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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's Discussions

आभार सम्पादक महोदय , प्रधान सम्पादक महोदय और प्रिय मित्रों का

आभार सम्पादक महोदय , प्रधान सम्पादक महोदय और प्रिय मित्रों का प्रिय मित्रों आप सभी हिंदी साहित्य प्रेमियों को 'भ्रमर' का नमन !आप सब के साथ ये साझा करते बहुत ही हर्ष हो रहा है की  मुझे (21.08.2012 -…Continue

Started Aug 25, 2012

 

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Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"कोटि कोटि बधाई ।"
Nov 28, 2017
Samar kabeer commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"जनाब सुरेन्द्र कुमार शुक्ला"भ्रमर"जी आदाब,उम्दा प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 27, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"जनाब समर जी बेहद उम्दा  गजल। .उर्दू के लफ्ज कभी हमें परेशान करते हैं कम ज्ञान जो है  फिर भी आनंद लेता हूँ। .बधाई  भ्रमर ५ "
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"मनोज जी धन्यवाद आप का इस सामयिक रचना पर  आपका समर्थन मिला ख़ुशी  हुयी आभार "
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Manoj kumar shrivastava's blog post प्रश्न तुमसे है
" मनोज जी होश जगाती सुन्दर रचना काश लोग जागें और ये बुराई भागे। ....भ्रमर ५  "
Nov 25, 2017
Manoj kumar shrivastava commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"आदरणीय शुक्ल जी, इस भावपूर्ण रचना पर मेरी बधाई स्वीकार करें।"
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"आरिफ भाई आदाब आप की  त्वरित और प्यारी प्रतिक्रिया मिली रचना बेहतरीन लगी मन खुश हुआ बुराई तो सब के लिए बुरी ही है भाई चाहे वो आप हों या हम नेता या अभिनेता राजनीतिज्ञ या लेखक , आइये अपनी कोशिश जारी रहे अमन चैन के लिए बहुत बहस सुनते होंगे आप…"
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"शहजाद उस्मानी भाई आदाब। .ये सामयिक रचना आप के मन को छू सकी सुन मन हर्षित हुआ आइये हम सब सदा अमन चैन की कोशिश में लगे रहें जितनी संख्या अच्छे लोगों की बढ़ पाए तो शायद कुछ काम आये। पता लिखना आवश्यक नहीं ठीक कहा आप ने। सुरक्षित तरीका भी है ,लेकिन एक आदत…"
Nov 25, 2017
Mohammed Arif commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"आदरणीय सुरेंद्र कुमार शुक्ल जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन और सामयिक रचनाएँ हैं । हर बुराई का अंत होना मानव के हित में है भाई मगर जो आतंक की आड़ में राजनेता रात-दिन ऊल-जलूल ब्यानबाज़ी करके एक वर्ग विशेष को राष्ट्रीय धारा से वंचित करने का काम कर रहे हैं उन…"
Nov 25, 2017
Sheikh Shahzad Usmani commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"देश के रक्षक और भक्षकों/आतंकियों पर बेहतरीन विचारोत्तेजक भावपूर्ण रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' जी। (अंत में पता वगैरह लिखना आवश्यक नहीं है।)"
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR posted a blog post

चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है

क्यों मरते हो हे ! आतंकीकीट पतंगों के मानिंदहत्यारे तुम-हमे बुलातेजागें प्रहरी नहीं है नींद==============उधर काटता केक वो बैठाड्राई फ्रूट चबाता हैघोर निशा में सर्द बर्फ  हिमकब्र तेरी बनवाता है===================आतातायी ब्रेनवाश  करनित नए जिहाद सिखाता है'मूरख' ना बन तू भी मानवकभी सोच रे ! क्या तू दानव ?===================मार-काट नित खून बहानाकुत्तों सा निज खून चूसना -खुश होना  फिर- कौन मूर्ख सिखलाता हैनाली के कीड़े सा जीवन क्या 'आजादी' गाता  है============================== कितनी आशाएं सपने…See More
Nov 25, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"बहुत ही ख़ूबसूरत  ग़ज़ल ... बधाई,"
Nov 21, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत सुंदर  ग़ज़ल भ्रमर ५"
Nov 21, 2017
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post जग में करूँ प्रसार (गीत) - रामानुज लक्ष्मण
"बहुत सुंदर अभिव्यक्ति और सार्थक भ्रमर ५"
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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
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PRATAPGARH
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PRATAPGARH
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INSANIYAT , EEMANDARI , ACHHAIYON KA PUJARI

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन -जाऊं ---भ्रमर ५ 

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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's Blog

चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है

क्यों मरते हो हे ! आतंकी

कीट पतंगों के मानिंद

हत्यारे तुम-हमे बुलाते

जागें प्रहरी नहीं है नींद…

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Posted on November 25, 2017 at 11:00am — 8 Comments

गुमशुदा हूँ मैं

गुमशुदा हूँ  मैं

तलाश जारी है

अनवरत 'स्व ' की

अपना ‘वजूद’

है क्या ?

 आये खेले ..

कोई घर घरौंदा बनाए..

लात मार दें हम उनके 

वे हमारे घरों को....

रिश्ते  नाते उल्का से लुप्त

विनाश ईर्ष्या विध्वंस बस

'मैं ' ने जकड़ रखा  है मुझे

झुकने नहीं देता रावण सा

एक 'ओंकार'  सच सुन्दर

मैं ही हूँ - लगता है

और सब अनुयायी

'चिराग'  से डर लगता है

अंधकार समाहित है

मन में ! तन - मन दुर्बल…

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Posted on May 10, 2016 at 12:30pm — 5 Comments

तुम तो जिगरी यार हो

तुम तो जिगरी यार हो

==================

दोस्त बनकर आये हो तो

मित्रवत तुम दिल रहो

गर कभी मायूस हूँ मैं

हाल तो पूछा करो ..?

-------------------------------…

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Posted on April 15, 2016 at 1:00pm — 4 Comments

अभिव्यक्ति की आजादी

पढ़ते हुए बच्चे का अनमना मन

टूटती ध्यान मुद्रा

बेचैनी बदहवासी

उलझन अच्छे बुरे की परिभाषा

खोखला करती खाए जा रही थी .......

कर्म ज्ञान गीता महाभारत

रामायण राम-रावण

भय डर आतंक

राम राज्य देव-दानव…

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Posted on March 4, 2016 at 11:00am — 6 Comments

Comment Wall (28 comments)

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At 6:32pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय सुरेन्द्र कुमार जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद , कुछ दिनो से व्यस्तता कि वजह से ओ बी ओ में अनुपस्थित रही इसलिए देर से आपका msg पढ़ा । इसके लिए क्षमा चाहुंगी । 

At 8:35am on May 19, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय सुरेन्द्र जी

सादर!

At 7:28pm on October 12, 2013, D.K.Nagaich 'Roshan' said…

आपका बहुत बहुत दिली शुक्रिया, आदरणीय शुक्ल जी .. आपको मेरी कोशिश पसन्द आई, मेरी मेहनत कामयाब हुई..

At 1:05pm on September 2, 2013, annapurna bajpai said…
आ० सुरेन्द्र कुमार जी आपका हमारी मित्र मंडली मे आपका स्वागत है ।
At 9:58am on April 25, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

 मित्रता सौभाग्य लाती है। मैं पावन हुआ।   आपका हार्दिक स्वागत है।

At 9:04pm on October 22, 2012, VISHAAL CHARCHCHIT said…

आपका हृदय से आभारी हूं सुरेन्द्र भाई.......मुझे भी अत्यंत प्रसन्नता हुई कि आप भी मेरे ही जनपद के हैं.......यह स्नेह दिनोंदिन प्रगाढ हो ऐसी कामना है !!!!

At 6:50am on October 3, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आदरणीय ज्येष्ठ भ्राता सुरेन्द्र जी........आपका बहुत-बहुत धन्यवाद..........जय श्री राधे............

At 12:32pm on August 10, 2012, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

सुरेन्द्र भाई नमस्कार
"हम दोनों सागर के तट पर ना जाने कितनी बार एक साथ बैठ के साझा सूरज डुबा दिया करते थे क्या उन्हें उसका एक भी लम्हा याद नहीं आता होगा ! उनके स्पर्स को मै दिल से महसूस किया करता था ! क्या उनका स्पर्स मात्र एक छलावा था ? जो भी कुछ हो मै आज भी उन्हें यही दुवा दूंगा की

ओ जहाँ रहे वहाँ दर्द न हो...खुशी हो...रौशनी हो...खुशबुएं हों मुरादे मन की पूरी हो,..........!!! मै एक संस्था की अस्थापना करूंगा जो जरुरत मंद के लिए हमेशा कम करती रहेगी >>!!!!!!!!!!!!

At 12:09pm on August 10, 2012, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

सुरेन्द्र भाई नमस्कार ....!!!
दर्द में भी जीने का अपना एक मज़ा होता है ! उन्होंने जितने भी वादे किये थे उस वक्त बहुत सहज और सरल लगा था ! लेकिन आज ऐसा लगता है की उन्होंने एक बड़ा अजीब सा वादा किया था ! मुझे ख़ुशी इस बात की है की मैंने एक भी वादा तोड़ा नहीं ....किये भी वही...तोड़े भी वही......... !!!!

At 12:43am on August 4, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

सुरेन्द्र भाई नमस्कार ! ग़ज़ल पर आपकी सधी हुई प्रतिक्रिया और उत्साहबर्धन के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! ऐसे ही स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखें ! साभार !

 
 
 

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