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DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU'
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DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s Page

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DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |
"ममनून हूँ.......... आपसब का आशीर्वाद मिला | शुक्रिया |"
Nov 10
Mahendra Kumar commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय डॉ. बैजनाथ जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Nov 7
Samar kabeer commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |
"जमाब बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्चा है, बधाई स्वीकार करें I  टंकण त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दें I "
Nov 5
Zaif commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |
"मयकशी के लिए अब मैं भी चला आया हूँ तेरी आँखों से ही पीने की तलब है साक़ी| अहा कमाल। बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आदरणीय मिंटू जी। दाद क़ुबूल फरमाएं।"
Nov 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |
"आदरणीय शर्मा जी बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल कही है...बह्र लिख देने से समझने में आसानी होती...सादर"
Nov 1
DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' updated their profile
Oct 22
DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' posted a blog post

आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |

 आज मैखाने का दस्तूर अज़ब  है साक़ी |जाम दिखता नहीं पर बाकी तो सब है साक़ी । मयकशी के लिए अब  मैं भी चला आया हूँ    तेरी आँखों से ही पीने की तलब है साक़ी| भूल जाता हूं मैं दुनिया के सभी रंजो अलमजाम नज़रों का तेरे हाय गज़ब है साक़ी| अपनी आँखों से ही इक जाम पिला दे मुझकोतेरे मयख़ाने में ये आख़िरी शब है साक़ी| तेरी चौखट की तो ये बात निराली लगतीजाति मजहब न कोई नस्ल–नसब है साक़ी| दर्दो ग़म अपने भूलाने को चला आता हूँवरना पीने का कहां और सबब है साक़ी| डॉ. बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’स्वरचित व अप्रकाशित See More
Oct 22
Gurpreet Singh jammu commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ
"वाह वाह आदरणीय बैजनाथ शर्मा 'मिंटू जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने, बहुत बहुत बधाई।"
Nov 20, 2021
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ
"आदरणीय शर्मा जी विषय आपने बहुत ही खूब चुना है...सादर"
Nov 15, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ
"आदरणीय बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' जी आदाब, ख़ूबसूरत अह्सासात से लबरेज़ अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Nov 12, 2021
DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' posted a blog post

ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ

2 2 1 2 1 2 1 1 2 2 1 2 1 2बचपन की याद हमको दिलाती हैं बेटियाँ|उंगली पकड़ के जब भी घुमाती हैं बेटियाँ| हाथों से अपने जब भी खिलाती हैं  देखिये दादी की याद हमको दिलाती हैं बेटियाँ| बेटा बसा है देखिये जब से विदेश मेंइस घर के सारे बोझ उठाती हैं बेटियाँ | जर्जर शरीर में जो न आती है नींद तो दे दे के थपकियाँ भी सुलाती हैं बेटियाँ| बेटी की शान में मैं भला और क्या कहूँ,बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ| मौलिक व अप्रकाशित See More
Nov 11, 2021
DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' commented on केवल प्रसाद 'सत्यम''s blog post समसामयिक दोहे
"बहुत बढ़िया ................फलते पाप कुतंत्र .....वाह "
Mar 15, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
AHAMEDABAD
Native Place
BIHAR
Profession
TEACHER

DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s Blog

आज मैखाने का दस्तूर अज़ब है साक़ी |

 

आज मैखाने का दस्तूर अज़ब  है साक़ी |

जाम दिखता नहीं पर बाकी तो सब है साक़ी ।

 

मयकशी के लिए अब  मैं भी चला आया हूँ    

तेरी आँखों से ही पीने की तलब है साक़ी|

 

भूल जाता हूं मैं दुनिया के सभी रंजो अलम

जाम नज़रों का तेरे हाय गज़ब है साक़ी|

 

अपनी आँखों से ही इक जाम पिला दे मुझको

तेरे मयख़ाने में ये आख़िरी शब है साक़ी|

 

तेरी चौखट की तो ये बात निराली लगती

जाति मजहब न कोई नस्ल–नसब है…

Continue

Posted on October 22, 2022 at 9:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ

2 2 1 2 1 2 1 1 2 2 1 2 1 2

बचपन की याद हमको दिलाती हैं बेटियाँ|

उंगली पकड़ के जब भी घुमाती हैं बेटियाँ|

 

हाथों से अपने जब भी खिलाती हैं  देखिये 

दादी की याद हमको दिलाती हैं बेटियाँ|

 

बेटा बसा है देखिये जब से विदेश में

इस घर के सारे बोझ उठाती हैं बेटियाँ |

 

जर्जर शरीर में जो न आती है नींद तो 

दे दे के थपकियाँ भी सुलाती हैं बेटियाँ|

 

बेटी की शान में मैं भला और क्या कहूँ,

बेटे से बढ़ के…

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Posted on November 11, 2021 at 9:00pm — 3 Comments

चारण हूँ मद्दाह नहीं मैं सच लिक्खूंगा-बोलूँगा - बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

S S S S S S S S S S S S S S S

.

देश के दुश्मन सबके दुश्मन इनसे यारी ठीक नहीं|

इनसे हाथ मिलाने वालों यह गद्दारी ठीक नहीं|

मंदिर-मस्ज़िद-धर्मों-मज़हब रक्षित औ महफूज़ हैं फिर

इनकी खातिर गोलीबारी -तेग-कटारी ठीक नहीं

माँ की अस्मत ख़तरे में औ मुल्क में हो गर त्राहिमाम

तब तो लोग कहेंगे दिल्ली की सरदारी ठीक नही।

आरक्षण की ख़ातिर ही अंधे-बहरे कुर्सी पर हैं

इस हालत से देश की होगी कुई बीमारी ठीक नहीं|

चारण हूँ मद्दाह नहीं मैं सच…

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Posted on February 4, 2019 at 2:00pm — 4 Comments

पढ़ न पाए ये ज़माना इश्क की तहरीर अब

२१२२ २१२२ २१२२ २१२

पढ़ न पाए ये ज़माना इश्क की तहरीर अब 

इसलिए ही ख़त जलाये औ तेरी तस्वीर अब

मंदिरो-मस्ज़िद में जाकर मिन्नतें-सजदा किये

फिर भी तुमसे दूर रहना है मेरी तक़दीर अब|

लोग कुछ मजनूँ कहें अब और कुछ फ़रहाद भी

यह तुम्हारे इश्क की ही लग रही तासीर अब |

ज़ख़्म गहरा हो गया हो या कि फिर नासूर तो

प्यार का ही लेप उस पर हो दवा अक्सीर अब|

है मुक़द्दर में नही मत सोचकर बैठो मियाँ

बदलेगी तक़दीर निश्चित…

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Posted on May 23, 2018 at 1:30pm — 2 Comments

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At 8:56am on October 23, 2015, मनोज अहसास said…
आपका स्वागत है
सादर
At 1:35am on October 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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