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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
Aug 24
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
Aug 24
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी , हर बार की तरह इस बार भी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने।  मतला भी बहुत खूबसूरत हुआ है। आपकी ग़ज़ल में कुछ शब्द जैसे "खुदा" को (1 -1 )और   " दोस्तों " को ( 2 1 1 ) के वज़न पर पहली बार…"
Aug 24
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"मतले में ईता के बारे में कन्फ्यूजन हो रहा है सर जी , प्लीज़ क्लियर करें"
Aug 24
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"आदरनीय गंगाधर शर्मा जी, हास्य का रंग लिए बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने , बहुत बहुत बधाई। गिरह बहुत ही मज़ेदार लगी।   आखिरी मिसरे में बह्र गड़बड़ाती लग रही है जी।  "
Aug 24
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"ज़ुल्म ज़ालिम के सहा करते हैं ख़ामोशी सेइतने मासूम हैं आवाज़ उठाते भी नहींमेरी नज़रों में "समर" लाइक़-ए-तहसीन हैं वोज़ख्म दिल के जो ज़माने को दिखाते भी नहींवाह वाह आदरणीय समर सर जी , बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है।  इस खूबसूरत ग़ज़ल से इस बार के…"
Aug 24
Gurpreet Singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(उजाले..लुभाने लगे हैं)
Aug 16
Gurpreet Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- कब यहाँ पर प्यार की बातें हुईं
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ,  बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल हुई है । बहुत बहुत बधाई आपको ।  दूसरा शेर और ये वाला  शेर बहुत पसंद आए  बाढ़ में जब बह चुका सब, तब कहीं नाव की, पतवार की बातें हुईं वैसे मुझे लगा कि ऊला में अगर '…"
Aug 12
Gurpreet Singh commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _ घर की बर्बादी के हालात नज़र आते हैं |0
"वाह वाह आ तस्दीक़ अहमद खान जी , बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। मुबारकबाद कबूल करें"
Aug 6
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"रफ़्ता रफ़्ता हम भी याद-ए-रफ्तगाँ हो जाएँगे। और फिर इक रोज़ भूली दास्ताँ हो जाएँगे । आशिकों के चाव हैं हम जब जवाँ हो जाएंगे, कुछ बनेंगे अश्क तो कुछ सिसकियाँ हो जाएंगे । दिल की बस्ती मैं तुम्हारे नाम तो कर दूँ..मगर , सोचता हूँ कितने अरमाँ ला-मकाँ हो…"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान जी , इस ज़मीन में ये आपकी दूसरी ग़ज़ल भी बेहतीरन हुई है। बहुत ही खूबसूरत अशआर कहे हैं आपने , वाह वाह बागबां बिजली अगर मेरे नशेमन पर गिरीनज़रे आतिश पास के भी आशियाँ हो जाएँगे l नक़शे पा तस्दीक रह में उनके मिल जाएंगे जबहम भी गिरते…"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"वाह वाह आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी ,, बहुत बढ़िया अशआर हुए हैं , इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें जी"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आदरणीय विनय कुमार जी , बहुत अच्छी गाल हुई है , बधाई स्वीकार करें"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"बन भी सकते हैं किसी दिन दुश्मनी का ये सबबराज़ दिल के दोस्तों पर गर अयाँ हो जाएँगे. आख़री हिचकी तलक दिल को यही उम्म्मीद थीमेरी हालत पर कभी वो मह्रबाँ हो जाएँगे ज़िक्र उनकी बेवफ़ाई का जो छेड़ोगे "समर"मेरी आँखों से अभी आँसू रवाँ हो जाएँगे वाह…"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आदरणीय नीलेश सर जी ,बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने ,, ये शेर तो बेमिसाल रूह का पंछी जो उड़ जाए तो ये सारे क़फ़सया मिलेंगे ख़ाक में या फिर धुआँ हो जाएँगे."
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आदरणीय राज़ नवादवी जी , बहुत खूबसूरत ग़ज़ल से मुशायरे का आगाज़ किया आपने ,बहुत बहुत बधाई"
Jul 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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