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Manoj kumar Ahsaas
  • 36, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2×16अशआर की आंखें खुलती है, जब सारा आलम सोता है।मेरे कमरे में रात गए तंजीम का मौसम होता है।तकदीर के हाथों सौंप दिया जब तूने मुझे महबूब मेरे, मेरी हालत को सुनकर क्यों अब तन्हाई में रोता है।खुशियों से गम का रिश्ता जग में ऐसा लगता है हमको,कोई हाथों में रसगुल्लें देकर पीठ में कील चुभोता है। मैंने तो सदा चाहा है यही इस गम को रिहा कर दूं खुद से,हर और शिकारी बैठा है और ये पिंजरे का तोता हैउसकी मेहनत का फल उसको जाने क्यों देर से मिलता है,जो सपनों को आंखों में भर खेतों में पसीना होता है।गुटखे की महक से…See More
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2122   2122   2122   212सब हवाले कर दिया तुझको मसीहा जान कर, अब कहाँ जायें बता गैरों को अपना मान कर।मत करो उससे शिकायत अपने घाटे लाभ की, जिसको तुमने सर चढ़ाया दिल की बातें मान कर।तेरा उससे प्यार है औरों से नफरत की उपज, बरसों के रिश्ते भी चल उसके लिए कुर्बान कर।वक्त का पहिया है ये तो चलना इसका काम है, आने वाले कल की खातिर आज की पहचान कर।खुद को उसको सौंपकर निश्चित हुए बैठे हैं हम, उसको बस इतनी तलब है अपना कल आसान कर।साँसों की गिनती का भी ले लेगा वो तुमसे हिसाब, बन गया मालिक जो कहता था मुझे…See More
Monday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2×16बेकार सताते हो खुद को बेकार तमाशा करते हो,जो छुपकर तुमको देख रहा तुम उसको ढूंढा करते हो।जब पास कोई तस्वीर नहीं, न उसका पता मालूम तुम्हें,दर दर की ठोकर खाकर बस तकलीफ़ बढ़ाया करते हो।मिल जाएगा वो है शक इसमें, खो जाओगे तुम ये मुमकिन हैसागर को पाने की जिद में क्यों झील का सौदा करते हो।ऐसा तो कोई दस्तूर नहीं अजनबियों में कोई बात न हो,तुमको ही पुकारा है मैंने,पीछे क्या देखा करते हो।गर मांगने से मिल जाता कुछ ,किस्मत का लिक्खा फिर क्या हैउम्मीद से ज्यादा की चाह में उम्मीद ही तोड़ा करते हो।जो बिन मांगे…See More
Jan 11
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

221  2121  1221  212मंजिल भी थी, चराग भी थे ,हौसला न था ।अब सबसे कह रहा हूं ,उधर रास्ता न था ।यह किसकी दस्तरस में धुँआ है मेरी सहर, कल शब तो इस मकां में दिया भी जला न था।लेकर चला रकीब मुझे तेरी राह पर, इक शख्स बस वही था जो मुझसे खफा न था।मुद्दत के बाद भी तेरी तस्वीर दिल में है,तेरा फरेब तेरे करम से बड़ा न था ।उसके जवाब में थे कई उंगलियों के रंग,लगता है उसने खत मेरा पूरा पढ़ा न था ।बदले में उसको लात ही मिलनी जरूर थी,सारा नगर जला था घर उसका जलाना था।मेरे कलाम में कई अशआर वे भी थे,जिनका सही इशारा…See More
Jan 10
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर आपका हार्दिक धन्यवाद "
Jan 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 6
Manoj kumar Ahsaas posted blog posts
Jan 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी सादर"
Jan 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"आद0 मनोज अहसास जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल कहि आपने,, बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Jan 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब मैं सदैव आपका बेहद शुक्रगुज़ार रहूंगा आपका मार्गदर्शन मेरे लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है कृपा बनाये रखिये सर"
Nov 15, 2019
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब इस ग़ज़ल पर पुनः काम करता हूँ सादर"
Nov 10, 2019
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'ग़ज़ल में अपने माज़ी के कई लम्हात लाया हूँ' इस मिसरे में 'अपने' की जगह "अपनी" कर लें। 'मैं टुकड़ा टुकड़ा हूं फिर भी तुम्हारे दिल का टुकड़ा…"
Nov 9, 2019
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'कोई दरिंदा घात लगाकर जब घर में ही बैठा हो,सहमी हुई मासूम कली का कितना बड़ा दुपट्टा हो' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है । 'वक्त जरूरत पर ये दुनिया…"
Nov 9, 2019
Manoj kumar Ahsaas posted blog posts
Nov 7, 2019
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"हार्दिक आभार सागर साहब"
Nov 6, 2019

Profile Information

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Male
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saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2×16

अशआर की आंखें खुलती है, जब सारा आलम सोता है।

मेरे कमरे में रात गए तंजीम का मौसम होता है।

तकदीर के हाथों सौंप दिया जब तूने मुझे महबूब मेरे,

मेरी हालत को सुनकर क्यों अब तन्हाई में रोता है।

खुशियों से गम का रिश्ता जग में ऐसा लगता है हमको,

कोई हाथों में रसगुल्लें देकर पीठ में कील चुभोता है।



मैंने तो सदा चाहा है यही इस गम को रिहा कर दूं खुद से,

हर और शिकारी बैठा है और ये पिंजरे का तोता है

उसकी मेहनत का फल…

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Posted on January 15, 2020 at 12:38am

अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास

2122   2122   2122   212

सब हवाले कर दिया तुझको मसीहा जान कर,

अब कहाँ जायें बता गैरों को अपना मान कर।

मत करो उससे शिकायत अपने घाटे लाभ की,

जिसको तुमने सर चढ़ाया दिल की बातें मान कर।

तेरा उससे प्यार है औरों से नफरत की उपज,

बरसों के रिश्ते भी चल उसके लिए कुर्बान कर।

वक्त का पहिया है ये तो चलना इसका काम है,

आने वाले कल की खातिर आज की पहचान कर।

खुद को उसको सौंपकर निश्चित हुए बैठे हैं हम,

उसको बस इतनी…

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Posted on January 12, 2020 at 11:00pm — 1 Comment

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

2×16

बेकार सताते हो खुद को बेकार तमाशा करते हो,

जो छुपकर तुमको देख रहा तुम उसको ढूंढा करते हो।

जब पास कोई तस्वीर नहीं, न उसका पता मालूम तुम्हें,

दर दर की ठोकर खाकर बस तकलीफ़ बढ़ाया करते हो।

मिल जाएगा वो है शक इसमें, खो जाओगे तुम ये मुमकिन है

सागर को पाने की जिद में क्यों झील का सौदा करते हो।

ऐसा तो कोई दस्तूर नहीं अजनबियों में कोई बात न हो,

तुमको ही पुकारा है मैंने,पीछे क्या देखा करते हो।

गर मांगने से…

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Posted on January 11, 2020 at 12:27am

अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास

221  2121  1221  212



मंजिल भी थी, चराग भी थे ,हौसला न था ।

अब सबसे कह रहा हूं ,उधर रास्ता न था ।

यह किसकी दस्तरस में धुँआ है मेरी सहर,

कल शब तो इस मकां में दिया भी जला न था।

लेकर चला रकीब मुझे तेरी राह पर,

इक शख्स बस वही था जो मुझसे खफा न था।

मुद्दत के बाद भी तेरी तस्वीर दिल में है,

तेरा फरेब तेरे करम से बड़ा न था ।

उसके जवाब में थे कई उंगलियों के रंग,

लगता है उसने खत मेरा पूरा पढ़ा न था…

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Posted on January 9, 2020 at 11:39pm

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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