For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anjuman Mansury 'Arzoo'
  • Female
  • chhindwara
  • India
Share

Anjuman Mansury 'Arzoo''s Friends

  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Samar kabeer

Anjuman Mansury 'Arzoo''s Groups

 

Anjuman Mansury 'Arzoo''s Page

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"///ये स्कूल के हेड मास्टर की तरह रौब ग़ालिब करने का प्रयास एक साहित्यकार को अपने कनिष्ठ या वरिष्ठ साहित्यकार के लिए सर्वथा अनुचित है। //आपकी इस बात से मैं पूरी तरह सहमत हूँ और आग्रह करता हूँ कि अपने वरिष्ठों/ कनिष्ठों/ समकक्षों के कलाम में हेडमास्टर…"
Nov 9
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//आप शे'र पढ़ने नहीं खामियाँ निकालने बैठे हैं इसीलिए आपका गोलपोस्ट लगातार बदल रहा है ..// शेर पढ़ने और ख़ामियों को नज़र-अंदाज़ कर देने से क्या सीखा या सिखाया जा सकता है मुहतरम, जबकि सभी यहाँ सीखने-सिखाने आते हैं, ये मंच ही सीखने-सिखाने का…"
Nov 9
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब 136 में चर्चा तो आ. लक्ष्मण धामी जी के शेर पर भी हो चुका था फिर भी यहाँ उसे कुछ साबित करने के असफल प्रयास के रूप में चेपा गया.मैंने भी वही किया है अत: आहत न हों.. बात निकलेगी तो फिर दू........र तलक जाएगी ....//आरज़ू जी…"
Nov 9
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//आप की बात के जवाब में एक तुकबन्दी पेश है.. देख कर बताइए कि क्या वह बात स्पष्ट कर रही है ?? अपनी अना की शानकी ख़ातिर सूली चढ़ने वाले हैं "एक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बरबाद किया"... क्या यहाँ इन दो पंक्तियों से स्पष्ट है कि किन की…"
Nov 9
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. अमीरुद्दीन साहब //(क्योंकि यह कोई नज़्म नहीं है कि बात आगे की लाईनों में साफ़ हो जायेगी, ग़ज़ल का शे'र है और ग़ज़ल के शे'र में दो मिसरों में बात पूरी और स्पष्ट होना जरूरी है) //अव्वल तो यह शे'र क्रिस्टल क्लियर है ..दूसरे आप की…"
Nov 9
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//अत: सिर्फ पिता की बात करें तो उन में उनके तमाम अजदाद का डीएनए पिता के डीएनए में मौजूद रहेगा .. और पिता से सब्जेक्ट में  भी आएगा : पिता जो एकवचन हैं उस की मृत्यु होने पर भी सब्जेक्ट में सभी अजदाद रहेंगे..डीएनए की शक्ल में .. और दफ्न…"
Nov 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - 'आरज़ू' टूटी न उम्मीद से रिश्ता टूटा
"आ. अन्जुमन जी, अभिवादन । अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बवाई।"
Nov 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. अमीरुद्दीन साहब,किसी को ग़लत साबित करने की ज़िद में आप शेर समझना भूल गये हैं.. पहले बेहूदा सा बहर का पॉइंट लाए, फिर मुर्दे में मुर्दा  वाला और अब शुतुर्गुरबा वाला.. आ. लक्ष्मण धामी जी के शेर का यहाँ क्या मतलब वो आप ही समझें ..//शे'र…"
Nov 8
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी,  //क्या ज़रूरी है कि वो एकसाथ दफ्न किये गये हों..किसी सामूहिक कब्र में..// हास्यपद। अजदाद के जिस्म अलग-अलग दफ़्न दफ़्न होने से 'अजदाद' एक वचन नहीं हो जाएगा। शे'र में शुतरगुर्बा दोष यक़ीनी…"
Nov 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. अमीरुद्दीन साहब..शेर कतई यह तअस्सुर नहीं दे रहा कि किरदार ख़ुद मर गया है.. जैसा आप अबतक समझ रहे थे .. निदा की नज़्म पढ़कर आप यहाँ तक पहुँचे हैं कि अजदाद बहुवचन है अत: दफ्न किये आना चाहिए... हुज़ूर!! क्या ज़रूरी है कि वो एकसाथ दफ्न किये गये…"
Nov 7
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//मुझमें ज़िंदा हैं मेरे अजदाद सभी मौत फ़क़त तूने तो पैकर दफ़्न किया...  अगर शायरी समझते हैं तो पाएँगे कि कोई मामूली शेर नहीं हुआ है इस मंच पर बल्कि बड़ा क्लासिकी शेर हुआ है जो कभी कभी किसी के यहाँ हो पाता है .. अगर इस शेर में ताकत न होती तो मैं…"
Nov 7
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,अगर आप की टिप्पणी न पढ़ता तो आपका ज़िक्र भी नहीं करता..आप को आप की टिप्पणी. आरज़ू जी की ग़ज़ल का शेर और मेरी टिप्पणी तभी समझ आएगी जब आप निदा फ़ाज़ली साहब की उल्लेखित नज़्म पढ़ेंगे और पढ़कर समझेंगे ..उसके बिना सारी बातें बेकार हैं ..एक…"
Nov 7
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब भी अजदाद के ख़ुद में ज़िंदा रहने के हवाले पर निदा फ़ाज़ली साहब की नज़्म // तुम्हारी कब्र पर मैं फातहा पढ़ने नहीं आया// पढ़ें .. भ्रांतियों और कुंठाओं से आराम मिलेगा..कि हमारे पूर्वज किस तरह हम में ज़िंदा रहते हैं.. अक्षरश: न भी हो…"
Nov 7
Nilesh Shevgaonkar commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"आ. समर सर // //हिन्दी छंदों में कई जगह 222 को २१२१ लिया गया है और कतई लय भंग नहीं है// छंदों में ज़रूर ऐसा किया जाता होगा लेकिन ग़ज़ल में तो ऐसी मिसाल देखने को नहीं मिलती ।//.तरही आयोजन में मैं  आपको ग़ज़ल में  २१२१ के प्रयोग की कई मिसालें…"
Nov 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधाई। गुणीजनो की बातों का संज्ञान लें । और अन्य लेखकों की रचनाओं पर भी उपस्थिति दर्ज कराएँ।"
Nov 7
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - 'आरज़ू' टूटी न उम्मीद से रिश्ता टूटा
"मुहतरमा अंजुमन आरज़ू साहिबा आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।  "
Nov 6

Profile Information

Gender
Female
City State
Chhindwara
Native Place
Umranala
Profession
Teacher
About me
learner

Anjuman Mansury 'Arzoo''s Photos

  • Add Photos
  • View All

Anjuman Mansury 'Arzoo''s Blog

ग़ज़ल - 'आरज़ू' टूटी न उम्मीद से रिश्ता टूटा

वज़्न -2122 1122 1122 22/112

क्यों इसे आब दिया सोच के दरिया टूटा

जब समुंदर के किनारे कोई तिश्ना टूटा

एक साबित क़दम इंसान यूँ तन्हा टूटा

देख कर उसको न टूटे कोई ऐसा टूटा

वस्ल की जिस पे मुकद्दर ने लिखी थी तहरीर

वक़्त की शाख़ से वो क़ीमती लम्हा टूटा

तेरे बिन ज़ीस्त मेरी तुझ-सी ही मुश्किल गुज़री

हिज्र में मुझ पे भी तो ग़म का हिमाला टूटा

कुछ न टूटा मेरे हालात की आँधी में बस

जिसमें तुम थे वही ख़्वाबों…

Continue

Posted on November 3, 2021 at 11:22am — 4 Comments

ग़ज़ल- मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं

वज़्न -1212 1122 1212 22/112

मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं

गिरा के झोपड़ी वो बस्तियाँ बनाते हैं

ये आ'ला ज़र्फ़ हैं कैसे, बुलंदी पाते ही

उन्हें गिराते हैं जो सीढ़ियाँ बनाते हैं

है भूख इतनी बड़ी अब कि छोटे बच्चे भी

किताब छोड़ चुके बीड़ियाँ बनाते हैं

ग़िज़ा जहान में उनको नहीं मयस्सर क्यों

जो फ़स्ल उगा के यहाँ रोटियाँ बनाते हैं

उन्हें नसीब ने घर जाने क्यों दिया ही नहीं

सभी के वास्ते जो आशियाँ बनाते…

Continue

Posted on October 23, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया

वज़्न -2122 2122 2122 212

ख़ुद को उनकी बेरुख़ी से बे- ख़बर रहने दिया

उम्र भर दिल में उन्हीं का मुस्तक़र* रहने दिया (ठिकाना)

उनकी नज़रों में ज़बर होने की ख़्वाहिश दिल में ले

हमने ख़ुद को ज़ेर उनको पेशतर रहने दिया

उम्र का तन्हा सफ़र हमने किया यूँ शादमाँ

उनकी यादों को ही अपना हमसफ़र रहने दिया

उनसे मिलकर जो कभी होती थी इस दिल को नसीब

अपने ख़्वाबों को उसी राहत का घर रहने दिया

वो न आएँगे शब- ए- फ़ुर्क़त…

Continue

Posted on October 19, 2021 at 12:07pm — 4 Comments

ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया

वज़्न - 22 22 22 22 22 2

उनसे मिलने का हर मंज़र दफ़्न किया

सीप सी आँखों में इक गौहर दफ़्न किया

दिल ने हर पल याद किया है उनको ही

जिनको अक़्ल ने दिल में अक्सर दफ़्न किया

ख़्वाब उनकी क़ुर्बत के टूटे तो हमने

इक तुरबत को घर कहकर घर दफ़्न किया

उनका शाद ख़याल आने पर भी हमने

कब अपने अंदर का मुज़तर दफ़्न किया

मुझमें ज़िंदा हैं मेरे अजदाद सभी

मौत फ़क़त तूने तो पैकर दफ़्न…

Continue

Posted on October 16, 2021 at 8:30pm — 23 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:56am on September 30, 2021, Sheikh Shahzad Usmani said…

आदाब।.बहुत-मुबारकबाद और हार्दिक स्वागत आदरणीया अंजुमन 'आरज़ू' साहिबा। अब आपकी रचनायें अधिक सुविधा से पढ़ सकेंगे। गोष्ठियों में आपका इंतज़ार और स्वागत।

At 10:53pm on September 29, 2021, Anjuman Mansury 'Arzoo' said…
जी बहुत-बहुत शुक्रिया मोहतरम, आदाब
At 10:53pm on September 29, 2021, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

मुहतरमा अंजुमन साहिबा ओ बी ओ के मंच पर आप का स्वागत है। सादर। 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, किसी शब्द के किस गुरु वर्ण को गिरा कर पढ़ा जा सकता है, इस समझ पर गौर…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीया रिचा जी, एक सुझाव : मक्ते का नाम या तखल्लुस की कोई मात्रा नहूं गिरायी जाती. यह मान्य नियम…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपके कहे पर विद्वद्जन अपनी-अपनी बातें करेंगे. किंतु मेरा सुझाव शिकस्ते…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय दयाराम जी, आपके प्रयास पर हार्दिक बधाइयाँ.  गुणीजनों, विशेषकर लक्ष्मण जी के कहे का…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"मुझे उसकी उल्फतों पर यकीं आए कैसे तस्दीककरे बात मुझ से अक्सर जो नज़र बदल बदल के...  वााह…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"इस बेहतर कोशिश के लिए हार्दिक बधाइयाँ, आदरणीय सालिक गणवीर जी.  समय होता तो आपके अश'आर और…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आपसे जो कुछ कहना था, मैंने कह दिया. आप किन्हीं और की टिप्पणी की बातें मेरे सिर डाल कर अन्यथा कहे जा…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"जी, अब ठीक है।"
11 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-हमारे आँसू
"स्वागत संग आभार आदरणीय धामी जी..."
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी...सादर"
12 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ.भाई लक्ष्मण जी मतला यूँ पढ़ें 'ये कहा था उसने मुझको तो बिछड़ते ही मचल…"
12 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service