For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

khursheed khairadi
Share

Khursheed khairadi's Friends

  • jaan' gorakhpuri
  • pratibha tripathi
  • Hari Prakash Dubey
  • दिनेश कुमार
  • seemahari sharma
  • गिरिराज भंडारी
  • Sulabh Agnihotri
  • Pawan Kumar
  • मिथिलेश वामनकर
  • Saurabh Pandey
 

khursheed khairadi's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
jodhpur
Native Place
rawatbhata
Profession
engineering
About me
gazal ka ek navsadhak

Khursheed khairadi's Blog

ग़ज़ल--बोझ उल्फ़त हो गई तो

ग़ज़ल--2122--2122

बोझ उल्फ़त हो गई तो...?

तेरी आदत हो गई तो...?



प्यार का इज़हार कर दूँ

तुझको नफ़रत हो गई तो...?



डर लगे है आशिक़ी से

यार आफ़त हो गई तो...?



मुझको कंकर तूने समझा

मेरी क़ीमत हो गई तो...?



दर्द अब भाने लगा है

दिल को राहत हो गई तो...?



बिन तेरे रुक जाए साँसे

ऐसी हालत हो गई तो...?



कितना ख़ुद को रोकता हूँ

मेरी ज़ुर्रत हो गई तो...?



बेवफ़ा ये तेरी यादें

दिल की दौलत हो गई… Continue

Posted on October 5, 2017 at 11:15pm — 12 Comments

प्रेम-पचीसी-भाग 4 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग 4(प्रीत-पगे दोहे)



पाप कहूँ किसको भला, किसको समझूँ पुन्न ।

मैं जानूँ इतनी गणित, तुम बिन जीवन सुन्न ।। ...1



तुम मोहन की बाँसुरी, मैं राधा का हास ।

साथ तुम्हारा जब मिले, जीवन हो इक रास ।। ...2



दर्शन दे दो साँवरे, तरस रहे हैं नैन ।

मर जाऊँ मैं चैन से, जीती हूँ बेचैन ।।...3



सुध-बुध जी की खो गई, जबसे लागा हेत ।

मैं इक मछली साँवरे, विरहा तपती रेत ।।...4



बरजा तो माना नहीं, अब रोवे दिन-रैन ।

नैन मिलाकर खो… Continue

Posted on September 7, 2017 at 12:48pm — 3 Comments

प्रेम पचीसी --भाग 3 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग-3 (प्रीत-पगे दोहे)

दाँत दुखे तो पाड़ दूँ, आँख दुखे दूँ फोड़ ।

घायल मन की पीर का, पास पिया के तोड़ ।। ...1



झाल बदन में उठ रही, जबसे लागी लाग ।

सावन बरसे नैन से, बुझे न फिर भी आग ।। ...2



होना था सो हो गया, अब तो करो उपाय ।

बाहर-भीतर आग है, पीड़ा सही न जाय ।। ...3



रोग लगा सो लग गया, छोड़ो सोच-विचार ।

अंग-अंग काटो भले, ढूँढ़ों कुछ उपचार ।। ...4



ज्यों-ज्यों करती हूँ दवा, त्यों-त्यों बढ़ता रोग ।

बैद बनो तुम साँवरे, कब… Continue

Posted on September 5, 2017 at 12:53pm — 7 Comments

प्रेम पचीसी --भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)

प्रेम-पचीसी--भाग 2 (प्रीत-पगे दोहे)

कौन रसायन बह रहा, रग-रग फैली आग ।

स्त्राव हुआ किस ग्रन्थि से, धड़कन गाए राग ।। ...1



दर्पण देखूँ सौ दफ़ा, फिर-फिर बाँछूँ बाल ।

सूरत अपनी देखकर, गाल हुए हैं लाल ।। ...2



मैं मछली सी हो गयी, सागर तेरा ध्यान ।

बाहर निकसूँ तो चली, जाए मेरी जान ।। ... 3



जित देखूँ उत साँवरे, दिखे तिहारा रूप ।

अंधी होकर प्रेम में, पाए नैन अनूप ।। ...4



लज़्ज़त तेरी दीद की, याद मुझे है यार ।

दीदों से आँसू नहीं, टपक… Continue

Posted on September 2, 2017 at 6:03am — 6 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:09am on June 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

आदरणीय खुर्शीद सर जन्मदिवस पर आपको हृदयतल से अपार बधाई!

At 11:38am on February 23, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय खुर्शीद जी मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया करती हूँ , जो आप भी मेरी इस उपलब्धि के भागीदार बने आशा है की आप इसी प्रकार सहयोग देते रहेंगे और मुझे मार्गदर्शित करेंगे , सादर आभार । 

At 11:15pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय खुर्शीद सर, आपका स्नेह और सहयोग सदा मिलता रहा है. आपने इस बधाई सन्देश ने मेरा जो मान बढ़ाया है उसके लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ. मेरी रचनाएँ आपको पसंद आती है ये सौभाग्य है मेरा... लेकिन सच तो ये है कि मैं तो आपकी ग़ज़लों का दीवाना हूँ. सोचता हूँ आप जैसी उम्दा गज़लें कह सकूं. 

At 6:37pm on October 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय खुर्शीद जी

आपकी सक्रियता के हम सभी साक्षी है  और पुरुस्कार इसका प्रमाण है i बहुत-बहुत मुबारक i

At 12:05pm on October 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी,
सादर अभिवादन,

यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

अटल जी को श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन…See More
15 minutes ago
Neelam Upadhyaya replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
""और कोई भी होता तो लड़ लेते,क्या करें मृत्यु भी तो अटल है।"  भारतीय राजनीति  के…"
49 minutes ago
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

श्री अटल-मृत्यु संवाद:- कविता

कहा मौत ने श्री अटल से, वक़्त आ गया जाने का,स्वर्ग से आदेश मुझे है, आपको वहाँ लिवाने का।पर साधारण…See More
1 hour ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपकी पारखी नज़र के साथ आपकी सटीक टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार एवं…"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ कुशक्षत्रप जी , कविता पर आपकी बधाई हेतु ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , नमस्कार , प्रस्तुत कविता को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ , नमस्कार , प्रस्तुत कविता को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुश्री बबीता गुप्ता जी , इस छोटी सी कविता को स्वीकार कर मान देने के लिए आपका आभार एवं…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "आया ...आया ... गया!" (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत ही शानदार लघुकथा,इस बहतरीन प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार…"
12 hours ago
Samar kabeer commented on dandpani nahak's blog post जब क़सम हिंदुस्तान की है
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post स्वतंत्रता दिवस पर ३ रचनाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,क्या तारीफ़ करूँ इन रचनाओं की,वाह  बहुत ख़ूब, बेहद सटीक,और मार्मिक,दिल…"
12 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post पीढ़ी को समझा दे पंकज, खेती ख़ातिर खेत बचा ले----ग़ज़ल
"सादर आभार विजय सर"
12 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service