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Manoj kumar Ahsaas
  • 36, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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May 10
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय दिगंबर जी और आदरणीय लक्ष्मण जी ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार"
Apr 30
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब बेशकीमती इस्लाह के लिए हार्दिक आभार ग़ज़ल आपके सामने आते ही मैं निश्चिन्त हो जाता हूँ कि अब सब दोष निकल जाएंगे सादर नमन"
Apr 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । आ. भाई समर जी के सुझाव से गजल और निखर जायेगी।"
Apr 30
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'आदमी सोच के कुछ चलता है,दुनिया में हो जाता कुछ' इस मिसरे में 'आदमी' की जगह "इंसाँ" कर लें,गेयता बढ़ जाएगी । 'मानव की इच्छाएं कुछ है, अर…"
Apr 29
दिगंबर नासवा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मनोज जी ... "
Apr 24
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22  22  22  22  22  22  22  2एक ताज़ा ग़ज़लआदमी सोच के कुछ चलता है,दुनिया में हो जाता कुछ। मानव की इच्छाएं कुछ है, अर मालिक का लेखा कुछ ।अपने अपने दुख के साये मैं हम दोनों जिंदा है ,तू क्या समझे,मैं क्या समझूं, तेरा कुछ है, मेरा कुछ ।दुनिया के ग़म ,रब की माया और सियासत की बातें ,खुद से बाहर आ सकता तो, इन पर भी लिख देता।एक जरा सी बात हमारी हैरानी का कारण है,ख्वाब में हमने कुछ देखा था ,आंख खुली तो देखा कुछ।हम तो अपने सपनों को सच करने में नाकाम रहे,मेरी बेटी तू अंबर की छाती पर लिख देना कुछ ।सबसे पहले…See More
Apr 24
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"वाह आदरणीय मनोज जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..."
Apr 9
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'फरियाद कोई उनसे सुनाई नहीं जाती' इस मिसरे में 'उनसे' की जगह "उनको" कर लें ।"
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Sushil Sarna commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"फरियाद कोई उनसे सुनाई नहीं जाती । आंखों से मगर ,बात छुपाई नहीं जाती । मैं जानता हूं ,तू मेरे हक में नहीं है पर दिल से तेरी तस्वीर मिटाई नहीं जाती । आदरणीय इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई। हर शेर लाज़वाब है।"
Apr 5
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

221   2121   1221   212फरियाद कोई उनसे सुनाई नहीं जाती ।आंखों से मगर ,बात छुपाई नहीं जाती ।मैं जानता हूं ,तू मेरे हक में नहीं है पर दिल से तेरी तस्वीर मिटाई नहीं जाती ।जो बात जला देती है दिल को मेरे अक्सरवो बात किसी से भी बताई नहीं जाती।तुझपे न असर होगा किसी बात का मेरीफिर भी मेरे होठों से दुहाई नहीं जाती ।बारिश में बिखर जाते हैं जिनके सभी खुश रंग तस्वीर वो अश्कों से सजाई नहीं जाती।मौलिक और अप्रकाशितSee More
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Manoj kumar Ahsaas commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब  स्वागत है अमित भाई"
Apr 3

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. मनोज अहसास जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, मोहतरम समर कबीर साहिब की इस्लाह से और निखार आ गया है। सादर बधाई आपको"
Feb 12
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम ये हम लोगों का सौभाग्य है कि हम आपकी देख रेख में हैं आपके सामने आकर ग़ज़ल बोलने लगती है खुद ब खुद उसके दोष दूर हो जाते हैं आपका सादर आभार"
Feb 8
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम ये हम लोगों का सौभाग्य है कि हम आपकी देख रेख में हैं आपके सामने आकर ग़ज़ल बोलने लगती है खुद ब खुद उसके दोष दूर हो जाते हैं आपका सादर आभार"
Feb 8
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय रक्षिता जी सादर आभार"
Feb 8

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22 22 22 22 22 22 22 2

तुम ही बताओ साधु फकीरों तुमने तो देखा होगा ।

इस झूठी दुनिया का वो सच्चा मालिक कैसा होगा ।

जिसकी सोच के हर कतरे में मौत का खौफ समाया हो ,

सोच के देखो दुनिया वालों कैसे वो जीता होगा ।

जिस रास्ते पर चलते चलते मैं तुझको भी भूल गया ,

वो रस्ता तू समझ ले दिलबर कितना पथरीला होगा।

पल पल अपने जीवन का बस इस चिंता में घुलता है ,

बीते कल में ऐसा क्यों था ,आते कल में क्या होगा ।

धोखे ने सौ शक्लें…

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Posted on May 10, 2019 at 4:00pm

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22  22  22  22  22  22  22  2

एक ताज़ा ग़ज़ल

आदमी सोच के कुछ चलता है,दुनिया में हो जाता कुछ।

मानव की इच्छाएं कुछ है, अर मालिक का लेखा कुछ ।

अपने अपने दुख के साये मैं हम दोनों जिंदा है ,

तू क्या समझे,मैं क्या समझूं, तेरा कुछ है, मेरा कुछ ।

दुनिया के ग़म ,रब की माया और सियासत की बातें ,

खुद से बाहर आ सकता तो, इन पर भी लिख देता।

एक जरा सी बात हमारी हैरानी का कारण है,

ख्वाब में हमने कुछ देखा था ,आंख खुली तो…

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Posted on April 23, 2019 at 10:51pm — 5 Comments

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

221   2121   1221   212

फरियाद कोई उनसे सुनाई नहीं जाती ।

आंखों से मगर ,बात छुपाई नहीं जाती ।

मैं जानता हूं ,तू मेरे हक में नहीं है पर

दिल से तेरी तस्वीर मिटाई नहीं जाती ।

जो बात जला देती है दिल को मेरे अक्सर

वो बात किसी से भी बताई नहीं जाती।

तुझपे न असर होगा किसी बात का मेरी

फिर भी मेरे होठों से दुहाई नहीं जाती ।

बारिश में बिखर जाते हैं जिनके सभी खुश रंग

तस्वीर वो अश्कों से सजाई नहीं…

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Posted on April 3, 2019 at 5:06pm — 3 Comments

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

22 22 22 22 22 22 22 2

हर लम्हा इक चोट नई थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

मेरी हस्ती टूट रही थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

मेरे पाँव में इक कांटे से तुझको कितना दर्द हुआ

जब तू शोलों से गुजरी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

जिन सपनों को हमने मालिक के हाथों में सौंपा था

उन सपनों में आग लगी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

सारे रस्ते आकर के जिस रस्ते पर मिल जाते हैं

उस रस्ते पर पीर घनी थी मुझ पर क्या गुजरी होगी

छोड़…

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Posted on February 8, 2019 at 12:26pm — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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