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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh commented on santosh khirwadkar's blog post दिल ये कैसे बदल गया
"वाह,.. बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय संतोष जी "
Sep 13
Gurpreet Singh commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी,, नमस्कार,,ग़ज़ल के क्षेत्र में भी  बहुत बढ़िया प्रयास कर रहे हैं आप,, कुछ अशआर बहुत ही अच्छे लगे इस ग़ज़ल में,, इसे लिए आपको दिल से बधाई "
Sep 13
Gurpreet Singh commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post घरोंदों को जलाया है किसी ने दोस्ती करके
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी,, तेरे पहलू में आया हूँ लगा साकी गले मुझको बड़ा ही जुल्म ढाया है किसी ने दोस्ती करके यह शेयर बहुत अच्छा लगा"
Sep 11
Gurpreet Singh commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही ग़ज़ल (है अजब चीज मुहब्बत मुझे मालूम न था)
"आदरणीय सुरेंद्र जी,, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है,, बधाई स्वीकार करें  "
Sep 6
Gurpreet Singh commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )
"रु बरु उनके मैं रोता ही रहा सोच के यह आँसुओं से तो पिघल जाते हैं पत्थर यारो | वाह वाह आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,,, बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,, सभी अशआर बहुत अच्छे हुए हैं,, मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं "
Sep 6
Gurpreet Singh commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (22/22/22/2)
"जी आरिफ साहब,,  कुछ दिन तो पंजाब, हरयाणा में इंटरनेट सुविधा बंद होने के कारण और फिर कुछ अन्नय  व्यस्तताओं के चलते मंच पर उपस्थित नहीं हो पाया "
Sep 5
Gurpreet Singh commented on Gajendra shrotriya's blog post गज़ल- आज ढ़लती धूप सी हैं
"एक से एक खूबसूरत अशआर से सजी इस गज़क के लिए आपको दिल से बधाई आदरणीय गजेंद्र जी "
Sep 5
Gurpreet Singh commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (22/22/22/2)
"उम्दा ग़ज़ल हुई है आदणीय मोहम्मद आरिफ जी,,, बधाई स्वीकार करें "
Sep 5
Gurpreet Singh commented on SALIM RAZA REWA's blog post ग़ज़ल - चांदनी कहूँ तु्‍मको ( सलीम रज़ा रीवा )
"आदरणीय सलीम रज़ा  जी इस अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको  बहुत बहुत मुबारकबाद "
Sep 5
Gurpreet Singh commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -दिल ने थोड़ा मलाल रक्खा है
"आदरणीय नीलेश जी बहुत ही उम्दा अशआर कहे हैं आपने इस ग़ज़ल में,, बहुत बहुत मुबारकबाद "
Sep 5
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"मेरे कहे को मान देने के लिये धन्यवाद ।"
Aug 24
राज़ नवादवी commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ सेहम आँखों में सपने सुला कर चले तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़  वो जब मेरे खत को जला कर चले। बताओ मुझे नींद आएगी क्या  कि वो मेरा बिस्तर बिछा कर चले। जनाब गुरप्रीत सिंह जी, ये तीनों अशआर ख़ासतौर से पसंद आए. दाद क़ुबूल…"
Aug 24

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"आदरणीय गुरप्रीत भाई , बहुत खूबसूरत गज़ल कही है जो आवश्यक सुधार के बाद और बेहतरीन हो गई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ।"
Aug 24
Gurpreet Singh posted a blog post

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)रहे हम तो नादां ये क्या कर चले कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले मेरा आशियाना फ़ना कर चले।रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दरकि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ सेहम आँखों में सपने सुला कर चलेज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न देतो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़ वो जब मेरे खत को जला कर चले।बताओ मुझे नींद आएगी क्या कि वो मेरा बिस्तर बिछा कर.... चले। See More
Aug 24
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर जी,,, आपके सुझावों के अनुसार ग़ज़ल में बदलाव करता हूँ "
Aug 24
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,एक बात आपको बताना भूल गया था कि दूसरे शैर के सानी मिसरे में 'आशिआना'को "आशियाना" कर लें । आपके अशआर सुधारने की कोशिश की है देखिये कैसे लगते हैं :- 'रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर…"
Aug 20

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About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )

2122 -1212 -22

मुझ पे तू मेहरबां नहीं होता
मैं तेरा क़द्रदां नहीं होता।

बोलने वाले कब ये समझेंगे
चुप है जो बेज़ुबां नहीं होता।

कोई अरमान हम भी बोते. . .गर
मौसम-ए-दिल ख़िज़ाँ नहीं होता।

ख्वाहिशो सीने पे न दस्तक दो
अब मेरा दिल यहां नहीं होता।

जो बचाए किसी को कातिल से
वो सदा पासबाँ नहीं होता।

चाहे कितना उठे धुआँ ऊपर
वो कभी आसमाँ नहीं होता।
(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 20, 2017 at 1:41pm — 14 Comments

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)

2122 -1212 -22


आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

टूट जाए सभी का दिल या रब
दिलजले को बड़ी ख़ुशी होगी।

ज़ह्न हारा हुआ सा बैठा है
दिल से तक़रार हो गई होगी।

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना
शमअ बेइन्तहा जली होगी।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 11, 2017 at 1:26pm — 28 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )

(2122-2122-2122-212)

पहले सूरज सा तपें खुद को ज़रा रोशन करें

फिर थमें मत फिर किसी को चाँद सा रोशन करें।

ये नहीं, कोई दिया बस इक दफ़ा रोशन करें

गर करें, बुझने पे उसको बारहा रोशन करें।

मेरी भी वो ही तमन्ना है जो सारे शह्र की

आप मेरे घर में आएं घर मेरा रोशन करें।

सामने है इक चराग़ और आप के हाथों में शमअ

आप किस उलझन में हैं जी?क्या हुआ? रोशन करें!

तीरगी के हैं नुमाइंदे सभी इस शह्र में

कौन है…

Continue

Posted on May 23, 2017 at 10:04am — 22 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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