For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लिजिए
दूर रहने की अब ना सजा दिजिए

मेरे नयनो की आप रोशनी हो बनी
आप बिन कुछ ना देखूँ है खुद से ठनी
ज्योति को यूँ ना दृग से जुदा किजिए
दिल पे दस्तक .......

मद में ही मै भटकता रहा दर-बदर
रास आई तन्हाई मुझे इस कदर
इस तन्हाई को अपना पता दिजिए
दिल पे दस्तक .......

दिल में दर्दे हिज्र की अब तामीर हो रही
ख्वाब में आपके मेरा जिक्र भी नही
दश्ते-बेकसी से अब तो फना किजिए
दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लिजिए

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 727

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 24, 2016 at 9:51pm

 प्रिय पवन , सुन्दर भाव हैं  पर शिल्प में कसाव नहीं है . मैं  कोशिश करता हूँ -

दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लीजिये
दूर रहने की अब मत  सजा  दीजिये

मेरे नयनो की हैं  आप ही रोशनी 
जो न देखूं  तो मानो स्वयं से ठनी
नेह को यूँ ना दृग से जुदा कीजिये
 

अपने मद में भटकता रहा दर-बदर
रास  तनहाई आई  मुझे इस कदर
 दिल लगा पूंछने अब  पता दीजिये
 

दर्द यह हिज्र का है यकीनन सही
ख्वाब में आपके जिक्र मेरा नहीं
मेरी हर र्बेकसी को  फना कीजिये 

Comment by बशर भारतीय on May 24, 2016 at 2:44pm
अच्छा गीत है बधाई
Comment by pratibha pande on May 23, 2016 at 8:02pm

 सुन्दर गीत ,सुन्दर प्रवाह ,बधाई प्रेषित है आपको आदरणीय पवन जी 

Comment by kanta roy on May 23, 2016 at 4:35pm
वाह ! लाजवाब गीत बनी है । बधाई प्रेषित है आदरणीय पवन जी
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 20, 2016 at 10:17pm

मद में ही मै भटकता रहा दर-बदर
रास आई तन्हाई मुझे इस कदर
इस तन्हाई को अपना पता दिजिए
दिल पे दस्तक ....... बहुत खूब आदरणीय | हार्दिक बधाई | 

Comment by Samar kabeer on May 19, 2016 at 6:44pm
जनाब पवन कुमार जी आदाब,अगर ये कविता है तो ठीक है, लेकिन ये नज़्म है तो बहुत से मिसरे लय में नहीं हैं,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Shyam Narain Verma on May 19, 2016 at 5:36pm
इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 19, 2016 at 5:20pm
क्या बात है आदरणीय पवन कुमार जी अति उत्तम रचना सचमुच ही दिल पे दस्तक दे गई बधाई हो

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
20 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
21 hours ago
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Mar 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service