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Gurpreet Singh jammu
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Gurpreet Singh jammu commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उस के नाम पे धोखे खाते रहते हो
"वाह आदरणीय नीलेश सर, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने।"
Dec 31, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी। "
Dec 21, 2021
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'मेरी आँखों के ख़ित्ते में अक्सर रहती बारिश है' इस मिसरे में उचित लगे तो 'रहती' की जगह "होती" कर लें । ग़ज़ल लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि ग़ज़ल…"
Dec 10, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Dec 10, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
Dec 8, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय सुशील सरना जी"
Dec 8, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
" शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी "
Dec 8, 2021
Sushil Sarna commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति सर । हार्दिक बधाई सर"
Dec 5, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जम्मू साहिब आदाब, मज़ाहिया अंदाज़ की उर्दू- इंग्लिश क़वाफ़ी के साथ अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Dec 4, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जम्मू साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
Dec 4, 2021
Gurpreet Singh jammu posted a blog post

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-22-22-2उस लड़की को डेट करूँ ये मेरी पहली ख़्वाहिश है। और ये ख़्वाहिश पूरी हो जाए बस ये दूजी विश है।हँसना, शर्माना, भरमाना और फिर ना ना ना करना,उस लड़की का हर इक नख़रा सचमुच कितना गर्लिश है।मेरा बांकपना और उसकी मस्ती जब आपस में मिले,ये जो प्यार हमारा है ये उस पल की पैदाइश है।मेरे ख़्वाब में आना हो तो छाता लेकर आना तुम,मेरी आँखों के ख़ित्ते में अक्सर रहती बारिश है।क्यों न हुई वो मेरी? जाँच कराओ सी.बी.आई. से,मुझको लगता है इस में भी पाकिस्तान की साज़िश है।तूने अपने ख़्वाब का ख़ून किया है लाख…See More
Dec 2, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Nov 25, 2021
सालिक गणवीर commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"भाई  Gurpreet Singh jammu  जी सादर नमस्कार बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,शैर दर शैर मुबारक़बाद क़ुबूल करें। कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं ,ध्यान दें. यथा हूँ ,आँखों ,पँहुचे। जहाँ तक मैं जानता हूँ ग़ज़ल में कॉमा या प्रश्नवाचक चिन्हों का इस्तेमाल…"
Nov 22, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ
"वाह वाह आदरणीय बैजनाथ शर्मा 'मिंटू जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने, बहुत बहुत बधाई।"
Nov 20, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मेरी ज़ीस्त की कड़ी धूप ने मुझे रख दिया है निचोड़ कर
"मेरे दिल में अक्स उन्हीं का था उन्हें ऐतबार मगर न था कभी देखते रहे तोड़ कर कभी दिल की किरचों को जोड़ कर.    वाह वाह आदरणीय नीलेश सर जी, क्या ही लाजवाब शेर कहा आपने। इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई।"
Nov 20, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलेश सर, आप जिस तरह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं ये उस का भी नतीजा है की थोड़ा बहुत बेहतर कहने लगा हूं।आपने मतले में के बारे में बहुत शानदार सुझाव दिया है, *लौटाओ* बिलकुल परफेक्ट रहेगा सर जी। आपकी ग़ज़ल के लिए समझ बहुत ही…"
Nov 20, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

Gurpreet Singh jammu's Blog

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-22-22-2

उस लड़की को डेट करूँ ये मेरी पहली ख़्वाहिश है।

और ये ख़्वाहिश पूरी हो जाए बस ये दूजी विश है।

हँसना, शर्माना, भरमाना और फिर ना ना ना करना,

उस लड़की का हर इक नख़रा सचमुच कितना गर्लिश है।

मेरा बांकपना और उसकी मस्ती जब आपस में मिले,

ये जो प्यार हमारा है ये उस पल की पैदाइश है।

मेरे ख़्वाब में आना हो तो छाता लेकर आना तुम,

मेरी आँखों के ख़ित्ते में अक्सर रहती बारिश है।

क्यों न हुई वो मेरी?…

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Posted on December 2, 2021 at 7:39pm — 8 Comments

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-2

तुम कोई पैग़ाम कभी तो भिजवाओ।

वरना मेरे कबूतर वापिस दे जाओ।

जिसको तुमने अपने दिल से भुलाया है,

क्या ये वाजिब है खुद उसको याद आओ ?

मैने कहा जब,तुमने दिल को ज़ख़्म दिया,

वो बोले, कितना गहरा है, दिखलाओ।

जब से तुम बिछड़े हो, खुद से दूर हूं मैं,

प्लीज़ किसी दिन मुझ को मुझ से मिलवाओ।

आंखों में हैं ख्वाब भरे, पर नींद उड़ी,

गर ये प्यार नहीं तो क्या है, समझाओ।

'वो' कब के…

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Posted on November 15, 2021 at 11:30am — 6 Comments

दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.

शमअ  देखी न रोशनी देखी । 

मैने ता उम्र तीरगी देखी । 

देखा जो आइना तो आंखों में, 

ख़्वाब की लाश तैरती देखी । 

टूटे दिल का हटाया मलबा तो, 

आरज़ू इक दबी पड़ी देखी । 

एक इक पल डरावना सा लगा, 

इतने पास आ के ज़िन्दगी देखी । 

मैने इंसानियत रह ए हक़ पर, 

दो कदम चल के हांफती देखी 

2.

आप ने क्या कभी परी देखी । 

मैने यारो अभी अभी देखी । 

उसकी आँखों में सुब्ह सी…

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Posted on July 14, 2019 at 12:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

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Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 8:13pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया
हौसला अफ़जाई का मेरे ग़ज़ल कहने का प्रयास आपको पसंद आया दिल से शुक्रगुज़ार हूँ!
At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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