For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Mohinder Kumar
  • Male
  • Delhi NCR
  • India
Share

Mohinder Kumar's Friends

  • Tanuja Upreti
  • डिम्पल गौड़
  • poonam dogra
  • Rita Gupta
  • Hari Prakash Dubey
  • SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
  • rajni chhabra
 

Mohinder Kumar's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi NCR
Native Place
Himachal Pradesh
Profession
Sr. Manager in PSU
About me
A Simple Human Being who feels Life is Precious Gift of God.... Live it to its full.

Mohinder Kumar's Videos

  • Add Videos
  • View All

Mohinder Kumar's Blog

एक पर्वत की व्यथा - कविता

गर्व से सर उठाये

पर्वत की शिखरोँ को

सूर्य की किरण, सर्वप्रथम

व अंतिम किरण, अंत तक

निज दिन चूमती है

परंतु चकित हूँ

यह फिर भी हरित नहीँ होती

हरित होती हैँ घाटियाँ

जीवन वहीँ विचरता है

किँचित यह ओट देने का श्राप है

अथवा दमन का प्रतिशोध

कि जल की एक बूँद नहीँ ठहरती यहाँ

जल स्त्रोत इसी गोद मेँ जन्म ले

पलायन कर जाते हैँ

हवा की सनसनाहट

बादलोँ की गडगडाहट

के अतिरिक्त कोई स्वर नहीँ…

Continue

Posted on May 7, 2015 at 3:45pm — 3 Comments

भटकन – कविता

कभी गलियारे मेँ यादोँ के

कभी बँजारे बन राहोँ पर

न जाने क्या ढूँढते हैँ हम

 

भूलाना था जिसे हमको

वही सब  याद करते हैँ

रेत के भँवर मेँ डूबते हैँ हम

 

कभी मौसम जो भाते थे

और मँजर जो लुभाते थे

उन्हीँ से आज ऊबते हैँ हम

 

न आने वाला है अब कोई

न मनाने वाला है अब कोई

खुद से जाने क्योँ रूठते हैँ हम

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 5, 2015 at 3:00pm — 7 Comments

रेत की ढेरी - कविता

ऐ दिल

ख्वाबोँ की बस्ती से

निकल चल तो अच्छा हो

ये वो रँग हैँ

बिगाड देँगे जो

जिंदगी की तस्वीर

को तेरी

 

ले समझ

उस क्षितिज से आगे

है और भी दुनिया

सरकती जाती है सीमायेँ

और राहेँ साथ चलती हैँ

हर सजग राही की

बन चेरी

 

है गम

हार का अच्छा

न जश्न

किसी जीत का बेहतर

हवाओँ के रुख के साथ

बदलती रह्ती है

मरु मेँ रेत की

ये ढेरी

 

मौलिक…

Continue

Posted on November 10, 2014 at 12:30pm — 4 Comments

कुर्सी वाले लोग

क्या क्या मँशा उनसे बैठे पाले लोग

क्या करते हैँ सत्ता के ठैले वाले लोग

 

यहाँ दिन भर खटकर  चुल्हा जलता

कुछ जनता की खाते बैठे ठाले लोग

 

सरकारेँ बनती पूँजीपतियोँ के पैसे से

ताकत वोट की समझेँ भोले-भाले लोग

 

कुछ सालोँ बाद हवा खुद बदलती है

बुझा पुरानी नई मशाल सँभालेँ लोग

 

कुर्सी पर बैठे लोगोँ के हैँ ऊँचे सपने

जनता को सपने बेचेँ कुर्सी वाले लोग

देश विदेश के दौरे  हैँ उनकी…

Continue

Posted on November 7, 2014 at 3:30pm — 5 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:57pm on November 11, 2014, Admin said…

आदरणीय मोहिन्दर कुमार जी कृपया ओ बी ओ नियमावली की कंडिका २(ग) //OBO अंतर्गत फोरम, ब्लॉग, टिप्पणी, चैट या और भी कही पर किसी तरह का लिंक/RSS जो दूसरे साइट या ब्लॉग का हो देना मना है// का अवलोकन व अनुपालन सुनिश्चित करें।

सादर।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post बुढ़ापा .....
"आदरणीय सुशील सरना जी, बुढ़ापे पर अति सुंदर सृजन के लिए बधाई।"
4 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह भाई साहब वाह , बहुत खूब ..."
6 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"आप दोनो का बहुत बहुत शुक्रिया ....में कुछ सुधार करता हूं ... धन्यवाद मेरी जानकारी में वृद्धि करने…"
6 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

कुछ उक्तियाँ उषा अवस्थी आज 'गधे' को पीट कर 'घोड़ा' दिया बनाय कल फिर तुम क्या करोगे जब रेंकेगा जाय?…See More
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

बुढ़ापा .....

बुढ़ापा ....तन पर दस्तक दे रही, ज़रा काल की शाम ।काया को भाने लगा, अच्छा  अब  आराम ।1।बीते कल की आज…See More
11 hours ago
Samar kabeer is now friends with Dayaram Methani and Kamal purohit
12 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल :- हज़रत-ए-'मीर' की ज़मीन में
"जनाब कमल पुरोहित जी आदाब, सुख़न नवाज़ीऔर आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिय: ।"
14 hours ago
Samar kabeer left a comment for Kamal purohit
"ख़ुश रहो ।"
15 hours ago
Kamal purohit commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल :- हज़रत-ए-'मीर' की ज़मीन में
"वाह सर जी कमाल ग़ज़ल बेजोड़ काफ़िये इस मिसरे पर मैं सहमत नहीं (बेअदब हूँ अदब नहीं आता) इसके लिए मैं…"
15 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

मैं जताना जानता तो

मैं जताना जानता तो बन बैरागी यूं ना फिरता मेरे ही ख़िलाफ़ ना होता आज ये उसूल मेरा मैं ठहरना जानता तो…See More
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
20 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service