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Manoj kumar Ahsaas
  • 35, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक गीत मार्गदर्शन के निवेदन सहित: मनोज अहसास

आज मन मुरझा गया हैमर गई सब याचनाएं धूमिल हुई योजनाएंएक बड़ा ठहराव जैसे ज़िन्दगी को खा गया हैआज मन मुरझा गया हैखुरदरी सी हर सतह हैआंसुओ से भी विरह हैवेदना का तेज़ झोंका मेरा पथ बिसरा गया हैआज मन मुरझा गया हैकिसलिये बाकी ये जीवनकिसलिये सांसों का बंधनभावना ,विश्वास पर जब घुप अंधेरा छा गया हैआज मन मुरझा गया हैमौलिक और अप्रकाशितSee More
18 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी आपकी यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद आई हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Wednesday
Dr Ashutosh Mishra commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी उम्दा रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Wednesday
अजय गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है. ///वेदना के पल कुँवारे ले चलोकुछ तो जीने के सहारे ले चलो --मतला पढने में अच्छा लग रहा है. /////दिल बहुत मायूस है परदेस मेंबस हमें अब घर हमारे ले चलो ---- घर…"
Dec 10
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आदरणीय भुवन निस्तेज और आदरणीय राज़ नवादवी साहब हृदय से आभार सादर"
Dec 8
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आदरणीय कबीर साहब आपका हृदय से आभार सादर"
Dec 8
भुवन निस्तेज commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"काफी खूबसूरत अशआर कहे हैं 'अहसास' भाई !"
Dec 8
Surkhab Bashar commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार  जी उम्दा ग़ज़ल पढ़ने  को मिली  बहुत बहुत  मुबारक बाद"
Dec 7
राज़ नवादवी commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आदरणीय मनोज कुमार जी, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए मुबारकबाद. सादर. "
Dec 7
राज़ नवादवी commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आदरणीय मनोज कुमार जी, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए मुबारकबाद. सादर. "
Dec 7
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । अरकान के बारे में क़मर साहिब बता ही चुके हैं ।"
Dec 7
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Dec 7
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । '  तन्हाइयों से दर्द का रिश्ता नया था' ये मिसरा लय में नहीं है,देखियेगा ।"
Dec 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"आ. भाई मनोज जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 7
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"बहुत बहुत शुक्रिया कमर जौनपुरी साहब दरअसल दूसरी ग़ज़ल पोस्ट करनी थी और ये पोस्ट कर दी बहर पहले ही लिख दी थी याद दिलाने के लिए हार्दिक आभार सादर"
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"अच्छी ग़ज़ल हुई है जनाब मनोज कुमार एहसास जी। मुबारकबाद कबूल करें। बहर आपने अलग लिख रखी है। इसकी बहर है 2122 2122 212"
Dec 7

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

एक गीत मार्गदर्शन के निवेदन सहित: मनोज अहसास

आज मन मुरझा गया है

मर गई सब याचनाएं
धूमिल हुई योजनाएं
एक बड़ा ठहराव जैसे ज़िन्दगी को खा गया है
आज मन मुरझा गया है

खुरदरी सी हर सतह है
आंसुओ से भी विरह है
वेदना का तेज़ झोंका मेरा पथ बिसरा गया है
आज मन मुरझा गया है

किसलिये बाकी ये जीवन
किसलिये सांसों का बंधन
भावना ,विश्वास पर जब घुप अंधेरा छा गया है
आज मन मुरझा गया है

मौलिक और अप्रकाशित

Posted on December 15, 2018 at 9:20pm

एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए

221   1221    1221    122

वेदना के पल कुँवारे ले चलो
कुछ तो जीने के सहारे ले चलो

दिल बहुत मायूस है परदेस में
बस हमें अब घर हमारे ले चलो

झील सी आंखों में हैं खामोशियाँ
थोड़े से सपने उधारे ले चलो

मैकदे में बंटती है अब भी शिफा
मैकदे में ज़ख्म सारे ले चलो

दुनिया मे महफूज कोई भी नहीं
साथ कितने भी सहारे ले चलो

मौलिक और अप्रकाशित

Posted on December 6, 2018 at 8:38pm — 6 Comments

एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए

थोडा सा मुस्काने से गम हल्का भी हो सकता है

हर पल की तड़पन से दिल को खतरा भी हो सकता है

अक्सर धोखा हो जाता है देर से प्यासी आंखों को

तुम जिसको दरिया कहते हो सहरा भी हो सकता है

मैं तो अपने दिल से ही हर बार शिकायत करता हूं

वो भी मुझको भूल गया हो ऐसा भी हो सकता है

अब तो मैं यह सोच कर उसकी राहों से हट जाता हूं

इन आंखों से उसका दामन मैला भी हो सकता है

लोग तो अपने मन से बस इल्जाम लगाते रहते हैं

जो दरिया…

Continue

Posted on December 5, 2018 at 11:30pm — 6 Comments

एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए

221    2121     1221     212

माबूद कह दिया कभी मनहूस कह दिया

उसकी निगाहों ने सदा तस्लीम ही कहा

मुझको ये कैसा दिल दिया तूने मेरे खुदा

जिसको खुशी और गम का सलीका नहीं पता

ओझल नजर से हो गई तस्वीर आपकी

बस इतना होने के लिए क्या-क्या नहीं हुआ

जीवन के सारे हादसे आंखो में आ गए

मुरझा के एक फूल जो मिट्टी में जा गिरा

आया है अब की बार इक दूजे ही रंग में

तन्हाइयों से दर्द का रिश्ता नया…

Continue

Posted on December 5, 2018 at 10:53pm — 3 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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