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दिनेश कुमार
  • Male
  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"बहुत बहुत शुक्रिया आ.  श्याम नारायण वर्मा जी। इनायत।"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"आ. दिनेश जी,भरपूर और मुकम्मल ग़ज़ल हुई है..बहुत बहुत बधाई .."
10 hours ago
Shyam Narain Verma commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
" इस सुंदर ग़ज़लक़े लिए हार्दिक बधाई"
15 hours ago
दिनेश कुमार posted blog posts
15 hours ago
दिनेश कुमार posted a blog post

ग़ज़ल -- बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा / दिनेश कुमार

2122--1122--1122--22बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा ऐसी शोहरत की बुलन्दी हो ठिकाना मेरामैं हूँ इक प्रेम पुजारी ऐ मेरी जाने-हयात तू ही मन्दिर, तू कलीसा, तू ही का'बा मेरामेरे बेटे की निगाहों में हैं कुछ ख़्वाब मेरे ज़िन्दगी उसकी है जीने का सहारा मेरामौत भी चैन से आती है कहाँ इन्सां को ज़ेह्न में गूँजता ही रहता है मेरा मेराअब भी रातों को मेरी नींद उचट जाती है आह इक चाँद को छूने का वो सपना मेराअनकही बात मेरी क्या वो समझ पाएंगे ? क्या मुकम्मल कभी हो पायेगा क़िस्सा मेरा ??सिलवटें वक़्त की…See More
Thursday
Ravi Shukla commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- ये क्या हो गया है भले आदमी को // दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी बड़ी अच्छी ग़ज़ल आपने कही रवानी भी खूब है इस पर हुई चर्चा से कई बातें सीखने को मिली सीधी जुबान के शेर पर आपने अच्छी कोशिश की है उस पर आए सुझावों से रवानी और भी ज्यादा बढ़ गई है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
May 7
Ravi Shukla commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूं"
May 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- ये क्या हो गया है भले आदमी को // दिनेश कुमार
"आद0 दिनेश जी सादर नमन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। आद0 समर साहब के इस्लाह से और निखर गयी ग़ज़ल। बहुत बहुत बधाई आपको।"
May 7
दिनेश कुमार commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय समर साहब। वाह वाह। मत्ला विशेष हुआ है। और आख़िरी का जवाब नहीं। मैंने भी आपकी और उनकी वो चर्चा का बख़ू…"
May 7
TEJ VEER SINGH commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"हार्दिक बधाई आदरणीय दिनेश जी। बेहतरीन गज़ल। सितमगरों के इशारों पे खेल होता हैअदालतों में कोई फ़ैसला नहीं होता.जुड़ा ही रहता है ममता की गर्भनाल से वोवजूद बेटे का माँ से जुदा नहीं होता"
May 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"आ. भाई दिनेश जी, अच्छी गजल हुई है , हार्दिक बधाई ।"
May 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- ये क्या हो गया है भले आदमी को // दिनेश कुमार
"आ. भाई दिनेश जी अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
May 6
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"जी,मुझे याद है,इसी लिये लिख देता हूँ  ।"
May 6
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार आदरणीय निलेश सर जी। बहुत शुक्रिया। अगर कहीं चूक लगे, अवश्य point out किया करें। सादर। "
May 6
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. समर साहब, हौसला अफ़ज़ाई और सुधार…"
May 6
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May 6

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )

2122---1212---22

.

जो भी सोचूँ, उसी पे निर्भर है

मेरी दुनिया तो मेरे भीतर है

.

इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर

स्वर्ग से ख़ूब-तर मेरा घर है

.

जिसमें जज़्बा है काम करने का

कामयाबी उसे मयस्सर है

.

जीत कैसे मिली, है बेमानी

जो भी जीता, वही सिकन्दर है

.

कोई क़तरा भी भीक में माँगे

और हासिल किसी को सागर है

.

ज़ह्र-आलूदा इन हवाओं में

साँस लेना भी कितना दूभर है

.

हाँ, ये जादूगरी है लफ़्ज़ों की

( हाँ,…

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Posted on May 21, 2018 at 10:00am — 3 Comments

ग़ज़ल --- मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता / दिनेश कुमार / इस्लाह हेतु.

1212---1122---1212---22

.

मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता

तो कामयाबी की चोटी भी सर नहीं करता

.

हसीन ख़्वाब अगर दिल में घर नहीं करता

तवील रात से मैं दर-गुज़र नहीं करता

.

हरेक मोड़ पे ख़ुशियों तो कम हैं,दर्द हज़ार

कहानी वो मेरी क्यों मुख़्तसर नहीं करता

.

ग़मों ने मुझको सिखाया है ज़िन्दगी का हुनर

किसी भी हाल, मैं अब आँख तर नहीं करता

.

मैं अपने अज़्म की पतवार साथ रखता हूँ

मेरे सफ़ीने पे तूफ़ाँ असर नहीं…

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Posted on May 20, 2018 at 6:27pm

ग़ज़ल -- बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा / दिनेश कुमार

2122--1122--1122--22

बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा

ऐसी शोहरत की बुलन्दी हो ठिकाना मेरा

मैं हूँ इक प्रेम पुजारी ऐ मेरी जाने-हयात

तू ही मन्दिर, तू कलीसा, तू ही का'बा मेरा

मेरे बेटे की निगाहों में हैं कुछ ख़्वाब मेरे

ज़िन्दगी उसकी है जीने का सहारा मेरा

मौत भी चैन से आती है कहाँ इन्सां को

ज़ेह्न में गूँजता ही रहता है मेरा मेरा

अब भी रातों को मेरी नींद उचट जाती है

आह इक चाँद को छूने का वो सपना मेरा

अनकही बात मेरी क्या वो…

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Posted on May 17, 2018 at 5:31am

ग़ज़ल --- कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता // दिनेश कुमार

1212---1122--1212--22

.

कठिन, सरल का कोई मसअला नहीं होता

अगर तू ठान ले दिल में तो क्या नहीं होता

.

अगर हो अज़्म तो पत्थर में छेद होता है

हुनर मगर ये सभी को अता नहीं होता

.

हमारे कर्म से प्रारब्ध भी बदलता है

नसीब अपना कभी तयशुदा नहीं होता

.

ये तज्रिबा है हमारा मुशाहिदा भी है

अमीर-ए-शह्र किसी का सगा नहीं होता

.

सितमगरों के इशारों पे खेल होता है

अदालतों में कोई फ़ैसला नहीं होता

.

जुड़ा ही रहता है ममता…

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Posted on May 6, 2018 at 9:00am — 8 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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