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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो// मेरे समझ से यह ऐसे होना चाहिए "मिल ले तू इक बार अगर मिल सकते हो" इसी तरह कुछ और भी देखियेगा... बहरहाल बधाई स्वीकार कीजिये"
Saturday
रामबली गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मनोज जी ग़ज़ल पर प्रयास के लिए बधाई स्वीकारें।कुछ बाते- मिल सकता हो>मिल सकना हो कोई कह सकता हो<कोई कह सकता है आगे कुछ खतरा हो<आगे कुछ खतरा है चुन सकता हो<चुन सकता है जरा देखें इन कथ्यों को"
Jul 7
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास

22  22   22  22  22  2मेरे दिल का बोझ किसी दिन हल्का हो. मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो.मुझको लगता है तू मुझको भूल गया,तेरे मन में भी शायद कुछ धोखा हो.तेज तपन के साथ है सूरज अब सर पर,मेरी दुआ है तेरे सर पर कपड़ा हो.मैं तुझको खुद में शामिल कैसे रक्खूँ,तेरे नाम के आगे जब कुछ लिक्खा हो.अब तो अपनेपन की तुझमें बात नहीं, शायद तू अब मुझको ग़ैर समझता हो.छोटी सी एक बात बतानी थी तुझको,पढ़ लेना गर पास कोई ख़त रक्खा हो.जितना मैंने कहा है तुझको ग़ज़लों में, इससे ज्यादा क्या कोई कह सकता हो.मंज़िल उसको कभी नहीं…See More
Jul 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय अमीर साहब गजल पर ध्यान देने के लिए बहुत-बहुत आभार आपका सुझाव उत्तम है तुरंत पालन किया जा रहा है सादर"
Jul 5
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार 'अहसास' जी आदाब।शानदार ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। //दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,// समर सर बता ही चुके हैं, दलीलें बहुवचन है इसलिए गई को भी गईं कर लें। सादर। "
Jul 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब बहुत बहुत आभार सर आपकी सलाह के बिना मेरी हर ग़ज़ल अधूरी है आप कुशल से तो है ना थोड़ा रेस्ट कर लीजिए सर मैं आपसे पहले भी कहता रहा हूं आराम भी जरूरी है हार्दिक आभार सर"
Jul 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार जो टंकण त्रुटियां आपको दिखाई दें उन्हें बता भी दिया करें बड़ी कृपा होगी सादर"
Jul 4
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ये देख कर प्रसन्नता हुई कि इस बार आपने नुक़्ते लगाए हैं । 'दलीले रह गई कमज़ोर मेरी' इस मिसरे में 'दलीले' को "दलीलें" कर लें । यहाँ अब हर किसी…"
Jul 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं देखियेगा ।"
Jul 4
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222  1222  122ज़माने भर में जितने हादसे हैं.हमें ख़ामोश होकर देखने हैं.किसी को चलने में दिक़्क़त न आए,चलो इतना सिमट कर बैठते हैं.मेरी बेबाकियों के रास्ते में, मेरी कुछ ख़्वाहिशों के कटघरे हैं.बिना जिसके हुआ था जीना मुश्किल, उसी के होने से शिकवे गिले हैं.तुम्हारी याद भी इक रोग है क्या, तुम्हारे ख़त को छूते डर रहे हैं.दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,वो अपनी बात कह कर जा चुके हैं.तरक़्क़ी वाली ये दुनिया है ऐसी, यहाँ अब हर किसी से फासले हैं.मौलिक और अप्रकाशितSee More
Jul 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
" आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार"
Jul 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय आगे से बेहतर प्रयास का प्रयास रहेगा"
Jun 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब"
Jun 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय आपकी कृपा से जल्दी ही सीख जाऊँगा सर"
Jun 29

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास

22  22   22  22  22  2

मेरे दिल का बोझ किसी दिन हल्का हो.

मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो.

मुझको लगता है तू मुझको भूल गया,

तेरे मन में भी शायद कुछ धोखा हो.

तेज तपन के साथ है सूरज अब सर पर,

मेरी दुआ है तेरे सर पर कपड़ा हो.

मैं तुझको खुद में शामिल कैसे रक्खूँ,

तेरे नाम के आगे जब कुछ लिक्खा हो.

अब तो अपनेपन की तुझमें बात नहीं,

शायद तू अब मुझको ग़ैर समझता हो.

छोटी सी एक बात बतानी थी…

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Posted on July 5, 2020 at 4:35pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222  1222  122

ज़माने भर में जितने हादसे हैं.

हमें ख़ामोश होकर देखने हैं.

किसी को चलने में दिक़्क़त न आए,

चलो इतना सिमट कर बैठते हैं.

मेरी बेबाकियों के रास्ते में,

मेरी कुछ ख़्वाहिशों के कटघरे हैं.

बिना जिसके हुआ था जीना मुश्किल,

उसी के होने से शिकवे गिले हैं.

तुम्हारी याद भी इक रोग है क्या,

तुम्हारे ख़त को छूते डर रहे हैं.

दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,

वो अपनी बात कह कर जा चुके…

Continue

Posted on July 3, 2020 at 8:55pm — 6 Comments

अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास

2122  2122  2122  212

आदमी को आदमी से डर के बचता देखकर

अपना चेहरा ढक रहे हैं शहर ठहरा देखकर

ढूंढ कर ला दे कोई मुझको मेरे वो आइने

जिनमें तुझको देखता था अपना चेहरा देखकर

इससे बेहतर ज़िन्दगी का और क्या मकसद रहे

आदमी ज़िंदा रहे दुनिया को हँसता देखकर

हाथ को छूकर निकल जाता है मेरे हाथ से

मेरा मन घबरा गया है बहता दरिया देखकर

आपकी बातों पे मुझको अब यकीं बिल्कुल नहीं

आग को झुठला रहे हैं घर भी जलता…

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Posted on June 23, 2020 at 11:32am — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

22  22  22  22  22  22

ज्यादा चिंता से भी आखिर क्या होता है

जो सोचा,अक्सर उसका उल्टा होता है

कह देने से दर्द कहाँ हल्का होता है

कमजोरी का लोगों में चर्चा होता है

शाम ढले तो सब चीज़े धुंधली लगती हैं

सूरज फिर भी अगले दिन उजला होता है

जीवन का चक्कर चलता रहता है यों ही

हरियाली के बाद खेत सूखा होता है

कोई कहता रहता है मन की सब बातें

और किसी का दर्द सदा गूंगा होता है

पीड़ा के लम्हों में…

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Posted on June 21, 2020 at 3:36pm — 5 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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