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Manoj kumar Ahsaas
  • 35, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas's Page

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Ajay Kumar Sharma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"बहुत सुन्दर रचना. बधाई स्वीकार करें.."
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"वाह लाजबाब गजल, साथ में शानदार समीक्षा भी , वाह , बहुत बहुत बधाई आपको "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..बेहतरीन"
Friday
Gurpreet Singh commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"बहुत खूब आदरणीय मनोज अहसास जी ,, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने"
Friday
Neelam Upadhyaya commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
" आदरणीय  मनोज कुमार जी, बढ़िया  ग़ज़ल की पेशकश के लिए बधाई स्वीकार करें  ।  "
Friday
Mohammed Arif commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी आदाब,                          हिंदी कवाफ़ी से सुसज्जित बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का तत्काल…"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास जी।बेहतरीन गज़ल। ये समझ आता नही अपनो में बेगाना है कौनमतलबी शर्तें जुड़ी है हर किसी सहयोग में"
Friday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, हिन्दी क़वाफ़ी मेअच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले में शुतरगुर्बा का दोष है, ऊला में 'तेरी' और सानी में 'तुम' देखियेगा । चौथे शैर के सानी मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें 'साथ…"
Friday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

2122 2122 2122 212तोड़ डाला खुद को तेरी आशिकी के रोग में नहीं तुम नहीं लिक्खे थे मेरी कुंडली के योग मेंअब तेरी तस्वीर दिल से मिट गई है इस तरह जैसे ईश्वर को भुला डाले कोई भवरोग मेंतेरे ग़म की,इश्क़ की मूरत थी मुझमें,ढह गई आ नहीं सकती ये मिट्टी अब किसी उपयोग मेंमिल गया,कुछ खो गया, कुछ मिलके भी खोया रहा साथ थी तक़दीर भी जीवन के हर संयोग मेंचैन तेरे इश्क़ के बिन मिल नही पाया कहीं तेरे ग़म में जो असर है योग में ना भोग मेंअब किसे जाकर सुनाऊँ दर्द के ये तर्जुमा तन्हा शाइर जल रहा है बेबसी में ,सोग मेंये समझ…See More
Friday
Manoj kumar Ahsaas commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'
"    बहुत खूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय कबीर साहब आदरणीय नूर साहब को भी बधाई कि कबीर साहब की ये ग़ज़ल जब जब पढ़ी जाएगी संदर्भ के लिए आपकी ग़ज़ल भी पढ़ी जाएगी जनाब मोहम्मद आरिफ साहब वैसे तो मुझे नही लगता कि आपने जो सवाल पूछे हैं उनका जवाब आपको नही पता…"
May 9
Manoj kumar Ahsaas commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-2-ऐ ख़ुदा! रूतबा इबादत-गाहों का अपनी जगह
"खूबसूरत मुकम्मल गजल के लिए आपको हार्दिक बधाई आदरणीय "
Apr 21
Manoj kumar Ahsaas commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"बहुत खूबसूरत और बेहद दिलचस्प  गजल के लिए हार्दिक बधाई और एक खास बात यह भी है सर कि आपकी और कबीर साहब की बातचीत से बहुत सारी बातें पता चली है साफ हुई है बातचीत जारी रखिए जब तक हम लोग देख रहे हैं सादर धन्यवाद"
Apr 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक अतुकांत रचना :फरियाद: मनोज अहसास
"अच्छी रचना हुई है हार्दिक बधाई ।"
Apr 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक अतुकांत रचना :फरियाद: मनोज अहसास
"बहुत ही खूब भावरचना आदरणीय.."
Apr 4
Shyam Narain Verma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक अतुकांत रचना :फरियाद: मनोज अहसास
"बहुत खूब ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥"
Apr 4
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक अतुकांत रचना :फरियाद: मनोज अहसास
"कोई बात नहीं,शुक्रिया प्रिय ।"
Apr 3

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

2122 2122 2122 212

तोड़ डाला खुद को तेरी आशिकी के रोग में नहीं

तुम नहीं लिक्खे थे मेरी कुंडली के योग में

अब तेरी तस्वीर दिल से मिट गई है इस तरह

जैसे ईश्वर को भुला डाले कोई भवरोग में

तेरे ग़म की,इश्क़ की मूरत थी मुझमें,ढह गई

आ नहीं सकती ये मिट्टी अब किसी उपयोग में

मिल गया,कुछ खो गया, कुछ मिलके भी खोया रहा

साथ थी तक़दीर भी जीवन के हर संयोग में

चैन तेरे इश्क़ के बिन मिल नही पाया कहीं

तेरे ग़म में जो…

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Posted on July 12, 2018 at 10:30pm — 8 Comments

एक अतुकांत रचना :फरियाद: मनोज अहसास

एक दुआ

साथ देने की गुजारिश के साथ

जाने अबकी बार खुदाया कैसी पूर्णमासी है

चाँद के पूरे दीदार की चाहत सुलग रही है माथे पर

और पैरों को हिला रहा है डर मंज़र खो देने का

सूनी आँखे ढूंढ रही हैं अपनी क्षमता से दूर

घुटने टेके, हाथ पसारे ,दुआ सहारे

हर दम

मर्यादा से बँधे खड़े हैं

और अम्बर का कैसा नज़ारा

इन नज़रों को सता रहा है

पेड़ों के पीछे चाँद के आने की आहट से

धड़ धड़ सीना धड़क रहा है

लेकिन

जो अंधियारे ,गहरे, काले बादल गरज रहे हैं

उनसे इन…

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Posted on April 2, 2018 at 7:02pm — 12 Comments

एक अतुकांत रचना

एक नवीनतम अतुकांत रचना

मैं तो सदा उसकी ही रहूंगी,

मुझे उसी की रहना है बस

इससे क्या

कि

मेरे जिस्म की मासूमी पर,

उसने दर्द के दाग लिखे हैं ।

मेरी सुर्ख आंखों का काजल ,

उसके जुर्म बह निकला है

और चेहरे की रंगत है

उसके दिए हुए निशान

अंतिम लफ्ज़ से उसके नाम के,

बस मेरी पहचान बची है

मैंने उसकी खातिर अपना,

चेहरा सब से छुपा लिया है

मैं फिर भी उसकी ही हूं

जबकि

वो जब चाहे मुझको अपनी,

जीस्त से रुखसत कर सकता है

वो जब…

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Posted on March 27, 2018 at 4:21pm — 6 Comments

ग़ज़ल इस्लाह के लिए :मनोज अहसास

221 2121 1221 212

हमनें यूँ ज़िन्दगानी का नक्शा बदल लिया

देखा तुझे जो दूर से रस्ता बदल लिया

तुमने भी अपने आप को कितना बदल लिया

नज़रों की ज़द में आते ही चहरा बदल लिया

जब इस सराय फानी का आया समझ में सच

हमनें भरी दुपहर में कमरा बदल लिया

दादी की जलती उंगलियों का दर्द अब नहीं

हामिद ने इक खिलौने से चिमटा बदल लिया

दीवानगी भी ,शाइरी भी,दिल भी, शहर भी

तुमको भुलाने के लिए क्या क्या बदल लिया

कांपी तमाम रात…

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Posted on February 1, 2018 at 6:12pm — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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