Sarna said…

आ. केवल प्रसाद जी आपकी  बधाई का हार्दिक आभार। ये सब आपके स्नेह का प्रतिफल है। 

At 1:13pm on March 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय केवल प्रसाद जी आपकी कविता "अच्छे दिन !"माह की सर्वश्रेष्ठ रचना के रूप में चयनित होने पर आपको हार्दिक हार्दिक बधाई। 

At 4:43pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय केवल प्रसाद जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी कविता "अच्छे दिन !" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:08pm on July 10, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय केवल जी

जन्मदिन की ढेर सी बधाइयाँ  i

At 8:25am on November 8, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji
said…

आदरणीय केवल जी, हार्दिक आभार. 

At 2:12pm on September 14, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय केवल जी ..रचनाओं पर आपकी समीक्षा मुझे बेहद प्रभावित करती है ..मेरा भी आपसे निवेदन है की समय समय पर ऐसा ही मार्गदर्शन मुझे भी देने की कृपा करें ..ग़ज़ल से सम्बंधित यदि कोई अच्छी किताब हो तो जानकारी देने का कष्ट करें ताकी नियमों की और जानकारी हो सके ....मार्गदर्शन की आकांक्षा के साथ 

At 6:13am on September 9, 2013, Manoshi Chatterjee said…

आदरणीय केवल प्रसाद जी,

आपको उन्मेष की रचनायें अच्छी लग रही हैं, जानकर मुझे हर्ष हुआ। । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 

सादर,
मानोशी

At 10:02am on September 4, 2013, Shyam Narain Verma said…
आदरणीय केवल जी
प्रणाम ,
 
आपके दिये गये पते से हमने किताब मँगवा लिया | आपको सहयोग के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |
सादर 
 
 
 

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