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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"वाह सर जी  ये एक और खूबसरत  ग़ज़ल आपकी पढ़ने को मिली । मतले सहित सभी अशआर शानदार हुए ,  बहुत बधाई आपको "
Nov 2
Gurpreet Singh commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"वाह वाह आदरणीय बलराम धाकड़ जी , क्या शानदार  ग़ज़ल कही है आपने,  आनंद आ गया पढ़कर । बधाई स्वीकार करें "
Nov 2
Gurpreet Singh commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"दर्द बढ़ता ही जा रहा है,"समर" कैसी देकर दवा गया है मुझे  वाह वाह बहुत खूब, आदरणीय समर सर जी , आपकी ये चौथी तरही ग़ज़ल भी क्या कमाल हुई है।"
Nov 1
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आपकी सराहना से बहुत हौसला बड़ा है आदरणीय अफरोज़ सहर जी , बहुत बहुत शुक्रिया आपका "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय महेंद्र कुमार जी , बस ये तीसरी ग़ज़ल वाली बात प्रभाकर सर को नहीं पता चलनी चाहिए ...हाहाहा "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय अजय तिवारी जी ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"शुक्रिया जनाब नादिर खान जी ,  दोष को दूर करने की कोशिश रहेगी , शुक्रिया आपका "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"शुक्रिया आदरणीय मनन कुमार सिंह जी "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
" खूंडी हौली मारिओ बाबा जी "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"माफ़ी चाहता हूँ जी ,  जोश में होश खो बैठा "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"माफ़ी चाहता हूँ जी ,  जोश में होश खो बैठा "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"ग़ज़ल - 3 आज का सच भुला गया है मुझे । ख़्वाब कल के दिखा गया है मुझे। साथ लेकर तो आ गया है मुझे।पर डगर में बिठा गया है मुझे । ये ग़नीमत है मौत से पहले , सब्र करना तो आ गया है मुझे । ज़िन्दगी एक खेल है जिसमें , हर खिलाड़ी हरा गया है मुझे । तीर निकला…"
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"उस जगह से बिखर गया हूँ मैंजिस जगह से छुआ गया है मुझे वाह वाह आदरणीय महेंद्र कुमार जी क्या उम्दा शेर है , , इस तीसरी शानदार प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय नीलेश सर जी ..आपने जिस तरह हमेशा दिल खोल कर मेरी हौसला अफजाई की है , ये उसी का नतीजा है की जैसे तैसे ये  दूसरी ग़ज़ल कह पाया हूँ । बहुत बहुत धन्यवाद "
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"परम आदरणीय योगराज सर जी ,  मेरी साधारण सी तुकबंदी को आपने इतना प्यार बख्शा ,  इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया । आप जैसे ग़ज़ल विद्वान का तारीफ के दो शब्द कहना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है ।  इसके काबिल तो मैं नहीं शायद  प्यार जितना दिया…"
Oct 21
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"(ग़ज़ल - 2) इश्क़ तेरा बना गया है मुझे । इश्क़ तेरा मिटा गया है मुझे । निकला जब तक न ज़ीस्त की हद से , तेरा ग़म हांकता गया है मुझे । अब तू वादा निभा या तोड़ सनम, "सब्र करना तो आ गया है मुझे।" इस दफ़ा मैने एक झूठ कहा , इस दफ़ा ही सुना गया है मुझे…"
Oct 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

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Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आपके उत्साह वर्धन से हम आह्लादित हैं ,हमारी लेखनी सफल हुई ,आपका दिल से आभार"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
11 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ  भाईजी मेरा प्रयास सार्थक हुआ। हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से…"
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Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीयल लक्ष्मण भाईजी हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से धन्यवाद, आभार।"
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ भाई हरिगीतिका छंद की प्रशंसा के लिए आपका हृदय से धन्यवाद, आभार।"
12 hours ago

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