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khursheed khairadi
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Latest Activity

Ravi Shukla commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"आदरणीय खुर्शीद जी कमाल की ग़ज़ल कही आपने हर शेर उम्दा है मकता खासतौर पर पसंद आया इसके लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
Aug 6
vijay nikore commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"बहुत ही अच्छी गज़ल कही है, जनाब ख़ुर्शीद खैराड़ी साहिब । दिल से बधाई।"
Aug 2
laxman dhami commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"आ. भाई खुर्शीद जी सुंदर गजल हूई है। हार्दिक बधाई ।"
Aug 1
Gurpreet Singh commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"कोई 'खुरशीद' कहीं हो तो सुने मेरी सदागाँव के आख़री घर तक भी उजाला जाए वाह वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल है आदरणीय खुर्शीद जी"
Aug 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"वाह वाह आदरणीय बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई..सादर"
Jul 31
Samar kabeer commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)
"जनाब ख़ुर्शीद खैराड़ी साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'आपने कह दिया झट से कि मैं,मैं हूँ ही नहीं' इस मिसरे में 'मैं,मैं'कुछ अच्छा नहीं लग रहा है ।"
Jul 31
khursheed khairadi commented on rajesh kumari's blog post कब तक मूर्ख बनाएगा (गीतिका/ग़ज़ल 'राज')
"लाज़वाब ग़ज़ल आदरणीया, बहुत बहुत बधाई । सादर ।"
Jul 31
khursheed khairadi commented on rajesh kumari's blog post कब तक मूर्ख बनाएगा (गीतिका/ग़ज़ल 'राज')
"लाज़वाब ग़ज़ल आदरणीया, बहुत बहुत बधाई । सादर ।"
Jul 31
khursheed khairadi commented on rajesh kumari's blog post कब तक मूर्ख बनाएगा (गीतिका/ग़ज़ल 'राज')
"लाज़वाब ग़ज़ल आदरणीया, बहुत बहुत बधाई । सादर ।"
Jul 31
khursheed khairadi posted a blog post

ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)

2122--1122--1122--112 फैसले के लिए सिक्का न उछाला जाए जान माँगे जो वतन वक़्त न टाला जाए हाँ मैं हूँ मुल्क़ तुम्हारा न उछालो मिट्टी नौज़वानों मुझे गड्डे से निकाला जाए अच्छे अच्छों के किये होश ठिकाने लेकिन होश में हो जो उसे कैसे सँभाला जाए आपने कह दिया झट से कि मैं, मैं हूँ ही नहीं मेरे भीतर मुझे थोड़ा तो खँगाला जाए ज़ह्र के दाँत उखाड़ो कि कुचल डालो फन आस्तीनों में यूँ नागों को न पाला जाए मुफ़लिसी ने मिरी आगाह किया है मुझको यार पव्वे के लिए वोट न डाला जाए कोई 'खुरशीद' कहीं हो तो सुने मेरी सदा गाँव…See More
Jul 31
khursheed khairadi commented on KALPANA BHATT's blog post सवाल (कविता)
"आदरणीया कल्पना जी , सुन्दर कविता। हार्दिक शुभकामनाएँ। सादर।"
Jul 29
khursheed khairadi commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"मुहब्बत का तू ऐसा रंग हो जा। क्या बात है सर। आदरणीय समर सर उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत मुबारक़बाद ।सादर।"
Jul 29
khursheed khairadi commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/2)
"मोहतरम ज़नाब आरिफ़ साहब, बेहद उम्दा ग़ज़ल हुई है। तहेदिल से दाद क़बूल फर्मावें।"
Jul 29
khursheed khairadi commented on Hari Prakash Dubey's blog post कालिख: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय हरी सर , बहुत सटीक लघुकथा है।संभ्रांत वर्ग के नैतिक पतन को उजागर करती हुई रचना है। बहुत बहुत बधाई सर।"
Jul 29
khursheed khairadi commented on laxman dhami's blog post कभी गम के दौर में भी हुई आखें नम नहीं पर- लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
"आदरणीय लक्ष्मण सर, उम्दा अशआर हुए हैं। दिल से दाद क़बूल फर्मावें ।लाज़वाब।"
Jul 29
khursheed khairadi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post रह गए हम -ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा
"शानदार ग़ज़ल हुई है आदरणीय बसंत सर । बहुत बहुत बधाई।"
Jul 29

Profile Information

Gender
Male
City State
jodhpur
Native Place
rawatbhata
Profession
engineering
About me
gazal ka ek navsadhak

Khursheed khairadi's Blog

ग़ज़ल --2122--1122--1122--112(22)

2122--1122--1122--112



फैसले के लिए सिक्का न उछाला जाए

जान माँगे जो वतन वक़्त न टाला जाए



हाँ मैं हूँ मुल्क़ तुम्हारा न उछालो मिट्टी

नौज़वानों मुझे गड्डे से निकाला जाए



अच्छे अच्छों के किये होश ठिकाने लेकिन

होश में हो जो उसे कैसे सँभाला जाए



आपने कह दिया झट से कि मैं, मैं हूँ ही नहीं

मेरे भीतर मुझे थोड़ा तो खँगाला जाए



ज़ह्र के दाँत उखाड़ो कि कुचल डालो फन

आस्तीनों में यूँ नागों को न पाला जाए



मुफ़लिसी ने मिरी…

Continue

Posted on July 30, 2017 at 11:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है

122--122--122--122



किसी का कहा मानता ही कहाँ है

वो अपनी ख़ता मानता ही कहाँ है



न काफ़िर कहूँ तो उसे मैं कहूँ क्या

है बुत में ख़ुदा मानता ही कहाँ है



है छोटी बहुत सोच उसकी करें क्या

किसी को बड़ा मानता ही कहाँ है



शिकायत यही है हर इक आदमी की

मेरी दूसरा मानता ही कहाँ है



मेरे पास हल है, सभी मुश्किलों का

कोई मश् वरा मानता ही कहाँ है



लगाना पड़ा झूठ का मुँह पे ग़ाज़ा

कि सच आइना मानता ही कहाँ है



भला आदमी है… Continue

Posted on July 10, 2017 at 9:00pm — 15 Comments

रघुनाथ ..ग़ज़ल 2122—1122—1122—22

2122—1122—1122—22

रूठ मत जाना कभी दीन दयाला मुझसे

रखना रघुनाथ हमेशा यही नाता मुझसे

 

हर मनोरथ हुआ है सिद्ध कृपा से तेरी

तू न होता तो हर इक काम बिगड़ता मुझसे

 

नाव तुमने लगा दी पार वगरना रघुवर

इस भँवर में था बड़ी दूर किनारा मुझसे

 

जैसे शबरी से अहिल्या से निभाया राघव

भक्तवत्सल सदा यूँ प्रेम निभाना मुझसे

 

एक विश्वास तुम्हारा है मुझे रघुनंदन

दूर जाना न कोई करके बहाना मुझसे

 

जानकी नाथ…

Continue

Posted on March 28, 2015 at 11:16pm — 9 Comments

ग़ज़ल ..22 22 22 22 22 2 ....सीला माँ (शीतला माता )

ताप घृणा का शीतल करदे सीला माँ

इस ज्वाला को तू जल करदे सीला माँ

 

इस मन में मद दावानल सा फैला है

करुणा-नद की कलकल करदे सीला माँ

 

सूख गया है नेह ह्रदय का ईर्ष्या से

इस काँटे को कोंपल करदे सीला माँ

 

प्यास लबों पर अंगारे सी दहके है

हर पत्थर को छागल करदे सीला माँ

 

सूरज सर पर तपता है दोपहरी में

सर पर अपना करतल करदे सीला माँ

 

दूध दही हो जाता है शीतलता से

भाप जमा कर बादल करदे सीला…

Continue

Posted on March 13, 2015 at 11:13am — 15 Comments

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At 9:09am on June 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

आदरणीय खुर्शीद सर जन्मदिवस पर आपको हृदयतल से अपार बधाई!

At 11:38am on February 23, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय खुर्शीद जी मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया करती हूँ , जो आप भी मेरी इस उपलब्धि के भागीदार बने आशा है की आप इसी प्रकार सहयोग देते रहेंगे और मुझे मार्गदर्शित करेंगे , सादर आभार । 

At 11:15pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय खुर्शीद सर, आपका स्नेह और सहयोग सदा मिलता रहा है. आपने इस बधाई सन्देश ने मेरा जो मान बढ़ाया है उसके लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ. मेरी रचनाएँ आपको पसंद आती है ये सौभाग्य है मेरा... लेकिन सच तो ये है कि मैं तो आपकी ग़ज़लों का दीवाना हूँ. सोचता हूँ आप जैसी उम्दा गज़लें कह सकूं. 

At 6:37pm on October 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय खुर्शीद जी

आपकी सक्रियता के हम सभी साक्षी है  और पुरुस्कार इसका प्रमाण है i बहुत-बहुत मुबारक i

At 12:05pm on October 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी,
सादर अभिवादन,

यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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