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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आ. अनीस साहब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है। वाह"
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दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आ.गणेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश क़बूल कीजिए सर। वाह"
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दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है आ. वन्दना जी। वाह"
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दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. निलेश सर जी, दिली दाद व मुबारक बाद। इस शेर पर विशेष दाद,,, ऐब मुझ में सभी उसी के हैं जिस के हाथों घड़ा गया है मुझे. ."
17 hours ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आसमाँ से गिरा गया है मुझे मेरा अभिमान खा गया है मुझे शुक्र है ! आइना दिखा कर वो मेरी कमियाँ बता गया है मुझे कर के वादा तेरा मुकर जाना दुनियादारी सिखा गया है मुझे मैं हूँ आवाज़ आपके दिल की ग़ौर से कब सुना गया है मुझे अश्क पीना भी सीख ही लूँगा…"
17 hours ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"क़ीमती समय और बहुमूल्य राय/इस्लाह के लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, आदरणीय समर सर जी। आपके सभी सुझाव अति उत्तम है। दिली आभार"
Sep 27
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"देखें तो एक दम से शनासा कहें जिसे दरपन हो दिल के हाल का चेहरा कहें जिसे अन्धे की लाठी, आँख का तारा कहें जिसे कलियुग में कोई बेटा है ? बेटा कहें जिसे सोए हुओं को इल्म भी कैसे हो दोस्तो सपनों का इन्द्र जाल है दुनिया कहें जिसे जो ज़ुल्म की हर ईंट का…"
Sep 27
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"जी, वाक़ई। बिल्कुल सही कहा। ☺☺"
Sep 27
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अंजलि जी, बहुत दाद।"
Sep 27
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"बहुत बढ़िया हुई है आ. निलेश जी। दिली दाद व् मुबारक। ख़ास तौर पर " अब ज़िंदगी का दरया हमें....""
Sep 27
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"क्या ही शानदार अशआर हुए हैं मुहतरम समर कबीर साहब। पूरी ग़ज़ल पढ़ने में मज़ा आ गया। मैं ज़मीन मुश्किल मानता था, लेकिन आपको पढ़ कर सीखने को मिलता है कि शेर कैसे कहे जाते हैं। वाह वाह वाह। मत्ला ता मक़्ता नगीने जड़े हैं। दिली दाद व् मुबारक बाद सर। "
Sep 27
gumnaam pithoragarhi commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"वाह खूब सूरत ग़ज़ल के लिए बधाई .. .. "
Jul 19
Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l शेर 4 में शब्द "सानेहा" को "सानिहा  "कर लें l"
Jul 18
Sushil Sarna commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"आदरणीय निशब्द हूँ आपकी इस गहन भावों की अभिव्यक्ति वाली बेहतरीन ग़ज़ल पर। हार्दिक हार्दिक बधाई सर।"
Jul 17
vijay nikore commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"अच्छी गज़ल के लिए बधाई"
Jul 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"आ. भाई दिनेश जी, बहुत अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 17

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार

2122---1212---22

ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था

मैं ही मैं था, मेरे सिवा क्या था

.

झूठ बोला तो बच गई गरदन

हक़-बयानी का फ़ाएदा क्या था

.

चाह मंज़िल की थी निगाहों में

ठोकरें क्या थीं आबला क्या था

.

पर निकलते ही थे उड़े ताइर !

ये रिवायत थी, सानेहा क्या था

.

दर्द, ग़ुस्सा, मलाल, मजबूरी

आख़िर उस चश्मे-तर में क्या क्या था

.

क्यों मैं बर्बादियों का सोग करूँ

जब मैं आया, यहाँ मेरा क्या…

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Posted on July 13, 2018 at 12:30am — 14 Comments

ग़ज़ल -- ख़ुशी का पल तो मयस्सर नहीं, हैं दर्द हज़ार / दिनेश कुमार

1212--1122--1212--112

.

ख़ुशी का पल तो मयस्सर नहीं, हैं दर्द हज़ार

हमारे हिस्से में क्यों है बस इंतिज़ारे-बहार

.

कि रफ़्ता रफ़्ता थकावट बदन में आएगी

उतर ही जाएगा आख़िर में ज़िन्दगी का ख़ुमार

.

मिलेगी आख़िरी ख़ाने में मौत ही सबको

बिसाते-दह्र पे पैदल हो या हो फिर वो सवार

.

इधर जनाज़ा किसी का बस उठने वाला है

उधर दुल्हन की चले पालकी उठाए कहार

.

ग़मों की धूप भी हमको सुखों की छाँव लगे

हमारा नाम भी कर लो कलन्दरों में…

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Posted on May 30, 2018 at 6:09pm — 5 Comments

ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )

2122---1212---22

.

जो भी सोचूँ, उसी पे निर्भर है

मेरी दुनिया तो मेरे भीतर है

.

इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर

स्वर्ग से ख़ूब-तर मेरा घर है

.

जिसमें जज़्बा है काम करने का

कामयाबी उसे मयस्सर है

.

जीत कैसे मिली, है बेमानी

जो भी जीता, वही सिकन्दर है

.

कोई क़तरा भी भीक में माँगे

और हासिल किसी को सागर है

.

ज़ह्र-आलूदा इन हवाओं में

साँस लेना भी कितना दूभर है

.

हाँ, ये जादूगरी है लफ़्ज़ों की

( हाँ,…

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Posted on May 21, 2018 at 10:00am — 7 Comments

ग़ज़ल --- मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता / दिनेश कुमार / इस्लाह हेतु.

1212---1122---1212---22

.

मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता

तो कामयाबी की चोटी भी सर नहीं करता

.

हसीन ख़्वाब अगर दिल में घर नहीं करता

तवील रात से मैं दर-गुज़र नहीं करता

.

हरेक मोड़ पे ख़ुशियों तो कम हैं,दर्द हज़ार

कहानी वो मेरी क्यों मुख़्तसर नहीं करता

.

ग़मों ने मुझको सिखाया है ज़िन्दगी का हुनर

किसी भी हाल, मैं अब आँख तर नहीं करता

.

मैं अपने अज़्म की पतवार साथ रखता हूँ

मेरे सफ़ीने पे तूफ़ाँ असर नहीं…

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Posted on May 20, 2018 at 6:27pm — 3 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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