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Pawan Kumar
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Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
Gorakhpur
Profession
Student
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I Love My India

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Pawan Kumar commented on pratibha pande's blog post कुत्ता [लघु कथा ]
"जानवर और स्वार्थी इन्सान के बीच के फर्क को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।आदरणीया, हार्दिक बधाई!"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar commented on Abha Chandra's blog post ब्रेकिंग न्यूज़
"मार्मिक व सजीव चित्रण!हार्दिक बधाई!"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( आँखों से निकलते हैं )
"ज़माना जानता है यह मुहम जारी है  मुद्दत…"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar commented on Sushil Sarna's blog post दिल-ऐ-बिस्मिल में ...
"दिल.ऐ.बिस्मिल में .....आदरणीय, सुन्दर रचना हेतु हार्दिक बधाई"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar commented on maharshi tripathi's blog post अपने मित्रों को समर्पित एक गज़ल
"मित्रों को समर्पित सुन्दर रचनाहार्दिक बधाई"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post सीखना होगा
"हर पल, हर कदम सीखना होगाआदरणीयासुन्दर रचना, हार्दिक बधाई"
Jun 4, 2016
Pawan Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-14 में स्वीकृत सभी रचनाएँ
"एक से बढकर एक रचनायें ये सब ओ0बी0ओ0 और आदरणीय गुरुजनो का ही कमाल है।शुभ शुभ!"
Jun 2, 2016
Pawan Kumar replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ, लखनऊ चैप्टर वार्षिकोत्सव-2016
"आदरणीय,ये तो आपलोगों का स्नेह है, जो मुझ जैसे अदना को भी इतना मान देते है।वहां तो मेरा खुद का ही स्वार्थ होता है, क्योकि आप लोगो के सानिध्य में होना मेरे लिये किसी सुखद स्वप्न से कम नही है।"
Jun 1, 2016
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
" प्रिय पवन , सुन्दर भाव हैं  पर शिल्प में कसाव नहीं है . मैं  कोशिश करता हूँ - दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लीजिये दूर रहने की अब मत  सजा  दीजिये मेरे नयनो की हैं  आप ही रोशनी जो न देखूं…"
May 24, 2016
बशर भारतीय commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"अच्छा गीत है बधाई"
May 24, 2016
pratibha pande commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
" सुन्दर गीत ,सुन्दर प्रवाह ,बधाई प्रेषित है आपको आदरणीय पवन जी "
May 23, 2016
kanta roy commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"वाह ! लाजवाब गीत बनी है । बधाई प्रेषित है आदरणीय पवन जी"
May 23, 2016
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"मद में ही मै भटकता रहा दर-बदररास आई तन्हाई मुझे इस कदरइस तन्हाई को अपना पता दिजिएदिल पे दस्तक ....... बहुत खूब आदरणीय | हार्दिक बधाई | "
May 20, 2016
Samar kabeer commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"जनाब पवन कुमार जी आदाब,अगर ये कविता है तो ठीक है, लेकिन ये नज़्म है तो बहुत से मिसरे लय में नहीं हैं,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 19, 2016
Shyam Narain Verma commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई"
May 19, 2016
सुरेश कुमार 'कल्याण' commented on Pawan Kumar's blog post दिल पे दस्तक
"क्या बात है आदरणीय पवन कुमार जी अति उत्तम रचना सचमुच ही दिल पे दस्तक दे गई बधाई हो"
May 19, 2016

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Pawan Kumar's Blog

दिल पे दस्तक

दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लिजिए

दूर रहने की अब ना सजा दिजिए

मेरे नयनो की आप रोशनी हो बनी

आप बिन कुछ ना देखूँ है खुद से ठनी

ज्योति को यूँ ना दृग से जुदा किजिए

दिल पे दस्तक .......

मद में ही मै भटकता रहा दर-बदर

रास आई तन्हाई मुझे इस कदर

इस तन्हाई को अपना पता दिजिए

दिल पे दस्तक .......

दिल में दर्दे हिज्र की अब तामीर हो रही

ख्वाब में आपके मेरा जिक्र भी नही

दश्ते-बेकसी से अब तो फना किजिए

दिल पे दस्तक…

Continue

Posted on May 19, 2016 at 11:30am — 8 Comments

ख्वाब

ख्वाब!

क्या है ये?

एक पल में राजा बना देता है

और दूसरे ही पल ..............

ज्योतिषियों के लिए तो दूर दृष्टी है

और अनाडि़यों के लिए...

फ्री का सनिमा

मेहनतकश के लिए उसकी मंजिल

हमारे और आपके लिए ..........

कभी खुद भी सोच लिया करो!

ख्वाब के रंग कई रुपो में बिखरे हैं

बच्चे, बूढे, जवान

सभी अलग-अलग रुपो में

इसका दीदार करते हैं

कोई परियों के साथ खेलता है तो

किसी को अपना भविष्य नजर आता है

और किसी को उसके परिश्रम का परिणाम

ख्वाब की…

Continue

Posted on August 10, 2015 at 5:13pm — 6 Comments

इक-इक पग

डगर कठिन है

मंजिल से पहले पग रुकता है

फिर हौसलों के सहारे

एक-एक पग आगे बढता हूँ

गिरता हूँ, संभलता हूँ

क्या?

मंजिल भी

मेरे इस परिश्रम को देख रही होगी

क्या?

वह भी जश्न मनायेगी

मेरे वहाँ पहुँचने पर

कभी-कभी

ये उत्कण्ठा भी उत्पन्न हो जाती  हैं

फिर विचार आता है!

मंजिल जश्न मनाये या ना मनाये

उसे पा तो लूँगा, उसे चुमूँगा

दुनिया को दिखाउँगा कि

इसी के लिए मैने अथक प्रयास किया है

और अनवरत ही चलता रहता हूँ

इक-इक पग बढाते…

Continue

Posted on March 19, 2015 at 7:20pm — 9 Comments

खुशनसीब (लघुकथा)

दोनो बचपन की सहेलियाँ शादी होने के बहुत दिनो बाद मिली थीं. सारे दुःख-दर्द बाँटे जा रहे थे.
"मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ जो उनके जाने के बाद मुझे रोहन जैसे पति का साथ मिला जो हरपल मेरा ख्याल रखता है." पहली सहेली के चेहरे पर मुस्कान थी।.
"एक पति मेरा है, आधी रात के बाद पी के आता है, और मार-पीट के सो जाता है, ये दारु उसे कहीं ले भी तो नही जाती.
दूसरी की आँखों से बरबस ही आँसू छलक पड़े!

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on November 6, 2014 at 2:30pm — 24 Comments

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At 1:54pm on September 25, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपका ह्रदय से स्वागत, आदरणीय पवन जी. सादर!

At 8:23am on September 25, 2014, vijay nikore said…

Thanks for extending the hand of friendship, Pawan ji. May you flourish.

Vijay Nikore

At 10:30am on August 28, 2014, Dr Ashutosh Mishra said…

पवन जी ..आपके मित्रों की सोची में शामिल होना मेरे लिए सुखद अहसास है ..सादर 

At 8:59pm on August 22, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

पवन जी

आपका स्वागत i आप काव्य गोष्ठी में भी आये i  मित्रता को  अविस्मर्णीय बनाएं i सादर i

 
 
 

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