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ख्वाब!
क्या है ये?
एक पल में राजा बना देता है
और दूसरे ही पल ..............
ज्योतिषियों के लिए तो दूर दृष्टी है
और अनाडि़यों के लिए...
फ्री का सनिमा
मेहनतकश के लिए उसकी मंजिल
हमारे और आपके लिए ..........
कभी खुद भी सोच लिया करो!
ख्वाब के रंग कई रुपो में बिखरे हैं
बच्चे, बूढे, जवान
सभी अलग-अलग रुपो में
इसका दीदार करते हैं
कोई परियों के साथ खेलता है तो
किसी को अपना भविष्य नजर आता है
और किसी को उसके परिश्रम का परिणाम
ख्वाब की भी अपनी एक अलग ही दुनिया है
कोई जागते हुए देखता है
कोई सोते हुए
सोते हुए देखे गये ख्वाब
अक्सर टूट जाया करते हैं
फिर भी कोई ग्लानि नही होती
पर, अगर जागते हुए देखे गये ख्वाब
टूट जायेें जो
तौबा-तौबा
सारा जग सूना-सूना लगने लगता है
और अगर यही ख्वाब पूरे हो जाये तो
अहाः
चारो तरफ मधूर ध्वनि सुनाई देती है
मन मयूर की तरह झूमने लगता है
देखा आपने
ख्वाब ने क्या-क्या गुल खिलाये
शायद!
आप भी ख्वाबो में डूब गयें

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 12, 2015 at 7:52pm

जरूर ख्वाब है तो आब है साब! आपसे सहमत!

Comment by Pawan Kumar on August 12, 2015 at 1:19pm

उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी व आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, हार्दिक आभार!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2015 at 11:10am

आ. भाई पवन जी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति हुई है.  हार्दिक बधाई.

Comment by pratibha pande on August 11, 2015 at 7:22pm
ख्वाब टूट जाएँ तो तौबा , मिल जाएँ तो अहा , खूबसूरत रचना है बधाई आपको आ० पवन जी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2015 at 2:39pm

आदरणीय पवन भाई , अच्छी वैचारिक रचना हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 10, 2015 at 11:03pm

आदरणीय पवन जी सुन्दर भावाभिव्यक्ति हुई है. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. सादर 

कृपया ध्यान दे...

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