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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"बहुत बहुत शुक्रिया आ नादिर साहब। वाक़ई, आ समर साहब बेहतरीन सुझाव देते हैं। "
Saturday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"जनाब ओम रायज़ादा साहब, बढ़िया ashaar के लिए बधाई। आख़िरी शेर सबसे अच्छा लगा। "
Saturday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"जी सर। नोट कर लिया है। बहुत बहुत शुक्रिया। "
Saturday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय कबीर सर। जो जो आपने सुधार किया है, नोट कर लिया है मैंने। बहुत शुक्रिया आपका जो आप इतनी मेहनत करते हैं।  एक गुज़ारिश है, कि  इक दूसरे की, दुःख में मदद, दिल से हम करेंइन्सानियत के दीप से दुनिया उजाल हो' इस का…"
Saturday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"तरही ग़ज़ल दिल में जो आखि़रत का हमें कुछ ख़याल होदौलत की दौड़ में न यूँ जीना मुहाल हो .. १ क़िस्मत हो मेहर् बान या गर्दिश की चाल होहर दौर में तुम्हारी फ़क़ीरी मिसाल हो.. २ अपने ज़मीर को भी परख, आईने में देखमरने से पेशतर न तेरा इंतिक़ाल हो ..…"
Saturday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"जी, आ. कबीर सर। कोशिश तो रहेगी। देखते हैं, "
Friday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"मुहतरम zaif साहब। बेहतरीन मतला। उम्दा ashaar, गिरह भी khoob वाह वाह"
Friday
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आ. नाहक साहब। अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई। वाह वाह"
Nov 25
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मुहतरम नादिर साहब। वाह !! क़ाफ़ियाबन्दी मतले में सही हुई है ? मुझे नहीं मालूम। "
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. समर सर !! आपका आशीर्वाद पाकर धन्य हुआ।"
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी, इसी मुहावरे का इस्तेमाल करने की कोशिश थी। सादर"
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"शुक्रिया आ. रचना जी। "
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"ग़ज़ल का प्रयास सराहनीय है आ. भाई दिनेश जी।  2nd शेर बढ़िया लगा। वाह"
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"अटके खजूर में जो गिरे आसमां से हमसहमे रहे हयात के हर इम्तिहाँ से हम अब हासिल-ए-सफ़र की भी ख़्वाहिश नहीं रहीकुछ ऐसे ना-उमीद हुए कारवाँ से हम माना कि हक़परस्ती का मतलब है सरकशीमुकरे न एक बार भी अपने बयां से हम दिख जाएंगे बशर्ते महब्बत की हो नज़ररहते हैं…"
Sep 25, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"नमस्कार आदरणीय समर कबीर सर। "
Sep 24, 2021
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"मैं दूसरों की ग़ज़ल पर अपने विचार अवश्य रखूँगा, सर। लेकिन अभी वक़्त कम बचा है। संकलन के समय, हर ग़ज़ल पर अपनी राय ज़रूर दूँगा। आज के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ, सर। उम्मीद है, आप अन्यथा नहीं लेंगे।"
Jan 25, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल -- फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता / दिनेश कुमार

1212---1122---1212---22

.

फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता

मैं वो परिन्दा हूँ जो बालो-पर नहीं रखता

.

न चापलूसी की आदत, न चाह उहदे ( पदवी ) की

फ़क़ीर शाह के क़दमों में सर नहीं रखता

.

उरूज और ज़वाल एक से हैं जिसके लिये

वो हार जीत का दिल पर असर नहीं रखता

.

मिला नसीब से जो कुछ भी, वो बहुत है मुझे

पराई चीज़ पे मैं बद-नज़र नहीं रखता

.

नशा दिमाग़ पे दौलत का जिसके जन्म से हो

वो अपने पाँव कभी फ़र्श पर नहीं रखता

.

वो इस…

Continue

Posted on November 16, 2018 at 3:04pm — 8 Comments

ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार

2122---2122---2122---212

.

नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी

ग़लतियाँ राई भी हों, पर्वत बना दी जाएँगी

.

रौशनी दरकार होगी जब भी महलों को ज़रा

शह्र की सब झुग्गियाँ पल में जला दी जाएँगी

.

फिर कोई तस्वीर हाकिम को लगी है आइना

उँगलियाँ तय हैं मुसव्विर की कटा दी जाएँगी

.

इनके अरमानों की परवा अह्ले-महफ़िल को कहाँ

सुबह होते ही सभी शमएँ बुझा दी जाएँगी

.

नाम पत्थर पर शहीदों के लिखे तो जाएँगे

हाँ, मगर क़ुर्बानियाँ उनकी भुला दी…

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Posted on November 7, 2018 at 10:22am — 15 Comments

ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार

2122---1212---22

ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था

मैं ही मैं था, मेरे सिवा क्या था

.

झूठ बोला तो बच गई गरदन

हक़-बयानी का फ़ाएदा क्या था

.

चाह मंज़िल की थी निगाहों में

ठोकरें क्या थीं आबला क्या था

.

पर निकलते ही थे उड़े ताइर !

ये रिवायत थी, सानेहा क्या था

.

दर्द, ग़ुस्सा, मलाल, मजबूरी

आख़िर उस चश्मे-तर में क्या क्या था

.

क्यों मैं बर्बादियों का सोग करूँ

जब मैं आया, यहाँ मेरा क्या…

Continue

Posted on July 13, 2018 at 12:30am — 14 Comments

ग़ज़ल -- ख़ुशी का पल तो मयस्सर नहीं, हैं दर्द हज़ार / दिनेश कुमार

1212--1122--1212--112

.

ख़ुशी का पल तो मयस्सर नहीं, हैं दर्द हज़ार

हमारे हिस्से में क्यों है बस इंतिज़ारे-बहार

.

कि रफ़्ता रफ़्ता थकावट बदन में आएगी

उतर ही जाएगा आख़िर में ज़िन्दगी का ख़ुमार

.

मिलेगी आख़िरी ख़ाने में मौत ही सबको

बिसाते-दह्र पे पैदल हो या हो फिर वो सवार

.

इधर जनाज़ा किसी का बस उठने वाला है

उधर दुल्हन की चले पालकी उठाए कहार

.

ग़मों की धूप भी हमको सुखों की छाँव लगे

हमारा नाम भी कर लो कलन्दरों में…

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Posted on May 30, 2018 at 6:00pm — 5 Comments

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Comment Wall (7 comments)

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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